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Thursday, July 22, 2021

कर्मों की वजह से सबसे बढ़ कर घाटा उठाने वाले




 उनसे कहो, "क्या हम तुम्हें उन लोगों की ख़बर दें, जो अपने कर्मों की वजह से सबसे बढ़ कर घाटा उठाने वाले हैं?

ये वे लोग हैं जिनकी दुनियावी ज़िदगी की सारी दौड़ धूप सीधे रास्ते से भटकी रही और ये लोग यही समझते हैं कि वे बहुत अच्छा कर्म कर रहे हैं |

- सूरह : कहफ, आयत : 103,104

हकिकत मे इंसान अपने रब का बहोत बड़ा ना शुक्रा है और उसको सब्र नही होती उसके रिज्क पर जिससे वो खसारा घाटा नुक्सान उठाने वालो मे शामिल हों जाता है

Friday, July 9, 2021

बेटे ! क्या बात है परेशान हो तुम

 



बेटे ! क्या बात है परेशान हो तुम


बाबा जी ! मैं थक गया हूं, मुझे मुहब्बत ने थका दिया है,

अरे ! मुहब्बत भी भला कोई थका देने वाली चीज़ है, ये तो बंदे को ताकतवर बनाने वाली सब्र करने वाले , शुक्र करने वाली बनाती है,

लेकिन बाबा जी मैं थक गया हूं,

असल में बेटे मुहब्बत जब बेकद्रों से , बेहिस लोगों से हो जाए तो बंदा थक ही जाता है, तू समझ ले के थकावट मुहब्बत की नहीं लोगों के रवैए की होती है,

मनकूल 

Monday, May 10, 2021

हकीक़त ए नफ़स या फैशन !!




 हकीक़त ए नफ़स या फैशन !!


आजकल की खवातीन खुद तो शरई पर्दा करके बाहर जाती हैं लेकिन साथ में ही जवान बेटी को खूब चुस्त लिबास में तैयार करके ले जाती हैं,

अब्बा मस्जिद के इमाम हैं और इस बात से बेखबर है के बेटा फेसबुक और टिकटॉक स्टार है,

बहुत से दीनदार लोगों को देखा जो अपनी औलाद के बारे में कहते हैं हम उन पर ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं करेंगे ये खुद शौक से करेंगे तो ठीक वरना दीन में ज़बरदस्ती नहीं,

दीन में ये वाला जब्र ज़रूर है के अपनी औलाद को दीन का पाबंद बनाया जाए, नमाज़ का , रोज़े का और अल्लाह के अहकामात का ,

इस फितने ने शायद कोई घर खानदान छोड़ा हो वरना हम सब इससे मुतासिर है, होश में आएं और अपने नस्लों के दीन को बचाएं, वैसे भी आजकल मुरतद होना आसान है ( क्यूंकि सर कलम करने की सजा बंद है), पता चला कल को मुंह पर कह दें के," मुझे ये दीन वीन की बातें पसंद नहीं अब्बा चुप कर जाओ"

बहुत से मां बाप बुढापे में पछताते हैं के अब तो बड़ा हो गया है अब मार भी नहीं सकते , भाई बचपन में ही लाड प्यार या मार से समझा लें वरना कहीं आपको भी इस तरह पछताना ना पड़े ,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com

Tuesday, May 4, 2021

रिश्ते वज़ाहतों के मोहताज हो जाएं तो समझ लें के रिश्ते की उमर खतम हो चुकी है,

 



कभी कभी हम गलत नहीं होते बस हमारे पास वह अल्फ़ाज़ नहीं होते जिससे हम खुदको सही साबित कर सकें कोई सफाई दे सकें और शायद देने की ज़रूरत भी नहीं होती,


क्यूंकि जब रिश्ते वज़ाहतों के मोहताज हो जाएं तो समझ लें के रिश्ते की उमर खतम हो चुकी है,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com

Sunday, April 18, 2021

वेलेंटाइन डे




 वेलेंटाइन डे


ये त्योहार बदकार और अय्याश लोगों का है,

क़ुरआन में अल्लाह ने फरमाया है

" और खुली और पोशीदा आशनाई मत करो"

और फरमाया

" व्याभिचार (ज़ीना) के करीब भी मत जाओ"

और साफ लफ़्ज़ों में फरमाया

"जो लोग चाहते हैं कि ईमान लानेवालों के गरोह में बेहयाई फैले, वे दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक सज़ा के हक़दार हैं, अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।"

(क़ुरआन सुराह नूर आयत 19)

गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड बनाने का मकसद क्या होता है ??
क्या कोई गैरतमंद और ब हया लड़का पसंद करेगा की उसकी बहन भी किसी लड़के को अपना वेलेंटाइन बनाए ??

रसूलुल्लाह मुहम्मद (Sws) ने फरमाया:-" जब तुम में शर्म वा हया ना रहे , तो जो चाहो करो "

और फरमाया:- " जिसमे शर्म वा हया नहीं उसमे ईमान नहीं "

इसलिए मुसलमानों सुधर जाओ और अपने ईमान की हिफाज़त करो,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Saturday, April 17, 2021

एहसान करने से पहले देखें

 



एहसान करने से पहले देखें


एक बाज़ ने देखा के एक हाथी एक हिरण के बच्चे को अपने ऊपर बिठाकर दरख़्त के नरम नरम पत्ते खिला रहा है, बाज़ बहुत हैरान हुआ और उसने हाथी से पूछा के , " भई ये क्या माजरा है ??"

तो हाथी ने बाज़ को बताया के," मेरे पांव में कांटा चुभ गया था और मैं चल नहीं सकता था तो उसकी मां ने मेरे पांव से कांटा निकाल दिया , फिर वह किसी जानवर का शिकार हो गए , ये उसका बच्चा है मैं इसके एहसान का बदला चुकाने की कोशिश कर रहा हूं"

बाज़ ने भी दिल में ठान ली के मैं भी किसी पर एहसान करूंगा, एक दिन उसने देखा के एक चूहा पानी में डूब रहा है तो बाज़ ने उसको पानी से निकाला और अपने परों के नीचे लेकर बैठ गया ताकि ये गर्मी से सूख जाए,

चूहा ठीक होकर भाग गया तो बाज़ दिल में बहुत खुश हुआ और उड़ने के लिए कोशिश की तो उड़ ना सका, क्यूंकि चूहा उसके पर कुतर गया था

अब बाज़ बेचारा ज़मीन पर ही रेंग रहा था के उसको वह हाथी मिल गया, तो बाज़ ने उसको गुस्से से कहा के , " ये सब तेरे सबक की वजह से हुआ है, तुम्हे देखकर मैंने भी एहसान किया "

तो हाथी कहने लगा के ," एहसान करने से पहले उसकी नसल देखी थी तुमने ??"

इसी तरह बे नसल लोगों पर एहसान करके उनसे अच्छाई की उम्मीद नहीं करनी चाहिए , बल्कि किसी से भी नहीं रखनी चाहिए, सब पर एहसान करो, जो नस्ली होगा वह उसका बदला खुद ही उतारेगा

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Friday, April 16, 2021

आप लोगों के साथ कितना भी एहसान करें फिर भी आप उनकी अज़ीयत से महफूज़ नहीं रह सकते,

 



आप लोगों के साथ कितना भी एहसान करें फिर भी आप उनकी अज़ीयत से महफूज़ नहीं रह सकते,


इमाम अहमद बिन हमबल रहमतुल्लाह अलैह से पूछा गया ," लोगों की अज़ीयत से बचने का क्या तरीका है ??"

उन्होंने जवाब दिया ," इन चीजों पर अमल करो,

1- तुम उन्हें देते रहो और नवाज़ते रहो मगर उनसे कभी लेने की उम्मीद मत रखो,

2- लोग तुम्हे तकलीफ पहुंचाए तो, तुम बदले में उन्हें तकलीफ ना दो,

3- उनकी जरूरतों को पूरा करो मगर कभी उनसे तुम अपनी ज़रूरत पूरी करने का मुतालबा ना करो,"

पूछने वाले ने जवाब सुनकर कहने लगा, " इमाम साहब ! इस पर अमल करना तो बहुत मुश्किल है "

इमाम अहमद बिन हमबल रहमतुल्लाह अलैह ने जवाब दिया," ए काश ! इतना सबकुछ करने के बावजूद तुम उनकी अज़ीयत से महफूज़ रह जाओ, "

(سير أعلام النبلاء / الجزء 11 الطبقة 12)

मनकूल

तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Saturday, April 10, 2021

मुगालता या Paradox से क्या मुराद है ??

 



शार्गिदों ने अपने प्रोफ़ेसर से पूछा, " मुगालता या Paradox से क्या मुराद है ??


प्रोफ़ेसर ने कहा इसके लिए एक मिसाल समझाता हूं, दो आदमी मेरे पास आते हैं, एक साफ सुथरा है और दूसरा गंदा,

मैं दोनों को मशवरा देता हूं के वह नहा धोकर पाक वा साफ हो जाए, आप लोग बताएं इन दोनों में कौन गुस्ल करेगा ??

शार्गिदों ने कहा :-" गंदा आदमी "

प्रोफ़ेसर ने कहा :-, नहीं ! बल्कि साफ आदमी ऐसा करेगा क्यूंकि उसे नहाने की आदत है जबकि गंदे आदमी को सफाई की अहमियत मालूम ही नहीं," अब बताइए कौन नहाएगा ??

शार्गिदों ने कहा," साफ आदमी"

प्रोफ़ेसर बोले," नहीं ! बल्कि गंदा नहाएगा क्यूंकि उसे सफाई की ज़रूरत है "

प्रोफ़ेसर ने फिर पूछा अब आप लोग बताएं कौन नहाएगा ??

सबने कहा, गंदा आदमी,

प्रोफ़ेसर ने कहा," नहीं , बल्कि दोनों नहाएंगे, क्यूंकि साफ आदमी को नहाने की आदत है जबकि गंदे को नहाने की ज़रूरत है,"

प्रोफ़ेसर ने फिर पूछा," आप लोग बताएं अब कौन नहाएगा ??"

शार्गिदों ने कहा," दोनों !"

प्रोफ़ेसर बोले," नहीं ! कोई नहीं क्यूंकि गंदे को नहाने की आदत नहीं जबकि साफ को नहाने की ज़रूरत नहीं "

प्रोफ़ेसर ने फिर पूछा ," अब बताएं कौन नहाएगा ??"

शार्गिद बोले ," कोई नहीं "

शार्गिद कन्फ्यूजन का शिकार होने लगे ,उन्होंने प्रोफ़ेसर से पूछा," आप हर बार अलग जवाब देते हैं और हर जवाब सही मालूम होता है, हमें सही बात कैसे मालूम हो?"

प्रोफ़ेसर ने कहा ," Paradox या मुगालता यही है जिसे आप मीडिया और मीडिया एंकर के यहां देख सकते हैं, मीडिया और उसके झूठे एंकर वा एडिटर के लिए ये अहम नहीं है के सच या हकीकत क्या है ?? बल्कि अहम ये है के झूट किस तरह और कैसे सच साबित किया जाए !!"

इलेक्ट्रॉनिक वा प्रिंट मीडिया के अक्सर वा बेश्तर झूट और बिके एडिटर वा एंकर के सफेद वा सफ्फाफ झूट आप समझते होंगे , अगर आप समझ गए हैं तो दूसरों को भी समझाएं

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Wednesday, January 13, 2021

बा हिम्मत तो वो होते हैं जिनके अंदर ना जाने कितने तूफ़ान होते हैं




 बा हिम्मत तो वो होते हैं जिनके अंदर ना जाने कितने तूफ़ान होते हैं, मगर ऊपर बला का सुकून हो, मुस्कुराती आंखें हों,


इसका मतलब ये नहीं के वह गमगीन नहीं होते , वह रोते नहीं.... वह रोते हैं! आखिर इंसान हैं !

लेकिन जो गमों का पहाड़ नहीं बनाते, जो जीना नहीं छोड़ते,जो जगह जगह गमों का इश्तहार नहीं लगाते, जिनको गमों से निकलना आता हो,

वह ही तो होते हैं जिन्हें इस ज़िन्दगी की कद्र होती है,

उदास मत हो, अल्लाह आपकी सारी मुश्किलात जानता है, वह आपके साथ है,
☆ان اللہ مع الصابرین☆

हाफ़िज़ इब्न रजब अल बग़दादी हंबली फरमाते हैं

❞ والصبر الجميل هو أن يكتم العبد المصيبة ولا يخبر بها.❝
" सब्र ए जमील ये है के इंसान अपनी मुसीबत छुपा ले और किसी को भी इसकी खबर ना दे "

(मजमुआ अल रसाईल इब्न रजब 3/153)

साभार: बहन सबा युसुफजई
ब्लॉग: islamicleaks.com 

Monday, August 10, 2020

COMMUNISM AUR ISLAM



मैं कम्युनिज़्म से बहुत मुतास्सिर (प्रभावित)था, क्योंकि वह इंसानों में यक्सानियत की आवाज उठाता है, अमीरी गरीबी के फ़र्क को मिटाता है, बड़ी जात छोटी जात के फ़र्क को मिटाता है, और उन तमाम मानताओं का विरोध करता है जो यह फ़र्क पैदा करती हैं चाहे वह धर्म के नाम से आई हें या कुरीतियों के, या सामाजिक मान्यताओं के,

मगर जब हमने इस्लाम को पढ़ा तो पता चला कि इस्लाम ना सिर्फ इस यक्सानियत की आवाज उठाता है बल्कि ऐसा करके भी दिखाता है, इस्लाम आक़ा और गुलाम को लड़वाए बिना, मज़दूरों और मिल मालिकों में ख़ूरेज़ी करवाए बिना,अमीरों ग़रीबों को एक दूसरे का दुश्मन बनाए बिना ही यक्सानियत काइम कर देता है,

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा,

"जो खुद खाते हो वही अपने गुलाम को खिलाओ जो खुद पहनते हो वही अपने गुलाम को पहनाओ, उनपर ज़रूरत से ज्यादा बोझ ना डालो, और उनके काम में हाथ बटा लिया करो,"

तारीख़ नवेश लिखते हैं,

"जब कोई सफीर हज़रत उमर से मिलने के लिए आता तो उसे यह पूछना पड़ता के उमर कौन हैं, क्योंकि उमर और उनका गुलाम एक जैसे कपड़े पहने एक साथ बैठे होते,"

अल्लाह का शुक्र है कि उसने मुझे इस्लामी तारीख पढ़ने का शर्फ़ बख़्शा और मुझे नास्तिक होने से बचा लिया,

अगर आज इस्लाम अपनी अस्ल शक्ल में हम मुसलमानों की जिंदगी में मौजूद होता तो दुनिया में कोई भी ना लेनिन से मुतास्सिर होता ना ही मारक्स से, और सारे बुद्धिजीवी और न्याय प्रिय लोग मुसलमान होते, और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम को अपना हीरो मान रहे होते,
✍️मौलाना हारुन छतरपुर

Thursday, August 6, 2020

POLICE BRUTALITY





पुलिस उत्पीड़न

नबी ए करीम मुहम्मद (sws) ने फ़रमाया :- " क़रीब है के अगर तुम्हे लंबी मुद्दत मिल गई तो तुम ऐसे लोगों को देखोगे
जिनके हाथों में गायों की दुमों जैसे कोड़े होंगे , वह अल्लाह के गजब में सुबह गुजारेंगे और अल्लाह की सख्त नाराजगी में शाम बसर करेंगे "

(सही मुस्लिम हदीस 7195 )

UmairSalafiAlHindi

Wednesday, July 29, 2020

JAMHOORIYAT ( REAL FACE OF DEMOCRACY)







अगर लोगों को लगता है कि हमने 1947 में आजादी पा ली तो ऐसे लोग सिर्फ गुमान में जी रहें हैं, दरअसल वो आजादी नहीं एक गुलामी से दूसरी गुलामी की तरफ पलायन था,

और वो गुलामी थी लोकतंत्र की गुलामी जिसे यहूदियों लाबी कंट्रोल करती है, 1947 से पहले भारत एक सुपर पॉवर था अमेरिकन डॉलर भारतीय रुपया से बहुत कमजोर था, अरब मुल्क दरिद्रता में जी रहे थे, दुबई, यूएई बंजर रेगिस्तान के इलावा कुछ नहीं था,

फिर ऐसा क्या हुआ कि इन 70 सालों में भारत जैसा सुपर पॉवर देश भीकारी बन गया, आज वर्ल्ड बैंक के कर्जों का मोहताज है, बात बात पर वर्ल्ड बैंक से पैकेज मांगता रहता है,

क्या आपको पता है वर्ल्ड बैंक जो कर्ज देता है उस पर मोटा ब्याज यानी सूद वसूलता है, और इस ब्याज की वसूली सरकार जनता पर कर लगाकर करती है, यही वजह है कि भारत जैसा सुपर पॉवर देश आज बिखारी मुल्कों में आ चुका है,

हकीकत यही है लोकतंत्र, ग्रेट ब्रिटेन के पतन के बाद जिन जिन मुल्कों ने लोकतंत्र को अपनाया वो बिखरी होते चले गए, और जिन्होने इसे ठुकराया वो कामयाब होते चले गए, ब्रिटेन में आज भी बड़े फैसलों में महारानी से मशवरा होता है,

दरअसल लोकतंत्र को चलाने के लिए खून और पैसा चाहिए ,कंगाल विपक्ष यहूदी लाबी से पैसा लेता है और चुनाव लड़ता है, जब वो जीत जाता है तो यहूदी लाबी को सूद समेत वो कर्ज चुकाता है,

दूसरी जगह है पेपर करंसी जिसे पूरा यहूदी लाबी कंट्रोल करती है, पेपर करंसी को छपने के एवज में 35% मूल्य का गोल्ड भारत को गिरवी रखना पड़ता है, और उसके बदले में कागज के टुकड़े छापने की अनुमति मिलना ये एक आर्थिक गुलामी है,

उदाहरण के तौर पर समझिए अगर यहूदी लाबी चाहे तो किसी भी देश को चुटकियों में प्रतिबंध लगा कर बर्बाद कर सकती है फिर आपके ये कागज के टुकड़े सिर्फ हवा खाने के लिए ही रह जाएंगे,
मौजूदा सूरत ए हाल को देखते हुए यही बेहतर है कि भारत को 100-100 साल के लिए कांग्रेस और बीजेपी को लीज ले लेना चाहिए,

Sunday, July 12, 2020

RAAFZIYAT, SUFIYAT AR IKHWANIYAT MUQABLA SALAFIYAT





राफजियत, सूफियत और इख्वानियत बा मुकाबला सलफियत

सलाफियों को करम फरमाओ की तरफ से अलकबात !

शेख उल इस्लाम इमाम इब्न तैमिय्या ने जब अपनी मरकतुल अला किताब ( मिन्हाज उस सुन्नह ) लिखी जिसमें राफजियात की धज्जियां उड़ाकर रख दिया तो राफजियो ने सलाफियों को नवासिब के लकब से नवाजा

जब शैख मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब ने मशहूर ज़माना किताब ( किताब उल तौहीद) लिखी जिसके अंदर सूफी बिदातों की धज्जियां उड़ा दी तो सूफी तुरको ने सलाफियों को वहाबियों के लकब से नवाजा,

और जब शेख रबी बिन हादी मदखली ने कमर तोड़ किताब "العواصم مما في كتب سيد قطب من القواصم" तालीफ की जिसने इख्वनियत की कब्र को खोद दी तो इख्वानियों ने सलफियों को मदखिल्यत के लकब से नवाजा

UmairSalafiAlHindi

Wednesday, January 28, 2015

FUZOOL. BE'MAQSAD BAHES WA TAQRAAR





•••Fuzool, Be-Maqsad Bahes Wa Takraar•••

Al-Mughira bin Shuba Radiallahu anhu se rivayat hai ki Rasoollallah Sallallahu Alaihi Wasallam ne farmaya Allah taala ne Fizul Baat karney ko, zyada sawal karney ko aur Maal zaya(fizul kharch) karney ko Napasand (hated) bataya hai.

Sahih Bukhari, Vol 3, 2408

Hikmat Wa Danaai Ye Hai Ke Baat Sonch Samajh Kar Ki Jaye, Fuzool Guftugu Be-Maqsad Bahesh Wa Takraar Koyi Achhi Chiz Nahin Hai,

Chunanchah Riwayat Mein Aaya Hai,

(امسك عليك لسانك.)

"Apni Zuban Par Control Rakho (Yaani Khaamosh Raho)"

(Al-Tirmizi: 2406)
(Silsila Al-Sahiha: 888)

Haalan Ke Yehi Khamoshi Behtar Aur Kaamiyabi Ki Daleel Hai,

"Bilaal Bin Haarish r.a Farmate Hain, Main Ne Nabi Kareem Sallallahu Alaihe Wa Sallam Ko Farmate Huye Suna:-"Tum Mein Se Koyi Shakhs Allah Taala Ki Raza Wali Koyi Aisi Baat Kah Jata Hai Aur Use Us Ki Azmat Ka Ehsaas Tak Nahin Hota, Jis Ki Wajah Se Allah Taala Qayamat Tak Us Par Raazi Ho Jata Hai,

Isi Tarah Koyi Aadmi Allah Taala Ki Naraazgi Wali Koyi Baat Kah Jata Hai, Aur Use Us Ki Sangeeni Ka Ehsaas Tak Nahin Hota, Magar Is Ek Baat Ki Wajah Se Allah Taala Us Par Qayamat Tak Naraaz Ho Jaata Hai",

(Al-Tirmizi: 2319)

Ye Naraazgi Mahez Ek Baat Ki Wajah Se Hai Ke Ek Baat Aisi Kahi Jo Jahannum Mein Le Jane Ka Sabab Ban Gayi, Ke Jis Ki Wajah Se Allah Taala Us Se Naraaz Ho Gaya, Jis Se Maalum Hua Ke Bolne Mein Intehayi Ehtiyaat Ka Muzahera Karna Chaahiye,
Jahan Zarurat Ho Bola Jaye Lekin Jahan Zarurat Na Ho, Bolne Se Qat'an Gurez Kiya Jaye,

Aur Allah Ke Nek Aur Saaleh Bande Hamesha Bolne Mein Ehtiyaat Se Kaam Lete Hain, Aur Fuzool Bahesh Wa Takraar Mein Apne Waqt Ko Zaya Nahin Karte,

Irshad E Rabbani Hai:- " Aur Jab Behooda Baat Kaan Mein Padti Hai To Is Se Kinara Kar Lete Hain, Aur Kah Dete Hain Ke Hamare Amal Hamare Liye Aur Tumhare Amaal Tumhare Liye Tum Par Salaam Ho Hum Jaahilon Se Ulajhna Nahin Chaahte"

(Surah Al-Qasas: 55)

Is Aayat Par Gour Farmayen Ke Allah Ke Bande Jaahilon Se Fuzool Bahesh Wa Takraar Nahin Karte, Balke Sharifana Andaaz Mein Salaam Kar Ke Chale Jate Hain,

Lihaaza Koshish Karni Chaahiye Ke Fuzool Bahesh Wa Takraar Mein Apna Waqt Zaaya Na Karen,

Haa'n ! Jo ilmee Bahesh Ho Deeni Masaail Ki Tahqeeq Ke Liye Bahesh Wa Takraar Karna, Ye Bahesh Wa Takraar Intehaayi Mubarak Hogi, Jab Ke Bahesh Karne Ka Maqsad Sahih Baat Tak Pahunchna Ho, Is Ke Bar-Khilaaf Bahesh Karne Mein Koyi Fayeda Nahin Hai, Balke Nuqsaan Hi Nuqsaan Hai,
 
 
#ImranKhanSalafi
#IslamicLeaks

Tuesday, February 4, 2014

SHAITAAN KA WASWASA





Bismillahirrahmanirraheem



Agar aapke kaan me kisi shaitaan ne ye soor foonk diya ho ke

" Ahle haadees imamo aur mujtahidon, buzrugo aur neko ke munkir hain"

 To hum aap se kahenge ke ye is ne galat kaha...
 


Hum ahle hadees ,

imamo ki,

buzrugo ki,

mujtahido ki,

muhaddiso ki,

sab ki izzat karne wale hain in sab ki buzrugi  maante hain inhe apna sardaar aur peshwa jaante hain,
 


LEKIN 

ise kya karen ke khud inhi aima karaam ne humein ye farma diya hai
ke 


"sahih hadees ke  muqable me na hamari  mano na kish aur ki"

(al mizaan al kubra al sha'rani- jild-1 page-60)

pus in ka maanna aur inki maanna bhi yahi hai ke 


jo hadees me hai maane ,jo is ke khilaaf ho usse chhod de, imamo ka jo dushman ho charo imamo
se bugaz o bair rakhta ho hum to usse matrood aur shaitaan ka chhota bhai jaante hain,
haan beshak hadees rasool s.a.w  ke muqable me kisi ke  qoul ko maanna ye khud in charo imamo ki taaleem ke khilaaf hai, is liye chhod dete hain, ye nahi karte ke is ke muqable me hadees ko chhod de,
hamare nazdeek  ye allah ke rasool karim(s.a.w)  ki sarai tauheen,  hadees ki Aalaa be adbi
aur deen-islam ka sarai khilaaf hai,  kai sau shaikro ahaadeesein  jo sarai hain sahih hain  jin ke khilaaf hanafi mazhab ki fiqaah ki kitaabein hain, kahiye hum kaise  hadeeso ko chhod de ?

Aur kaise in fiqaah ki kitaabo ko le lein ?

Insaaf, imaan, islaam, taaleem buzrugo aqwaal-aima ka khulasa to ye hai ke hum hadees ko len aur qaul ko chhode, pus yahi hum chahte hain...
 

ye hakikat hai kisi ko bura lage tho i am sorry


FROM-- IMRAN KHAN SALAFI

Friday, June 28, 2013

EK DIN IMAM ABU HANEEFA RAHIMAHULLAH KI MASJID ME:








Bismillahirrahmanirraheem 




EK DIN IMAM ABU HANEEFA RAHIMAHULLAH KI MASJID ME:



 " Main 2 saal Pahle Ulema ka Ek Wafad Lekar Arab Ke mulkon Ke Daure Par Gaya, Uske Tamam Tabaqaat (Firqe) Ke uleme They, 

Sabse Pahle Hamare Safar Ka Marhala Baghdad Ke Andar Tha, 

Baghdad Me Ham Jumeraat Ko Pahunche, Dusre Din Jumah Tha, Sabne Faisla Kiya Ki Jumah Kahan Padhen ?? 


Kahle Lage-" Ji Imam Abu Haneefa Rahimahullah Ki Masjid Me Namaz padhte Hain "


 Chunanche Ham Wahan Gaye, 9 Ulema Ka Kaafila Tha, Mujhe Uski Qayadat Ka Sharf Haasil Hua, 

Daariya e Dajla Ke Kinaare Imam abu haneefa Rahimahullah Ki Bahut Badi Jama Masjid Hai, Wahan Ham Pahunche, Sarkari Mahman they,

 Arab Ke Andar Ye Riwaaj Hai Ke Jama Masjid Ke Andar Mukbir Ke Liye Ek Oonchi Jagah Banaayi Hui hoti Hai, Jahan Mukbir Aur Chand Log Khade Hote Hain,


 Wah Imam Ko Dekh kar Peeche Takbeer Kahta Hai, Unhone Hukumat Ke Mahman samjhkar Hamko Us

Oonchi Jagah Par Baithaaya, Us Oonchi Jagah Hamen Jagah Di,

Ham 9 Ke 9 Saathi Ikatthe Khade hue,

Tamam Tabaqaat ke Log they, Barelwi dost bhi They, Deobandi Bhai bi, Ek Shia Dost Bhi they, Ahle Hadith Bhi They,

Namaz shuru Hui,

Ab Imam Sahab Ki Masjid Hai Aur Masjid ke ek Ghoshe Me Alag Hisse me Imam Sahab Ki Qabr Bhi Hai,

Imam Ne Wallazzalleen Kaha,

Saari Masjid Aaameen Ki Aawaaz Se Goonj Uthi,

Aur Ye Kamre ke Andar Chhup Ke Baat Nahin Kah Raha, Stage Pe Khade Hoke Zimmedaari Se Baat Kah Raha Hoon,

Duniya Ka Koi Shakhs Is Baat Ki Tardeed Karne Ki Jurrat Nahin Kar sakta,

Koi Us Zamaane Ki Baat Nahin Kar Raha Jis Zamaane me Koi Baghdad Pahunch Hi Nahin Sakta Tha,

Agar Kisi Ko shubah wa Shaq ho Hamare Saath Aaye Ticket Ke Paise Hamko De, Agar wahan Aameen Hoti Ho Ticket Uske Zimme, Agar Aameen Na ho Toh Ham Uska Kiraaya Dene Ke liye Taiyyar Hain,

Buland Aawaaz se Aameen Kahi,

Ab 2,3 Maulwi Sahab Beech Mese Bahut Pareshaan Ho Gaye, Ek toh Hamare Dost They, Unki Hansi Nikal Gayi,

Ab maine Dekha Jo Mere Saath Maulwi Sahab they,

Allah Maaf Kare Aur Maulwi Sahab Ne Namaz Ke Andar Idhar Udhar Dekhna Shuru Kiya Ke Aameen Toh Ho Gayi, Aage Pata Nahin Kya Hone Waala Hai ???

Log Zameen Ki Taraf Dekh Rahe They , Molwi Sahab Aasmaan Ki Taraf Dekh Rahe They, Ab Jo Imam Ne Surah Padhi Woh Bhi Wahabiyon Ki Surah,

Pahle Surah "Sabbihisma Rabbikal aala", Jumah Ki Namaz Thi.

Ab Molwi Sahab Aur Pareshan Ho Gaye, Ye Kahan Wahabiyon ki Masjid Me Hamko Le Aaye Hain ???

Masjid Imam Sahab Ki Hai, Ab Wah dekh Rahe Hain, Imam Ne Kaha Allahuakbar Dono Haath Uthaaye,

Imam Ne Bhi Aur Saari Masjid Ne Rafulyadain Kiya, Ruku Se Sar Uthaaya Tab Bhi Kiya, Ab Jab Salam Phera, Abhi Ek Taraf Hi Salam Phera Toh Chunke Wah Mere Baayen Taraf They, Salaam Daayen Taraf Phera, Muh Mere Taraf Hua,

Kahne Laga:-" Wahabiyon Khush Na ho Dono Tarah Jayez Hai "

Maine Kaha:-" Mujhe Dusri Taraf Toh Salam Pher Lene De "

Dusra Salaam Phera

Kahne Laga:-" Kyun Hans Rahe ho?"

Maine Kaha:-" Dono Tarah Jayez Hone Par Hans Raha Hoon"

Kahne Laga:-"Isme Hasne Ki Kya Baat Hai?"

Maine Kaha:-" Yahi Aadat Tumhe Dubo Gayi Hai"

Jab Koi Jawab Nahin Aata Toh Kahte Ho Aisa Bhi Ho Sakta Hai

Phir Maine Kaha:-" Kabhi Pakistan Me Apni Masjid Ke Andar Khade Hoke Bhi Kaha Hai Ke Dono Tarah Jayez Hai ??"

Kahne Laga :-" Kahne Ko Toh Taiyyar Hoon Lekin Log Bade Bewaqoof Hote Hain"...

Takreer----Allama Ehsaan Ilaahi Zaheer Shaheed (rh)