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Wednesday, February 4, 2026

स्विट्ज़रलैंड में बच्चों का गोश्त खाने वाला फ़व्वारा!!

 




स्विट्ज़रलैंड में बच्चों का गोश्त खाने वाला फ़व्वारा!!


तुम्हारे ख़याल में वो एक मूर्ति क्यों रखते हैं जो एक आदमी को बच्चों का गोश्त खाते दिखाता है?
और ये ख़याल कहाँ से लाए अगर ये वाक़ई न हो रहा हो?

और क्या बात यहाँ तक पहुँच गई कि बच्चों का गोश्त खाने वालों की इज़्ज़त-अफ़ज़ाई के लिए एक ख़ास फ़व्वारा बनाया जाए?

शैतानी रस्मात जो “तलमूद और ज़ोहार” की तहरीरों में जड़ी हुई हैं, और कहानी को समझने के लिए पहले ये जानना ज़रूरी है कि रब्बानी किस तरह “ग़ैर-यहूदी” बच्चों को देखते हैं।
● तलमूद - सनहदरीन 54b
“यहूदी के लिए नौ साल से कम उम्र के लड़के के साथ हमबिस्तरी जाइज़ है बग़ैर उसे ज़िनाकारी समझे”
● तलमूद - सनहदरीन 55b
“यहूदी के लिए तीन साल और एक दिन की उम्र की लड़की से शादी जाइज़ है”
● तलमूद - कितोबोत 11b
“जब एक बालिग़ आदमी एक छोटी लड़की के साथ हमबिस्तरी करता है तो ये कुछ भी नहीं”
● यबूमोत - 98a
“तुम यहूदियों को इंसान कहा जाता है, जबकि दुनिया की क़ौमें इंसान नहीं कहलातीं”
● ज़ोहार (पहला हिस्सा, सफ़्हा 131a)
“क़ौमें जानवरों की तरह हैं, और उनकी औरतें जानवरों की बेटियों की तरह”

ये “इन्फ़रादी इनहिराफ़” नहीं हैं बल्कि “तलमूद और ज़ोहार” में मुक़द्दस तहरीरें हैं, और अब हम “एपस्टीन” जज़ीरे पर वापस आते हैं

- बच्चों को क्यों ज़्यादती का निशाना बनाया जाता था?
- उन्हें मौत तक क्यों अज़ीयत दी जाती थी?
- उनका ख़ून (एड्रीनोक्रोम) क्यों पिया जाता था?

क्यूँकि ये शैतानी रस्मात हैं और तलमूद ने बच्चों की ज़्यादती को जाइज़ ठहराया, “ज़ोहार” ने ग़ैर-यहूदियों की इंसानियत को छीन लिया, जबकि “कबाला” ने “जादुई पहलू” शामिल किया कि बच्चों का ख़ून शैतानी ताक़त है, यहाँ तक कि मुसलमान मुल्कों में भी इसी यहूदी तरीक़े का तसल्लुस है जैसे जादूगर या शोबदा-बाज़ जिनके लिए बच्चा या जानवर क़ुर्बानी के तौर पर मांगता है और ख़ून को ख़फ़ी तौर पर अलग-थलग तारीक जगह पर बहाया जाता है।

और “जज़ीरों” और “सीवर्स” का इख़्तियार यहूदियों के लिए इत्तिफ़ाक़ी नहीं है, क्यूँकि तलमूद की सिफ़ारिश है: “अपनी बुराई वहाँ कर जहाँ कोई तुम्हें न जानता हो, और अपने अक़ीदे को ग़ैरों से छिपाओ” इसलिए अलग-थलग जज़ीरे और तारीक सीवर्स उनकी रस्मात के लिए ख़फ़ी अड्डे थे ⛧⁶𖤐⁶ “तलमूद और कबाला” में बुनियादी क़ायदा के मुताबिक़ ग़ैर-यहूदियों से अक़ीदे को छिपाना।

क्या तुम जानते हो कि “ज़ोहार” ग़ैर-यहूदियों के ख़ून बहाने को नजात की जल्दी से जोड़ता है? और ये वजह बताता है कि एपस्टीन ने ख़ुद को सियासत और पैसे के आदमियों से क्यों घेरा और उन्हें अपनी रस्मात में शामिल किया, ये महज़ करप्शन का नेटवर्क नहीं बल्कि “मुनहिरफ़ ईमान” का नेटवर्क है।

और एपस्टीन एक मरहले का काहिन था, महज़ जिस्मों का दलाल नहीं, और जज़ीरा महज़ अख़लाक़ी स्कैंडल नहीं बल्कि एक छोटी खिड़की थी जो एक ख़फ़ी दीन को ज़ाहिर करती है जो दुनिया पर हुकूमत करता है, एक दीन जो बच्चों को क़ुर्बानियाँ बनाता है और शैतान को ख़ुदा, और ये वो राज़ है जिसे वो तुम्हारे शुऊर तक पहुँचने से डरते हैं।

चाहे ये ब्लैकमेल हो, इताअत हो या बातिल ईमान, जो मुसलमानों के ख़ून की हिफ़ाज़त न करे वो ख़याली सरहदें भी नहीं बचा सकता जो इस्तेमार ने खींचीं, और जो उम्मत को पहले धोखा दे वो वतन को आख़िर में बेच देगा, और इसी लिए कुछ हुकमरानों की ग़ज़ा में क़त्ल-ए-आम पर ख़ामोशी इस बात का वाज़ेह सबूत है कि वो इस ड्रामे का हिस्सा हैं न कि वतनों के मुहाफ़िज़।

और क्या तुम जानते हो कि अगर एक यहूदी एक ग़ैर-यहूदी तीन साल की लड़की पर ज़्यादती करे तो लड़की को सज़ा दी जाएगी क्यूँकि उसने यहूदी को ज़्यादती पर मजबूर किया, और यहूदी पर कोई गुनाह नहीं?!

बहरहाल! एपस्टीन की फ़ाइलें और इस वक़्त लीक का शाया होना महज़ तवज्जोह हटाने के लिए है, और एपस्टीन केस को अशरों से बनाया गया है, जबकि इसे तर्तीब दे कर दुनिया की निगाहें आने वाली तमाम तबाहियों से हटाने के लिए दबाव के कार्ड के तौर पर।
दुनिया फटने के क़रीब है और अवाम (पब्लिक) शुऊर की ग़ैर-मौजूदगी की हालत में हैं और ऐसी चीज़ों के पीछे दौड़ रहे हैं जो किसी काम की नहीं..!

Saturday, February 19, 2022

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

 



हमारी हस्ती सिर्फ दिल और रूह की सच्चाइयों पर कायम है, अगर खज़ाना खतम हो जाए तो फिर जमा किया जा सकता है, अगर फौजें कट जाएं तो दोबारा बनाई जा सकती हैं, अगर हथियार छिन जाए तो कारखानों में दोबारा ढाले जा सकते हैं, लेकिन अगर हमारे दिल का ईमान जाता रहा तो वह कहां मिलेगा ??

अगर कुरबानी और हक़ परस्ती का जज़्बा लुट गया तो वह किस से मांगा जाएगा ??
(मौलाना अबुल कलाम आज़ाद)

Thursday, February 17, 2022

डेविड सेलबॉर्न पश्चिमी दुनिया का मशहूर लेखक है, उसने एक किताब लिखी थी the loosing battle with islam,





 डेविड सेलबॉर्न पश्चिमी दुनिया का मशहूर लेखक है, उसने एक किताब लिखी थी the loosing battle with islam,

इस किताब में उसने लिखा के पश्चिमी दुनिया इस्लाम से हार रही है, उसने हार के कई कारण गिनाए हैं, जिसमे इस्लाम के मज़बूत फैमिली सिस्टम को भी एक कारण बताया है,
पश्चिमी दुनिया मे फैमिली सिस्टम तबाह हो चुका है, जिसके नतीजे में पूरा पश्चिमी समाज तबाह होने के कगार पर पहुंच चुका है, पश्चिमी दुनिया मे फैमिली सिस्टम इस बुरी तरह से तबाह हो चुका है के वहां की पोलिटिकल पार्टियां फैमिली सिस्टम को बचाने का वादा अपने इलेक्शन में करती है, ऑस्ट्रेलिया में तो 'फैमिली फर्स्ट' नाम से एक पोलिटिकल पार्टी तक बना ली गयी थी, फैमिली सिस्टम को बचाना वेस्टर्न वर्ल्ड का सबसे बड़ा मुद्दा है क्योंकि अगर फैमिली नही बचेगी तो समाज भी देर सवेर ध्वस्त हो जाएगा,
पश्चिमी विचारक ये बात बहुत अच्छी तरह से जानते है के पूरी दुनिया मे सिर्फ इस्लाम और मुस्लिम सोसाइटी ही ऐसी बची है जहां फैमिली सिस्टम बचा हुआ है और इस्लाम एक ऐसा इको सिस्टम डेवलप करता है जहां फैमिली सिस्टम फलता फूलता है,
यही वजह है के डेविड सेलबॉर्न जैसे लेखक ये कहने पर मजबूर हो जाते हैं के इस्लाम के मज़बूत फैमिली सिस्टम की वजह से पश्चिम देर सवेर इस्लाम से हार जाएगा
मलाला यूसुफजई को वेस्ट ने खड़ा किया है तो अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल भी करेगा, और करता रहता है,
मलाला हों या उसके समर्थक हों, उन सबका टारगेट इस्लाम और मुस्लिम समाज मे मौजूद मज़बूत फैमिली सिस्टम को तोड़ना और खत्म करना है, शादी बियाह पर दिया गया मलाला का हालिया बयान उसी सिलसिले की कड़ी है
मलाला और उनके समर्थक
दरअसल सभ्यताओं की जंग में पश्चिम के प्यादे हैं, उनके एजेंट हैं, जो सभ्यताओं की जंग में पश्चिम की हारती हुई बाज़ी को जीत में बदलने के लिए फड़फड़ा रहे है

Wednesday, February 16, 2022

बाग बहिस्त में मुझे हुक्म सफर दिया था क्यू कार कहां दराज है,अब मेरा इंतेजार कर,

 


बाग बहिस्त में मुझे हुक्म सफर दिया था क्यू

कार कहां दराज है,अब मेरा इंतेजार कर,
व्याख्या:
मुझे तूने बहिस्त से कूच का हुक्म क्यों दिया था ? तेरे हुक्म के मातहत मैं इस दुनियां में आ गया और जो काम सुपुर्द हुआ था उसमे लग गया, ये काम बहुत लंबा है और जल्द खतम नहीं हो सकता ,ना मैं इसे अधूरा छोड़ सकता हूं, अब मेहरबानी फरमा कर मेरा इंतेजार कर ,
(शरह गुलाम रसूल महर)
इकबाल कहते हैं के , ऐ खुदा ! तूने अपनी मईशत के मुताबिक हज़रत आदम को खुद जन्नत से निकाला अब तो तुझे इंतजार करना ही पड़ेगा क्योंकि जबतक " कार ए जहां " इख्तेताम पजीर ना हो,मेरी मुलाकात तुझसे नामुमकिन है, यानी जब तू ये कारखाना आलम खतम कर देगा उस वक्त मैं तुझसे मिल सकूंगा ,
वाजेह हो के इस अशहार में अल्लामा इकबाल ने इस हकीकत का इंशिकाफ किया हैं के जिस तरह इंसान खुदा से मिलने का आर्जुमंद है, खुदा भी इंसान से मिलने का तमन्नाई है, चुनांचे ज़बूर अजम में उन्होंने खुद इस हकीकत को वाज़ेह कर दिया है,
ما از خدائے گم شدہ ایم او بجستجوست
چوں ما نیاز مند و گرفتارِ آرزوست
" खुदा हमें गुम कर बैठा है और अब हमारी तलाश में है,अब गोया वह हमारी तरह नियाज़ मंद भी है और गुफ्तार ए आरजू भी"
लेकिन उसने खुद अपनी मईशत की बिना पर इंसान को एक अरसे के लिए दुनिया में भेज दिया है,अंजाम कार जब ये कारखाना दरहम बरहम हो जायेगा तो
"کل شی یرجع الیٰ اصله"
के मुताबिक इंसान फिर अपनी असल की तरफ लौट जाएगा, इस बात को इकबाल ने शायराना अंदाज में इस शेर में बयान किया है और इस मफरूजा की बिना पर के महबूब खुद हमारा मुश्ताक है,
Bagh-e-Bahisht Se Mujhe Hukam-e-Safar Diya Tha Kyun
Kaar-e-Jahan Daraz Hai, Ab Mera Intizar Kar✨
Why did You order me to quit the Garden of Eden?—
Now there is much to be done here—so just wait for me!
साभार: सबा यूसुफजई
Blog: Islamicleaks

Tuesday, February 15, 2022

किसी को जान लेना बहुत बड़ा अजाब होता है,

 



किसी को जान लेना बहुत बड़ा अजाब होता है,
चेहरे पढ़ने लगोगे तो दोस्तियां टूट जाएंगी,
नजरें पहचानोगे तो कइयों से घिन आना शुरू हो जाएगी,
और ये तो जानने की कोशिश भी ना करना के कौन कौन सी बातें लोग दिल में छिपाए बैठे हैं,

ये तो बस अल्लाह का हौसला है वह सबकुछ जानता है और खामोश रहता है,
साभार: सबा यूसुफजई

Sunday, February 13, 2022

जानते हैं !!

 



जानते हैं !!

अल्लाह से मुहब्बत को भी Revive करने की जरूरत रहती है, उस मुहब्बत को अगर बढ़ाने की कोशिश नहीं की जाए अगर उसका तजकिरा ना किया जाए,
अगर इसको दूसरों में ना बांटा जाए,
अगर उसके खातिर खुद को थकाया ना जाए,
अगर उसको पाने के लिए अपनी मर्ज़ीयां, अपनी अना , अपनी तरजीहात कुर्बान ना की जाए तो....
तो ये मुहब्बत उसी मक़ाम पर नहीं रहती फिर ये रफ्ता रफ्ता घटने लगती है, फिर ये आदत सी बनने लगती है, फिर ये फीकी पढ़ने लगती है, इसमें वो पहले की सी तड़प वा शिद्दत नहीं रहती, फिर अमाल भी बेदिल से होने लगते हैं, फिर दिल मे वो करार ,चेहरे पर वो मुहब्बत भरी मुस्कुराहट, अखलाक में वो गर्मजोशी, कोशिशों में वो इखलास बाकी नहीं रहता ,
साभार: सबा यूसुफजई
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Thursday, February 3, 2022

मैने बहुत अरसों तक लोगों की पसंद और नापसंद का बोझ खुद पर उठाए रखा है के,





 मैने बहुत अरसों तक लोगों की पसंद और नापसंद का बोझ खुद पर उठाए रखा है के,


फलां को फलां चीज़ बुरी लग जायेगी मगर, अब मुझे खुद के लिए वक्त मिला है, जबसे खुद से मुलाकात करना शुरू किया है तो एहसास हुआ के हमें हर किसी का बोझ खुद पर लेकर जिंदा नहीं रहना खुलूस और प्रेशर को मिक्स अब नहीं करना ,

वरना दूसरों की ख्वामखाह की उम्मीदें मेरा सांस लेना भी मुश्किल कर देंगी, मैने खुद को एहसास दिलाना शुरू किया के अगर मैं लोगों के लिए सिर्फ नियत खालिस कर लूं और जरूरत पड़ने पर मयस्सर रहूं तो यही काफी है मुझे मेरी नज़र में अपने को मोअतबार बनाने के लिए,

लेकिन खुद को बिलावजाह थकाना नहीं है, क्योंकि आखिर में सोचना हर किसी को अपने मनपसंद तरीके से ही है , लिहाजा मुझे खुद को Manipulate नहीं होने देना, मुझे लोगों के इशारों पर नहीं जीना,

मुझे खुद को मारकर नहीं जीना जो मेरा खास होगा वह मिल जायेगा और जिसे जाना होगा चला जायेगा !!

मनकूल

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Tuesday, February 1, 2022

अना (ज़िद) सब में होती है

 



अना (ज़िद) सब में होती है, झुकना कोई भी पसंद नहीं करता, मगर इसके बावजूद कोई अपनी अना का गला घोंट कर आपके लिए झुक रहा है,आपको संभालकर रखना चाहता है तो कदर करें ऐसे रिश्तों की ..!!!

वरना अच्छे लोगों का क्या है वह कहीं भी किसी भी जगह अपना मकाम आसानी से बना लेते हैं, और रह गई बात आपकी तो अच्छे लोगों को खोकर आपने कितना घाटे का सौदा किया ये बात वक्त आपको समझा देगा !!!

Umair Salafi Al Hindi

Sunday, January 30, 2022

टूटे हुए इंसान को हर अपनाईयत से बात करने वाला मसीहा लगने लगता है

 



टूटे हुए इंसान को हर अपनाईयत से बात करने वाला मसीहा लगने लगता है, और इस जज्बे में खोकर हम अपना सब कुछ उसे सुना देते हैं जो खालिस उस जात के लिए था जो बिन कहे सब जानता था,

मगर इंसान मिट्टी से बनाए इन पुतलों से हमदर्दी पाने के खातिर इतना झुक जाता है के फिर उठना मुमकिन नहीं होता ,

और जिससे गम बांटता है वह हकीर समझ लेता है, मोहतात रहें इन नरम दिल लहजों से , बड़े सफफाक होते हैं!!!
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Saturday, January 29, 2022

हस्सास (Sensitive) तबियत लोगों के भी अजीब मसाइल होते हैं

 




हस्सास (Sensitive) तबियत लोगों के भी अजीब मसाइल होते हैं, दूसरों के लिए खुद की मसरूफियात तर्क करके उनको वक्त देने वाले ये लोग छोटी छोटी बातों को ना सिर्फ महसूस करते हैं बल्कि कहीं ना कहीं हर बात के जिम्मेदार खुद को महसूस करते हैं,

कोई नज़र अंदाज़ करे !!
सख्त लहजे में बात करे !! गोया हर तरह की बात को गहराई में जाकर सोचने लग जाते हैं, दूसरों को खुश करने के लिए अपने दुख दर्द को भी फरामोश कर देते हैं,
फिर एक वक्त आता है के अपनी कद्र वा कीमत खो देते हैं,भला ऐसे लोगों की क़दर की जा सकती है जो हर वक्त मयस्सर हों !!
जो हमारी खुशी गमी में अपने एहसासात को रद्द करते हुए हमारे साथ शामिल होते हैं, ऐसे लोगों को बेवकूफ तसव्वुर किया जाता है, भला कोई चीज हो या इंसान बगैर जद्दोजेहद के मयस्सर आ जाए हमें तो उसकी क़दर हम थोड़ी ना करते हैं,
हम तो उन चीजों और इंसानों के पीछे भागने के आदी हैं जो हमारी पहुंच से दूर हों, जिनको हमारे एहसासात हमारे साथ की कदर ना हो, हम भी उन्ही के पीछे जलील वा ख्वार होना पसंद करते हैं मगर जो खामोशी से हमारे साथ साय की तरह रहते हैं, हमारी परवाह करते हैं उनको नजरंदाज करना अपना फर्ज समझे , सराबों के पीछे भागते भागते हकीकत को झुटला देते हैं,
फिर यही हस्सास तबियत लोग अंदर ही अंदर खुद को अजीयत देना गवारा तो कर लेते हैं मगर एक हर्फ ए शिकायत तक ज़बान पर नहीं लाते, खुशियों भरी जिंदगी गुजारने के लिए कभी कभी खुदगर्ज होना पड़ता है मगर हस्सास फितरत लोगों के अख्तियार में कहां होता है के वह बेहिस होकर जिंदगी गुजारें,
Umair Salafi Al Hindi

Monday, January 24, 2022

मुझे चेहरे पढ़ने आते हैं ??, मैने उसको हंस कर कहा ,

 



मुझे चेहरे पढ़ने आते हैं ??, मैने उसको हंस कर कहा ,

कहने लगी, " बिलकुल तुम्ही तो जादूगर हो !", मैने कहा " हां ! बिलकुल मुझे जादूगर ही समझो "

पता है सबसे ज्यादा अजाब इंसान के लिए क्या होता है ?, किसी को हद से जान लेना

ये सुनकर बोली, " मैं तो तुमको मुकम्मल जानती हूं ? तुम्हारे बारे में एक एक बात जो तुम बोलते भी नहीं", मैं हंस कर चुप कर गया क्योंकि मुझे मालूम था के सबकुछ एक जैसा नहीं रहता क्योंकि हर इंसान के पास अपना रास्ता चुनने का हक है, मैं कैसे किसी को रोक सकता था,

हर इंसान ही जादूगर होता है जो मुहब्बत से रिश्तों को जोड़े रखता है, जिन रिश्तों में मुहब्बत होती है ना उनमें दिल से दिल को राह होती है, जब एक शख्स को तकलीफ होती है तो दूसरे सख्स को फौरन पता चल जाता है,

लेकिन एक वक्त ऐसा आता है के चाहे आप किसी स्टेचर पर जिंदगी की बाजी लड़ रहें होते हैं या अकेले वीरान कमरे में, कोई हाल नहीं पूछता क्योंकि जाने वाला अपनी मंजिल चुन चुका होता है,

आपके आंसू और अजियत उसके लिए बेमायने हो चुके होते हैं, अगर गलती से बर्दाश्त का दामन छोड़कर अपनी तकलीफ का उनको बता दें तो सिर्फ Get Well Soon का लफ्ज़ कह दिया जाता है,

तो फिर इंसान यही सोचता है के क्यों बताया जाए किसी को, जाने वाला जा चुका है, उसको ख्वाब दिखाने वाला और उनको ताबीर देने वाला मिल चुका है, इसलिए अपनी जात को उस शख्स के सामने बार बार Degrade ना करें, जिसके लिए कभी आप जादूगर थे क्योंकि उसका soulmate अब कोई और है,

आप सिर्फ जोकर !!

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Friday, January 21, 2022

हम परफेक्ट नहीं होते !

 



हम परफेक्ट नहीं होते !


एक तरफ हम किसी की बहतारीन याद होते हैं, तो दूसरी तरफ कोई हमारा नाम लेते ही सर से पांव तक सुर्ख हो जाता है,

कोई हमारी कुर्बत के लिए तरसता है, तो कोई हमारे साए से भी दूर रहना चाहता है,

कोई भी इंसान सिर्फ अच्छा या सिर्फ बुरा नहीं होता ,

हम किसी के लिए एक मिसाल, और किसी के लिए एक सबक और किसी के लिए अजाब होते हैं,

हम परफेक्ट नहीं होते !!

मनकूल 

Monday, January 17, 2022

आज का सेकुलर मुसलमान:

 



आज का सेकुलर मुसलमान:


अपने आपको मुसलमान कहने वाले वो लोग जो दूसरे बातिल धर्मों की तरफ कुछ ज्यादा ही (यानी उनके धार्मिक रस्म वा रिवाज और इबादात तक में किसी तौर पर भी शिरकत करना ) लचकपन और नरम रवैया रखते हैं वह दो हाल से खाली नहीं है,

पहला : वह सिर्फ नाम के मुसलमान हैं और सेकुलरिज्म के नाम पर अक्सरियत को खुश करने के लिए करते हैं ये लोग अपने आपको पक्का सेकुलर साबित करने के लिए कभी इस्लाम के बाज अहकाम का मज़ाक भी उड़ाते रहते हैं, और उनमें से बाज तो कभी इंटर रिलीजन के नाम पर काफिराह औरत को उसके अपने शराइत के साथ अपना रफीक ए हयात भी बना लेते हैं, और कुछ तो उस काफिरह को खुश करने के लिए घर में उसके पसंद का मंदिर भी बना देते हैं, और ये लोग अकबर को अपना इमाम ए आज़म तसव्वुर करते हैं, और कुछ तो " Inter Faith " और " Co- Existance " के नाम पर अपने बच्चों का नाम गैर इस्लामी रख कर Non Muslimon से खूब वाहवाही बटोरते हैं, उन्हे इसका शाउर भी नहीं रहता के वह कौम रसूल हाशमी की तरकीब का सत्यानाश कर रहे होते हैं, इनमे अक्सर आप Celebraties का नाम पायेंगे जो खेल, फिल्म और सियासत की दुनिया से जुड़े हैं,

दूसरा: ये वो सेकुलर मुसलमान हैं जो एहसास कमतरी का शिकार हैं, गैरों का रूवाब और कमजोर ईमानी का साया कभी उनका पीछा नहीं छोड़ता ,कभी कभी तो ईमान का आखिरी दर्जा भी उनसे पनाह मांगने लगता है, क्योंकि ये जब कभी उन्हें अपनी ईमानी कुव्वत के मुजाहिरे का वक्त पड़ता है तो वह आखिरी सीढ़ी पर भी अपनी बका को सेकुलरिज्म के खिलाफ समझने लगते हैं और Intolerance का खौफ दिलाकर Peaceful Co Existance के नाम पर सरीह कुफरिया वा शिरकिया अमाल को भी एक मामूली मरी हुई मक्खी का चढ़ावा समझ कर उसे Thamsup Coldrink की तरह अपने इस्लाम का हाजमा तसव्वुर करते हैं Discrimination और Cultural Clash का हव्वा खड़ा करके अपने हम मजहबों को भी दीनी वुसत कल्बी की दावत देना शुरू कर देते हैं,

इसी तरह Mutual Understanding ، Multi-Religious society और Mutual Respect के नाम पर अपना सबकुछ लुटा चुके होते हैं फिर भी उन्हें सेकंड बल्कि थर्ड क्लास जैसे लकब के अलावा कुछ नहीं हासिल होता , क्योंकि सिर्फ इस्लामी नाम ही पिछड़ा हुआ, ओबीसी बना दिए जाने के लिए काफी है,

मैं नहीं समझता के मुग़ल सलातीन से भी ज्यादा कोई हिंदुस्तान में सेक्युलर रहा होगा लेकिन आज भारत के हुक्मरान ए वक्त उन्हें गद्दार, लुटेरा और कातिल के इलावा क्या क्या समझ रहे हैं और उनसे जुड़ी मुल्की तहजीबी विरासत के साथ क्या क्या सुलूक कर रहें हैं ये सब हमसे ज्यादा खुले हुए सेकुलर हजरात जानते होंगे , नेज उन्हे ये भी पता होगा के महज़ इंसानी हमदर्दी के नाम पर किसी इस्लामी फैसले की ताईद कर देने से ऐसे ही खुले दिल के सेकुलर लोगों को अक्सर गद्दार ए वतन होने का परवाना दिया जाता है, फिर भी मसाकीन ए वक्त और इस्लामी नुमा सेकुलर होश के नाखुन नहीं लेते,

उनमें अक्सर आपको राफिज़ी,तहरीकी और उनके हमनवा मिल जायेंगे जो कभी बिरादराने वतन के नाम पर मंदिर साफ करते दिखाई देंगे तो कुछ मंदिर के नाम पर तोहफे देते नज़र आएंगे , तो उन्ही में कुछ लोग गंगा जमुना तहजीब के नाम पर कभी दिवाली की मिठाई खाते और कभी काफिरों के मज़हबी रसूमात में शरीक होते नज़र आएंगे,

ये सेक्युलर हजरात अपनी वसी सोच वा फिक्र के एतबार से रवादारी के मुख्तलिफ तजुर्बात भी पेश करते रहते हैं और ये नहीं जानते के एक पक्का मोमिन भी तकसीरियत के बीच रहकर पूरे वकार, भाईचारे और तमाम हमदर्दियों के साथ अपनी मुकम्मल इस्लामी शिनाख्त को बचाकर जीता है और जीता रहेगा , जनाब शौकत परवेज का तजुर्बा इसके लिए काफी है,

ये याद रहे के ऐसे ही लोगों की वजह से इस्लाम का दिफा करने के लिए अल्लाह ताला हमेशा एक जमात बाकी रखेगा जो बिला खौफ वा मलामत लोगों के सामने सीना सपर रहेंगे और इस्लाम के एक एक जोड़ को कभी भी तहस नहस नहीं होने देंगे ,

अल्लाह हमें पक्का वा सच्चा बा अमल मुसलमान बनाए और हक बात कहने और सुनने की तौफीक बख्शे...आमीन
साभार : डॉक्टर अजमल मंजूर मदनी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks

Friday, January 14, 2022

बाप अपने बेटे को पतंग उड़ाने ले गया

 



बाप अपने बेटे को पतंग उड़ाने ले गया , बेटा बाप को गौर से पतंग उड़ाते देख रहा था , थोड़ी देर बाद बेटा बोला,
" पापा...ये धागे की वजह से पतंग और उपर नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !!" ये और उपर चली जायेगी..
वालिद ने धागा तोड़ दिया, पतंग थोड़ा सा और उपर गई और इसके बाद लहरा कर नीचे आई और दूर अंजान जगह पर जाकर गिर गई,
तब बाप ने बेटे को जिंदगी का फलसफा समझाया, बेटा ! जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं , हमें अक्सर लगता है के कुछ चीज़ें, जिन पर हम बंधे हुए हैं वह हमें और उपर जाने से रोक रहीं हैं जैसे घर, खानदान , मां बाप वगेरह...
और हम इनसे आज़ाद होना चाहते हैं, असल में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना कर रखते हैं, इन धागों के बगैर हम एक बार तो ऊपर जाएं लेकिन बाद में हमारा वही हश्र होगा जो बिन धागे की पतंग का हुआ,
" लिहाज़ा जिंदगी में अगर तुम बुलंदियों पर बने रहना चाहते हो तो कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना, धागे और पतंग जैसे ताल्लुक के कामयाब तवाजन से मिली हुई ऊंचाई को ही कामयाब जिंदगी कहते हैं बेटा !!"
मनकूल
साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks