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Wednesday, February 16, 2022

बाग बहिस्त में मुझे हुक्म सफर दिया था क्यू कार कहां दराज है,अब मेरा इंतेजार कर,

 


बाग बहिस्त में मुझे हुक्म सफर दिया था क्यू

कार कहां दराज है,अब मेरा इंतेजार कर,
व्याख्या:
मुझे तूने बहिस्त से कूच का हुक्म क्यों दिया था ? तेरे हुक्म के मातहत मैं इस दुनियां में आ गया और जो काम सुपुर्द हुआ था उसमे लग गया, ये काम बहुत लंबा है और जल्द खतम नहीं हो सकता ,ना मैं इसे अधूरा छोड़ सकता हूं, अब मेहरबानी फरमा कर मेरा इंतेजार कर ,
(शरह गुलाम रसूल महर)
इकबाल कहते हैं के , ऐ खुदा ! तूने अपनी मईशत के मुताबिक हज़रत आदम को खुद जन्नत से निकाला अब तो तुझे इंतजार करना ही पड़ेगा क्योंकि जबतक " कार ए जहां " इख्तेताम पजीर ना हो,मेरी मुलाकात तुझसे नामुमकिन है, यानी जब तू ये कारखाना आलम खतम कर देगा उस वक्त मैं तुझसे मिल सकूंगा ,
वाजेह हो के इस अशहार में अल्लामा इकबाल ने इस हकीकत का इंशिकाफ किया हैं के जिस तरह इंसान खुदा से मिलने का आर्जुमंद है, खुदा भी इंसान से मिलने का तमन्नाई है, चुनांचे ज़बूर अजम में उन्होंने खुद इस हकीकत को वाज़ेह कर दिया है,
ما از خدائے گم شدہ ایم او بجستجوست
چوں ما نیاز مند و گرفتارِ آرزوست
" खुदा हमें गुम कर बैठा है और अब हमारी तलाश में है,अब गोया वह हमारी तरह नियाज़ मंद भी है और गुफ्तार ए आरजू भी"
लेकिन उसने खुद अपनी मईशत की बिना पर इंसान को एक अरसे के लिए दुनिया में भेज दिया है,अंजाम कार जब ये कारखाना दरहम बरहम हो जायेगा तो
"کل شی یرجع الیٰ اصله"
के मुताबिक इंसान फिर अपनी असल की तरफ लौट जाएगा, इस बात को इकबाल ने शायराना अंदाज में इस शेर में बयान किया है और इस मफरूजा की बिना पर के महबूब खुद हमारा मुश्ताक है,
Bagh-e-Bahisht Se Mujhe Hukam-e-Safar Diya Tha Kyun
Kaar-e-Jahan Daraz Hai, Ab Mera Intizar Kar✨
Why did You order me to quit the Garden of Eden?—
Now there is much to be done here—so just wait for me!
साभार: सबा यूसुफजई
Blog: Islamicleaks

Sunday, January 30, 2022

टूटे हुए इंसान को हर अपनाईयत से बात करने वाला मसीहा लगने लगता है

 



टूटे हुए इंसान को हर अपनाईयत से बात करने वाला मसीहा लगने लगता है, और इस जज्बे में खोकर हम अपना सब कुछ उसे सुना देते हैं जो खालिस उस जात के लिए था जो बिन कहे सब जानता था,

मगर इंसान मिट्टी से बनाए इन पुतलों से हमदर्दी पाने के खातिर इतना झुक जाता है के फिर उठना मुमकिन नहीं होता ,

और जिससे गम बांटता है वह हकीर समझ लेता है, मोहतात रहें इन नरम दिल लहजों से , बड़े सफफाक होते हैं!!!
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Saturday, January 29, 2022

हस्सास (Sensitive) तबियत लोगों के भी अजीब मसाइल होते हैं

 




हस्सास (Sensitive) तबियत लोगों के भी अजीब मसाइल होते हैं, दूसरों के लिए खुद की मसरूफियात तर्क करके उनको वक्त देने वाले ये लोग छोटी छोटी बातों को ना सिर्फ महसूस करते हैं बल्कि कहीं ना कहीं हर बात के जिम्मेदार खुद को महसूस करते हैं,

