Thursday, January 21, 2021

KYA AAPKO MALUM HAI ?

 



क्या आपको मालूम है ??


हमारी नाफ़ अल्लाह ताला की तरफ से एक ख़ास तोहफा है, 62 साल की उम्र के एक बूढ़े आदमी को बाईं आंख से सही नजर नहीं आ रहा था ख़ास तौर कर रात को और नज़र खराब हो जाती थी,

डॉक्टरों ने बताया आपकी आंखें तो ठीक है बस एक परेशानी ये है के जिन नसों से आंखों को खून फराहाम होता है वह सूख गईं हैं,

साइंस के मुताबिक सबसे पहले अल्लाह की तखलीक इंसान में नाफ बनती है जो फिर एक कॉर्ड के जरिए मां से जुड़ जाती है,

और इस ख़ास तोहफे से जो बाजाहिर एक छोटी सी चीज़ है एक पूरा इंसान में तब्दील हो जाता है, सुभानल्लाह

ना़फ का सूराख एक हैरांकुन चीज है, साइंस के मुताबिक एक इंसान के मरने के तीन घंटे बाद तक नाफ़ का ये हिस्सा गरम रहता है वजह इसकी ये बताई जाती है के यहां से बच्चे को मां के जरिए खुराक मिलती है, बच्चा पूरी तरह से 270 दिन में बन जाता है यानी 9 महीने में ,

ये वजह है के हमारी तमाम रगें इस जगह से जुड़ी होती है,इसकी अपनी एक खुद की ज़िन्दगी होती है,

पेचोटी नाफ़ के इस सुराख के पीछे मौजूद होती है जहां तकरीबन 72000 नसें मौजूद होती है, हमारे जिस्म में मौजूद रगें अगर फैलाई जाएं तो ज़मीन के गिर्द दो बार घुमाई का सकती हैं,

इलाज:

आंख अगर सूख जाए, सही नजर ना आता हो, पित्त सही काम ना कर रहा हो, पाओं या होंठ फट जाते हों, चेहरे को चमकदार बनाने के लिए , बाल चमकाने के लिए , घुटनों के दर्द, सुस्ती, जोडों में दर्द, सिकन का सूख जाना,

तरीका इलाज:

आंखों के सूख जाना, सही नज़र ना आना,के लिए रोज़ रात को सोने से पहले तीन कतरे खालिस देसी घी के या नारियल के तेल के नाफ़ के सुराख में टपकाएं और तकरीबन डेढ़ इंच सुराख के इर्द गिर्द लगाएं,

घुटनों की तकलीफ दूर करने के लिए तीन कतरे अरंडी के तेल के तीन कतरे सूराख़ में टपकाएं और इर्द गिर्द लगाएं जैसे ऊपर बताया है,

कपकपी और सुस्ती दूर करने के लिए और जोडों के दर्द में फायदे के लिए और सिकन सूख जाने को दूर करने के लिए सरसों के तेल के तीन कतरे ऊपर बताए गए तरीके के मुताबिक इस्तेमाल करें,

नाफ़ के सुराख में तेल क्यूं डाला जाए??

नाफ के सुराख में अल्लाह ने ये खासियत रखी है के जो रगें जिस्म में अगर कहीं सूख गईं है तो नाफ़ के जरिए उन तक तेल पहुंचाया जा सकता है, जिससे वह दोबारा खुल जाती हैं,

बच्चे के पेट में अगर दर्द हो तो हींग पानी और तेल मिक्स करके नाफ़ के इर्द गिर्द लगाएं चंद ही मिनटों में इंशा अल्लाह , अल्लाह के करम से आराम आ जायेगा,

साभार: बहन शिज़आ सलफी
तर्जुमा:Umair Salafi Al Hindi
Blog:Islamicleaks 

Wednesday, January 20, 2021

ATEET KE JHAROKHE SE




 गांधी जी 31 मार्च को दिल्ली आ गए पहला जुमला जो उन्होंने मुझ से कहा वो ये था के तक़सीम अब वाक़ई ख़तरा बन गयी है, वल्लभ भाई और जवाहर लाल नेहरू ने तो शायद हथियार डाल दिए हैं तुम्हारा क्या ख़याल है तुम भी बदल गए हो या मेरा साथ दोगे

