स्विट्ज़रलैंड में बच्चों का गोश्त खाने वाला फ़व्वारा!!
Har Ibteda Se Pehle Har Inteha Ke Baad, "ZAAT-E-NABI Buland Hai "ZAAT-E-KHUDA" Ke Baad, Dunya Main Ehtraam Ke Qabil Hain Jitne Log, Main Sabko Manta Hun, Magar ,"MUHAMMAD-MUSTAFA{sall’Allaahu ta’aalaa alaihi wa’sallam} Ke Baad..
स्विट्ज़रलैंड में बच्चों का गोश्त खाने वाला फ़व्वारा!!
हमारी हस्ती सिर्फ दिल और रूह की सच्चाइयों पर कायम है, अगर खज़ाना खतम हो जाए तो फिर जमा किया जा सकता है, अगर फौजें कट जाएं तो दोबारा बनाई जा सकती हैं, अगर हथियार छिन जाए तो कारखानों में दोबारा ढाले जा सकते हैं, लेकिन अगर हमारे दिल का ईमान जाता रहा तो वह कहां मिलेगा ??
डेविड सेलबॉर्न पश्चिमी दुनिया का मशहूर लेखक है, उसने एक किताब लिखी थी the loosing battle with islam,
बाग बहिस्त में मुझे हुक्म सफर दिया था क्यू
किसी को जान लेना बहुत बड़ा अजाब होता है,
चेहरे पढ़ने लगोगे तो दोस्तियां टूट जाएंगी,
नजरें पहचानोगे तो कइयों से घिन आना शुरू हो जाएगी,
और ये तो जानने की कोशिश भी ना करना के कौन कौन सी बातें लोग दिल में छिपाए बैठे हैं,
ये तो बस अल्लाह का हौसला है वह सबकुछ जानता है और खामोश रहता है,
साभार: सबा यूसुफजई
जानते हैं !!
मैने बहुत अरसों तक लोगों की पसंद और नापसंद का बोझ खुद पर उठाए रखा है के,
अना (ज़िद) सब में होती है, झुकना कोई भी पसंद नहीं करता, मगर इसके बावजूद कोई अपनी अना का गला घोंट कर आपके लिए झुक रहा है,आपको संभालकर रखना चाहता है तो कदर करें ऐसे रिश्तों की ..!!!
वरना अच्छे लोगों का क्या है वह कहीं भी किसी भी जगह अपना मकाम आसानी से बना लेते हैं, और रह गई बात आपकी तो अच्छे लोगों को खोकर आपने कितना घाटे का सौदा किया ये बात वक्त आपको समझा देगा !!!
Umair Salafi Al Hindi
हस्सास (Sensitive) तबियत लोगों के भी अजीब मसाइल होते हैं, दूसरों के लिए खुद की मसरूफियात तर्क करके उनको वक्त देने वाले ये लोग छोटी छोटी बातों को ना सिर्फ महसूस करते हैं बल्कि कहीं ना कहीं हर बात के जिम्मेदार खुद को महसूस करते हैं,
मुझे चेहरे पढ़ने आते हैं ??, मैने उसको हंस कर कहा ,
कहने लगी, " बिलकुल तुम्ही तो जादूगर हो !", मैने कहा " हां ! बिलकुल मुझे जादूगर ही समझो "
हम परफेक्ट नहीं होते !
आज का सेकुलर मुसलमान: