बाग बहिस्त में मुझे हुक्म सफर दिया था क्यू
Har Ibteda Se Pehle Har Inteha Ke Baad, "ZAAT-E-NABI Buland Hai "ZAAT-E-KHUDA" Ke Baad, Dunya Main Ehtraam Ke Qabil Hain Jitne Log, Main Sabko Manta Hun, Magar ,"MUHAMMAD-MUSTAFA{sall’Allaahu ta’aalaa alaihi wa’sallam} Ke Baad..
बाग बहिस्त में मुझे हुक्म सफर दिया था क्यू
हस्सास (Sensitive) तबियत लोगों के भी अजीब मसाइल होते हैं, दूसरों के लिए खुद की मसरूफियात तर्क करके उनको वक्त देने वाले ये लोग छोटी छोटी बातों को ना सिर्फ महसूस करते हैं बल्कि कहीं ना कहीं हर बात के जिम्मेदार खुद को महसूस करते हैं,
मुझे चेहरे पढ़ने आते हैं ??, मैने उसको हंस कर कहा ,
कहने लगी, " बिलकुल तुम्ही तो जादूगर हो !", मैने कहा " हां ! बिलकुल मुझे जादूगर ही समझो "
कभी जिंदगी कितनी तंग लगने लगती है,लोग हमें इतना महदूद कर देते हैं के हमारा खुद की जात में सांस घुटने लगता है, और किसी को हमदर्द पाकर कुछ कह लो, कोई शिकवा वा शिकायत तो सुनने को मिलता है
समुंदर सबके लिए एक जैसा ही होता है, लेकिन कुछ लोग उसमे से मोती तलाश कर लेते हैं, कुछ मछलियां पकड़ लेते हैं ...!!
कहने लगा , " जो लोग जिंदगी में खसारे बर्दाश्त करने के आदी हो जाएं ना तो,
वह हर रिश्ते से बा आसानी दस्ताबरदार हो जाते हैं, तुम क्या कहते हो ?
बे ज़रर और भोली जमात जो खुले आम अमेरिका यूरोप में तबलीग करती है, हर मुल्क इसका साथ देता है, हत्ता के इजराइल भी कहता है के तुम हमारे यहां के मुसलमानों में तबलीग करो उन्हे अच्छा मुसलमान बना दो, तुम बहुत अच्छे हो, मगर !!
जब वो पैदा हुआ तो उसकी मां ने उसे देखकर मुंह फेर लिया क्योंकि ना सिर्फ वह दोनो हाथों , पांव से महरूम था बल्कि सिरे से उसकी टांगें और बाजू मौजूद ही नहीं थे, इस वक्त उसकी उम्र 37 साल है,
एक दिन प्रोफेसर साहब से जूता पॉलिश करने वाले बच्चे ने जूता पॉलिश करते करते पूछा ," मास्टर साहब ! क्या मैं।भी बड़ा आदमी बन सकता हू ? "