कोई नज़र अंदाज़ करे !!
सख्त लहजे में बात करे !! गोया हर तरह की बात को गहराई में जाकर सोचने लग जाते हैं, दूसरों को खुश करने के लिए अपने दुख दर्द को भी फरामोश कर देते हैं,
फिर एक वक्त आता है के अपनी कद्र वा कीमत खो देते हैं,भला ऐसे लोगों की क़दर की जा सकती है जो हर वक्त मयस्सर हों !!
जो हमारी खुशी गमी में अपने एहसासात को रद्द करते हुए हमारे साथ शामिल होते हैं, ऐसे लोगों को बेवकूफ तसव्वुर किया जाता है, भला कोई चीज हो या इंसान बगैर जद्दोजेहद के मयस्सर आ जाए हमें तो उसकी क़दर हम थोड़ी ना करते हैं,
हम तो उन चीजों और इंसानों के पीछे भागने के आदी हैं जो हमारी पहुंच से दूर हों, जिनको हमारे एहसासात हमारे साथ की कदर ना हो, हम भी उन्ही के पीछे जलील वा ख्वार होना पसंद करते हैं मगर जो खामोशी से हमारे साथ साय की तरह रहते हैं, हमारी परवाह करते हैं उनको नजरंदाज करना अपना फर्ज समझे , सराबों के पीछे भागते भागते हकीकत को झुटला देते हैं,
फिर यही हस्सास तबियत लोग अंदर ही अंदर खुद को अजीयत देना गवारा तो कर लेते हैं मगर एक हर्फ ए शिकायत तक ज़बान पर नहीं लाते, खुशियों भरी जिंदगी गुजारने के लिए कभी कभी खुदगर्ज होना पड़ता है मगर हस्सास फितरत लोगों के अख्तियार में कहां होता है के वह बेहिस होकर जिंदगी गुजारें,
Umair Salafi Al Hindi

Monday, January 24, 2022

मुझे चेहरे पढ़ने आते हैं ??, मैने उसको हंस कर कहा ,

 



मुझे चेहरे पढ़ने आते हैं ??, मैने उसको हंस कर कहा ,

कहने लगी, " बिलकुल तुम्ही तो जादूगर हो !", मैने कहा " हां ! बिलकुल मुझे जादूगर ही समझो "

पता है सबसे ज्यादा अजाब इंसान के लिए क्या होता है ?, किसी को हद से जान लेना

ये सुनकर बोली, " मैं तो तुमको मुकम्मल जानती हूं ? तुम्हारे बारे में एक एक बात जो तुम बोलते भी नहीं", मैं हंस कर चुप कर गया क्योंकि मुझे मालूम था के सबकुछ एक जैसा नहीं रहता क्योंकि हर इंसान के पास अपना रास्ता चुनने का हक है, मैं कैसे किसी को रोक सकता था,

हर इंसान ही जादूगर होता है जो मुहब्बत से रिश्तों को जोड़े रखता है, जिन रिश्तों में मुहब्बत होती है ना उनमें दिल से दिल को राह होती है, जब एक शख्स को तकलीफ होती है तो दूसरे सख्स को फौरन पता चल जाता है,

लेकिन एक वक्त ऐसा आता है के चाहे आप किसी स्टेचर पर जिंदगी की बाजी लड़ रहें होते हैं या अकेले वीरान कमरे में, कोई हाल नहीं पूछता क्योंकि जाने वाला अपनी मंजिल चुन चुका होता है,

आपके आंसू और अजियत उसके लिए बेमायने हो चुके होते हैं, अगर गलती से बर्दाश्त का दामन छोड़कर अपनी तकलीफ का उनको बता दें तो सिर्फ Get Well Soon का लफ्ज़ कह दिया जाता है,

तो फिर इंसान यही सोचता है के क्यों बताया जाए किसी को, जाने वाला जा चुका है, उसको ख्वाब दिखाने वाला और उनको ताबीर देने वाला मिल चुका है, इसलिए अपनी जात को उस शख्स के सामने बार बार Degrade ना करें, जिसके लिए कभी आप जादूगर थे क्योंकि उसका soulmate अब कोई और है,

आप सिर्फ जोकर !!

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Saturday, January 22, 2022

कभी जिंदगी कितनी तंग लगने लगती है,

 



कभी जिंदगी कितनी तंग लगने लगती है,लोग हमें इतना महदूद कर देते हैं के हमारा खुद की जात में सांस घुटने लगता है, और किसी को हमदर्द पाकर कुछ कह लो, कोई शिकवा वा शिकायत तो सुनने को मिलता है


दफा करो!
छोड़ दो उनको, उनके हाल पर !
तुम अपनी जिंदगी जिओ !
रिश्तेदार होते ही ऐसे हैं !

और दिल का बोझ कम होने की बजाए बढ़ जाता और उलझन ज्यादा उलझ जाती है,

अगर जिंदगी बगैर रिश्तों के अच्छी गुजर सकती थी, तो अल्लाह ने रिश्ते क्यों बनाए ??

अगर लोगों के बगैर हम पुरसुकून रह सकते हैं तो अल्लाह ने इतने लोग क्यों बनाए ?? अजनबियों से इतने प्यारे ताल्लुक क्यों बनाए ??

जब ये मशवरा देते हो के दूसरों को उनके हाल पर छोड़ दो, तो जब कोई तुमको तुम्हारे हाल पर छोड़ता है तब तुम क्यों तड़पते हो ??

दूसरों को कहते हो के तुम बहुत हशशाश बन रहे हो,जब वह बेहिश हो जाए तो उसे जीने क्यों नहीं देते ??

कोई दुख सुनाए तो...तो सुनते क्यों नहीं!!

Umair Salafi Al Hindi

Thursday, January 20, 2022

समुंदर सबके लिए एक जैसा ही होता है

 



समुंदर सबके लिए एक जैसा ही होता है, लेकिन कुछ लोग उसमे से मोती तलाश कर लेते हैं, कुछ मछलियां पकड़ लेते हैं ...!!

और कुछ को समुंदर से खारे पानी के सिवा कुछ नहीं मिलता ...!!!
बादल से बरसने वाला पानी एक जैसा ही होता है, उपजाऊ ज़मीन उसी पानी से सब्जा ऊगा लेती है, सहरा की रेत उसी पानी से अपनी प्यास बुझा लेती है और वही पानी चिकने पत्थरों को महज़ छू कर गुजर जाता है,
अल्लाह की रहमत हर दिल के लिए एक जैसी है, अब ये हम पर है के , हम पर इसका कितना रंग चढ़ता है,
" और अल्लाह का रंग सब रंगों से बेहतर है "
अपना खुद का मुहासबा कीजिए
Umair Salafi Al Hindi

Sunday, January 16, 2022

वह हर रिश्ते से बा आसानी दस्ताबरदार हो जाते हैं

 



कहने लगा , " जो लोग जिंदगी में खसारे बर्दाश्त करने के आदी हो जाएं ना तो,

वह हर रिश्ते से बा आसानी दस्ताबरदार हो जाते हैं, तुम क्या कहते हो ?

मैंने लंबी सांस ली और बोला , पता है कोई भी इंसान बा आसानी किसी रिश्ते से दस्ताबरदार हो ही नहीं सकता , कभी उजड़े हुए लोगों की आंखों को देखना , वह कभी शिकवे करते नज़र नहीं आयेंगे ,

उन लोगों के रवैए बता देते हैं के कौन साथ चल सकता है और कौन बीच राह में छोड़ जायेगा , ऐसे लोग दुख वा दर्द के तमाम मनाजिल तय कर चुके होते हैं, वह ना किसी से झूट बोलते नज़र आएंगे और ना ख्वाब दिखाते हुए,

पता है जब उनके सवालों के जवाबात, जी, अच्छा, और ह्म में तब्दील हो जाते हैं तो वो रिश्तों को मजीद नहीं घसीटते बल्कि उनको आजाद कर देते हैं , ऐसा नहीं है के वह जान बूझकर किसी खास रिश्ते से दस्ताबरदार होते हैं बल्कि वह हर चीज का इलज़ाम खुद पर लेकर खामोशी के समुंदर में चुपचाप गरक हो जाते हैं, और जाने वाला ये समझता है के बहुत ही ज्यादा अनापरस्त और खुदगर्ज इंसान था,

जबकि हकीकत उसके मुख्तलिफ होती है क्योंकि बेपनाह मुहब्बत से बनाए गए रिश्तों से दस्ताबरदार होना सब से मुश्किल तरीन और तकलीफदेह काम होता है, ये हुनर ऐसे नहीं आता ,

इंसान को अपनी जात तक खत्म करनी पड़ती है, जब इंसान अजियातों और तकलीफों से गुजरता है तो एक वक्त ऐसा आता है के उसे आम इंसान से ज्यादा बर्दाश्त आ जाती है, उसके आंसू कभी आंखों में नज़र नहीं आयेंगे , बल्कि अंदर ही अंदर कहीं दिल के परदे पर गिर रहे होते हैं,

उसको तकलीफ भी होती है और अजीयत भी लेकिन वह दूसरे इंसान के जाने में आसानी के लिए खुद मुहब्बत से बनाए गए रिश्तों से दस्ताबरदार हो जाता है,

वो ये सब इसलिए करता है के दूसरा इंसान बा आसानी Move On कर जाए, और जिस अजीयत से वह गुजरा है दूसरा ना गुजरे

मनकूल

तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi 

Saturday, January 15, 2022

जब दुआएं राएगा जाएं तो फिर एक मकाम वह भी आता है जब हाथ नहीं उठता

 




जब दुआएं राएगा जाएं तो फिर एक मकाम वह भी आता है जब हाथ नहीं उठता, दिल अफसुर्दा और दिमाग गुस्से में होता है,

क्या फायदा ?? कितने दिल से मांगा... मगर... जब कुबूल ही नहीं होनी तो की भी क्यों जाए ??

मगर !! देने वाले का भला क्या जाता है ?? नुकसान तो उसका है जो भिखारी है... मांगने वाले को ज़रूरत है,वह तो बेनियाज है....उसको क्या ???

तो क्या जरूरी है के अगर तुम दिल से उसको पुकारो तो अब वसूली करना हक है तुम्हारा ?? उसकी मर्जी वह पलट कर जवाब दे या ना दे... तुम बस अपनी बंदगी पर गौर करो और बंदगी का तकाज़ा है के खुलूस से मांगो, जितनी तलब ज्यादा है उतनी ही आजिजी से मांगों,

और जो वो ना अता करे तो भी कहो, " मैं राज़ी हूं अल्लाह ...में राज़ी हूं !!"

वो अता करे तो सजदा शुक्र,
ना अता करे तो भी रज़ा का सजदा !!

साभार : Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks




Wednesday, January 12, 2022

बे ज़रर और भोली जमात

 



बे ज़रर और भोली जमात जो खुले आम अमेरिका यूरोप में तबलीग करती है, हर मुल्क इसका साथ देता है, हत्ता के इजराइल भी कहता है के तुम हमारे यहां के मुसलमानों में तबलीग करो उन्हे अच्छा मुसलमान बना दो, तुम बहुत अच्छे हो, मगर !!


ये जमात इतनी भोली भाली और बे ज़रर है के अपने मुल्क में अहले हदीसों की मस्जिद पर कब्ज़ा ही नहीं करती बल्कि मिस्मार भी कर देती है, जहां बस चले वहां बनने नहीं देती, कुशादा ज़र्फी इतनी है के जिस तरह खुद हर मस्जिद में दावत वा तबलीग करना चाहती है उसी तरह अपनी मस्जिद में किसी दूसरे मसलक वाले को पनपने नहीं देती , खुद हमारे अपने देवबंदी भाई इतनी कुशादा जर्फ हैं के उनका एक बंदा भरी पार्लियामेंट में साल्फियों (अहले हदीसों) को दहशतगर्द कहता है,
जिस जगह या जिस मुल्क में उन्हें अथॉरिटी मिल जाए वहां किसी दूसरे मसलक की खैर नहीं,

मगर हमें अपने मुल्क में तो ये सब नज़र नहीं आता , अलबत्ता सऊदी में क्या हो रहा है इसकी वजह से हम अपने मुल्क के सल्फियों से उलझ रहें हैं,

हैरत उन लोगों पर है जो कुछ दिनों पहले तक ये तराना गाते थे के अपने मुल्क को खबर लें, ईरान तूरान और खलीज के लिए परेशान न हों, ना एनर्जी बर्बाद करें, वह सबसे आगे हैं,

बात इतनी सी है के अपने मतलब वाली बात हर जगह अच्छी लगती है, निफाक़ की इंतहा है भाई !!

नोट: तबलीगी जमात को सऊदी अरब ने दहशतगर्द नहीं कहा है, ये भी खुद को भोला कहने वाले और कुशादा ज़र्फी का नमूना पेश करने वालों का प्रोपेगंडा है, बल्कि ये कहा है के " ये जमात दहशतगर्दों के लिए दरवाज़ा और ठिकाना है",

और यकीनन है क्योंकि सउदी में जो दाईशी और इखवानी मुल्क के खिलाफ शाजिश करते थे, जब उनके खिलाफ 2016 में क्रैक डाउन किया गया तो इसके बाद ये इसी भोली जमात में शरीक होने लगे , वरना सऊदी में तबलीग करना कोई जुर्म नहीं है,वहां हज़ारों दावा सेंटर कायम है जहां से हज़ारों गैर मुस्लिम ईमान लाते हैं, बल्कि हुकुमती सरपरस्ती में शोबा दावत हमेशा होता रहता है, और पूरी दुनिया में ये काम मुल्की पैमाने पर किया जाता है, सबसे ज्यादा इस वक्त ये काम अफ्रीका के अंदर हो रहा है जहां ईसाई और राफजी मुसलमानों को सूफियत के रास्ते बद दीन बना रहें हैं,

कुरआन कॉम्प्लेक्स और हदीस कॉम्प्लेक्स इसका जीता जागता सबूत है जिसका काम ही पूरी दुनिया में कुरआन वा हदीस को पहुंचाना है,

साभार: डॉक्टर अजमल मंजूर मदनी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Sunday, August 8, 2021

जब वो पैदा हुआ तो उसकी मां ने उसे देखकर मुंह फेर लिया

 




जब वो पैदा हुआ तो उसकी मां ने उसे देखकर मुंह फेर लिया क्योंकि ना सिर्फ वह दोनो हाथों , पांव से महरूम था बल्कि सिरे से उसकी टांगें और बाजू मौजूद ही नहीं थे, इस वक्त उसकी उम्र 37 साल है,


सोचिए उसने पिछले 37 साल बिना टांगों, बाजुओं, बगैर हाथों, पांव के कैसे गुजारे होंगे और वह आज किस हालत में होगा,

अगर आप ऑस्ट्रेलिया में पैदा होने वाले इस सख्स की जिंदगी को पढ़ें तो आपके तमाम गिले शिकवे, तमाम बहाने , सब शिकायतें, हवा में उड़ जायेंगी और मेरी तरह आपका सर भी शर्म से झुक जाएगा क्योंकि वह अपने आधे अधूरे जिस्म के बावजूद एक मुकम्मल और भरपूर जिंदगी जी रहा है बल्कि करोड़ों बुझी आंखों में उम्मीद की रोशनी और मायूस दिलों में जोश की आग भड़का रहा है,

ये सात किताबों का लेखक है और इसकी अक्सर किताबें न्यू यॉर्क बेस्ट सेलर की लिस्ट का हिस्सा बनी हैं, इसकी किताबों की शोहरत का अंदाजा इस बात से लगाएं के ये किताबें दुनिया के चालीस से ज्यादा जबानों में ट्रांसलेट हो चुकी हैं,

वह एक मोटिवेशनल स्पीकर भी है और TED समेत हर काबिल ए जिक्र फोरम पर अपनी गुफ्तगू के जरिए लाखों लोगों की जिंदगियां बदल चुका है उसके मुंह से निकलने वाला हर लफ्ज़ उम्मीद और जिंदगी से भरपूर होता है, अपनी तकरीरी सरगर्मियों के सिलसिले में वह आधी से ज़्यादा दुनिया घूम चुका है,

उसने 2005 में " Limbs Without Limbs" और 2007 में "Altitude is Altitude" के नाम से ट्रेनिंग के इंस्टीट्यूट बनाए जहां वह कारोबारी इदारों , अफ़राद और दुनिया के मुख्तलिफ हुकूमतों के ऑफिसर्स को कामयाबी के गुर सिखाता है,

इसका मीडिया से भी गहरा ताल्लुक है, हर काबिल ए जिक्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके लाखों फॉलोअर हैं जिन्हें वह अपनी गुफ्तगू, वीडियो और तहरीरों के जरिए बेहतर और खुशहाल जिंदगी जीने की तरघीब देता रहता है,

BBC, CNBC, CNN समेत दुनिया भर के मोतबर तरीन टीवी चैनल इसके इंटरव्यू नश्र करते रहते हैं,

इसने मुहब्बत भी की और शादी भी, इसकी बीवी एक खूबसूरत ऑस्ट्रेलिवी मॉडल है, इन दोनो के चार हस्ते खेलते बच्चे हैं, ये अपनी खूबसूरत बीवी और बच्चों के साथ कैलिफोर्निया अमेरिका में अपने आलीशान घर में अपनी मनपसंद जिंदगी जी रहा है,

इस आदमी का नाम Nick Vujicic है,

जब आप अपने पूरे जिस्म के साथ अपनी अधूरी जिंदगी से तंग आने लगे तो इस पोस्ट को बार बार पढ़ लिया करें, इसके अधूरे जिस्म के साथ " पूरी" जिंदगी आपको जीने का हुनर और हौसला अता करेगी,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Friday, August 6, 2021

क्या मैं।भी बड़ा आदमी बन सकता हू ?

 



एक दिन प्रोफेसर साहब से जूता पॉलिश करने वाले बच्चे ने जूता पॉलिश करते करते पूछा ," मास्टर साहब ! क्या मैं।भी बड़ा आदमी बन सकता हू ? "


प्रोफेसर ने कहकाहा लगाकर जवाब दिया , " दुनिया का हर सख्स बड़ा आदमी बन सकता है "

बच्चे का अगला सवाल था," कैसे ??"

प्रोफेसर ने अपने बैग से चाक निकाला और उसके खोखे की दीवार पर दाएं से बाएं तीन लकीरें बनाई,

पहली लकीर पर मेहनत, मेहनत, और मेहनत लिखा,
दूसरी लकीर पर ईमानदारी, ईमानदारी और ईमानदारी लिखा,
और तीसरी लकीर पर सिर्फ एक लफ्ज़ हुनर लिखा,

बच्चा प्रोफेसर को चुपचाप देखता रहा , प्रोफेसर ये लिखने के बाद बच्चे की तरफ मुड़ा और बोला ," तरक्की के तीन जीने (Stairs) होते हैं"

पहला ज़ीना मेहनत है,
आप जो भी हैं आप अगर सुबह दोपहर और शाम तीनों वक्त में मेहनत कर सकते हैं तो आप तीस फीसद कामयाब हो जायेंगे ,

आप कोई सा भी काम शुरू कर दें, आपकी दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस या खोखा सबसे पहले खुलना चाहिए और रात को आखिर में बंद होना चाहिए , आप कामयाब हो जायेंगे ,

प्रोफेसर ने कहा," हमारे इर्द गिर्द मौजूद नब्बे फीसदी लोग सुस्त हैं ये मेहनत नहीं करते , आप जूं ही मेहनत करते हैं आप नब्बे फीसदी लोगों की लिस्ट से निकल कर दस फीसद महनती लोगों में आ जाते हैं, आप तरक्की के लिए अहल लोगों में शुमार होने लगते हैं,

अगला मरहला ईमानदारी होती है, ईमानदारी चार आदतों का पैकेज है, वादे की पाबंदी, झूट से नफ़रत, ज़बान पर कायम रहना और अपनी गलती का ऐतराफ करना,

आप मेहनत के बाद ईमानदारी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लो, वादा करो तो पूरा करो, झूट किसी कीमत पर ना बोलो, ज़बान से अगर एक बार बात निकल जाए तो आप उस पर हमेशा कायम रहो और हमेशा अपनी गलती, कोताही, का आगे बढ़कर एतराफ करो, तुम ईमानदार हो जाओगे , कारोबार में इस ईमानदारी के शरह 50 फीसद होती है,

आप पहला 30% मेहनत से हासिल करते हैं,आपको दूसरा 50% ईमानदारी देती है, और पीछे रह गया 20% तो ये 20% हुनर होता है,

आपका प्रोफेशनलिज्म आपकी स्किल और आपका हुनर आपको बाकी 20% भी दे देगा ,

" आप सौ फीसद कामयाब हो जाओगे "

प्रोफेसर ने बच्चे को बताया," लेकिन ये याद रखो हुनर, प्रोफेशनलिज्म और स्किल की शारह सिर्फ 20% है और ये 20% भी आखिर में आता है, आपके पास अगर हुनर की कमी है तो भी आप मेहनत और ईमानदारी से 80% कामयाब हो सकते हैं,

लेकिन ये नहीं हो सकता के आप बेईमान और सुस्त हों और आप सिर्फ हुनर के जोर पर कामयाब हो जाएं, आपको मेहनत से ही स्टार्ट लेना होगा , ईमानदारी को अपना ओढ़ना और बिछौना बनाना होगा, आखिर में खुद को हुनरमंद साबित करना होगा ,

प्रोफेसर ने बच्चे को बताया," मैंने दुनिया के बेशुमार हुनारमंदो और फनकारों को भूखे मरते देखा " क्यों ? क्यूंकि वो बेईमान भी थे और सुस्त भी, और मैने दुनिया के बेशुमार बेहूनरों को खुद का हवाई जहाज उड़ाते देखा ,

तुम इन तीन लाकीरों पर चलना शुरू कर दो,
तुम आसमान की बुलंदियों को छूने लगोगे,

मनकूल

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks