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Tuesday, February 22, 2022

मदखली, मदखली, मदखली !!!,

 



जबसे हमने जमात "इख्वानुल मुस्लिमीन मिस्र" और उसकी दूसरी शक्ल फलस्तीन में " हमास" और उसकी तीसरी शक्ल बर्रे सगीर में " जमात ए इस्लामी", और खुसुसन हमारी जमात अहले हदीस (सलाफी) में से जो जमात ए इस्लामी के रहनुमाओं से मुतास्सिर हैं जिनके पिछले दिनों मैंने नाम भी लिए , उन इख्वानियों की जिस दिन से मैंने पकड़ शुरू की है और उनकी दुम पर पांव रखा है तो उसी दिन से उनकी चीखें निकल रहीं हैं,


मदखली, मदखली, मदखली !!!,

और मेरे हल्के से एक आलिम ए दीन ने फेसबुक पर पोस्ट लिख डाली के ,"जनाब ये लोग मदखली हैं जो उलेमा इजरायल के खिलाफ जिहाद यानी हमला का ऐलान नहीं कर रहे ,"

मेरा इनबॉक्स भरा पड़ा है, के जनाब आप हमास की मुखालिफत करते हैं वह तो मजलूमों की हिमायत कर रही है ,क्या आप जिहाद के मुनकिर हैं ??

आज से पच्चीस साल पहले भी हमें मुनकर ए जिहाद कहा गया था ,जब हमने लोगों को ये समझाया के " कश्मीर का जिहाद खालिस वतनियत का जिहाद है, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान का नारा गलत है, पहले पाकिस्तान में तो इस्लाम नाफिज कर लो"

जब हमने ये बात लोगों को समझाना शुरू की तो जवाब में हमें मुंकर ए जिहाद कहा गया ,

अजीब बात ये है आज हमें मदखली कहने वाले वह लोग ही हैं जो कल को कश्मीर की लड़ाई को ऐन जिहाद कहा करते थे लेकिन जब हमारी मेहनत से जब उन्हें तागूत की समझ आई और इस बात का शाऊर हुआ के कुफफार के खिलाफ होने वाली हर लड़ाई जिहाद नहीं बन सकती जब तक के उसमे वह तमाम शरायत मौजूद ना हो जो इस्लाम के मुताबिक होनी चाहिए ,

लेकिन अफसोस ! आज फिर वही लोग हमारे मद्दे मुकाबिल हैं,इंशा अल्ला! अल्लाह से उम्मीद है के अल्लाह उन्हे इस मसले में भी समझ अता फरमाएगा,

मदखलियत

अब हम आते हैं इस बात की तरफ के मदखलियत क्या है, तारीफ तो वह होती है जो दुश्मन भी करे , तो हमारे मुखालिफ तारीफ क्या करते हैं ,उनके मुताबिक सादा अल्फाज़ में आप मदखाली उलेमा की तारीफ ये समझें

" जो उलेमा हुकमरानों के खिलाफ खुरूज को नाजायेज समझते हैं इल्ला ये के वह कुफ्र करें "

अब हम आते हैं अपने असल मौजू की तरफ, क्या हमारे 57 मुस्लिम मुमालिक के जो हुक्मरान हैं अगर वह अपने किसी कमजोरी की वजह से इजरायल पर हमला नहीं कर सकते और उनके यहां जो उलेमा हैं वह उनकी कमजोरी को देखते हुए खामोश हैं, या दूसरे अल्फाजों में वह इख्वानियों की तरह खुरुज नहीं कर रहे तो क्या ये उलेमा मदखली हैं ??

मेरा हर शक्श से सवाल है क्या हर मसला का हल हमला करना ही है कुछ मौके ऐसे होते हैं के जब ताकत न हो तो फिर दुआ ही करनी चाहिए, ये अक्लमंदी नहीं होती के आप अपनी ताकत का मवाजाना (Estimate) ही ना करें और मुखालिफ से भिड़ जाएं, और मैं ये बात अपनी तरफ से नहीं कह रहा हूं शरियत में इसका सबूत मौजूद है,

नबी ए करीम मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने हज़रत आसिम बिन साबित की इमारत में दस अफ़राद का काफिला जासूसी की खातिर मक्का की तरफ भेजा , जिनमे से एक सहाबी हज़रत खुबैब बिन अदी भी थे, वाकया तफसील काफी लंबा है लेकिन मैं मुख्तसर बयान करूंगा के जब इन अशहाब रसूल को पकड़ा गया तो हज़रत आसिम बिन साबित ने अल्लाह से दुआ की, " ए अल्लाह हमारी गिरफ्तारी की खबर अल्लाह के रसूल को पहुंचा दे"

हज़रत आसिम तो मौके पर ही शहीद कर दिए गए और हज़रत खुबैब बिन अदि को मक्का में जाकर फरोख्त कर दिया गया,और फिर कुफ्फार ए मक्का ने बड़े ही दर्दनाक तरीके से हज़रत खूबैब बिन अदी को शहीद कर दिया,

इस वाकए में हमारे लिए एक नसीहत है, मदीना में रियासत भी कायम हो चुकी थी और ये वाक्या गज़वा उहूद के बाद का है और अल्लाह के रसूल को उनके दस सहाबा किराम की सुरत ए हाल से आगाह भी कर दिया गया था , लेकिन फिर भी अल्लाह के रसूल उनकी मदद के लिए क्यों न पहुंचे ,

आपने मस्जिद नबावी में अपने सहाबा किराम को इस वाकए का बताकर अपने अशहाब से सिर्फ दुआ का ही क्यों कहा , आपने सिर्फ दुआ ही की ( आज अगर हम दुआ का कहे तो मदखली ठहरें)
अल्लाह के रसूल ने कुफ्फार मक्का की इसी तरह ईजा रसानियों का आठ साल का इंतजार क्यों किया !!

अगर आज हम ये बात कहें के इजरायल पर हमला करने से पहले हम मुसलमान एक हों , हम ताकत हासिल करें,असलहा खरीदें जैसा के कुरआन कहता है के واعدو لھم ما استطاعتم (जिस तरह के इस वक्त हुकूमत ए सउदी का सालाना दिफाई बजट पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है , वह ताकत हासिल करने की कोशिश कर रहें हैं ,इंशा अल्लाह अल्लाह उन्हे एक ना एक दिन जरूर कामयाबी अता फरमाएगा)

कुफ्फार के मुकाबले मतलूबा ताकत हासिल करने से पहले अगर दुआएं करना मदखलियत है, तो मेरा सवाल उन हजरात से है के ," ए अल्लाह के रसूल हज़रत खुबैब बिन अदी और आसिम बिन साबित की मदद को क्यों ना पहुंचे हालांकि आसिम बिन साबित ने अल्लाह से दुआ भी की थी के हमारी मजलूमियत हमारी गिरफ्तारी की खबर अल्लाह के रसूल तक पहुंचा दे ,

और अल्लाह के रसूल को अल्लाह ने खबर भी दे दी थी लेकिन अल्लाह के रसूल अपने प्यारे सहाबियों की मदद को ना पहुंच सके थे, इस वाक्य में हमारे लिए एक नसीहत छुपी है के जज़्बात में नहीं आना चाहिए बदला लेने के लिए मुनासिब वक्त का इंतजार करना चाहिए , अभी फिलहाल दुआओं का वक्त है ,आप दुआएं करें

और जिन भाइयों को अल्लाह ने ताकत दी है उन्हे हम रोकते नहीं वह इजरायल जाएं और मजलूमीन की मदद करें, वह हमसे बेहतर होंगे इंशा अल्लाह,

लेकिन अगर वह भी हमारे साथ इधर ही बैठे हैं, सारा दिन अपना कारोबार कर रहें हैं, तो मेरा उनसे मशवरा है ज्यादा बातें करने की बजाए वह अपने फलस्तीन भाइयों के लिए दुआएं जरूर करें...

साभार: शैख अब्दुल खालिक भट्टी
हिंदी तर्जुमा محمد عمیر انصاری
Blog: Islamicleaks 

Monday, February 21, 2022

ख्वारिज और रवाफिज का अहले सुन्नत वल जमात के साथ खूनी खेल,




 ख्वारिज और रवाफिज का अहले सुन्नत वल जमात के साथ खूनी खेल,


काजी अयाज़ रहमतुल्लाह अपनी किताब " तरतीब उल मदारिक 5/303 " में लिखते है,

राफज़ी हुकूमत बनी उबैद के ज़माने कैरवान के अहले सुन्नत वल जमात बहुत ही परेशान कुन हालात से गुज़र रहे थे, छुप छुप कर जिंदगी गुजारते थे, राफजियों ने हुसैन अल आमी नामी शख्स को इस बात के लिए मुकर्रर कर रखा था के वह भरे बाज़ार में सहाबा किराम रिजवानुल्लाह को गाली दे, कभी कभी वो नबी ए अकरम मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम को भी गाली देता ,सहाबा के नाम शराब की दुकानों कर लटकाए जाते , अगर अहले सुन्नत वल जमात का कोई फर्द हरकत भी करता तो उसकी गर्दन मार दी जाती,

उस ज़माने में जेनाता नामी कबाइल में एक शख्स था जिसकी कुन्नियत अबू यजीद थी, आबिद वा जाहिद था लेकिन ख्वारिज़ के सबसे शदीद फिरका सफरियाह से ताल्लुक रखता था , उसने अपनी जमात को लेकर राफज़ियो के खिलाफ मुहाज खोल दिया ,जब अहले सुन्नत वल जमात ने देखा तो उन्होंने इस खारीजी का साथ दिया क्योंकि ख्वारिज़ अहले सुन्नत वल जमात के नजदीक मुसलमान थे जबकि रवाफिज़ बिल्खुसूस बनी उबैद के रवाफिज़ काफिर थे,

चुनाँचे कैरवान के फुकहा , सुलहा , ऐम्मा वगेरह सभी ने रवाफिज़ की हुकूमत के खात्में के लिए ख्वारिज़ का साथ दिया , जंग की तैयारी शुरू हो गई , अबू यजीद खारजी की कयादत में लोग रवाफिज़ से मुकाबले के लिए निकले , अहले सुन्नत वल जमात के उलेमा वा फुकहा जिहाद का झंडा संभाले हुए थे, अल्लाह रब्बुल इज्जत उन्हे कामयाबी देता रहा , और आखिर में जब महदविया नामी शहर में रवाफिज़ का मुहासिरा कर लिया गया तो अबू यजीद खारजी ने देखा के अब तो हमारी हुकूमत बन्नी तय है, चुनांचे उसने अपनी खारजियत का असली चेहरा जाहिर कर दिया ,

अपनी खास फौज के कहा के," जब तुम रवाफिज़ से मुकाबला आराई के लिए जाना तो उलेमा ए कैरवान का साथ छोड़कर वापस चले आना ताकि रवाफिज़ उनसे अच्छी तरह बदला ले सकें, और ऐसा ही हुआ , रवाफिज़ ने चुन चुनकर कैरवान के उलेमा वा फुकहा और अहले सुन्नत वल जमात के अफ़राद को कत्ल कर दिया और खारीज़ी खबीस बैठकर मज़े लेता रहा "

ये काज़ी अयाज़ रहमतुल्लाह अलैह का बयान था जिसे मैंने निहायत ही इख्तेसार के साथ बयान किया है, आज के दौर में कोई सोचता है के खारजी राय रखने वाले रवाफिज़ के साथ मिलकर बैतुल मुकद्दस फतह कर लेंगे तो ये उनकी भूल है, बैतुल मुकद्दस ज्यों का त्यों रहेगा बस अहले सुन्नत का वहां से सफाया हो जाएगा ,

ख्वारिज़ और रवाफिज़ दोनों का इजातकरदा (Founder) एक ही है और वह अब्दुल्लाह बिन सबा है, इसलिए दोनों के दिल आपस में मिलते हैं

فاعتبروا يا أولى الأبصار

साभार: अबू अहमद कलीमुद्दीन यूसुफ ( जामिया इस्लामियां मदीना मुनाववारा)
हिंदी तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Sunday, February 20, 2022

अमीरुल मोमिनीन खलीफा अब्दुल मालिक इब्ने मरवान -

 



अमीरुल मोमिनीन खलीफा अब्दुल मालिक इब्ने मरवान -


"हज़रत अमीर मुआविया रज़ि० की औलाद में यज़ीद के सिवा कोई खलीफा नहीं हुआ। लेकिन वो तमाम खलीफा जो यज़ीद के बाद तख़्त नशीं हुए अमीर मुआविया रज़ि० के खानदान बनी उमैया से ही ताल्लूक रखते थे,(बाप के बाद बेटे वाला झूठ हज़रत मोआविया र०अ० के दुश्मन ख़ारजी राफ़ज़ियों ने फैलाया)

अब्दुल मालिक 39 साल की उम्र में तख़्त पर बैठा, वो मदीने के बड़े आलिमों में गिना जाता था।

अब्दुल मालिक एक बहादुर शख्स था, उसे शुरुआत में कई बगावतों का सामना करना पड़ा। इन बग़ावतों में सबसे बड़ी बग़ावत खारज़ियों ने की जिनका मरकज़ इराक और ईरान था।

खारज़ियों ने कई साल तक बग़ावत को ज़ारी रखा, और आख़िर में मुहल्लब बिन अबी सफ़रह की कोशिशों से, जो अपने ज़माने के सबसे बड़े सिपहसालार थे, ये बग़ावतें कुचल दी गई और पूरी सल्तनत में अमन क़ायम किया।
अपने इन्हीं कामों की वजह से अब्दुल मालिक खानदान बनी उमैया का बानी समझा जाता है।

शुमाली अफ्रीका को भी अब्दुल मालिक के ही दौर में दोबारा फतह किया गया।

ये काम एक सिपहसालार "मूसा बिन नासिर" ने अंजाम दिया, जो 79 हिज़री में शुमाली अफ्रीका के हाकिम (गवर्नर) बनाए गए थे।

मूसा ने न सिर्फ शुमाली अफ्रीका को फतह किया बल्कि उन्होंने वहां इस्लाम की तब्लीक़ भी की।

उनके दौर में पूरा शुमाली अफ्रीका मुसलमान हो गया।
अब्दुल मालिक के ही दौर में इस्लामी समुंद्री फ़ौज़ की तरक्की हुई और उन्होंने तूनीस में एक जहाज बनाने का कारखाना क़ायम करवाया।

अब्दुल मालिक के दौर का सबसे बड़ा काम येरुशलम में कुब्बतुस - सखरा (गोल्डन गुम्बद) की तामीर करवाना है।"
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Saturday, February 19, 2022

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

 



हमारी हस्ती सिर्फ दिल और रूह की सच्चाइयों पर कायम है, अगर खज़ाना खतम हो जाए तो फिर जमा किया जा सकता है, अगर फौजें कट जाएं तो दोबारा बनाई जा सकती हैं, अगर हथियार छिन जाए तो कारखानों में दोबारा ढाले जा सकते हैं, लेकिन अगर हमारे दिल का ईमान जाता रहा तो वह कहां मिलेगा ??

अगर कुरबानी और हक़ परस्ती का जज़्बा लुट गया तो वह किस से मांगा जाएगा ??
(मौलाना अबुल कलाम आज़ाद)

Thursday, February 17, 2022

डेविड सेलबॉर्न पश्चिमी दुनिया का मशहूर लेखक है, उसने एक किताब लिखी थी the loosing battle with islam,





 डेविड सेलबॉर्न पश्चिमी दुनिया का मशहूर लेखक है, उसने एक किताब लिखी थी the loosing battle with islam,

इस किताब में उसने लिखा के पश्चिमी दुनिया इस्लाम से हार रही है, उसने हार के कई कारण गिनाए हैं, जिसमे इस्लाम के मज़बूत फैमिली सिस्टम को भी एक कारण बताया है,
पश्चिमी दुनिया मे फैमिली सिस्टम तबाह हो चुका है, जिसके नतीजे में पूरा पश्चिमी समाज तबाह होने के कगार पर पहुंच चुका है, पश्चिमी दुनिया मे फैमिली सिस्टम इस बुरी तरह से तबाह हो चुका है के वहां की पोलिटिकल पार्टियां फैमिली सिस्टम को बचाने का वादा अपने इलेक्शन में करती है, ऑस्ट्रेलिया में तो 'फैमिली फर्स्ट' नाम से एक पोलिटिकल पार्टी तक बना ली गयी थी, फैमिली सिस्टम को बचाना वेस्टर्न वर्ल्ड का सबसे बड़ा मुद्दा है क्योंकि अगर फैमिली नही बचेगी तो समाज भी देर सवेर ध्वस्त हो जाएगा,
पश्चिमी विचारक ये बात बहुत अच्छी तरह से जानते है के पूरी दुनिया मे सिर्फ इस्लाम और मुस्लिम सोसाइटी ही ऐसी बची है जहां फैमिली सिस्टम बचा हुआ है और इस्लाम एक ऐसा इको सिस्टम डेवलप करता है जहां फैमिली सिस्टम फलता फूलता है,
यही वजह है के डेविड सेलबॉर्न जैसे लेखक ये कहने पर मजबूर हो जाते हैं के इस्लाम के मज़बूत फैमिली सिस्टम की वजह से पश्चिम देर सवेर इस्लाम से हार जाएगा
मलाला यूसुफजई को वेस्ट ने खड़ा किया है तो अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल भी करेगा, और करता रहता है,
मलाला हों या उसके समर्थक हों, उन सबका टारगेट इस्लाम और मुस्लिम समाज मे मौजूद मज़बूत फैमिली सिस्टम को तोड़ना और खत्म करना है, शादी बियाह पर दिया गया मलाला का हालिया बयान उसी सिलसिले की कड़ी है
मलाला और उनके समर्थक
दरअसल सभ्यताओं की जंग में पश्चिम के प्यादे हैं, उनके एजेंट हैं, जो सभ्यताओं की जंग में पश्चिम की हारती हुई बाज़ी को जीत में बदलने के लिए फड़फड़ा रहे है

