Thursday, February 10, 2022

STORY OF MUQALLID (BLIND FOLLOWERS)

 



STORY OF MUQALLID (BLIND FOLLOWERS)

एक गांव मे अंधे पति-पत्नी रहते थे । इनके यहाँ एक सुन्दर बेटा पैदा हुआ। पर वो अंधा नही था।

एक बार पत्नी रोटी बना रही थी। उस समय बिल्ली रसोई में घुस कर बनाई रोटियां खा गई।
बिल्ली की रसोईं मे आने की रोज की आदत बन गई इस कारण दोनों को कई दिनों तक भूखा सोना पड़ा।
एक दिन किसी प्रकार से मालूम पड़ा कि रोटियाँ बिल्ली खा जाती है।
अब पत्नी जब रोटी बनाती उस समय पति दरवाजे के पास बाँस का फटका लेकर जमीन पर पटकता।
इससे बिल्ली का आना बंद हो गया।
जब लङका बङा हुआ और उसकी शादी हुई।
बहू जब पहली बार रोटी बना रही थी तो उसका पति बाँस का फटका लेकर बैठ गया औऱ फट फट करने लगा।

कई दिन बीत जाने के बाद पत्नी ने उससे पूछा कि तुम रोज रसोई के दरवाजे पर बैठ कर बाँस का फटका क्यों पीटते हो?
पति ने जवाब दिया कि
ये हमारे घर की परम्परा (रिवाज) है इसलिए मैं ऐसा कर रहा हूँ।

कहानी का सार:

माँ बाप तो अंधे थे, जो बिल्ली को देख नहीं पाते थे, उनकी मजबूरी थी इसलिये फटका लगाते थे। पर बेटा तो आँख का अंधा नही था पर अकल का अंधा था,
इसलिये वह भी वैसा करता था जैसा माँ-बाप करते थे।

ऐसी ही दशा आज के अपने समाज की है।
पहले शिक्षा का अभाव था इसलिए #पाखण्डी लोग जिनका स्वयं का भला हो रहा था, पाखण्डवादी मूल्यों को अपनाया और फैलाया। जिनके पीछे किसी प्रकार का लाजिक नहीं है।

लेकिन आज पढ़लिख कर, शिक्षित होने के बाद भी अपने समाज के लोग उन्हीं पाखंडपूर्ण परम्पराओं व रूढ़िवादिता के वशीभूत हो कर जीवन जी रहे हैं।
ऐसे समाज व व्यक्तियों को #आँख_का_अंधा कहा जाता है।

इसलिये किसी भी परम्परा को सबसे पहले समझो, जानो और सही प्रतीत हो तब मानो, तभी समाज में परिवर्तन होगा नहीं तो वही......ढाक के तीन पात,,,,,

Wednesday, February 9, 2022

मैं अरबों को चकनाचूर कर दूंगा !! ( ईरान के बादशाह यजदगर्द की धमकी)

 



मैं अरबों को चकनाचूर कर दूंगा !! ( ईरान के बादशाह यजदगर्द की धमकी)

दौर ए जिहालत में अरब कबायेल, बनू शायबां,बनू बक्र बिन वायल और बनू हनीफा ( आल ए सऊद का कबीला) ने जब मुआरका जिल्कार में फारस के मुकाबले में फतह हासिल की तो इन कबायल के हौसले बढ़ गए , और फिर जब बनू शायबान कबीले के मशहूर शुरखील नौजवान मुस्सन्ना बिन हारिश नौ हिजरी को मदीना में आकर अल्लाह के रसूल के हाथों मुसलमान होकर गए थे,

तो वह हज़रत अबू बक्र सिद्दीक के जमाना ए खिलाफत में मदीना हाजिर हुए और मस्जिद नबावी में अहले फारस के खिलाफ एक पुरजोर तकरीर की और सहाबा किराम से कहा के ," अब अहले फारस का गुरूर हमने खाक में मिला दिया है,अगर आप लोग हमें थोड़ी सी मदद करें तो मैं फारस की ईट से ईट बजा दूंगा"

उनकी तकरीर को सहाबा किराम ने एक जज़्बाती तकरीर समझा और मस्जिद नबावी में चिमगोइया शुरू हो गई, कहां सुपरपावर अहले फारस और कहां एक कबीले का सरदार मुसन्ना इब्न हारीश

इस मौके पर के जब तमाम मुसलमान खामोश थे तो उस वक्त हज़रत उमर फारूक ही थे जिन्होंने अहले फारस से टक्कर लेने की सोची,वह हज़रत अबू बक्र सिद्दीक से फरमाते हैं के आप इस नौजवान की मदद करें, और खालिद बिन वलीद को एक फ़ौज देकर उसके साथ भेजें,

चुनाँचे हज़रत अबू बक्र ने हज़रत खालिद बिन वलीद की इमारत में एक लश्कर हजरत मुसन्ना बिन हारिश के ताऊन के लिए भेजा जिन्होंने वहां जाकर अहले फारस के साथ तीन मशहूर जंगें की और फतह हासिल की,

अर्धशेर की वफात और यजदगर्द की ताजपोशी!!

ईरान का बादशाह अर्दशेर जब फौत हुआ तो नौ उम्र यजदगर्द उनका बादशाह बना उसने अपनी ताजपोशी के दौरान बाद मुसलमानों से टक्कर लेने की सोची क्योंकि मुसलमानों ने दक्षिणी इराक़ का एक मुकम्मल हिस्सा उससे छीन लिया था,

और यजदगर्द ने मुसलमानों को पैगाम भिजवाया के मैं तुमसे निपट लूंगा और तुम्हे चकनाचूर कर दूंगा, उसने दो लाख की तादाद में फौज इकट्ठी की जिसमे साठ हज़ार घुड़सवार, साठ हज़ार ऊंटसवार और अस्सी हजार पैदल फौज थी,और तीस या चालीस के बीच हाथी भी तैयार कर लिए , और अपने मुल्क के छह बहतरीन कमांडरों का इंतेखाब किया जिनमें , रुस्तम, हरमुजान, मेहरान, बहमन जूदेव, जानीलूस, वगेरह थे,

उस वक्त हज़रत अबू बक्र सिद्दीक मर्जुल मौत में मुब्तिला हो गए थे,
जारी

साभार: शैख अब्दुल खालिक भट्टी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Tuesday, February 8, 2022

" तुम्हारा हश्र यजीद के साथ हो "




 " तुम्हारा हश्र यजीद के साथ हो "

एक तबका आपको ये कहते हुए नज़र आता है के अल्लाह तुम्हारा हश्र यजीद के साथ करे और हमारा हुसैन के साथ,
बंदा पूछे अगर कयामत के दिन यजीद भी हुसैन के साथ हुआ तो तुम्हारा क्या होगा ??
एक बड़े आलिम थे शेख अब्दुल मुगीस अल हंबली रहमतुल्लाह उन्होंने यजीद बिन मुआवियां के फजायेल पर किताब लिखी जिसका नाम था "فضل یزید" इस किताब के रद्द पर इमाम इब्न जौजी रहमतुल्लाह ने किताब लिखी "الرد المتعصب العنید المانع من ذم یزید " इन दोनों उलेमाओं का आपस में रद्द वा क़द आखिर वक्त तक चलता रहा ,
अब आप यूं समझ लें के इब्न जौजी आज के हालात में बन गए हुसैनी और शैख मुगीस बन गए यजीदी
तो उस यजीदी के बारे जिसने यजीद के फजाएल पर किताब लिखी इमाम इब्न जौजी रहमतुल्लाह अलैह आखिरकार फरमाते हैं ," मैं उम्मीद करता हूं के अब्दुल मुगीस और मैं जन्नत में एक साथ होंगे "
इमाम ज़ौजी रहमतुल्लाह एक यजीदी के जन्नत में अपने साथ होने की उम्मीद का इज़हार फरमा रहें हैं, जबकि आजके नाम निहाद हुसैनी जब जवाब देने से आजिज आ जाते हैं तो आखिरी हथियार ये इस्तेमाल करते हैं,
" अल्लाह तुम्हारा हश्र यजीद के साथ करे और हमारा हुसैन के साथ"
तो हम पूछते हैं के यजीद भी अगर सय्येदना हुसैन के साथ हुआ तो तुम लोग कहां होगे ??
साभार: डॉक्टर अजमल मंजूर मदनी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Monday, February 7, 2022

