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Saturday, February 5, 2022

लोगों के रवैय्यों से परेशान ना हों




 लोगों के रवैय्यों से परेशान ना हों, आपको अपने अमाल का सिला अल्लाह ताला से लेना है लोगों से नहीं, लोगों की बातों को दिल पर लेना छोड़ दें , अपनी जिंदगी का मकसद सिर्फ रब को राज़ी करना रखें , जब मकसद रब को राज़ी करना होगा तो लोगों की बातें परेशान नहीं करेंगी,


मैंने ये सीखा है के जब तक मैं हर एक की बात को अपने दिल से लगाता रहूंगा तब तक मैं अजियत में रहूंगा , किसी इंसान को सिर्फ अल्फाज़ से मेरा सुकून छीनने का इख्तियार नहीं होना चाहिए ,

Umair Salafi Al Hindi

Friday, January 28, 2022

अल्लाह की आजमाइश

 




अल्लाह की आजमाइश

जब कभी आप पर दुनिया तंग होने लगे तो याद कर लिया करें ..

वह सात बच्चों के बाप थे, तीन बेटे और चार बेटियां, उनका पहला बेटा दो साल और चंद माह की उम्र में फौत हो गया, दूसरा बेटा पंद्रह माह में चल बसा, तीसरा बेटा सत्रह माह में फौत हो गया,

उनकी पहली बेटी की शादी हुई वह 28 बरस में दुनिया से रुखसत हो गई, उनकी दूसरी बेटी की शादी हुई वह 21 बरस में अल्लाह को प्यारी हो गई, फिर उनकी तीसरी बेटी की शादी हुई वह भी 27 बरस में इस जहां ए फानी से कूच कर गई,

उन्होंने अपने तमाम बेटे और बेटियों को अपनी आंखों के सामने दुनिया से रुखसत होते देखा, और उनकी रहलत के वक्त सिर्फ एक बेटी दुनिया में रह गई थी,

क्या आपने जान लिया के ये कौन थे ???

अल्लाह के हबीब आखिरी नबी मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम थे, जब कभी आपको किसी सख्त आजमाइश या दिल चीर देने वाले गम का सामना हो तो अपने नबी मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम की आजमाइश को याद कर लिया करें...

Umair Salafi Al Hind

Wednesday, January 19, 2022

वो कहते है कुछ नही था ज़मिन व आसमान नही था सब जगह गेस ही गेस थी अचानक एक विसफोट हुवा और कायनात तशकिल पा गयी

 



वो कहते है कुछ नही था ज़मिन व आसमान नही था सब जगह गेस ही गेस थी अचानक एक विसफोट हुवा और कायनात तशकिल पा गयी ,,

लेकिन जब उनसे पुछा गया कि वो विसफोट किसने किया ?
तो साईंस इस सवाल पर घुटने टेक देता है ,,और वो कहते हुवे निकल जाते है कि बस हो गया ,,
जबकी इस सवाल का जवाब कोई नही दे सका ना दे सकेगा सिवाए कुरान के कुरान कहता है
اَوَ لَمۡ یَرَ الَّذِیۡنَ کَفَرُوۡۤا اَنَّ السَّمٰوٰتِ وَ الۡاَرۡضَ کَانَتَا رَتۡقًا فَفَتَقۡنٰہُمَا
यानी - क्या काफिरो ने ये ख्याल ना किया कि ज़मिन आसमान बन्द थे तो हमने उन्हे खोला ( सुराह अम्बिया आयत 30)

तो रतका कहते है खोलने को ,,फेलाव को ,जुदा करने को
वो कहते है बस युही जुदा हो गये अरे नादानो आयत ने बता दिया कि उसको खोलने वाला वो है जिसने तुम्हे ये बताया कि कायनात से पहले गेस ही गेस थी
ثُمَّ اسْتَوَىٰ إِلَى السَّمَاءِ وَهِيَ دُخَانٌ
यानी -फिर आसमान कि तरफ कस्द फरमाया और वहा धुआँ था ( सुराह हाममिम सज्दा आयत 11)

तो दोस्तो ये एडवन हर्बन और न्युटन यही कुरान से इल्म ले लेकर अपनी रिसर्च का नाम देकर नास्तिको को बेवकुफ बना रहे है और नास्तिक उनके चक्कर मे या ज्यादा पढे लिखे नाम निहाद मुस्लिम कुरान से दुर हो रहे है ..

Friday, August 6, 2021

क्या मैं।भी बड़ा आदमी बन सकता हू ?

 



एक दिन प्रोफेसर साहब से जूता पॉलिश करने वाले बच्चे ने जूता पॉलिश करते करते पूछा ," मास्टर साहब ! क्या मैं।भी बड़ा आदमी बन सकता हू ? "


प्रोफेसर ने कहकाहा लगाकर जवाब दिया , " दुनिया का हर सख्स बड़ा आदमी बन सकता है "

बच्चे का अगला सवाल था," कैसे ??"

प्रोफेसर ने अपने बैग से चाक निकाला और उसके खोखे की दीवार पर दाएं से बाएं तीन लकीरें बनाई,

पहली लकीर पर मेहनत, मेहनत, और मेहनत लिखा,
दूसरी लकीर पर ईमानदारी, ईमानदारी और ईमानदारी लिखा,
और तीसरी लकीर पर सिर्फ एक लफ्ज़ हुनर लिखा,

बच्चा प्रोफेसर को चुपचाप देखता रहा , प्रोफेसर ये लिखने के बाद बच्चे की तरफ मुड़ा और बोला ," तरक्की के तीन जीने (Stairs) होते हैं"

पहला ज़ीना मेहनत है,
आप जो भी हैं आप अगर सुबह दोपहर और शाम तीनों वक्त में मेहनत कर सकते हैं तो आप तीस फीसद कामयाब हो जायेंगे ,

आप कोई सा भी काम शुरू कर दें, आपकी दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस या खोखा सबसे पहले खुलना चाहिए और रात को आखिर में बंद होना चाहिए , आप कामयाब हो जायेंगे ,

प्रोफेसर ने कहा," हमारे इर्द गिर्द मौजूद नब्बे फीसदी लोग सुस्त हैं ये मेहनत नहीं करते , आप जूं ही मेहनत करते हैं आप नब्बे फीसदी लोगों की लिस्ट से निकल कर दस फीसद महनती लोगों में आ जाते हैं, आप तरक्की के लिए अहल लोगों में शुमार होने लगते हैं,

अगला मरहला ईमानदारी होती है, ईमानदारी चार आदतों का पैकेज है, वादे की पाबंदी, झूट से नफ़रत, ज़बान पर कायम रहना और अपनी गलती का ऐतराफ करना,

आप मेहनत के बाद ईमानदारी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लो, वादा करो तो पूरा करो, झूट किसी कीमत पर ना बोलो, ज़बान से अगर एक बार बात निकल जाए तो आप उस पर हमेशा कायम रहो और हमेशा अपनी गलती, कोताही, का आगे बढ़कर एतराफ करो, तुम ईमानदार हो जाओगे , कारोबार में इस ईमानदारी के शरह 50 फीसद होती है,

आप पहला 30% मेहनत से हासिल करते हैं,आपको दूसरा 50% ईमानदारी देती है, और पीछे रह गया 20% तो ये 20% हुनर होता है,

आपका प्रोफेशनलिज्म आपकी स्किल और आपका हुनर आपको बाकी 20% भी दे देगा ,

" आप सौ फीसद कामयाब हो जाओगे "

प्रोफेसर ने बच्चे को बताया," लेकिन ये याद रखो हुनर, प्रोफेशनलिज्म और स्किल की शारह सिर्फ 20% है और ये 20% भी आखिर में आता है, आपके पास अगर हुनर की कमी है तो भी आप मेहनत और ईमानदारी से 80% कामयाब हो सकते हैं,

लेकिन ये नहीं हो सकता के आप बेईमान और सुस्त हों और आप सिर्फ हुनर के जोर पर कामयाब हो जाएं, आपको मेहनत से ही स्टार्ट लेना होगा , ईमानदारी को अपना ओढ़ना और बिछौना बनाना होगा, आखिर में खुद को हुनरमंद साबित करना होगा ,

प्रोफेसर ने बच्चे को बताया," मैंने दुनिया के बेशुमार हुनारमंदो और फनकारों को भूखे मरते देखा " क्यों ? क्यूंकि वो बेईमान भी थे और सुस्त भी, और मैने दुनिया के बेशुमार बेहूनरों को खुद का हवाई जहाज उड़ाते देखा ,

तुम इन तीन लाकीरों पर चलना शुरू कर दो,
तुम आसमान की बुलंदियों को छूने लगोगे,

मनकूल

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks

Wednesday, August 4, 2021

अल्लाह मुझसे मुहब्बत करता है ??

 


अल्लाह मुझसे मुहब्बत करता है ??


ये सवाल अकसर मेरे जेहन में गर्दिश करता , फिर एक दिन मुझे ख्याल आया मेरा रब जिन बंदों को ज्यादा चाहता है उनके बारे में तो उसने आयतें उतारी हैं तो मैं कुरआन मजीद खोल कर बैठ गया ,

मैने ढूंढा तो पहली आयत मिली " वह मुत्ताकीन से मुहब्बत करता है "

मुझे मलाल हुआ मुझमें तो नाम का भी तकवा नहीं, फिर मैंने आगे पढ़ा के वह " सब्र करने वालों को " महबूब रखता है, मुझे अपने " बेसब्रा" होने पर शदीद अफसोस हुआ,

और आगे पढ़ा तो जाना "अल्लाह मुजाहिदीन" ( कोशिश करने वाले से मुहब्बत करता है) ,मैंने जाना के मैं कम हिम्मत वा हौसला वाला हूं,

फिर पढ़ा के वह एहसान यानी नेक अमाल करने वालों को पसंद करता है, मगर मैं इससे भी बहुत दूर रहा हूं !

फिर मैने अपनी तलाश तर्क करने का फैसला किया इस डर से के अब शायद मेरे पास ऐसा कुछ भी नहीं जिसके बदले अल्लाह मुझसे मुहब्बत करे, मैंने अपने अमाल खंगाले तो वह सब फितूर और गुनाहों से आलूदा थे, फिर मैने कुरआन के पन्ने बंद करने लगा के अचानक !!

मेरी नज़र अल्लाह के कौल पर पड़ी,
”ان اللہ یحب التوابین “
(बेशक अल्लाह तौबा करने वालों से मुहब्बत रखता है)

तो मैंने अपना मकाम पा लिया,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Monday, July 12, 2021

अल्लाह के एहकामात की पैरवी करनी चाहिए

 



शराबी एक आलिम ए दीन से ," जनाब! अगर मैं खजूरें खाऊं तो आपको कोई ऐतराज़ है ??"


आलिम: बिल्कुल कोई ऐतराज़ नहीं "

शराबी," अगर उसके साथ कुछ जड़ी बूटियां खा लूं ??

आलिम," कोई रुकावट नहीं "

शराबी," अगर मैं उनमें पानी शामिल कर लूं ?"

आलिम," बड़े शौक से पियो"

शराबी," जब ये सारी चीज़ें जायेज़ और हलाल हैं तो फ़िर आप शराब को क्यों हराम कहते हैं ? हालांकि उसमे यही चीज़ें तो हैं, यानी खजूरे, पानी और जड़ी बूटियां,

आलिम ने शराबी से ," अगर तुम्हारे ऊपर पानी फेंका जाए तो इस पर तुम्हे कोई ऐतराज होगा ??"

शराबी: हरगिज़ नहीं, पानी से क्या फर्क पड़ता है,

आलिम," अच्छा , अगर उस पानी में मिट्टी घोल दी जाए तो तुम उससे मर जाओगे ??"

शराबी," मिट्टी से मैने किसी को मरते नहीं देखा ,

आलिम," अगर मैं मिट्टी और पानी लूं और उनको गूंध कर ईंट बना लूं और इसे सुखा कर तुम्हे दे मारूं तो फिर ??

शराबी," जनाब इससे तो आप मुझे कत्ल कर देंगे "

आलिम ने कहा," शराब का भी यही हाल है, अल्लाह ने हमको जिस बात से भी रोका है उसमे कोई ना कोई मसलेहत है "

हमको अपनी तरफ से तावीलें नहीं गढ़नी चाहिए बल्कि अल्लाह के एहकामात की पैरवी करनी चाहिए...

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Wednesday, July 7, 2021

अल्लाह से दुआ करते हुए ये ना सोचें के पता नहीं मेरी दुआ कुबूल होगी या नहीं,

 



अल्लाह से दुआ करते हुए ये ना सोचें के पता नहीं मेरी दुआ कुबूल होगी या नहीं, मेरे गुनाह इतने हैं के वह मेरी दुआ क्यूं सुनेगा ?


मैं कौनसा नेक बशर हूं जो मेरी दुआएं कुबूल हों ?

या मुझे फलां दुआ अरबी में नहीं आती तो जिस ज़बान में मैं दुआ करूं वह अल्लाह कुबूल करेंगे या नहीं? वगेरह वगेरह जैसी तमामतर सोचों को एक तरफ रख दें और बस ये बात जान लें के ...!!

आपका रब आपके लफ्जों पर गिरफ्त नहीं रखता , वह अपने बन्दे के अल्फ़ाज़ पर गौर नहीं करता के उसने कितनी अच्छी तरह से दुआ का एहतिमाम किया , और कौनसे बहतारीन अल्फ़ाज़ का चुनाव किया,

अगर वह ये दुआ ना पढ़े तो कुबूल नहीं होगी ऐसा कुछ भी नहीं,

वह रब्बुल आलामीन तो सिर्फ अपने बन्दे के दिल के हालात को देखता है, वह उसके खूलूस ए नियत को देखता है के उसके बंदे ने कितनी तड़प और उम्मीद से मांगा है,

अपने बंदे से अल्लाह कुरआन में फरमाता है,

وَاس٘جُد٘ و٘اق٘تَرِب٘۔ (العلق)~
" सजदे में गिरो, इस तरह अल्लाह के करीब हो जाओ "

दुआ के चुनाव और लफ्जों की रस्म में ना लगें बस सजदे में गिरकर अपने रब के सामने खामोश हो जाएं, वह तो दिल में छुपे हर उस राज़ को भी जानता है जिससे अभी तक आप भी वाकिफ नहीं,

अपने अल्लाह से मांगें, मुखलिस नियत, साफ दिल और यकीन ए कामिल के साथ वह हर एक के दिल का हाल बखूबी जानता है,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks 

Sunday, July 4, 2021

तौबा (जिसका कुबूल करना अल्लाह के जिम्मे है)

 "तौबा (जिसका कुबूल करना अल्लाह के जिम्मे है) सिर्फ उन लोगों के लिए है जो जिहालत से बुराई करते हैं, फिर जल्द ही तौबा कर लेते हैं, तो यही लोग हैं जिनपर अल्लाह फिर मेहरबान हो जाता है, और अल्लाह हमेशा से सबकुछ जानने वाला है, (कुरआन सुरह निसा आयत 17)"

اِنَّمَا التَّوۡبَۃُ عَلَی اللّٰہِ لِلَّذِیۡنَ یَعۡمَلُوۡنَ السُّوۡٓءَ بِجَہَالَۃٍ ثُمَّ یَتُوۡبُوۡنَ مِنۡ قَرِیۡبٍ فَاُولٰٓئِکَ یَتُوۡبُ اللّٰہُ عَلَیۡہِمۡ ؕ وَ کَانَ اللّٰہُ عَلِیۡمًا حَکِیۡمًا
"اِنَّمَا التَّوۡبَۃُ عَلَی اللّٰہِ "
1- यहां اللّٰہِ के माने ये हैं के ऐसे लोगों की तौबा कुबूल करना अल्लाह ताला ने अपने फ़ज़ल वा करम से अपने जिम्मे लिया हुआ है, वरना अल्लाह ताला पर कोई चीज़ लाज़िम नहीं हैं (कुर्तुबी)
-"بِجَہَالَۃٍ"
2-यानी कभी अगर नादानी और जिहालत से मघलूब होकर गुनाह कर भी लेते हैं तो जल्द ही तौबा कर लेते हैं,
यहां एक सवाल है के अल्लाह ताला सिर्फ उन लोगों की तौबा कुबूल करता है जो जिहालत से गुनाह करते हैं तो इसका मतलब ये हुआ के अगर कोई जिहालत से गुनाह ना करे यानी इल्म रखते हुए गुनाह करे तो उसकी तौबा कुबूल ही नहीं ??
जवाब ये है के यहां "بِجَہَالَۃٍ की कैद एहतेराज के लिए नहीं है बल्कि यहां बयान वाकया के लिए है, यहां जिहालत से मुराद बेखबरी और नवाक्फियत नहीं बल्कि बेवकूफी और सिफाहत है, क्यूंकि हर गुनाह होता ही है बेवकूफी और जिहालत की वजह से, गुनाह करने वाला इसके अंजाम से बेपरवाह होकर ही गुनाह की जुर्रत करता है, अगर वो इसका पूरा अंजाम अपनी आंखों के सामने रखे तो वह कभी उस गुनाह का अर्तकाब ना कर सकेगा, مِنۡ قَرِیۡبٍ का मफहूम ये है के मौत के आसार मुशाहिदा करने से पहले पहले तायब हो जाते हैं, इन दो शर्तों के साथ अल्लाह ताला उनकी तौबा कुबूल फरमा लेता है,
(तफसीर कुर्तुबी, इब्न कसीर)
साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Friday, July 2, 2021

क्या आप अक्सरियत के पीछे चल रहें हैं ??

 



क्या आप अक्सरियत के पीछे चल रहें हैं ??


एक बार हज़रत उमर बाजार में चल रहे थे, वह एक शख्स के पास से गुजरे जो दुआ कर रहा था ,

" ऐ अल्लाह मुझे अपने चंद लोगों में शामिल कर , ए अल्लाह मुझे अपने चंद लोगों में शामिल कर "

हज़रत उमर ने उनसे पूछा ," ये दुआ तुमने कहां से सीखी? वह बोला , अल्लाह की किताब से !

अल्लाह ने कुरआन में फरमाया है," और मेरे बंदों में सिर्फ चंद ही शुक्रगुजार हैं " (कुरआन 34:13)

हज़रत उमर ये सुनकर रो पड़े और अपने आपको नसीहत करते हुए बोले ," ऐ उमर ! लोग तुमसे ज्यादा इल्म वाले हैं, ऐ अल्लाह मुझे भी उन चंद लोगों में शामिल कर "

हम देखते हैं के जब हम किसी शक्श से कोई गुनाह का काम छोड़ने को कहते हैं तो वह कहता है के ," ये अक्सर लोग करते हैं, मैं कोई अकेला तो नहीं "

अगर आप कुरआन में "अक्सर लोग " सर्च करें तो " अक्सर लोग "

" अक्सर लोग नहीं जानते " (कुरआन 7:187)

" अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते " (कुरआन 2:243)

" अक्सर लोग ईमान नहीं लाए " (कुरआन 11:17)

अगर आप " ज्यादातर " सर्च करें तो आपको मिलेगा के , ज्यादातर लोग,

" ज्यादातर शदीद नाफरमान हैं " (कुरआन 5:59)

" ज्यादातर जाहिल हैं " (कुरआन 6:111)

" ज्यादातर राह ए रास्त से हट जाने वाले हैं " (कुरआन 21:24)

" ज्यादातर सोचते नहीं " (कुरआन 29:23)

" ज्यादातर सुनते नहीं " (कुरआन 8:23)

तो अपने आपको " चंद लोगों" में डालो जिनके बारे में अल्लाह ने फरमाया,

" मेरे थोड़े ही बंदे शुक्रगुजार हैं " ( कुरआन 34:13)

" और कोई ईमान नहीं लाया सिवाए चंद के "( कुरआन 11:40)

" मजे के बगात में पिछलों में ज्यादा हैं और बाद वालों में थोड़े " (कुरआन 14-56:12)*

चंद लोगों में अपने आपको शामिल करें और इसकी परवाह ना करें के कोई इस रास्ते में नहीं और आप अकेले हैं,

मनकूल

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Wednesday, June 30, 2021

जहां सब्र हो वहां मायूसी और परेशानी की कोई जगह नहीं बिल्कुल नहीं,

 सब्र


सब्र, बेबसी से बर्दाश्त किए जाने का नाम नहीं, इससे मुराद है के अगर कांटों पर चलो तो नज़र सिर्फ फूलों पर हो अंधेरी रात हर तरफ छाई हो तो दिखाई सिर्फ सुबह का उजाला दे,





जहां सब्र हो वहां मायूसी और परेशानी की कोई जगह नहीं बिल्कुल नहीं,

जबकि, " बेसब्री " का मतलब है के आपका किसी काम के अंजाम पर यकीन ना हो, आप अंजाम देखने मे काबिल ना हो पाएं,

अल्लाह से मुहब्बत करने वाले सब्र का दामन कभी नहीं छोड़ते क्योंकि वो आगाह होते हैं के ," चांद को महीने कामिल बनने के लिए वक्त दरकार होता है, फूल को मुकम्मल बनने और खिलने के लिए पहले कांटों वाली झाड़ी बनना पड़ता है "

दिन का उजाला देखने के लिए रात की सियाही छटने का इंतजार करना पड़ता है, गोया के हर अंजाम को वक्त दरकार है, और वह वक्त सब्र में गुजरेगा तब मुमकिन है के आपका अंजाम बेहतरीन होगा ,

सब्र का दामन थामे रखें, क्योंकि

" अल्लाह सब्र करने वालों से मुहब्बत करता है"

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks 

Friday, June 25, 2021

वह हदीस जिसको जब अबू इदरीस अल खौलानी बयान करते तो घुटनों के बल गिर पड़ते थे,

 



वह हदीस जिसको जब अबू इदरीस अल खौलानी बयान करते तो घुटनों के बल गिर पड़ते थे,

ऐ मेरे बंदों ! मैने अपने ऊपर जुल्म को हराम करार दिया है,इसलिए मैने तुम्हारे दरमियान भी जुल्म को हराम करार दिया है, पस तुम आपस में एक दूसरे पर ज़ुल्म ना करो,
ऐ मेरे बंदों ! तुम सब गुमराह हो मगर उस शख्स के जिसको मैं हिदायत बख्शू, पस तुम मुझसे ही हिदायत चाहो, मैं तुम्हे हिदायत दूंगा,
ऐ मेरे बंदों ! तुम सब भूखे हो (यानी खाने के मोहताज हो), मगर उस शख्स के जिसको मैं खिला दूं, पस तुम सब मुझसे खाना मांगों, मैं तुम्हे खिलाऊंगा,
ऐ मेरे बंदों ! तुम सब नंगे हो ( यानी सतरपोशी के लिए कपड़े के मोहताज हो ),मगर उस शख्स के जिसको मैंने पहनने के लिए दिया , पस तुम सब मुझसे लिबास मांगों, मैं तुम्हे पहनाऊंगा ,
ऐ मेरे बंदों ! तुम रात दिन गुनाह करते हो और मैं तमाम गुनाहों को माफ करता हूं, पस तुम सब मुझसे ही मगफिरत तलब करो, मैं तुम्हे माफ कर दूंगा ,
ऐ मेरे बंदों ! तुम हरगिज मेरे नुकसान तक नहीं पहुंच सकते के तुम मुझको नुकसान पहुंचा सको, और हरगिज तुम मेरे नफा को नहीं पहुंच सकते के तुम मुझे नफा पहुंचा सको,( यानी तुम मुझे नफा नुकसान पहुंचाने पर कादिर नहीं )
ए मेरे बंदों ! अगर तुम्हारे अगले और पिछले इंसान और जिन्नात मिलकर तुम में से किसी एक निहायत परहेजगार आदमी के दिल की तरह हो जाएं तो इसे मेरी बादशाही में कोई ज्यादती नहीं होगी,
ए मेरे बंदों ! अगर तुम्हारे अगले और पिछले इंसान और जिन्नात मिलकर तुम में से किसी बदकार आदमी के दिल की तरह हो जाए तो इससे मेरी बादशाही में कोई कमी नहीं कर सकती,
ए मेरे बंदों ! अगर तुम्हारे अगले और पिछले इंसान और जिन्नात मिलकर एक खुले मैदान में खड़े हों और मुझसे फिर मांगें और मैं हर एक को उसके मांगने के मुताबिक दूं तो मेरा ये देना उस चीज से जो मेरे पास है इतना ही कम करती है जितना के एक सूई समुंदर में डालकर उसके पानी को कम करती है,
ऐ मेरे बंदों ! यकीनन ये तुम्हारे अमाल हैं जिनको मैं तुम्हारे लिए गिनकर रखता हूं,फिर मैं तुम्हे उनका पूरा पूरा बदला दूंगा , पस जो शख्स भलाई पाए तो उसे चाहिए के वह अल्लाह की तारीफ करे, और जो शख्स इसके अलावा पाए पस वह अपने नफ्स को ही मलामत करे,
(हदीस ए कुदसी, रवाह मुस्लिम, तिरमिजी, इब्न माजा)
" जो नेकी करेगा वह अपने जाती भले के लिए और जो बुराई करेगा उसका वबाल उसी पर है, फिर तुम सब अपने परवरदिगार की तरफ लौटाए जाओगे "
(कुरआन 45:15)
" जो शख्स नेक काम करेगा वह अपने नफा के लिए और जो बुरा काम करेगा उसका वबाल उसी पर है, और आपका रब बंदों पर ज़ुल्म करने वाला नहीं "
(कुरआन 41:46)
अल्लाह ताला हमारे गुनाहों को माफ फरमा..आमीन
साभार: Umair Salafi Al Hindi