Friday, February 11, 2022

हां! सय्येदना मुआविया बागी हैं




 हां! सय्येदना मुआविया बागी हैं


क्योंकि आज की तारीख में हर वो शख्स बागी तसव्वुर होगा जिसने कुरआन के हुक्म पर अमल किया ,

सुलह हुदैबिया के वक्त जब मुश्रिकीन ए मक्का ने नबी ए करीम मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर मक्का में दाखिले पर पाबंदी आइद कर रखी थी, अल्लाह के नबी चंद अफ़राद को लेकर उमराह के इरादे से मक्का की तरफ रवाना हुए और हुदैबिया के मकाम पर पड़ाओ डाला , आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने सैय्यदना हज़रत उस्मान बिन अफ्फान को अपना दूत बनाकर मक्का रवाना किया ,

उस वक्त अल्लाह के नबी एक पेड़ के नीचे अपने साथियों के साथ तशरीफ फरमा थे के अचानक आप तक एक खबर पहुंची के मक्का वालों ने नबी ए पाक के दूत उस्मान को शहीद कर दिया है,

ये खबर सुनते ही राहमतुलिल आलमीन जिनकी नरमी और बर्दाश्त की दुनिया मुतारिफ है वह हलीमुल फितरत नबी इंतहाई घुस्से में आकर ऐलान करते हैं के मैं उस्मान के कतल का किसास लिए बगैर वापस नहीं जाऊंगा और अपना दाहिना हाथ आगे कर दिया के कौन कौन मेरे साथ उस्मान का किसास लेना चाहता है, जिसपर वहां मौजूद तमाम सहाबा किराम ने नबी ए करीम मोहम्मद सल्ललाहो अलैहि वसल्लम के हाथ पर अपने हाथ रखकर बैय्यत कर ली के हम में से कोई उस वक्त तक वापस नहीं जायेगा जबतक उस्मान के खून के एक एक कतरे का हिसाब नही चुका देते,

इस पर कुरआन की ये आयत नाजिल हुई के अल्लाह भी तुम्हारे साथ इस बैय्यत में शामिल है और उन तमाम बैय्यत करने वालों पर सकीनत नाजिल कर दी,

لَقَدۡ رَضِیَ اللّٰہُ عَنِ الۡمُؤۡمِنِیۡنَ اِذۡ یُبَایِعُوۡنَکَ تَحۡتَ الشَّجَرَۃِ فَعَلِمَ مَا فِیۡ قُلُوۡبِہِمۡ فَاَنۡزَلَ السَّکِیۡنَۃَ عَلَیۡہِمۡ وَ اَثَابَہُمۡ فَتۡحًا قَرِیۡبًا ﴿ۙ۱۸﴾

तर्जुमा: " यकीनन अल्लाह उन मोमिनों से बड़ा खुश हुआ जब वो दरख़्त के नीचे तुम से बैय्यत कर रहे थे और उनके दिलों में जो कुछ था वह भी अल्लाह को मालूम था , इसलिए उसने उनपर सकीनत उतार दी, और उनको इनाम मे एक करीबी फतह अता फरमा दी "

(कुरआन सूरह फतह आयत 18)

कुछ देर बाद ये मालूम होता है के सैय्यदना उस्मान बिन अफ़ान की शहादत की खबर महज़ अफवाह थी मगर रब तो सब कुछ जानता था तो फिर भला वो क्यों ऐसी बय्यत का हिस्सा बन गया जिसकी बुनियाद ही एक अफवाह पर रखी गई थी, इसका सिर्फ एक ही मकसद हो सकता है के ये शायद मुस्तकबिल के अंदेशे की तरबियत थी के कल को जब उस्मान बिन अफ़फान को हकीकत में कतल कर दिया जाए तो इस बय्यत रिजवान पर अमल किया जाए,

और हज़रत मुआविया बागी हो गए क्योंकि उन्होंने कुरआन में मौजूद अल्लाह के हुक्म पर किसास उस्मान का मुतालिबा कर दिया और दुनिया वा तारीख की नजरों में बागी हो गए...