यजीदी कौन ?? (किस्त 1)




 यजीदी कौन ?? (किस्त 1)

तहरीर ज़रा लम्बी है लेकिन पूरी पढ़ लीजिए , ये दरसअल मौलाना अताउल्लाह अल मुहसिन शाह बुखारी देवबंदी का खिताब है, मौसूफ अहले हदीस नहीं थे लेकिन ये तहरीर पढ़ें, क्या जानदार और शानदार खिताब था,
यजीद कौन ??
दलील के साथ इख्तेलाफ़ करेंगे ??
सय्येदना हुसैन (ra) के हादसे सहादत के जमन में हमारे मौकफ के मुतअल्लिक़ ये मशहूर किया जाता है कि ये तो यजीदी हैं, हत्ता के पाकिस्तान के एक ज़िद्दी मोलवी ने हमें यजीदी लिख भी दिया,
किसी के लिखने से क्या होता है ?? भाई यजीदी तो दरअसल वह है जिसने यजीद की बय्यत की, और बय्यत की सय्यदना हजरत हुसैन के भाई ( मुहम्मद बिन अली उर्फ मुहम्मद बिन हंफिया) ने, ये रिवायत मजबूत सनद के साथ तारीख में मौजूद है और इस मौलवी को नज़र नहीं आता जो हमें बतौर गाली यजीदी कहा जाता है,
अहद यजीद के जिन मारूफ सहाबा ने बगैर जब्र वा जबरदस्ती यजीद की बैयत की उनमें जनाब हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर, जनाब अब्दुल्लाह बिन अब्बास और सय्यदन हजरत नोमान बिन बशीर शामिल हैं, यजीदी ये हुए के मैं ??
हमनें ना तो यजीद की बायत की , ना उसका ज़माना पाया, ना उसके अमाल देखे, ना उसके अहवाल देखे, हमने तो तारीख लिखी हुई एक बात सुनाई, और जाहिल मौलवी के मुंह खुल गए के सहाबा यजीदी हैं, ये यजीदी हैं,
अब हमको बताओ यजीद की बायत हमने कि के हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर ने ?? अबदुल्लाह बिन अब्बास ने , सय्यदना हजरत हुसैन के भाईयों ने ?? हज़रत अकील के बेटों ने ? हज़रत जाफर तैय्यार के बेटे ने ? सय्यदना हुसैन के बहनोई ने ??
हमारा क्या कसूर है ??
ये बताना जुर्म है तो हम ये जुर्म करते रहेंगे , और ना ही ऐसा जुर्म है के उसके बताने से हम रुक जाएं, रुक नहीं सकते, ये काफिला बढ़ेगा, बहुत दूर तक जायेगा, और वो तुम्हारा दाम तज्वीर और ये लखनऊ मुल्तान के बदमाशों की बदमाशियां हम खतम करके दम लेंगे इंशाल्लाह,
हमारे बुजुर्गों ने हमें इसी रास्ते पर चलाया है, सही रास्ते पर चलाया है, इस्तेकामत अता फरमाई है, तुम्हारे जबर वा ज़ुल्म का हमें कोई डर है ना तुम्हारे पैसों की कोई लालच हमारा कोई ताल्लुक नहीं है इससे , इस बात से ताल्लुक है के बात कब पहुंचीं है ?? किसको पहुंची है ??और किस तरह पहुंचीं है ?? कौन पहुंचाता है ?? किस तरह पहुंचाता है??
तुम हमें यजीदी कहो, यहां हमारे सामने आकर कहो, हम तुम्हें आकर बताएंगे कि यजीदी कौन है ??
हजरत हुसैन राजियाल्लाहु ताला अनहु ने सफर कर्बला में 7 मर्तबा कहा के मैं यजीद के हाथ पर हाथ रखता हूं, मेरा रास्ता खाली करो मैं जाता हूं,
बताओ यजीदी कौन हुआ ??
जारी.....
तहरीर: मौलाना अताउल्लाह अल मोहसिन शाह बुखारी देवबंदी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi

Sunday, February 6, 2022

महिला सम्मान और इस्लाम

 




महिला सम्मान और इस्लाम

महिला सम्मान के खातिर हज्जाज बिन यूसुफ ने जो अपने दौर में एक जबरदस्त जरनैल था जिससे मुजरिम कांपते थे, उसने अपने भतीजे मुहम्मद बिन कासिम को साथ हज़ार लश्कर के साथ हिंद भेजा और भतीजे कासिम ने हज्जाज़ बिन यूसुफ की ख्वाहिश पूरी की और उस मुसलमान महिला हो राजा दाहिर के चंगुल से आजाद कराया,

ये तो थी एक मुस्लिम महिला के सम्मान की बात, क्या आप जानते हैं स्पेन में किस महिला के सम्मान के खातिर तारिक बिन जियाद ने स्पेन में रॉडिक की हुकूमत को धूल चटा दी थी,

वो महिला थी राजा रादरिक के गवर्नर जूलियन की बेटी फ्लोरिडा जो ईसाई थी,

याद रहे दोनो लश्कर कुशी का हुक्म का परवाना हज्जाज बिन यूसुफ के नाम है, जो बनू उमय्या के वक्त के बसरा वा कुफा का गवर्नर था, और आज के लिब्बू वा चलांडू कहते है औरतों को इस्लाम सम्मान नहीं देता

Saturday, February 5, 2022

लोगों के रवैय्यों से परेशान ना हों




 लोगों के रवैय्यों से परेशान ना हों, आपको अपने अमाल का सिला अल्लाह ताला से लेना है लोगों से नहीं, लोगों की बातों को दिल पर लेना छोड़ दें , अपनी जिंदगी का मकसद सिर्फ रब को राज़ी करना रखें , जब मकसद रब को राज़ी करना होगा तो लोगों की बातें परेशान नहीं करेंगी,


मैंने ये सीखा है के जब तक मैं हर एक की बात को अपने दिल से लगाता रहूंगा तब तक मैं अजियत में रहूंगा , किसी इंसान को सिर्फ अल्फाज़ से मेरा सुकून छीनने का इख्तियार नहीं होना चाहिए ,

Umair Salafi Al Hindi

Friday, February 4, 2022

पता नहीं सैय्यदना हसन से शिया के नज़दीक ऐसा कौनसा जुर्म हुआ है के वह उन्हे इस क़दर याद नहीं करते जैसा सैय्यदना हजरत हुसैन को याद करते हैं,

 



पता नहीं सैय्यदना हसन से शिया के नज़दीक ऐसा कौनसा जुर्म हुआ है के वह उन्हे इस क़दर याद नहीं करते जैसा सैय्यदना हजरत हुसैन को याद करते हैं,

सैय्यदना हुसैन की सीरत खूब सुनाते हैं और सैय्यदना हसन की सीरत के बाब को बड़ी चालाकी से गोल कर जाते हैं,
आप उनके सोशल मीडिया पर जाकर पेज देख लें, ग्रुप देख लें, उनके जाकिरीन की महफिलें देख लें, अजादारी की मजलिसें देख लें , उनके इमाम बाड़ों में जाकर उनके प्रोग्राम सुन लें बस हज़रत हुसैन का तजकिरा मिलेगा , और हजरत हसन का ज्यादा से ज्यादा पंजतन पाक के तौर पर दीवारों, पोस्टरों, और बैनरों पर नाम लिख देंगे ,
लेकिन जिस जोश वा मुहब्बत और गुलु के साथ सैय्यदना हुसैन का तजकिरा करते हैं, उनके नाम के नारे लगाते हैं इस तरफ सैय्यदना हसन का तजकिरा नहीं करते और ना उनके नाम के नारे लगाते हैं,
पता नहीं उनके नज़र में सैय्यदना हसन का ऐसा कौनसा कसूर है जिसने उन्हे इस कदर नजर अंदाज करने पर मजबूर कर दिया ,
कहीं ये लोग सुलह हसन से तो खफा नहीं हैं ??
साभार: शैख कमालुद्दीन सनाबिली
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks