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Thursday, July 22, 2021

कर्मों की वजह से सबसे बढ़ कर घाटा उठाने वाले




 उनसे कहो, "क्या हम तुम्हें उन लोगों की ख़बर दें, जो अपने कर्मों की वजह से सबसे बढ़ कर घाटा उठाने वाले हैं?

ये वे लोग हैं जिनकी दुनियावी ज़िदगी की सारी दौड़ धूप सीधे रास्ते से भटकी रही और ये लोग यही समझते हैं कि वे बहुत अच्छा कर्म कर रहे हैं |

- सूरह : कहफ, आयत : 103,104

हकिकत मे इंसान अपने रब का बहोत बड़ा ना शुक्रा है और उसको सब्र नही होती उसके रिज्क पर जिससे वो खसारा घाटा नुक्सान उठाने वालो मे शामिल हों जाता है

Saturday, January 23, 2021

हमारा निज़ाम ए तालीम (Our Education System)

 



हमारा निज़ाम ए तालीम (Our Education System)


फितरत से जंग करके भला कोई कैसे कामयाब हो सकता है, फितरती तौर पर हर इंसान अपनी मादरी ज़बान में जो अपने खयालात का इजहार कर सकता है वह गैर ज़बान में मुमकिन नहीं, और इसी तरह सीखने और सीखाने के अमल में भी गैर ज़बान बहुत बड़ी रुकावट है,

यही वजह है सिवाए कुछ गुलाम मुमालिक के पूरी दुनिया में उनका निज़ाम ए तालीम उनकी अपनी ज़बान में है, और वह तरक्की की मंज़िल पर चढ़ते जा रहें हैं,

हाई स्कूल का रिज़ल्ट देखा बच्चों ने नंबर 500 में से 498 ले लिए लेकिन हमारा ये फर्सूदा निज़ाम आज तक कोई वैज्ञानिक पैदा नहीं कर सका,

हमारे निज़ाम ए तालीम में फितरी उलूम के जरिए से बच्चों को तालीम देने के बजाए रिवायती रटटा सिस्टम बड़े पैमाने पर चल रहा है लेकिन तखलीक और तहकीक के मैदान में हम दुनिया से बहुत पीछे हैं,

हम काबिल और माहिर डॉक्टर और इंजीनियर तो बना रहें हैं लेकिन ऊंचे दर्जे के साइंटिस्ट पैदा नहीं कर रहें हैं,

साइंसी उलूम के आला रिसर्च और नई इजादात में हिन्दुस्तानी मुसलमानों का कोई काबिल ए ज़िक्र नाम नज़र नहीं आता , यही वजह है के हम मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग वा टेक्नोलॉजी में तरक्की याफ़्ता मुल्कों के बहुत नीचे है,

यूरोप और अमेरिका दवा, मेडिकल आलात और जंगी असलहा के सौदागर हैं और मुस्लिम मुल्क उनके खरीदार हैं, आलमी मार्केट और आलमी मीडिया पर उनका कब्ज़ा है और हम उनको चैलेंज करने के काबिल नहीं,

अहद हाज़िर में वह कौम मुआशी और सियासी तौर पर खुदमुख्तार नहीं हो सकती जो साइंस के उलूम में दूसरे मुल्कों के मोहताज हों, हमारा तालीम ए निज़ाम नाकिस है क्यूंकि वह अहद हाज़िर में हमारी मूआशी ज़रूरीयात और कौमी तक़ाज़ों से हम आहिंग (Campatible) नहीं,

आखिर में... मैं एक मावाज़ ना पेश करना चाहता हूं के 73 साल हो गए हिन्दुस्तान को आज़ाद हुए लेकिन एक साइंसदा पैदा नहीं हुआ, बल्कि जिस मकसद के लिए ये निज़ाम ए तालीम बनाया गया था वह अपना मकसद पूरा कर रहा है, वह क्या है ??

दीन से दूरी, बच्चों को इल्हाद (नास्तिकता) सिखाना, मदरसे और मदरसे वालों से नफरत सिखाना, अंग्रेजों के लिए नौकरों की खेप तैयार करना ,

ये सब काम तो बख़ूबी हो रहें हैं लेकिन ऐतराज़ उलेमा पर करते हैं के मादारिस टेक्नोलॉजी के मैदान में आगे नहीं बड़ सके,

हालांकि ये काम तो उनका था इलज़ाम दूसरों पर लगा रहें हैं,

मदारिस वाले तो अपना काम बखूबी कर रहें हैं, और अल्लाह उन्हें मजीद दीन की खिदमत की तौफीक़ अता फरमाए.. आमीन

साभार : Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Tuesday, January 19, 2021

SCIENCE AUR TECHNOLOGY




 साइंस और टेक्नोलॉजी


क्या आप जानते हैं बारिश से पहले ही चीटियों को कैसे पता चल जाता है के बारिश होने वाली है ??

आज हम आपको चीटियों के बारे में ऐसे ही कुछ हकीकत के बारे में बताएंगे,

चीटियों से मुताॅलिक सुरह नमल आयत 17-18 में अल्लाह का इरशाद है:-

" और सुलेमान निकले अपने पूरे लश्कर को लेकर जिसमें इंसान, जिन्न और तमाम जानवर थे, फौज बंदी किए हुए जाने लगे यहां तक के वो गुज़रे वादी ए नमल से जो चीटियों की वादी थी, एक चीटी ने दूसरी चीटी से कहा , ए चीटियों अपने घरों में घुस जाओ, कहीं तुम्हे सुलेमान और उसकी फौजें ना पीस डालें , और उन्हें खबर भी ना हो , और सुलेमान ने जब इन चीटियों की बात सुनी तो मुस्कुराए और अपने लश्कर का रुख मोड़ लिया "

चीटियां हज़रत सुलेमान से बात करती थी और हज़रत सुलेमान को अल्लाह ने उनकी बात समझने की सलाहियत भी दी थी, जो बात कुरआन ने 1400 साल पहले बताई आज की जदीद साइंस मुख्तलिफ तजुर्बात करने के बाद इस नतीजे पर पहुंची है के चीटियां एक ज़बरदस्त मुआशी सिस्टम में रहती हैं और इतने मुश्किल सिस्टम से बात करती है के अक्ल दंग रह जाए,

साइंस ने बताया के चीटियां आवाज़ से बात नहीं करती बल्कि डेटा ट्रांसफर करके बात करती हैं और इनका तरीक़ा ये होता है के वह अपने मुंह से एक मवाद निकालती हैं और सामने वाली चीटी के मुंह पर चिपका देती है, दूसरी चीटी इससे सारा पैगाम डीकॉड (Decode) करके समझ लेती है, इसलिए आपने अक्सर देखा होगा के चीटियां चलते चलते रुक कर दूसरी चीतियों के मुंह से मुंह लगा कर आगे चलती जाती हैं, येे वह अमल होता है जिसमें वा डेटा ट्रांसफर करती हैं,

जदीद तहकीक में ये बात साबित हो चुकी है के चीटियां आपस में ना सिर्फ बात करती हैं बल्कि एक ज़बरदस्त निज़ाम के तहत ज़िन्दगी भी गुजारती हैं,

आपने अक्सर देखा होगा के बारिश से पहले चीटियां अपने घर के बाहर गोल चक्कर लगाना शुरू कर देती हैं और मिट्टी के पहाड़ बना लेती हैं ताकि बारिश का पानी उनके घर ना आ सके , उन्हें वक़्त से पहले बारिश का अंदाज़ा इसलिए हो जाता है के उनमें कुदरती तौर पर सेंसर मौजूद होता है जिसे हाइड्रो फोलिक कहते हैं, जब हवा में नमी का तनासब ज़्यादा हो जाता है तो चीटियों में मौजूद ये सेंसर उसे महसूस करता है और चीटियों के दिमाग़ को बारिश के मुतल्लिक पैगाम पहुंचाता है, इसलिए चीटियां बारिश से पहले ही अपने खाने पीने और रहने का इंतजाम कर लेती हैं,

महकमा मौसम भी इसी अमल को दोहराते हुए हवा में नमी का तनासब नोट करते हैं और फिर बताते हैं के बारिश के क्या इमकानात हैं,

तारीख़ गवाह है के जिन्होंने क़ुरआन में गौर वा फिक्र किया उन लोगों ने दरखतों के नीचे बैठ कर ना सिर्फ ज़मीन का हजम (Volume) बताया बल्कि ये भी बताया के इंसान परिंदों की तरह कैसे परवाज़ कर सकते हैं,

चुनानचे जहाज़ के सबसे पहले आविष्कारक मुसलमान ही हैं,

अगर हम गौर और फिक्र करें तो ऐसी इजादात कर सकते हैं के नसल इंसानी हैरान रह जाए, अल्लाह ताला ने क़ुरआन में इरशाद फरमाया है के

" कायनात में अक्ल वालों के लिए बहुत सी निशानियां हैं "

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Saturday, November 28, 2020

एक टीचर कहती हैं !!!

 



एक टीचर कहती हैं !!!
मैंने के तालिबात की एक टीम को साल के आखिर में एक प्रोग्राम में उनको माओं के सामने एक नज्म पेश करने के लिए ट्रेनेड किया , तैयारी और रिहर्सल के मुख्तलिफ मराहिल के बाद आखिर प्रोग्राम का दिन आ गया,
नज़्म शुरू हुई, मगर उनकी इस खूबसूरत परफॉरमेंस पर उस वक़्त पानी फिर गया जब एक बच्ची अपनी सहेलियों के साथ नज़्म पढ़ रही थी अचानक अपने हाथ, जिस्म और उंगलियों को हरकत देने लगी और अपना मुंह किसी कार्टून के कैरेक्टर की तरह बनाने लगी,
उसकी इस अजीब वा गरीब हरकत की वजह से दूसरी तमाम बच्चियां परेशान हो गईं,
टीचर कहती है :
मेरा जी चाहा के मैं जाकर उस बच्ची को डांट पिलाऊं और उसे तंबिया करूं के वो डिसिप्लिन और संजीदगी का मुजाहिरा करे, मुझे उस पर इतना गुस्सा आया के करीब था के मैं उसे सख्ती के साथ उन बच्चों से खींच कर अलग कर दूं लेकिन जैसे जैसे मैं उसके पास जाती वह पारे की तरह छिटक कर मुझसे दूर हो जाती उसकी ये हरकतें बढ़ती गई और वो सारे लोगों की नजर का मरकज बन गई,
वहां मौजूद तमाम औरतें उसकी इन हरकतों पर जोर जोर से हंस रही थी,
मेरी नजर प्रिंसिपल पर पड़ी जिनकी पेशानी शर्मिंदगी के पसीने से सराबोर थी वह अपनी सीट से उठी और मुझसे कहने लगी
" इस बेहूदा और बद तमीज लड़की को स्कूल से निकालना जरूरी है "
मैंने भी उनकी इस बात की ताइद की,
लेकिन एक चीज ने हम सबकी नज़रों को मुतावज्जोह किया के इस पूरे वक्फे मे उस बच्ची की मां खड़ी होकर अपनी बच्ची की इन हरकतों पर ताली बजाती रही, जैसे के वो उसकी हौसला अफजाई कर रही थी के वह अपना फिजूल काम जारी रखे,
जैसे ही नज़्म खतम हुई मैं जल्दी से स्टेज की तरफ बड़ी और उस लड़की को ज़ोर से पकड़ कर खींचा और बोली
" तुमने अपनी सहेलियों से नज्म पढ़ने की बजाए ये अजीब अजीब हरकतें क्यों की ??"
वह बोली :
" इसलिए के प्रोग्राम में मेरी मां भी मौजूद थीं "
मुझे उसके इस ढितायी भरे जवाब पर बड़ी हैरत हुई, लेकिन मुझे उस वक्त बड़ा धचका लगा जब उसने आगे ये कहा
" मेरी मां बोल और सुन नहीं सकती, मैंने गूंगे बहरे लोगों की ज़बान में इस नज़्म का तर्जुमा अपनी मां के लिए पेश किया ताकि बाक़ी बच्चियों की माओं की तरह मेरी मां भी अपनी बेटी की कारकरदगी पर खुशी का इजहार कर सके "
जैसे ही उसने ये खुलासा किया वह दौड़ कर अपनी मां की तरफ बड़ी और उसके गले लग कर ज़ार ओ कतार रोने लगी,
जब वहां मौजूद सारे लोगों को हकीकत मालूम हुई तो सारा हॉल सिसकियों से गूंज उठा,
वाक्ए का सबसे खूबसूरत पहलू ये हैं के प्रिंसिपल ने उस लड़की को स्कूल से निकालने की बजाए उसे इनाम से नवाजा और उसे " मिसाली तालीबा" का खिताब दिया,
वह लड़की जब वहां से निकली तो सर उठाकर खुशी से उछलते हुए जा रही थी,
सबक: कुछ मौकों पर जल्दबाजी में कोई रद्दे अमल ज़ाहिर मत कीजिए, दूसरों पर हुक्म लगाने में जल्दी से काम मत लीजिए,
महज़ बदगुमानी की बुनियाद पर हम एक दूसरे से नफरत करते हैं, मिलना जुलना कम करते हैं, रिश्ते खत्म कर लेते हैं
अल्लाह से लोगों के साथ हुस्न ए ज़न की तौफीक मांगिए के उसी में दिलों का सुकून और दिलों की सलामती है,
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi

Saturday, August 8, 2020

HAR CHEEZ KI QEEMAT USKI MANDI ME LAGTI HAI









हर चीज की कीमत उसकी मंडी में लगती है,

एक उस्ताद था वह अक्सर अपने शार्गिदों से कहा करता ता के ये दीन बड़ा कीमती है, एक रोज़ एक तालिब ए इल्म का जूता फट गया, वह मोची के पास गया और कहा :- मेरा जूता मरम्मत कर दो, उसके बदले में तुम्हे दीन का एक मसला बताऊंगा ,

मोची ने कहा :- अपना मसला रख अपने पास, मुझे पैसे दे,

तालिब ए इल्म ने कहा :- मेरे पास पैसे तो नहीं है,

मोची किसी सूरत ना माना और बेगैंर पैसे जूता मरम्मत ना किया,

तालिब ए इल्म अपने उस्ताद के पास गया और सारा वाक्ए सुना कर कहा

" लोगों के नजदीक दीन की कीमत कुछ भी नहीं "

उस्ताद अकलमंद थे तालिब ए इल्म से कहा :- अच्छा ऐसा करो मैं तुम्हे एक मोती देता हूं तुम सब्जी मंडी जाकर इसकी कीमत पता करो,

वह तालिब ए इल्म मोती लेकर सब्जी मंडी पहुंचा और एक सब्जी फरोश से कहा, इस मोती की कीमत लगाओ,

उसने कहा तुम इसके बदले दो तीन नीबू उठा लो, इस मोती से मेरे बच्चे खेलेंगे,

उस तालिब ए इल्म अपने उस्ताद के पास आया और उसने कहा उस मोती को कीमत दो तीन नीबु है,

उस्ताद ने कहा :- अच्छा अब तुम इसकी कीमत सोनार से मालूम करो, वह गया और पहली है दुकान कर उसने मोती दिखाया तो दुकानदार हैरान रह गया और कहा अगर में इस पूरी दुकान को भी बेच दूं, तो भी इस मोती को कीमत पूरी ना होगी, तालिब ए इल्म ने अपने उस्ताद के पास आकर सारा माजरा सुनाया

उस्ताद ने कहा :- बच्चे ! हर चीज की कीमत उसकी मंडी में लगती है, दीन को कीमत अल्लाह की मंडी में लगती है, इस कीमत को अहले इल्म ही समझते हैं, जाहिल क्या जाने दीन की कीमत क्या है,

Saturday, July 25, 2020

ILM KI JUNG







काश कोई मेरी कौम को बताए के जंग तो अभी भी जारी है, मगर मैदान ए जंग बदल चुका है, अब ये इल्म का मैदान , टेक्नोलॉजी की दुनिया और इजादात की दौड़ है जहां कौमों की फतह वा शिकस्त का हकीकी फैसला होता है, अब दुनिया तलवार से इल्म के दौर में दाखिल हो चुकी है, अब इल्म की ताकत ही फौजी ताकत बनती है, इल्म की ताकत की मुआशी ताकत बनती है, इल्म की ताकत ही वह टेक्नोलॉजी देती है जो एक कौम को दूसरी कौम से आगे बढ़ाती है, इल्म की ताकत की वह आविष्कार करती है जो एक कौम को दूसरे से ज़्यादा तरक्की की राह पर डालती है,
काश मजीद शिकस्तों , जिल्लतों, और रुसवाइयों से पहले हमारी कौम इस हकीकत को समझ ले
UmairSalafiAlHindi
IslamicLeaks

Monday, July 6, 2015

AAO ILM SEEKHEIN—PART-8











Bismillahirrahmanirraheem



AAO ILM SEEKHEIN—PART-8


Khabar E Wahid Ki Chauthi Takseem

Khabar E Wahid K Seg E Ada K Etebaar Se 3 Kismien H

(1) Muanaan
(2) Muwannan
(3) Musalsal

1) Muanaan
Wo Hadis H Jis Ki Sanad Falanun Ann Falan Ho

2) Muwannan
Wo Hadis H Jis Ki Sanad Mai Hadasna Falanun Anna Falan Ho

3) Musalsal
Wo Hadis H Jis Ki Sanad Mai Seg E Ada Ki Sifaat Wa Halat Ya Ravion Ki Sifaat Wa Halat Ek Hi Tarah K Ho

Wo Illm Sikhien Jo Sirf Ehle Hadis Ki Den H Kisi Mazhab Firke K Pass Nhi Aisa Usool Apne Mazhabi Baaton Ko Pehchanne Ka Parakhne Ka

Note
Yaani Doodh Ka Doodh Paani Ka Paani Kar Dena

Isi Illm Se Yateem Mehroom Hone Ki Wajah Se Bhot Se Log 72 Jehnnumi Firko Mai Chale Jaate H Or Unhe Khabar Bhi Nhi Hoti K Kaisi Hadis Amal K Layak H Kaisi Hadis Fazail K Layak H Kaisi Hadis Ko Chordha Ja Sakta H ???

Hadis Bayan Karne K Tarike

Mohadasin Ikraam Hadis Ko Ada Rivayat Karte Waqt In Alfazo Mai Se Koi Ek Alfaz Istemal Karta H

(1) Hadasni
(2) Akhbarani
(3) Anbaani
(4) Hadasna
(5) Akhbarana
(6) Karat O Aleh
(7) Kala Li Fulaan
(8) Zakara Li Fulaaan
(9) Rava Li Fulaan
(10) Kataba Ilayya Fulanu Ann Fulaan
(11) Kala Fulan
(12) Zakara Fulaan
(13) Rava Fulaan
(1) Kataba Fulaan

Hadasni, Akhbarani Mai Fark

Mutakadameen K Nazdeek Ye Dono Lafaz Mutaradaf H Or Mutakhareen K Nazdeek Ye Fark J Agar Ustad Padhe Or Shagird Sune To Shagird K Tanha Hone Ki Surat Mai "Hadasni" Or Zyada Hone Ki Surat Mai "Hadasna" Kaha Jata H

Agar Shagird Padhe Or Ustaad Sunta Rahe To Shagird K Akele Hone Ki Surat Mai "Akhbarni" Or Zyada Hone Ki Surat Mai "Akhbarna" Kaha Jata H

Bayan Kutub E Hadis

Kutub E Hadis Ki 2 Mukhtalif Pehluon Mai Se 2 Mashhoor Takseem

Hadis Ki Pehli Takseem

Hadis Ki Kitaabien Waza Or Tarteeb Masail K Etebaar Se 11 Kismo Par H

(1) Jaame
(2) Sunan
(3) Muajaam
(4( Itraaf
(5) Jaza
(6) Murad
(7) Gharaib
(8) Musnad
(9) Mustakhraj
(10) Musdatrak
(11) Ilal

Jaame

Wo Kitaab H Jis Mai Tafseer, Akaid, Adaab, Ehkaam, Manakib, Ser, Fatan, Alamat, Qayamat Wagera Har Kism Ki Hadis Darj Ho Jaise Aljame Sahi Bukhair Aljame Sahi Muslim Al Jame Tirmizi

Isi Illm Se Yateem Mehroom Hone Ki Wajah Se Bhot Se Log 72 Jehnnumi Firko Mai Chale Jaate H Or Unhe Khabar Bhi Nhi Hoti K Kaisi Hadis Amal K Layak H Kaisi Hadis Fazail K Layak H Kaisi Hadis Ko Chordha Ja Sakta H ???

Hadis Ki Kitabo Ki Tarteeb

(2) Sunan
Wo Kitaab H Jis Mai Ehkam Ki Hadis Abwab E Fiqah Ki Tartib Muwafik Ho Jaise Sunan Abu Dawood, Sunan Nisai, Sunan Ibne Maja

(3) Musnad
Wo Kitaab Jis Mai Sahaba(R.A Ki Tartib Zamni Ya Tartik E Hurf Heja Ya Takddam Wa Takhir E Islami K Lehaz Se Ahadis Mazkoor Ho Jaise Musnad Ahmed, Musnad Abu Yaaala, Musnad Albazar

(4) Muaajjam
Wo Hadis Ki Kitaab H Jis Mai Wazhe Ahadis H Tartib E Sahaba(R.A Tartib E Asteza Ka Lehaz Rakha Gaya Ho Jaise Muaajamal Kabir, Muajjamal Wast, Muajamal Sagheer Lil Tabraani,

Awwalul Zikr Tartib E Sahaba(R.A Or Akhir Dono Kitaabien Tibarani K Shaikh Ki Tarteeb Par H

(5) Etraaf
Wo Kitaab H Jis Mai Hadis K Ek Tukde Ko Zikr Kiya Jaye Or Wo Zaati Ho Hadis K Bakiya Par Or Is Ki Asaneed Ko Isteaa Ban Jama Kiya Jaye Ya Mmakhsoos Kitaab K Sath Khas Kar Diya Jaye Jaise Tohafatul Asharaf Fi Morefa Ilal Itraaf Lil Mazi Wa Kutub E Sitta Par Mushtamil Ho

(6) Mufarid
Wo Kitaab Jis Mai Ek Shaks Ki Kul Muraviyat Zikr Ho Jaise Almufarid La Bi Yaala

(7) Jaza
Wo Kitaab Jis Mai Sirf Ek Masle Ki Ahadis Ek Sath Jama Ho Jaise Jaza Ul Kura, Jazaul Rafaden Lil Bukhari, Ya Jaza Ul Kura Lil Bekahi

(8) Gharaib
Wo Kitaab Jis Mai Ek Mohaddis Ki Mufaredaat Jo Kisi Shaikh Se Ho Zikr Ho Jaise Gharib Ul Malik Lil Daru Kutni, Gharaib Malik Lil Tabrani, Gharaib Shuaba La Bin Manda

(9) Mustakhraj
Wo Kitaab Jis Mai Dusri Kitaab Ki Hadison Ki Rivayat Is Kitaab Se Zaid Sanado Se Ki Gaee Ho Is Shirt K Sath K Dusri Kitaabo K Maullif K Ustad Se Upar Ja Kar Dono Ki Sanadien

Allah Se Dua H K Wo Shiatan Ki Shar Se Hifazat Ata Farmaye Or Deen Samjhna Aasan Kare Ameen Ya Rabalalameen

#Imrankhansalafi
#Islamicleaks

Friday, July 3, 2015

AAO ILM SEEKHEIN—PART-7












Bismillahirrahmanirraheem

AAO ILM SEEKHEIN—PART-7

Aao Wo Illm Sikhien Jo Ehle Hadiso Ki Den H

Usool E Hadis Ka Illm Is Illm K Sikhne Se Aap Islam Zyada Asani Se Samjh Sakoge

72 Firke Is Illm Se Yateem Hote H Q K Un K Imamo Ne Ye Kaam Nhi Kiye ? Or Wo Na Samjhi Mai Gumrahi Mai Chale Jaate

Allah Rabulalameen Ne Quran Ki Hifazat Ki Zimmedari Lekar Usey Har Tarah Ki Kami Or Zyadati Se Mehfuz Farma Diya Wo Aaj Bhi Apni Asli Shakal Or Sino Daftaro K Andar Mehfuz H

Usi Tarah Hadis K Azeem Zakhirey Ki Hifazat Ka Aisa Bando Bast Farma Diya

Jis Tarah Allah Rabulalameen Ne Apne Bando Ki Ek Jamat Aisi Paida Ki Jis Ne Quran Ko Mehfuz Kiya ?

Usi Tarah Aisi Ek Jamat Paida Ki Jis Ne Akhaz E Tehmmul Or Hifz E Dardayat K Zariye Hadis Ki Hifazat Ki

Hadis Ki Hifazat Aise Alaa Miyari Usool Wa Zawabat Or Kawaneen Murattab Kiye Jin Ki Misal Puri Insani Tarikh Mai Nahi Milti Or Kisi Bhi Deeni Wa Tarikhi Sarmaye Ko Mehfuz Rakhne K Liye Un Se Behter Qanoon Ki Tashkeel Na Mumkin Hi Nahi Muhal Hai.,,

Is Haqiqat Ka Eteraf Gair Muslim Danishwaro Or Mufakreen Ko Bhi Karna Padha

Alhamdulillah

Hadis Ki Takseem

(1) Khabar E Mutawatur

(2) Khabar E Wahid

1) Khabare E Mutawatur Ki Tarif

Ye Wo Hadis H Jis K Bayan Karne Wale Har Zamane Mai Itne Zyada Ho K Un K Jhut Hone Par Itefak Karne Lene Akal E Salim Muhal Samjhe

2) Khabar E Wahid Ki Tarif

Ye Wo Hadis H Jis K Ravi Itne Zyada Na Ho

Khabar E Wahid Ki Pehli Takseem

Khabar E Wahid Apne Haqiqi Etebaar Se 3 Kism H

1) Marfoo
2) Mokuf
3) Maktu

(1) Marfoo Hadis
Wo Hadis Jis Mai Nabi(S.A.W K Kaul, Amal, Takreer Ka Zikr Ho

(2) Mokuf Hadis
Wo Haadis H Jis Mai Sahabi(R.A Ka Kaul.Amal.Takreer Ka Zikr Ho

(3) Maktu Hadis
Wo Hadis H Jis Mai Tabaee(R.Al K Kaul.Amal.Atkreer Ka Zikr Ho

Khabar E Wahid Ki Dusri Takseem

Khabar E Wahid K Adad Rivayat K Etebar Se 3 Kismmien H

1)Mashhur
2)Azizi
3)Ghareeb

(1) Mashhur Hadis

Wo Hadis Jis K Ravi Kisi Tabke Mai 3 Se Kam Na Ho

(2)Aziz Hadis

Wo Hadis Jis K Ravi Kisi Tabke Mai 2 Se Kam Na Ho

(3) Ghareeb Hadis

Wo Hadis Jis K Ravi Kisi Tabke Mai Ek Hi Ho

Usool E Hadis Ka Illm Is Illm K Sikhne Se Aap Islam Zyada Asani Se Samjh Sakoge

72 Firke Is Illm Se Yateem Hote H Q K Un K Imamo Ne Ye Kaam Nhi Kiye ? Or Wo Na Samjhi Mai Gumrahi Mai Chale Jaate

Allah Rabulalameen Ne Quran Ki Hifazat Ki Zimmedari Lekar Usey Har Tarah Ki Kami Or Zyadati Se Mehfuz Farma Diya Wo Aaj Bhi Apni Asli Shakal Or Sino Daftaro K Andar Mehfuz H

Usi Tarah Hadis K Azeem Zakhirey Ki Hifazat Ka Aisa Bando Bast Farma Diya

Jis Tarah Allah Rabulalameen Ne Apne Bando Ki Ek Jamat Aisi Paida Ki Jis Ne Quran Ko Mehfuz Kiya ?

Usi Tarah Aisi Ek Jamat Paida Ki Jis Ne Akhaz E Tehmmul Or Hifz E Dardayat K Zariye Hadis Ki Hifazat Ki

Hadis Ki Hifazat Aise Alaa Miyari Usool Wa Zawabat Or Kawaneen Murattab Kiye Jin Ki Misal Puri Insani Tarikh Mai Nahi Milti Or Kisi Bhi Deeni Wa Tarikhi Sarmaye Ko Mehfuz Rakhne K Liye Un Se Behter Qanoon Ki Tashkeel Na Mumkin Hi Nahi Muhal Hai.,,

Is Haqiqat Ka Eteraf Gair Muslim Danishwaro Or Mufakreen Ko Bhi Karna Padha

Alhamdulillah

Khabar E Wahid Ki Teesri Kismien
1) Sahi Lazzata
2) Hasan Lazzata
3) Zaif
4) Sahi Laghira
5) Hasan Laghira
6) Mauzu
7) Matruk
8) Shaaz
9) Mehfuz
10) Munkir
11) Maaruf
12) Muallal
13) Miztarab
14) Maklub
15) Mushaf
16) Madraj

(1) Sahi Lazzata
Wo Hadis H Jis K Kul Ravi Aadil Or Kamilul Zabat Ho Jis Ki Sanad Mutasal Ho Or Muallal Or Shaaz Hone Se Mehfuz Ho

(2) Hasan Lazzata
Wo Hadis H Jis K Ravi Mai Sirf Zabat E Nakis Ho Baaki Ho Baaki Sab Sharayat Sahi Lazzata K Us Mai Mojood Ho

(3) Zaif
Wo Hadis H Jis K Ravi Mai Sahi Lazzata Or Hasan Lazzat K Sharayat Na Paye Jayein

(4) Sahi Laghira
Us Hadis E Hasan Lazzata Ko Kaha Jata H Jis Ki Sanadien Mutaadad Ho

(5) Hasan Laghira
Is Hadis E Zaif Ko Kaha Jata H Jid Ki Sanadien Mutaadad Ho

(6) Mauzu
Us Hadis Ko Kehte H Jis Ko Kisi Shaks Ne Apni Taraf Se Gadh Kar Banakar Nabi(S.A.W Ki Taraf Mansub Kar Diya Ho

(7) Matruk
Wo Hadis H Jis Ka Ravi Mutaham Bil Kazzab Ho Ya Wo Rivayat Kawaid E Maluma Fid Deen K Khilaaf Ho

(8) Shaaz
Wo Hadis H Jis Ka Ravi Bawajood Saka Hone K Kisi Saka Farad Ya Saka Jamat K Khilaaf Rivayat Kare

(9) Mehfuz
Wo Hadis H Jo Shaaz K Mukabil Ho

(10) Munkir
Wo Hadis H Jis Ka Ravi Khud Zaif Ho Or Kisi Saka Farad Ya Saka Jamat K Khilaaf Rivayat Kare

(11) Maaruf
Wo Hadis H Jo Munkir K Mukabil Ho

(12) Muallal Ya Maalul
Wo Hadis H Jis Mai Koi Aisi Illat Khufiya Ho Jo Sehet E Hadis Mai Nuksaan Deti Ho, Us Illat E Khufya Ko Maalum Karna Bada Hi Dakik Amar H Or Mahir E Fan Ka Kaam H

(13) Miztarab
Wo Hadis H H Jis Mai Bhul Se Matan Ya Sanad K Andar Taqdeem Wa Taakheer Ho Gaee Ho Yaani Mukdaam Lafaz Ko Muakhkhar Or Mokhkhar Ko Mukdam Kiya Gaya Ho Ya Bhul Kar Ek Ravi Ki Jagah Dusra Ravi Rakha Gaya Ho

(15) Mushaf
Wo Hadis H Jis Mai Bawajood Surat Khitti Baaki Rehne K Nukto Or Harkat Wa Saknat K Tagayyur Ki Wajah Se Tallafuz Mai Ghalti Wakiye Huee Ho

(16) Mudraj
Wo Hadis H Jis Mai Ravi Kisi Jagah Apna Kalam Darj Kar De
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Allah Se Dua H K Wo Deen Ko Samjhna Asan Kar De Ameen Ya Rabalalameen

To Be Continued

#Islamicleaks
#Imrankhansalafi