किसास के मुतालिबे पर मुआविया को बागी कहने वालों अपने कुरआन से ये आयत खतम कर दो क्योंकि जबतक ये आयात कुरआन में मौजूद रहेगी इंशा अल्लाह मुआविया की बेगुनाही साबित होती रहेगी

तहरीर: उस्मान पटनी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
blog: Islamicleaks 

Wednesday, February 9, 2022

मैं अरबों को चकनाचूर कर दूंगा !! ( ईरान के बादशाह यजदगर्द की धमकी)

 



मैं अरबों को चकनाचूर कर दूंगा !! ( ईरान के बादशाह यजदगर्द की धमकी)

दौर ए जिहालत में अरब कबायेल, बनू शायबां,बनू बक्र बिन वायल और बनू हनीफा ( आल ए सऊद का कबीला) ने जब मुआरका जिल्कार में फारस के मुकाबले में फतह हासिल की तो इन कबायल के हौसले बढ़ गए , और फिर जब बनू शायबान कबीले के मशहूर शुरखील नौजवान मुस्सन्ना बिन हारिश नौ हिजरी को मदीना में आकर अल्लाह के रसूल के हाथों मुसलमान होकर गए थे,

तो वह हज़रत अबू बक्र सिद्दीक के जमाना ए खिलाफत में मदीना हाजिर हुए और मस्जिद नबावी में अहले फारस के खिलाफ एक पुरजोर तकरीर की और सहाबा किराम से कहा के ," अब अहले फारस का गुरूर हमने खाक में मिला दिया है,अगर आप लोग हमें थोड़ी सी मदद करें तो मैं फारस की ईट से ईट बजा दूंगा"

उनकी तकरीर को सहाबा किराम ने एक जज़्बाती तकरीर समझा और मस्जिद नबावी में चिमगोइया शुरू हो गई, कहां सुपरपावर अहले फारस और कहां एक कबीले का सरदार मुसन्ना इब्न हारीश

इस मौके पर के जब तमाम मुसलमान खामोश थे तो उस वक्त हज़रत उमर फारूक ही थे जिन्होंने अहले फारस से टक्कर लेने की सोची,वह हज़रत अबू बक्र सिद्दीक से फरमाते हैं के आप इस नौजवान की मदद करें, और खालिद बिन वलीद को एक फ़ौज देकर उसके साथ भेजें,

चुनाँचे हज़रत अबू बक्र ने हज़रत खालिद बिन वलीद की इमारत में एक लश्कर हजरत मुसन्ना बिन हारिश के ताऊन के लिए भेजा जिन्होंने वहां जाकर अहले फारस के साथ तीन मशहूर जंगें की और फतह हासिल की,

अर्धशेर की वफात और यजदगर्द की ताजपोशी!!

ईरान का बादशाह अर्दशेर जब फौत हुआ तो नौ उम्र यजदगर्द उनका बादशाह बना उसने अपनी ताजपोशी के दौरान बाद मुसलमानों से टक्कर लेने की सोची क्योंकि मुसलमानों ने दक्षिणी इराक़ का एक मुकम्मल हिस्सा उससे छीन लिया था,

और यजदगर्द ने मुसलमानों को पैगाम भिजवाया के मैं तुमसे निपट लूंगा और तुम्हे चकनाचूर कर दूंगा, उसने दो लाख की तादाद में फौज इकट्ठी की जिसमे साठ हज़ार घुड़सवार, साठ हज़ार ऊंटसवार और अस्सी हजार पैदल फौज थी,और तीस या चालीस के बीच हाथी भी तैयार कर लिए , और अपने मुल्क के छह बहतरीन कमांडरों का इंतेखाब किया जिनमें , रुस्तम, हरमुजान, मेहरान, बहमन जूदेव, जानीलूस, वगेरह थे,

उस वक्त हज़रत अबू बक्र सिद्दीक मर्जुल मौत में मुब्तिला हो गए थे,
जारी

साभार: शैख अब्दुल खालिक भट्टी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Sunday, August 1, 2021

बाग ए फिदक के बारे में हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहिमहुल्लाह का फैसला





बाग ए फिदक के बारे में हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहिमहुल्लाह का फैसला


हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहिमहुल्लाह की नरम दिली की वजह से रवाफिज और शिया हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहिमहुल्लाह से बाग ए फिदक का मुतालबा कर दिया,

तो हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहिमहुल्लाह ने उनको ये जवाब दिया ,

"फिदक रसूल अल्लाह मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम का खास था जिसकी आमदनी आप अपनी और बनी हाशिम की जरूरियात पर सर्फ फरमाते थे, हज़रत फातिमा ने अल्लाह के रसूल से ये विरासत मांगी भी थी, लेकिन अल्लाह के रसूल ने अपनी बेटी को ये विरासत नहीं दी, और खुलेफा ए अरबा ने इसको बैतुल माल की मिल्कियत में ही रखा ,

लिहाजा मैं भी इस विरासत को मुसलमानों की ही मिल्कियत समझता हूं, मैं उसको इसी हालत में रहने दूंगा जिस हालात में ये अल्लाह के रसूल के ज़माने में थी"

(किताब सीरत हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ इब्न जौजी पेज 308)

साभार: Umair Salafi Al Hindi

Blog: Islamicleaks  

Tuesday, July 27, 2021

नहर स्यूज मिस्र




 तीन दिनों से नहर स्यूज मिस्र के अंदर एक बहुत बड़ा जापानी जहाज रास्ता रोक कर खड़ी है, यूरोप और अमेरिका में तेल का दाम दस गुना महंगा हो चुका है, जापानी कंपनी ने माफी मांगी है, इसे सीधा करने के लिए दुनिया भर की माहिर कंपनियां कोशिश कर रही हैं मगर अब तक नाकाम रहीं हैं,

अंदाज़ा हैं के ऐसे ही हफ्ता दस दिनों तक रास्ता रुका रह सकता है जिससे यूरोप और अमेरिका के अंदर तेल की कीमतों में पचास गुना इज़ाफा हो जायेगा ,
दरअसल कुछ टेक्निकल खराबी की वजह से जहाज के सारे इंजन बंद हो गए , जहाज काबू से बाहर हो गया मतलब काग़ज़ की कश्ती जैसी इसकी हालत हो गई है, हवा तेज चलने लगी फिर हवाओं ने इसका रुख मोड़ दिया और इस तरह जहाज का अगला सिरा जाकर साइड में खुश्की के अंदर दूर तक धंसता चला गया, मालूम रहे जहाज़ एफिल टावर से भी लंबा है,
नोट : इसी रास्ते को 1973 की लड़ाई में मिस्र और सऊदी अरब की तरफ से एक हफ्ते के लिए रोका गया था तो उस वक्त यूरोप और अमेरिका के अंदर सारी गाडियां सड़क पर खड़ी हो गईं थी और सब लोग पैदल हो गए थे,
ये कुदरती ताकत और वसाएल अल्लाह ने मुसलमानों को अता किया है, बस मुनाफिकों के खात्मे और आपसी इत्तेहाद की जरूरत है,
साभार: डॉक्टर अजमल मंजूर मदनी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Tuesday, June 15, 2021

इतिहास के पन्नों से

 




इतिहास के पन्नों से

ये तस्वीर 11 दिसंबर 2002 की है जब जॉर्ज बुश तैयब एरडोगन से मीले थे हैरत की बात ये है की उस वख्त एरडोगन सत्ता में नही बल्कि विपक्ष मे अध्यक्ष थे
25 फरवरी 2003 को एरडोगन की पार्टी सब के उम्मीद के उलट 363 सीट के साथ बहुमत से जीत जाती है और सिर्फ पांच दिन बाद 1मार्च 2003 को तुर्की की संसद मे अमेरिका की इराक पर चढ़ाई के समर्थन मे बिल आता और पास होता है

फिर अमेरिका ने अपने 62 हज़ार सैनिक, 250 लड़ाकू विमान और 65 हेलीकॉप्टर तुर्की में स्थित नाटो सैनिक अड्डे इंक्रिलिक मे भेजे जो यूरोप का सबसे बाद नाटो का सैनिक अड्डा है तुर्की में जिसे आज भी अमेरिका सीरिया, लीबिया इराक मे बम्बारी के लिए इस्तेमाल करता है

ये ज़रूरी था क्यो की अमेरिका को कुवैत छोड़ कर सारे अरब मुल्को ने सैन्य अड्डा या अपनी ज़मीन किसी भी तरीके से इराक के खिलाफ इस्तेमाल करने देने से साफ मना कर दिया था लेकिन कुवैत अकेला काफी नही था तुर्की मे एरडोगन के समर्थन की वजह से अब इराक दो तरफ से घेरा गया था

साथ ही एरदोगान ने अमेरिका को अपनी तुर्की सेना का परांजर झील बेस भी इस्तेमाल के लिए दे दिया और साथ ही 5000 तुर्की सैनिको को तुर्की इराक बार्डर पर तैनात कर दिया

06 मार्च 2003 को अमेरिका के रक्षा सेक्रेटरी कॉलिन पॉवेल (जो फ़ोटो मे दूसरी तरफ है) उन्होने प्रेस को बताया तुर्की और एरदोगान का धन्यवाद करते हुए की तुर्की को 8 बिलियन डॉलर का तुरंत भुगतान किया गया है साथ ही रक्षा आविष्कारो के लिए 24 बिलियन डॉलर बहोत ही कम ब्याज दर पर दिया गया है

आज बहोत से भाई उसी एरडोगन को जो अभी कोरोना मे भी इज़राइल को मदद भेजा था उसे अमीर उल मोमिनीन दुनिया का सबसे अच्छा मुस्लिम हुक्मरान वगैरह बोलते है जब की ऐसा बोला जाता है की उसने बहोत आवाज़ उठायी है लेकिन नज़र ऐसा आता है जितना उसने आवाज़ उठायी उतनी इज़राइल और अमेरिका की हिम्मत बढ़ी क्यो की
आज तक 75 सालो में इज़राइल ने अपना राजधानी जेरुसलम को बोलने की हिम्मत नही की अमेरिका ने पहली बार अपना दूतावास जेरुसलम शिफ्ट किया इज़राइल के सबसे खतरनाक जान माल का नुकसान करने वाली बम्बारी गाज़ा में दो बार हो गयी एरडोगन के ही राज में हुई

सोचने वाली बात है की हम हर दूसरी छोटी छोटी बात पर अमेरिक इज़राइल की साज़िश ढूंढते है लेकिन शायद असली साज़िश यहूद नासरा ऐसी खेलते है की हम को बज़ाहिर वो बहोत आकर्षित करती है और ये सोच कर वो ऐसा खेल खेलते है की हमारा उस पर ध्यान भी जाए तो सकारात्मक रूप मे और हम फालतू चीज़ों मे साज़िशें ढूंढते रह जाए।

Thursday, June 10, 2021

FRANCE DID #NRC TO THOUSANDS OF JEWS ON 14th MAY 1941

 



FRANCE DID #NRC TO THOUSANDS OF JEWS ON 14th MAY 1941: ISRAEL WAS ESTABLISHED ON THE LAND OF PALESTINE ON 14th MAY 1948 BY EUROPE

आज के ही दिन 14 मई 1941 को 80 साल पहले फ्रांस ने हजारो यहूदी को पेरिस मे नागरिकता साबित करने के लिये "काग़ज" मॉग कर NRC कर कैम्प मे भेजा था।यह काम फ्रांस सरकार ने 1940 मे जनगणना (Census) के बाद यहूदियो को तंग करने को किया था।
हजारो बच्चे और औरते फ्रांस से सेकडौ मिल दूर कैम्प मे ट्रेन से भेजे गये और सैकडो मर गये और अपने परिवार से हमेशा के लिए बिछड़ गये।
फिर जो ज़ुल्म हिटलर ने WWII मे यहूदियो पर किया वह आज यूरोप और आतंकी बाईडेन आतंकी इसराईल के द्वारा फ़लस्तीनियों पर किये जा रहे जुल्म को सही ठहरा कर यहूदी का शुभचिंतक बन रहा है।
गौर से सोचये यह यूरोप और अमेरिका के क्रिस्चन नैरेटिव बना आज भी यहूदियो को मरवा रहे हैं।यही हज़ारों साल से यहूदियों के दुश्मन हैं न के मुस्लिम।
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याद किजये हमारे संघ के मोहन जी भागवत और मोदी जी यही फ्रांस के 1941 के यहूदियो को #NRC कर मारने का शोध कर भारतीय मुस्लिम का 2020 मे जनगणना कर NRC करवा रहे थे।देख लिजये यह लोग फ्रांस के जुल्म को भारत मे लागू कर समाज और देश को बरबाद कर रहे थे।वही फ्रांस भारत के 3.3 करोड के भगवान का मज़ाक़ उडा रहा है कि भगवान ओक्सीजन नही पैदा कर रहे हैं।संघीतकार शरम ले डूब मरो।
मोहन जी हिन्दु को सही बूद्धी दिजये और भारत को जो बरबाद किया है उस का प्राशचित किजये।मोदी जी चायवाला, चौकिदार और प्रघान सेवक का डाईलौग बंद किजये और चीन से भारत को बचाईये। जय हिन्द.