Monday, January 24, 2022

मुझे चेहरे पढ़ने आते हैं ??, मैने उसको हंस कर कहा ,

 



मुझे चेहरे पढ़ने आते हैं ??, मैने उसको हंस कर कहा ,

कहने लगी, " बिलकुल तुम्ही तो जादूगर हो !", मैने कहा " हां ! बिलकुल मुझे जादूगर ही समझो "

पता है सबसे ज्यादा अजाब इंसान के लिए क्या होता है ?, किसी को हद से जान लेना

ये सुनकर बोली, " मैं तो तुमको मुकम्मल जानती हूं ? तुम्हारे बारे में एक एक बात जो तुम बोलते भी नहीं", मैं हंस कर चुप कर गया क्योंकि मुझे मालूम था के सबकुछ एक जैसा नहीं रहता क्योंकि हर इंसान के पास अपना रास्ता चुनने का हक है, मैं कैसे किसी को रोक सकता था,

हर इंसान ही जादूगर होता है जो मुहब्बत से रिश्तों को जोड़े रखता है, जिन रिश्तों में मुहब्बत होती है ना उनमें दिल से दिल को राह होती है, जब एक शख्स को तकलीफ होती है तो दूसरे सख्स को फौरन पता चल जाता है,

लेकिन एक वक्त ऐसा आता है के चाहे आप किसी स्टेचर पर जिंदगी की बाजी लड़ रहें होते हैं या अकेले वीरान कमरे में, कोई हाल नहीं पूछता क्योंकि जाने वाला अपनी मंजिल चुन चुका होता है,

आपके आंसू और अजियत उसके लिए बेमायने हो चुके होते हैं, अगर गलती से बर्दाश्त का दामन छोड़कर अपनी तकलीफ का उनको बता दें तो सिर्फ Get Well Soon का लफ्ज़ कह दिया जाता है,

तो फिर इंसान यही सोचता है के क्यों बताया जाए किसी को, जाने वाला जा चुका है, उसको ख्वाब दिखाने वाला और उनको ताबीर देने वाला मिल चुका है, इसलिए अपनी जात को उस शख्स के सामने बार बार Degrade ना करें, जिसके लिए कभी आप जादूगर थे क्योंकि उसका soulmate अब कोई और है,

आप सिर्फ जोकर !!

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks 

Sunday, January 23, 2022

अल्लाह ने किसी को जना नहीं है और ना ही किसी से जना गया है





जिस अहमक (जाहिल) ने भी ये तस्वीर बनाई है उसे " खालिक" (पैदा करने वाला ), और " विलादत " ( जन्ने वाला ) का फर्क ही नहीं मालूम,


उर्दू में जब अल्लाह को " पैदा करने वाला" कहा जाता है तो ये " खालिक" यानी बनाने वाले के माने में होता है, और जब मां बाप को " पैदा करने वाला" कहा जाता है तो ये " वालिद और वालिदा " यानी जन्ने " वाले के माने में होता है,

अल्लाह यानी " खालिक" है लेकिन वालिद नहीं है, सुराः इखलास में है,
{ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ}

" अल्लाह ने किसी को जना नहीं है और ना ही किसी से जना गया है "

(कुरआन सूरह इखलास आयत 3) 

Saturday, January 22, 2022

कभी जिंदगी कितनी तंग लगने लगती है,

 



कभी जिंदगी कितनी तंग लगने लगती है,लोग हमें इतना महदूद कर देते हैं के हमारा खुद की जात में सांस घुटने लगता है, और किसी को हमदर्द पाकर कुछ कह लो, कोई शिकवा वा शिकायत तो सुनने को मिलता है


दफा करो!
छोड़ दो उनको, उनके हाल पर !
तुम अपनी जिंदगी जिओ !
रिश्तेदार होते ही ऐसे हैं !

और दिल का बोझ कम होने की बजाए बढ़ जाता और उलझन ज्यादा उलझ जाती है,

अगर जिंदगी बगैर रिश्तों के अच्छी गुजर सकती थी, तो अल्लाह ने रिश्ते क्यों बनाए ??

अगर लोगों के बगैर हम पुरसुकून रह सकते हैं तो अल्लाह ने इतने लोग क्यों बनाए ?? अजनबियों से इतने प्यारे ताल्लुक क्यों बनाए ??

जब ये मशवरा देते हो के दूसरों को उनके हाल पर छोड़ दो, तो जब कोई तुमको तुम्हारे हाल पर छोड़ता है तब तुम क्यों तड़पते हो ??

दूसरों को कहते हो के तुम बहुत हशशाश बन रहे हो,जब वह बेहिश हो जाए तो उसे जीने क्यों नहीं देते ??

कोई दुख सुनाए तो...तो सुनते क्यों नहीं!!

Umair Salafi Al Hindi

Friday, January 21, 2022

हम परफेक्ट नहीं होते !

 



हम परफेक्ट नहीं होते !


एक तरफ हम किसी की बहतारीन याद होते हैं, तो दूसरी तरफ कोई हमारा नाम लेते ही सर से पांव तक सुर्ख हो जाता है,

कोई हमारी कुर्बत के लिए तरसता है, तो कोई हमारे साए से भी दूर रहना चाहता है,

कोई भी इंसान सिर्फ अच्छा या सिर्फ बुरा नहीं होता ,

हम किसी के लिए एक मिसाल, और किसी के लिए एक सबक और किसी के लिए अजाब होते हैं,

हम परफेक्ट नहीं होते !!

मनकूल 

Thursday, January 20, 2022

समुंदर सबके लिए एक जैसा ही होता है

 



समुंदर सबके लिए एक जैसा ही होता है, लेकिन कुछ लोग उसमे से मोती तलाश कर लेते हैं, कुछ मछलियां पकड़ लेते हैं ...!!

और कुछ को समुंदर से खारे पानी के सिवा कुछ नहीं मिलता ...!!!
बादल से बरसने वाला पानी एक जैसा ही होता है, उपजाऊ ज़मीन उसी पानी से सब्जा ऊगा लेती है, सहरा की रेत उसी पानी से अपनी प्यास बुझा लेती है और वही पानी चिकने पत्थरों को महज़ छू कर गुजर जाता है,
अल्लाह की रहमत हर दिल के लिए एक जैसी है, अब ये हम पर है के , हम पर इसका कितना रंग चढ़ता है,
" और अल्लाह का रंग सब रंगों से बेहतर है "
अपना खुद का मुहासबा कीजिए
Umair Salafi Al Hindi

Wednesday, January 19, 2022

वो कहते है कुछ नही था ज़मिन व आसमान नही था सब जगह गेस ही गेस थी अचानक एक विसफोट हुवा और कायनात तशकिल पा गयी

 



वो कहते है कुछ नही था ज़मिन व आसमान नही था सब जगह गेस ही गेस थी अचानक एक विसफोट हुवा और कायनात तशकिल पा गयी ,,

लेकिन जब उनसे पुछा गया कि वो विसफोट किसने किया ?
तो साईंस इस सवाल पर घुटने टेक देता है ,,और वो कहते हुवे निकल जाते है कि बस हो गया ,,
जबकी इस सवाल का जवाब कोई नही दे सका ना दे सकेगा सिवाए कुरान के कुरान कहता है
اَوَ لَمۡ یَرَ الَّذِیۡنَ کَفَرُوۡۤا اَنَّ السَّمٰوٰتِ وَ الۡاَرۡضَ کَانَتَا رَتۡقًا فَفَتَقۡنٰہُمَا
यानी - क्या काफिरो ने ये ख्याल ना किया कि ज़मिन आसमान बन्द थे तो हमने उन्हे खोला ( सुराह अम्बिया आयत 30)

तो रतका कहते है खोलने को ,,फेलाव को ,जुदा करने को
वो कहते है बस युही जुदा हो गये अरे नादानो आयत ने बता दिया कि उसको खोलने वाला वो है जिसने तुम्हे ये बताया कि कायनात से पहले गेस ही गेस थी
ثُمَّ اسْتَوَىٰ إِلَى السَّمَاءِ وَهِيَ دُخَانٌ
यानी -फिर आसमान कि तरफ कस्द फरमाया और वहा धुआँ था ( सुराह हाममिम सज्दा आयत 11)

तो दोस्तो ये एडवन हर्बन और न्युटन यही कुरान से इल्म ले लेकर अपनी रिसर्च का नाम देकर नास्तिको को बेवकुफ बना रहे है और नास्तिक उनके चक्कर मे या ज्यादा पढे लिखे नाम निहाद मुस्लिम कुरान से दुर हो रहे है ..

Tuesday, January 18, 2022

शादी जिंदगी का मकसद नहीं है, एक हिस्सा है जिंदगी का ,...




 शादी जिंदगी का मकसद नहीं है, एक हिस्सा है जिंदगी का ,...


क्या आप इसी लिए पैदा हुए हैं के बस किसी अच्छे इंसान से शादी हो गई और जिंदगी का मकसद पूरा हो गया...?? और अगर इसमें ताखीर हो गया या कोई पसंद का इंसान ना मिला तो उसे जिंदगी का End ही समझ लिया ??

खुद को खत्म कर लिया , या नाशुक्री और डिप्रेशन में जिंदगी गुजार दी ..??

मोमिन तो ऐसा नहीं होता !!

मोमिन तो बड़े मकसद के लिए जीने वाला होता है, उसकी सोच तो इससे बहुत आगे की होती है,फिर कैसे हो सकता है के वह इस सब में उलझा रहे , और उन्ही फिक्रों में खुद को घुला दे, जिंदगी को बर्बाद कर दे, अल्लाह से शिकवे नाराजगी का इज़हार करता रहे..

" Life isn't a fairy tale ۔۔۔ जिसका End ये हो के शहजादा शहजादी की शादी हो गई और वह हंसी खुशी रहने लगी"

अल्लाह का प्लान आपके प्लान से मुख्तलिफ भी हो सकता है ?? क्या आप ज्यादा इल्म वाले , अकल वाले हैं या वह गायब वा जाहिर का जानने वाला, हकीमुल खबीर है ???

मानते हैं ना उस रब की हिकमतें आपकी सोच से भी बलातर हैं... फिर क्यों नहीं उस पर भरोसा करते ?? क्यों नहीं उसके सुपुर्द अपने मामलात करते ??

कितने ही मामलात आपके ऐसे थे जो बजाहिर तकलीफदेह थे, पर वह कुछ अरसे की बात थी, अल्लाह ने उन हालात से कितनी खैर निकाली,कितना कुछ सिखाया, कितना कुछ अता किया ,

और कितने ही मामलात ऐसे थे जो बजाहिर आपको बहतारीन लगते थे, कितनी ही चीज़े कितने ही इंसान ