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Sunday, March 14, 2021

AURAT KO MARD SE NAHIN, AURAT KO AURAT SE TAHAFFUZ KI ZAROORAT HAI

 



औरत को मर्द से नहीं औरत को औरत से तहफ्फुज की ज़रूरत है,

तलाक के 80% वाकयात के पीछे हाथ एक औरत का होता है,
सास बहू जब तक अपना मकाम नहीं जानेंगी तब तक औरत के हाथों औरत जलील होती रहेगी, शौहर अगर बीवी को मारे या घर से निकाले तो उसमे शामिल सास और ननदें होती है,
1- जब एक मां अपनी आंखों में आसूं भर के बहू के उन किए जुल्मों की दास्तां बेटे को सुनाएगी तो बेटे का हाथ तो फिर ज़ालिम पर उठेगा ही क्यूंकि यहां एक मर्द बेटा है और एक औरत मां है, मां पर हुए जुल्मों का बदला लिया , मगर ज़ालिम फिर भी मर्द,
2- जब बहन भाई को भाभी के नाकर्दा जुल्मों की दास्तां सुनाएगी तो भाई बहन के बहते आंसुओं का बदला करे तो ज़ालिम फिर भी मर्द की कहलाएगा,
3- जब बीवी शौहर के सामने , सास ननद के नाकरदा जुल्मों की दास्तां सुनाएगी, आंसू बहाएगी और शौहर उस पर भरोसा करके घर अलग कर लेता है तो इलज़ाम फिर भी मर्द पर आता है,
तमाम बातों का गैर जानिब दाराना तजजिया करेंगे तो नतीजा यही निकलेगा के औरत को मर्द से नहीं बल्कि औरत को औरत से तहफ्फुज़ की जरूरत है।
मर्द तो बेचारा रिश्ते निभाने की कोशिश करता है कभी एक शौहर की हैसियत से , कभी भाई और कभी बेटे की हैसियत से ,
सास बहू ननद भाभी अगर येे तीन रिश्ते ठीक हो जाएं शायद ही बहुत कम घर बर्बाद हों और तलाकें ना होने के बराबर हों,
साभार: डॉक्टर सबा खालिद
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi

Saturday, March 13, 2021

RISHTON ME BOLNA ZAROORI HAI

 



रिश्तों में बोलना जरूरी है।


कुछ बुरा लगे तो बोलो, कुछ अच्छा लगे तो बोलो, कुछ समझ ना आए तो बोलो, गुस्सा आए बोलो प्यार आए बोलो,

किसी भी हालत में जो भी जज़्बा हो उसको कॉम्प्रोमाइज की छुरी से ज़ीबह मत करो कॉम्प्रोमाइज करनें का मतलब ये नहीं के अपना गला दबा कर अपनी आवाज़ बंद कर दो और अपनी जज़्बात को ज़बान पर कॉम्प्रोमाइज का कोयला रखकर उसको गूंगा कर दो

याद रखो जज़्बात आवाज़ के मोहताज है अल्लाह ने इसलिए ज़बान दी ताकि बोल सको, अल्लाह जब शहरग के करीब रहते हुए भी तुमसे कहता है के मुझे पुकारो तो समझलो बोलना कितना ज़रूरी है,

जब अल्लाह के साथ ताल्लुक में बोलना पड़ता है तो इंसानों के साथ आप कैसे गूंगा बनके रह सकते हैं,

देखें मजबूर होकर दुनिया का कोई भी काम चल सकता है मगर रिश्ता नहीं चल सकता , कोशिश करके देख लेते हैं ये कहने वाले लोग ज़हर भी इसी शौक से खा कर देखें के मरेंगे या नहीं,

साभार: बहन सबा युसुफजई
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Friday, March 12, 2021

PACHTAAWA

 



पछतावा


तलाक होने के बाद एक युवती ने दिल को छू लेने वाली बात कही है. मेरे पति से थोड़ी कहासुनी होने के बाद वो मुझे मायके लेने आए थे, लेकिन तब कुछ झूठे रिश्तेदारों और कुछ मायके के लोगों की बातों में आकर मैं साथ नहीं गई. उल्टा उनको दहेज के झूठे केस में धोखे से फंसा दिया.

पर अब 6 साल हो चुके हैं और मैं घर पर बैठी हूं, केस झूठे थे, तो मेरे पति बरी हो गए. उनकी दोबारा शादी हो गई. आज सोचती हूं मेरे पति लेने आए तब ही उनके साथ चली जाती तो आज मेरे भी एक दो बच्चे होते और मैं भी अपनी सहेलियों की तरह खुश होती अपने पति के संग.

साथ कोई नहीं देगा सलाह सब देंगे...
आखिर में आपकी ही जिंदगी तबाह हो जाएगी...

अगर कहासुनी हो जाती है तो रिश्तो को खत्म करने से अच्छा है दो-चार दिन रुठ जाए..

Thursday, March 4, 2021

BAS EK CHEEZ KA DHYAN RAKHNA

 



बस एक चीज़ का ध्यान रखना,

किसी को ख़ुद मत छोड़ना,
दूसरे को फ़ैसला करने का मौक़ा देना,
यह अल्लाह की सिफ़त है,
अल्लाह कभी अपनी मख़लूक़ को तंहा नही छोड़ता,
मख़लूक़ अल्लाह को छोड़ती है,
और ध्यान रखना!
जो जा रहा है उसे जाने देना,
मगर जो वापस आ रहा है,
उसके लिए कभी दरवाज़ा बंद मत करना,
यह भी अल्लाह की सिफ़ात है,
अल्लाह वापस आने वालों के लिए अपना दरवाज़ा खुला रखता है,
तुम यह करते रहना,
तुम्हारे दरवाज़े पर मेला लगा रहेगा______✍️
मरियम खान

Wednesday, March 3, 2021

ALLAH KE BAARE ME GHALAT TASAWWUR DENA




 घरों में काम करने वाली एक औरत रोटी पकाने के साथ साथ अपनी छोटी सी बेटी को डांट रही थी, जो बार बार जूते के बगैर बाहिर गली में जाने की कोशिश करती थी, उसकी मां उसे डराने के लिए बड़ी अजीब तावीलें पेश कर रही थी,


" अगर तू गली में गई तो अल्लाह गुनाह देगा, तेरे पांवों काट देगा, गला काट के रख देगा। "

मैं पास ही थी, पहले तो मैं समझी के इतनी छोटी बच्ची जो सही से बोल भी नहीं सकती उसको ये सब समझ ही नहीं आ रहा होगा , मगर मैंने देखा के बच्ची ज़रा देर को रूक कर अपनी मां के चेहरे की तरफ गौर से देखते हुए शायद उसके अल्फ़ाज़ पर गौर कर रही थी, इसका मतलब था के बात को ज़ेहन नशीन कर रही थी,

तब मैंने बच्ची को मुखातिब होकर कहा

" मेरी बात सुनो ! अल्लाह ताला ना पांवों काटता है ना गला, ये काम बुरे आदमी करते हैं, अल्लाह ताला तो चीज़ें देता है, कपड़े जूते उसी ने दिए हैं, अल्लाह ताला तुम्हारी अम्मा की तरह प्यार करता है "

फिर मैंने उसकी मां से कहा

" क्यूं छोटी सी बच्ची के सामने अल्लाह को गलत तस्वीर पेश कर रही हो ? क्या ये काम इन्सान नहीं करते ? इंसानों को गलतियां अल्लाह पर मत डालो "

बच्ची की अम्मा हैरान वा परेशान मुझे देखते हुए असबात में सर हिलाने लगी और मुझे लगा के ये अल्फ़ाज़ मुझ पर क़र्ज़ थे, ये अल्फ़ाज़ कुछ साल पहले एक घास काटने वाली औरत ने मेरे हवाले किए थे जब मेरा छोटा सा बेटा बाग़ में रेंगने वाले हसरात उल अर्ज़ को पांवों से रौंद रहा था, मैं बार बार उसे रोकती और कहती के

"अल्लाह नाराज़ हो जायेगा , जब कीड़ों को दर्द होगा तो अल्लाह गुनाह देगा "

तब पास ही घास काटती हुई औरत ने खुरपी रख कर संजीदगी से मुझे कहा

" बीबी बच्चे को वह बात बताओ जो उसे समझ में आए, अल्लाह से अलग मत करो,अल्लाह इतनी सी बात पर नाराज़ होता तो ये सबकुछ ना देता, इसको बताओ के जैसे आपको तकलीफ होती है वैसी ही तकलीफ कीड़ों को भी होती है, और किसी को तकलीफ देने से हमारे प्यारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने मना फरमाया है "

मैं भी एक अनपढ़ औरत के मुंह से ऐसी गहरी बात सुनके बिल्कुल इसी तरह हैरान होकर देख रही थी, आज ये अल्फ़ाज़ मैंने रोटी पकाने वाली के सुपुर्द कर दिए ,

यकीनन इसी तरह ये अल्फाज़ आगे ही आगे मुनतकल होते रहेंगे इंशाल्लाह

मनकूल

तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks.com

Tuesday, March 2, 2021

TAALEEMI MAIDAN ME AAGE BADNA

 



बच्चों को बालिग होकर एहसास होता है के असल कामयाबी खिलौने जमा करना नहीं बल्कि तालीमी मैदान में आगे बढ़ना है,

फिर शादी होने पर मालूम होता है के बेहतरीन शरीक ए हयात का मिलना असल कामयाबी है,
फिर रोज़गार के मामलात से दिल में यकीन पैदा हो जाता है के असल कामयाबी कारोबार के बड़ा होने या नौकरी में पोजिशन से है,
जवानी ढलने पर नुक्ता ए नज़र तब्दील हो जाता है के असल कामयाबी तो बसलाहियत औलाद , बड़े से घर और बेहतरीन गाड़ी के होने से है,
फिर बुढापे में इन्सान के नजदीक असल कामयाबी का पैमाना बीमारियों से बचकर जिस्मानी वा दिमाग़ी तन्दरूस्ती का बरकरार रहना करार पाता है,
बिलाआखिर जब मौत का फरिश्ता इन्सान को लेने आ जाता है तो असल बात खुलकर सामने आती है के कामयाबी के तमामतर दुनियावी तसव्वुर दरहकीकत बहुत बड़ा धोका थे, असल कामयाबी का तसव्वुर तो तो अल्लाह की नाज़िल कर्दा किताब कुरआन मजीद में दर्ज है जिसके मुताला वा समझने का वक्त ही नहीं मिल सका था,
इसलिए अभी वक्त को गनीमत जानिए और अल्लाह की तरफ रूजू का जेहन बनाएं,
साभार: Umair Salafi Al Hindi

Thursday, February 25, 2021

EK BAHEN KI TARAF SE YE SAWAL AAYA HAI ??

 



अस्सलामू अलैकुम वारहमतुल्लाही वाबरकातहु

अभी एक बहन की तरफ से ये सवाल आया है ??
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर्रहीम
आपकी खिदमत में तीन सवाल करना चाहती हूं, मगर सवाल करने से पहले मैं अपने बारे में कुछ बताना चाहती हूं जो इस तरह है:
मै एक तलाकशुदा मुस्लिम औरत हूं मेरी उम्र तकरीबन चौबीस या पच्चीस साल है, मैं एक बच्ची की मां भी हूं, बच्ची की उम्र तकरीबन पांच या छह साल है फिलहाल मां बाप के घर पर रहती हूं
अकीदे के ऐतबार से सलफी मन्हज पर हूं, अलहम्दुलिल्लाह बा हया, बा पर्दा और नेक सीरत वा मां बाप की इंतेहाई दर्जा फर्माबरदार हूं, दुनियावी तालीम बीएससी तक और जामिया उर्दू अलीगढ़ से मुअल्लिम तक है, दीनी तालीम सिर्फ जाती मुताले के ज़रिए हासिल की है, आगे मजीद दुनियावी वा दीनी तालीम हासिल करके खवातीन के शोबे में दीनी ख़िदमात अंजाम देने की दिल में बेइंतेहा तड़प रखती हूं,
मैं अपने खानदान में अकेली अहले हदीस हूं, मेरे घर के सभी लोग हनाफी देवबंदी है और मेरे अहले हदीस होने के सबब मेरे वालीदैन मुझसे बहुत नाराज़ रहते है खुसूसी तौर से मेरी मां मुहतरमा तो मुझसे इस क़दर नाराज़ रहती है के वो मुझको यहां तक कह देती है के:- " जा ! तू कहीं जाकर ज़हर खा कर मर जा "
मैंने दीनी ऐतबार से तमाम हुज्जत के तौर पर अपने मां बाप के अकीदे को दुरुस्त करने की तमामतर कोशिशें कर के देख लिया मगर इसके बावजूद भी मेरे मां बाप के अकीदे को दुरुस्त नहीं करा सकी हूं, इस पर मुझे अफसोस भी होता है और दिल गमगीन भी रहता है, मेरे मां बाप का ये कहना के :-
" तुम अपना अकीदा बदलो, अपना इस्लामी तौर तरीका बदलो, और मजीद इल्म हासिल करने की आरजू को खतम करके हमारी मर्ज़ी के मुताबिक खामोशी के साथ निकाह करके इस घर से चली जाओ, और अगर अपना अकीदा नहीं बदल रही हो तो, तुम्हारा अकीदा तुम्हारे साथ तुम जानो मगर अपनी तालीम सीखने की ज़िद छोड़कर हमारी मर्ज़ी के मुताबिक शादी करके इस घर से चली जाओ, अगर तुम ऐसा नहीं करती हो कहीं जाकर ज़हर खाकर मर जाओ , या अगर तुम अपनी ज़िद नहीं छोड़ोगी तो मैं ज़हर खाकर मर जाऊंगी, गर्ज़ ये के ना तुमको अपनी मर्ज़ी के मुताबिक निकाह की इजाज़त है और ना आगे मजीद पढ़ने की इजाज़त दी जाएगी"
मेरे मां बाप मुझसे एक बात और कहते हैं के :- जाओ तुम अपनी मर्ज़ी का लड़का तलाश करके निकाह कर लो, हम निकाह तो कर देंगे मगर हमारी बद्दुआ से कैसे बचोगी ?? अपनी मर्ज़ी से निकाह करके , हमारे दिल को चोट पहुंचा कर जाओगी, जाओ ज़िन्दगी में कभी कामयाब नहीं हो सकती, हम भी देखेंगे के :- तुम और पढ़ लिख कर क्या उखाड़ लोगी "
मेरा कहना है के :- " मैं अपना अकीदा , अपना इस्लामी तौर तरीका, अपनी नमाज़ का तरीका नहीं बदलूंगी, और ना ही अपना दीन का इल्म हासिल करने की आरज़ू को छोडूंगी और ना ही खुदकुशी करके मरूंगी, और आपको भी खुदकुशी करके नहीं मरने दूंगी, रही बात निकाह की तो मैं किसी मुशरिक वा बिदती मुकल्लिद (धार्मिक अंध भक्त) से निकाह नहीं करूंगी, अगर मेरा निकाह होगा तो सिर्फ मुवाहहिद आदमी के साथ जो मुझे मेरी मर्ज़ी के मुताबिक दीन और दुनिया दोनों का इल्म सीखने में मेरी भरपूर मदद करे और ये निकाह भी मैं आप दोनों की मर्ज़ी से ही करूंगी, मुझे मेरा मनहज भी महबूब है और आप दोनों भी ??
में आप दोनों को अपनी नज़र मे हकीर नहीं समझ रही हूं और ना है मैं आपको चोट पहुंचाना चाहती हूं,?? बस मैं तो यही चाहती हूं के आप मुझे मेरी मर्ज़ी के लड़के के साथ निकाह करके खुशी खुशी अपनी दुआएं देते हुए इस घर से रुखसत कीजिए , और अगर आप मेरा निकाह मेरी मर्ज़ी से नहीं करना चाहते हैं तो मैं निकाह ही नहीं करूंगी, बस आप लोग मुझे मजीद तालीम सीखने की इजाज़त तो कमसे कम दे दीजिए ??"
सवाल-1
क्या मैं अपने मां बाप को खुश करने के खातिर अपने मनहज को छोड़कर मनहज अहनाफ वा बिदात को कुबूल करते हुए उनकी मर्जी के मुताबिक किसी भी बिदाती वा मुशरिक मुकल्लीद के साथ निकाह कर लूं तो मुझपर कोई।गुनाह तो नहीं होगा ??
सवाल -2
क़ुरआन वा हदीस की रोशनी में कौन हक पर है ?? मैं या मेरे मां बाप ?? मै अपनी मां को ऐसी बातें सुनकर डर जाती हूं के कहीं मैं उनकी नाफरमानी तो नहीं कर रही हूं ??
सवाल -3
मेरे मां बाप का ये कहना के :- " जाओ तुम अपनी मर्ज़ी का लड़का तलाश करके निकाह कर लो, हम निकाह तो कर देंगे मगर कभी हमारी तरफ पलट कर भी मत आना और हमारी बद्दुआ से कैसे बचोगी ?? अपनी मर्ज़ी से निकाह करके हमारे दिल को चोट पहुंचा कर जाओगी, जाओ ज़िन्दगी में कभी कामयाब नहीं हो सकती, हम भी देखेंगे के :-" तुम और पढ़ लिख कर क्या उखाड़ लोगी ??"
तो अगर मैं अपने वालिद की इजाज़त के साथ इस तरह का निकाह कर लूं तो क्या मेरा ये निकाह करना दुरुस्त होगा, क्या मुझे मेरे मां बाप की बद्दुआ तो नहीं लगेगी ??
नोट: मेरा पहला निकाह भी बिदत और शीर्क करने वाले घर में हुआ था,
मेरे इस मसले का हल कुरआन वा हदीस की रोशनी में बयान करके मेरी रहनुमाई फरमाएं, नवाजिश होगी
वालैकुम अस सलाम वारहमतुल्लही वा बरकताहू
अल्लाह की बंदी,
साभार: शेख मकबूल अहमद सलफी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi

Wednesday, February 24, 2021

ZAINDAGI KE TAJURBAAT

 



जिन्दगी के तजुर्बात

अगर लोग मुझसे पूछें के तुमने अपनी जिंदगी में क्या कुछ सीखा तो मेरा जवाब होगा के मैंने अब तक की अपनी ज़िन्दगी से यही सीखा के :-

1-  दुनिया क़र्ज़ है जो दोगे वहीं लौटकर आएगा,

2-  देर सवेर मजलूम को मदद जरूर मिलेगी

3- रात के आखिरी पहर की दुआएं रायगा नहीं जाती,

4- ज़िन्दगी किसी भी वक्त खत्म हो सकती है मगर हम इससे गाफिल रहते हैं,

5- मीठी ज़बान, हंसता मुस्कुराता चेहरा  और सखावत वा फय्याजी यही असल अखलाक है,

6- दुनिया का सबसे मालदार इन्सान वह है जिसके पास सेहत वा तन्दरूस्ती  और अमन वा अमान की दौलत हो,

7-  जिन्दगी खतम हो जायेगी मगर जिन्दगी की मसरूफियात खत्म नहीं होगी,

8- लोगों को पहचानने का सबसे बहतरीन जरिया उनके साथ सफर करना है,

9- जो ज्यादा फलसफे बघारता है और मैं मैं की ज़बान बोलता है वह अंदर से खोखला होता है,

10- आज जो कब्रों में दफन हैं उनकी जिंदगी में भी बहुत सारी मसरूफियात  थी और वह बहुत कुछ करना चाहते थे मगर मौत ने अचानक सारी आरजूओं और तमन्नाओं पर पानी फेर दिया,

ऐ अल्लाह ! जिन्दगी में ज्यादा से ज्यादा नेकियां करने की तौफीक़ दे और नेक अमाल पर हमारा खात्मा फरमा और जो कब्रों में दफन हैं उनपर रहमत वा अनवार की बारिश बरसा"

अरबी से मनकूल

साभार: मौलाना शाहिद सनाबिलि

हिन्दी तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi

Friday, February 19, 2021

RISHTON KI BUNIYAD KYA HAI ?

 



रिश्तों की बुनियाद क्या है ?

मैंने अपने आप से सवाल किया,

खून के रिश्ते ? रिश्तेदारियां ? दोस्ती के बंधन या ताल्लुक ??

नहीं !!! असल रिश्ते दरअसल एहसास के रिश्ते है, बंधन कोई भी हो, अगर एहसास नहीं तो कुछ भी नहीं,

ये एहसास ही तो है जो अपनों को गैर और गैरों को अपना कर देता है, रिश्ता जात और फिरकों का मोहताज नहीं होता,

दूसरों की छोटी छोटी खुशियों, ज़रूरतों, और चाहतों का एहसास ही दरअसल तहायात कायम वा दायम रहने वाले रिश्तों का सुतून है,

एहसास खतम रिश्ता खत्म 

Tuesday, February 9, 2021

गोल रोटियां

 





गोल रोटियां

परेशानी उसके चेहरे से साफ बयां थी, शादी के चंद दिन बाद ही आज तीसरी बार रोटियां गोल नहीं बनी थी, उसे यकीन था के आज उसकी खैर नहीं,

खाने के दौरान उसकी सास ने उसे देखा और फिर उसके कानों में उनकी शाफ्फक्कत भरी आवाज़ आई,

" बेटी ! कोई बात नहीं

गोल रोटियां बहू के अच्छे किरदार और मां बाप की बेहतरीन तरबियत और तहज़ीब से बड़ कर नहीं, नबी ए अकरम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी खाने में ऐब नहीं निकाला, पसंद आता तो खा लेते वरना उठकर चले जाते बाक़ी ये तुम्हारा अपना घर है सीख जाओगी, आओ खाना खाएं "

कोई इन्सान अपना जिगर का टुकड़ा किसी को ऐसे नहीं देता दूसरों की बेटियों को अपनी बेटी समझें ताकि आपकी अपनी बेटी दूसरे घर जाए तो ऐसा ही अच्छा सुलूक हो,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com

Sunday, February 7, 2021

मुझे याद है सब ज़रा ज़रा

 



मुझे याद है सब ज़रा ज़रा

हमारे घर में जब बाहर से औरतें आती, अम्मी बेटों को कहती हैं :-" तुम उधर जाकर बैठो यहां औरतें बैठेंगी "
जिस कमरे में बहनें सोई हुई हों, भईयों को इजाज़त नहीं होती थी के बेधड़क वहां घुस जाएं,
अगर रास्ते में किसी औरत को मदद चाहिए तो मां कहती के बेटा जाओ " तुम्हारी मां जैसी है उसकी मदद करो" बेटा मां ही समझ कर ऐसा करता
किसी की जवान बेटी को कोई काम होता तो अम्मी यूं कहती " जाओ तुम्हारी बहन जैसी है बिल्कुल उसके जितनी ही है, फलां काम कर दो, या वहां छोड़ आओ "
बेटे के दिल में बैठ जाता के "मेरी भी इतनी ही बहन है ऐसी ही बहन है, ये भी मेरी बहन जैसी है "
बहनों को सहेलियां घर आती तो उसका बहनों की तरह ही एहतेराम किया जाता, मंगनियां हो जाती थी बेटों को पता तक ना होता था,
ये तरबियत होती थी, ये हमारा मुआशरा था जो माओ ने तश्कील दिया था,
अब तो लगता है, नई नसलो की माएं रोटी और सालन में कहीं खो गईं हैं, वह तरबियत करना भूल गई है,
तीन फितरी कानून जो कड़वे लेकिन हक हैं,
पहला कानून ए फितरत :
अगर खेत में दाना ना डाला जाए तो कुदरत उसे घास फूस से भर देती है,
इसी तरह अगर दिमाग़ को " अच्छी फिक्रों " से ना भरा जाए तो " कज़ फिक्री" उसे अपना मस्कन बना लेती है, यानी उसे सिर्फ उल्टे सीधे खयालात आते हैं और वह शैतान का घर बन जाता है,
दूसरा कानून ए फितरत:
जिसके पास जो कुछ होता है वह वहीं कुछ बांटता है,
खुश मिजाज़ इन्सान खुशियां बांटता है,
ग़मजदा इन्सान ग़म बांटता है,
आलिम इल्म बांटता है,
दीनदार इन्सान दीन बांटता है,
खौफजदा इंसान खौफ बांटता है,
तीसरा कानून ए फितरत :
आपको ज़िन्दगी में जो कुछ भी हासिल हुआ उसे हज़म करना सीखें इसलिए के,
खाना हज़म ना होने पर बीमारियां पैदा होती है,
माल वा शोहरत हज़म ना होने की सूरत में रियाकारी बड़ती है,
बात ना हज़म होने पर चुगली और गीबत बड़ती है,
तारीफ हज़म ना होने की सूरत में गुरूर में इजाफा होता है,
मुजम्मत के हज़म ना होने की वजह से दुश्मनी बड़ती है,
इक्तेदार और ताकत हज़म ना होने की सूरत में खतरात में इजाफा होता है,
अपनी ज़िन्दगी को आसान बनाएं और एक बामकसद और बा अखलाक ज़िन्दगी गुजारें, लोगों के लिए आसानिया पैदा करें,
खुश रहें, खुशियां बांटे
मनकूल
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi

Wednesday, February 3, 2021

बच्चों का जिंसी इस्तेहसाल (Child Sex Abuse) (किस्त 1)

 



बच्चों का जिंसी इस्तेहसाल (Child Sex Abuse) (किस्त 1)

जिंसी इस्तेहसाल क्या है ??

बच्चों के जिंसी इस्तेहसाल का मतलब है एक बालिग (Adult) आदमी का बच्चे के साथ जिंसी मामलात में शामिल पाया जाना। आम तौर पर बच्चे को अपनी मासूमियत और जिंसी मुआमलात से अनजान होने की वजह से ये मालूम ही नहीं होता के उसका इस्तेहसाल किया जा रहा है और उसे गलत मकसद के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे ये मालूम नहीं होता के उसके साथ क्या किया जा रहा है, लेकिन वह इन कामों से बेचैनी महसूस करता है,

Child Sex Abuse का मतलब सिर्फ जिस्मानी ताल्लु़क ही नहीं है बल्कि इसे जमरे में वह तमाम काम आते हैं जो जिंसी जज़्बात को उभारते हैं मसलन जिंसी तस्वीर दिखाना, पोर्न वगेरह,

अफसोस नाक बात ये है के जिस क़दर ये चीज़ हमारे मुआशरा में आम हो रही है और बच्चों पर इसके जिस कदर बुरे असरात पड़ रहे हैं, मां बाप इस बात से अनजान हैं,

किसमें (Types Of Child Sex Abuse )

इसकी दो किसमें हैं:

1- जिस्मानी ताल्लुकात (touching Behaviour)

इसमें ये सब काम आते हैं,

* बच्चे के जिंसी हिस्सों को छूना, थपथपाना और चाटना
* बच्चे को मजबूर करना के वह बड़े के जिंसी हिस्सो को छुए और उनसे खेले,
* कोई चीज़ बच्चे के जिंसी हिस्से या मुंह में डालना, मसलन उंगली या लिंग वगेरह
* बच्चे के मुंह में लिंग डालना।

2- गैर जिस्मानी ताल्लुक ( Non Touching Behaviour)

* बच्चे को गंदी तस्वीर दिखाना
* बच्चे को अपने जिंसी हिस्से दिखाना
* बच्चे को बीगैर कपड़ों के देखना
* बच्चे से अलग अलग जिंसी अंदाज़ (pose) बनवाना और उनकी तस्वीर खींचना।

Child Sex Abuse कौन करता है ??

ये आम तौर पर उन लोगों के हाथ होता है जिन्हे बच्चा जानता हो और उन पर भरोसा करता हो मसलन घरेलू नौकर, टीचर, और करीबी रिश्तेदार, मसलन मामू, चाचा, और कजिन वगेरह,

Sex Abuse में आम तौर पर मर्द शामिल होते हैं, लेकिन कभी कभी औरतें भी इस काम में शामिल पाई जाती है मसलन घर में काम करने वाली कम उम्र लड़कियां जो बुलूगत की उम्र को पहुंचने वाली हों या बड़ी उम्र की वह औरतें जिनकी उम्र ज़्यादा हो चुकी हो और उनकी शादी ना हुई हो या शादी शुदा वह औरतें जिनके शौहर लम्बे अरसे से बेरून मुल्क मुकीम हों,

जारी......

किस उम्र के बच्चे का जिंसी इस्तेहसाल किया जा सकता है ??
इसके नतीजे ?? वजह ??

इंशा अल्लाह अगले पोस्ट में बयान होगा !!

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com