मैं ने जवाब दिया - मैं जैसा पहले तक़सीम का मुख़ालिफ़ था अब भी हूँ बल्कि मैं तो कहूँगा के तक़सीम का जितना सख़्त मुख़ालिफ़ मैं अब हूँ इतना पहले कभी नहीं था मगर मैं इस बात से बेहद परेशान हूँ के जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने हार मान ली है या जैसा आपने फ़रमाया हथियार डाल दिया है अब मुझे जो उम्मीद है आपसे है अगर आपने इस्तक्लाल के साथ तक़सीम की मुखालिफत की तो हम अब भी बच सकते हैं लेकिन आप भी दब गए तो मुझे डर है के हिंदुस्तान तबाह हो जाएगा |
गांधी जी ने कहा - अगर कांग्रेस तक़सीम को तस्लीम करेगी तो मेरी लाश को रौंध कर करेगी जब तक मेरे जिस्म में जान है मैं तक़सीम पर कभी राज़ी नहीं होऊंगा और अगर मेरा बस चला तो कांग्रेस को भी राज़ी नहीं होने दूंगा
उसी रोज़ बाद में गांधी जी माउन्ट बेटन से मिले दूसरे दिन उनकी फिर मुलाक़ात हुई, 2 अप्रैल को वो एक बार फिर मिले |
पहली मुलाक़ात से वापसी के फ़ौरन बाद सरदार पटेल गांधी जी के पास आए और दो घंटे से ज़्यादा तखलिए में गुफ्तगू करते रहे मुझे कुछ इल्म नहीं के उन दोनों के बीच क्या बातें हुई
लेकिन मैं जब उसके बाद गांधी जी से मिला तो मुझे अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सदमा पहुंचा मैंने देखा गांधी जी भी बदल गए हैं अभी वो खुल्लम खुल्ला तक़सीम का समर्थन तो नहीं कर रहे थे लेकिन उनकी मुखालिफत में पहली जैसी गर्म जोशी नहीं थी
उससे भी ज़्यादा हैरानी और दुःख मुझ को इस बात से हुआ की अब वो भी वही दलीलें पेश करने लगे थे जो मैं सरदार पटेल की ज़बानी सुन चुका था, तक़रीबन दो घंटे तक मैं उनकी मिन्नत समाजात करता रहा लेकिन कोई असर नहीं हुआ |
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(मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की किताब
"इंडिया विन्स फ्रीडम" से)
~Md Iqbal

Tuesday, January 19, 2021

SCIENCE AUR TECHNOLOGY




 साइंस और टेक्नोलॉजी


क्या आप जानते हैं बारिश से पहले ही चीटियों को कैसे पता चल जाता है के बारिश होने वाली है ??

आज हम आपको चीटियों के बारे में ऐसे ही कुछ हकीकत के बारे में बताएंगे,

चीटियों से मुताॅलिक सुरह नमल आयत 17-18 में अल्लाह का इरशाद है:-

" और सुलेमान निकले अपने पूरे लश्कर को लेकर जिसमें इंसान, जिन्न और तमाम जानवर थे, फौज बंदी किए हुए जाने लगे यहां तक के वो गुज़रे वादी ए नमल से जो चीटियों की वादी थी, एक चीटी ने दूसरी चीटी से कहा , ए चीटियों अपने घरों में घुस जाओ, कहीं तुम्हे सुलेमान और उसकी फौजें ना पीस डालें , और उन्हें खबर भी ना हो , और सुलेमान ने जब इन चीटियों की बात सुनी तो मुस्कुराए और अपने लश्कर का रुख मोड़ लिया "

चीटियां हज़रत सुलेमान से बात करती थी और हज़रत सुलेमान को अल्लाह ने उनकी बात समझने की सलाहियत भी दी थी, जो बात कुरआन ने 1400 साल पहले बताई आज की जदीद साइंस मुख्तलिफ तजुर्बात करने के बाद इस नतीजे पर पहुंची है के चीटियां एक ज़बरदस्त मुआशी सिस्टम में रहती हैं और इतने मुश्किल सिस्टम से बात करती है के अक्ल दंग रह जाए,

साइंस ने बताया के चीटियां आवाज़ से बात नहीं करती बल्कि डेटा ट्रांसफर करके बात करती हैं और इनका तरीक़ा ये होता है के वह अपने मुंह से एक मवाद निकालती हैं और सामने वाली चीटी के मुंह पर चिपका देती है, दूसरी चीटी इससे सारा पैगाम डीकॉड (Decode) करके समझ लेती है, इसलिए आपने अक्सर देखा होगा के चीटियां चलते चलते रुक कर दूसरी चीतियों के मुंह से मुंह लगा कर आगे चलती जाती हैं, येे वह अमल होता है जिसमें वा डेटा ट्रांसफर करती हैं,

जदीद तहकीक में ये बात साबित हो चुकी है के चीटियां आपस में ना सिर्फ बात करती हैं बल्कि एक ज़बरदस्त निज़ाम के तहत ज़िन्दगी भी गुजारती हैं,

आपने अक्सर देखा होगा के बारिश से पहले चीटियां अपने घर के बाहर गोल चक्कर लगाना शुरू कर देती हैं और मिट्टी के पहाड़ बना लेती हैं ताकि बारिश का पानी उनके घर ना आ सके , उन्हें वक़्त से पहले बारिश का अंदाज़ा इसलिए हो जाता है के उनमें कुदरती तौर पर सेंसर मौजूद होता है जिसे हाइड्रो फोलिक कहते हैं, जब हवा में नमी का तनासब ज़्यादा हो जाता है तो चीटियों में मौजूद ये सेंसर उसे महसूस करता है और चीटियों के दिमाग़ को बारिश के मुतल्लिक पैगाम पहुंचाता है, इसलिए चीटियां बारिश से पहले ही अपने खाने पीने और रहने का इंतजाम कर लेती हैं,

महकमा मौसम भी इसी अमल को दोहराते हुए हवा में नमी का तनासब नोट करते हैं और फिर बताते हैं के बारिश के क्या इमकानात हैं,

तारीख़ गवाह है के जिन्होंने क़ुरआन में गौर वा फिक्र किया उन लोगों ने दरखतों के नीचे बैठ कर ना सिर्फ ज़मीन का हजम (Volume) बताया बल्कि ये भी बताया के इंसान परिंदों की तरह कैसे परवाज़ कर सकते हैं,

चुनानचे जहाज़ के सबसे पहले आविष्कारक मुसलमान ही हैं,

अगर हम गौर और फिक्र करें तो ऐसी इजादात कर सकते हैं के नसल इंसानी हैरान रह जाए, अल्लाह ताला ने क़ुरआन में इरशाद फरमाया है के

" कायनात में अक्ल वालों के लिए बहुत सी निशानियां हैं "

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Monday, January 18, 2021

बनू उमैया की मुलुकियत और उस्मानी खिलाफत ??

 



बनू उमैया की मुलुकियत और उस्मानी खिलाफत ??


वह तमाम हजरात जो नाकद बनू उमैया हैं, क्या उन्होंने कभी खिलाफत बनू उमैया और उस्मानी खिलाफत का तकाबुल किया है ??

अगर आम उर्दू मुवॉरिखीन की लिखी हुई तारीखी किताब से सिर्फ सरसरी तौर पर सिर्फ मूताला भी किया जाए, कदीम वा मुस्तनद तारीखी माखज को तो अभी जाने दीजिए , तो साफ नजर आएगा के क़ुरआन वा सुन्नत के शाआर की ताजीम उनके कवानीन के इंतजाम की पाबंदी और हुकूमत वा अवाम का मजमुई इस्लामी तर्ज़ ए अमल हर लिहाज से दौर बनू उमैया में खिलाफत उस्मानिया के मुकाबले में करोड़ गुना बेहतर था,

उस्मानी खिलाफत की अफ़ादियत और इसलाम के लिए उनकी ख़िदमात से इंकार मुमकिन नहीं लेकिन इस सिलसिले में उनका खिलाफत बनू उमैया से कोई मुकाबला तक नहीं बनता के वह इस्लामी मिजाज़ और इस्लामी कानून के पाबंदी, जिहादी मसाई और खिदमत इस्लाम के सिलसिले में हर आने वाले दौर हुकूमत पर फौकियत रखते हैं,

फिर क्या वजह है के हमारे ये दोस्त वा साथी, खिलाफत बनू उमैया के दरपे आज़ार रहते हैं, उनके खिलाफ हर वही बात वा गैर मुसद्दका मालूमात पर ना सिर्फ बे धड़क ईमान ले आते हैं बल्कि नमक मिर्च लगा कर उसकी इशाअत भी करते हैं,

जबकि यही लोग दौलत ए उस्मानिया की तारीफ वा तौसीफ में ना सिर्फ आगे रहते हैं बल्कि पूरे जोश और जज्बे के साथ उस पर लगने वाले इल्ज़ामात का दिफा भी करते हैं, फिर इस पर तमाशा ये के हमारे ऐसे दोस्त बाप के बाद बेटे की जाननशीनी के तहत दौलत बनू उमैया को तो मुलुकियत साबित करने पर अपना पूरा ज़ोर खर्च करते हैं लेकिन उसकी बाप के बाद बेटे की जाननशीन के तरीके के दौलत उस्मानिया में होने के बावजूद उसकी खिलाफत करार देते हैं और उसकी मुलूकियत के असबात पर एक लफ्ज़ नहीं बोलते जबकि दौलत ए उस्मानिया में तो चाचा भतीजे और भाई भाई तक इकतेदार के लिए एक दूसरे से टकराए हैं,

खैर ! सोचने की बात ये है के इस दो रंगी की वजह क्या है ??

कहीं हमारे तहतुल शाऊर में बैठा शिया प्रोपगंडा तो नहीं जो हर हाल में बनू उमैया को बदनाम करने में ही आफियत वा सुकून महसूस करता है,

एक मुवॉरिख एक गैर जानिब्दार मुसलमान तारीख का मारूजी मुताला करता है, इसको गैर जानिब्दाराना नज़रों से परखता है, मैं दूसरों की बात नहीं करता सिर्फ अपनी बात करूंगा के वहाबी सूफी कशमकश में अक्सर एक फरीक का झुकाव आल ए सऊद की तरफ होता है तो दूसरे का उस्मानी सलातीन की तरफ ,लेकिन काराइन गवाह हैं के मोहतरम हाफ़िज़ मुहम्मद ज़ुबैर ने जब इस तनाजिर में उस्मानी सलातीन को गैर साबित क्यासात के तहत मतून करना चाहा तो अहकर ने ही सबसे अव्वल उनके नकद में और उस्मानी सलातीन के दिफ़ा में फेसबुक पर कलम उठाया था और अब तक इस सिलसिले में लिखता आया है के जब जब किसी ने गैर साबित बातों के संबंध में महज मगरिबी मुस्तरकीन के प्रोपगंडा से मूतासिर होकर खिलाफत उस्मानिया के खिलाफ कोई हफवात नकल की है, लेकिन हमारे बाक़ी अहबाब येे काम क्यूं नहीं करते , आपने अपनी अपनी पार्टियां क्यूं बनाई हुई हैं ??

आप तहरीकी हैं तो क्या ये बात लाज़िम है के आप बनू उमैया पर नकद करें जबकि बनू उमैया से किरदार वा अमल और इस्लामी ख़िदमात में दसियों गुना पीछे रह जाने वाले उस्मानी सलातीन की मुहब्बत वा तायीद का आप दम भरते हैं,

ऐसा ही कुछ हमारे बाज़ वहाबी दोस्त करते हैं के उनको उस्मानी सलातीन में कुछ खैर ही नजर नहीं आता जबकि इनके झंडे तले पूरी उम्मत मुसलमां मुत्ताहिद और कुफ्फार से बरसरे पैकार थी,

खैर तारीख का मूताला गैर जानिब्दारी वा मारूजियत मांगता है, इस सिलसिले में कमसे कम मुझे उन लोगों के नफसियात बिल्कुल भी समझ नहीं आती जो नाकद बनू उमैया बने हैं उनकी तरफ हर औल फौल बात मंसूब करके उनकी तजलील करते हैं और साथ ही उस्मानी सलातीन बाशमूल उर्रुदुगान की अजमत के गीत गाते हैं, कम से कम मेयार तो एक रखें सबके लिए,

तहरीर: मुहम्मद फहद हारिस
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks.com

Sunday, January 17, 2021

जिन औरतों के चेहरों पर पर्दा नहीं यकीनन उनके दिलों और अकलों पर पर्दा पड़ा हुआ है,




 जिन औरतों के चेहरों पर पर्दा नहीं यकीनन उनके दिलों और अकलों पर पर्दा पड़ा हुआ है,


कुछ बेपर्दा फिरने वाली औरतें ये कहती हैं के क़ुरआन मजीद में चेहरे का पर्दा नहीं है,

उनसे कोई पूछे के जब हिजाब से मुताल्लिक आयत उतरी तो उस वक़्त उम्माहात उल मोमिनीन को क्या छिपाने का हुकम हुआ ??

दिल वा दिमाग़ से सोचें के चेहरा छिपाने का हुकम हुआ या माज़ अल्लाह वह नंगे सर वा नंगे सीना (घर से बाहर) फिरती थीं और उन्हें सर वा सीना छिपाने का हुक्म हुआ ??

साफ जाहिर है के उन्हें चेहरा छुपाने का हुक्म हुआ ,इसीलिए फरमाया गया के,

" ऐ नबी ! अपनी बीवियों और बेटियों से और मुसलमानों कि औरतों से कह दो के वह अपने ऊपर अपनी चादरें लटका लिया करें, इससे बहुत जल्द उनकी सिनाख्त हो जाया करेगी ( के ये पाकदामन औरतें हैं) फिर ना सताई जाएंगी, और अल्लाह ताला बख्शने वाला महरबान है "

(क़ुरआन अल एहजाब आयात 59)

कुछ औरतें पर्दे से मुताल्लिक़ बहस करते हुए कहती हैं के :- पर्दा तो दिल का होता है, हमारी आंखें और दिल पाक हैं"

उन्हें पूछना चाहिए के जिन को खुद अल्लाह नाम ले कर फरमा रहा है (नबी ए अकरम मुहम्मद सल्ल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम की बीवियां, बेटियां और सहाबियात)

साभार: बहन सबा युसुफ जई
ब्लॉग: islamicleaks.com

Saturday, January 16, 2021

AURAT KI IZZAT

 



"औरत की इज्ज़त"


अशफाक़ अहमद मरहूम फरमाते हैं कि मैं अपनी अहलिया बानो के साथ इंग्लैंड के एक पार्क में बैठा हुआ था कि वहां कुछ तौहिदी नौजवान चहल क़दमी करते हुए पार्क में आए,
इतने में मग़रिब का वक़्त हुआ तो उन्होंने वहीं जमाअत शुरू कर दी _

उन नौजवानों को नमाज़ पढ़ता देख कुछ नौजवान लड़कियों का एक ग्रुप उनके पास पहुंचा और नमाज़ मुकम्मल होने का इंतजार करने लगीं _

मैने अपनी अहलिया से कहा आओ देखते हैं कि उनके दरमियान क्या बात होती है _

मरहूम फरमाते हैं कि हम दोनों मियां बीवी वहां चले गए और नमाज़ खत्म होने का इंतजार करने लगे _

नमाज़ खत्म होते ही उनमें से एक लड़की ने आगे बढ़ कर जमाअत करवाने वाले नौजवान से पूछा कि क्या तुम्हें इंग्लिश आती है?

तो नौजवान ने कहा कि जी हां आती है _

तो लड़की ने सवाल किया कि तुमने अभी यह क्या अमल किया?

नौजवान ने बताया कि हमने अपने रब की इबादत की है _

तो लड़की ने पूछा आज तो इतवार नहीं है तो आज क्यों की?

तो नौजवान ने उसे बताया कि यह हम रोज़ दिन में पांच बार यह अमल करते हैं, तो लड़की ने हैरत से पूछा कि फिर बाक़ी काम कैसे करते हो तुम?

तो उस नौजवान ने उसे मुकम्मल तरीक़ा से पूरी बात समझाई _

बात खत्म होने के बाद लड़की ने मुसाफह के लिए हाथ बढ़ाया तो नौजवान ने कहा कि मआज़रत के साथ मैं आपको छु नहीं सकता, यह हाथ मेरी बीवी की अमानत है और यह सिर्फ उसे ही छु सकता है _

यह सुनकर वह लड़की ज़मीन पर लेट गई और फूट फूट कर रोने लगी और रोते हुए बोली कि ऐ काश! यूरोप का नौजवान भी इसी तरह होता तो आज हम भी कितनी खुश होतीं _

फिर बोली कि वाह कितनी ही खुश नसीब है वह लड़की जिसके तुम शौहर हो _

यह कहकर वह लड़की वहां से चली गई _

अशफाक़ मरहूम फरमाते हैं कि मैने अपनी अहलिया से कहा कि "बानो! आज यह नौजवान अपने अमल से वह तबलीग कर गया जो कई किताबें लिखने से भी नहीं होती _"

बेशक इज्ज़त और सर बुलंदी इस्लाम में ही है _
Syed Abdul Mujeeb

Friday, January 15, 2021

SUKOON

 



ढूंढा सुकून को हर जगह
उमर ए रवां तक " या रब"
कहीं और ना मिला सुकून
तेरे सजदे के सिवा।