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Tuesday, March 16, 2021

SHAB E GHAM KO KAHKE ALWIDA

 



शब ए ग़म को कहके अलविदा, बाद ए सबा का इंतज़ार किया जाए।


रास्ते हैं खोय से , फिर कैसे इनका ऐतबार किया जाय।

हर्फ हर्फ सींच कर , जो बनाए गए लफ्ज़ मुहब्बत के,

वो किताबों की जेबाईश नहीं, इस बात का इकरार किया जाए।

साभार: Umair Salafi Al Hindi

Monday, March 15, 2021

TAMAM TAR QURBAAN JIS PAR WAHI CHAHAT MANGI GAYI

 



तमाम तर चाहतें कुरबान जिस पर, वही चाहत मांगी गई।
वक़्त ऐ कुबुलियत था, अल्लाह से अल्लाह की मुहब्बत मांगी गई।

ना और कोई आरज़ू, ना मजीद ख्वाहिश रही बाक़ी
हर्फ ए आखिर में हुआ सवाल तो तहज्जुद की आदत मांगी गई।

Thursday, March 11, 2021

DEKHKAR YUN MUSAFATEIN LAMBI

 



देखकर यूं मुसाफतें लम्बी,

दिल को छोटा किया नहीं करते।
उदास रहने के लिए ज़िन्दगी बहुत मुख्तसर है, इसलिए हर चीज़ में खुशियां ढूंढा करो, जो साथ नहीं चलता उसकी मिन्नत ना करो और जो हाथ थाम कर साथ चल दे तो समझ जाओ वही अपना है और बस ये याद रखो के तुम अल्लाह के सिवा किसी के बिगैर भी रह सकते हो,
साभार: Umair Salafi Al Hindi

Thursday, February 18, 2021

थोड़ा थोड़ा करते करते अच्छा खासा बाट दिया।


 


थोड़ा थोड़ा करते करते अच्छा खासा बाट दिया।

रफ्ता रफ्ता कतरा कतरा मैंने दरिया बांट दिया।
इतना तो मत तंज़ करो मेरी इस खस्ताहाली पर।
जितना पाकर तुम नाज़अ हो, मैंने उतना बांट दिया।
आखिर को क्या नाम दूं मैं यारों की इस दिलदारी को।
अपना हिस्सा बांध कर रखा ,मेरा हिस्सा बांट दिया।
अपनी बरबादी में अपना जुर्म भी शामिल है प्यारे।
आधा लोगों ने लूटा था मैंने आधा बांट दिया।
राज़ की बातें , दर्द के किस्से, टूटे दिल के अफसाने।
लफ़्ज़ों के इस खेल में ज़ख्मी, मैंने क्या क्या बांट दिया।
साभार: सिराज आलम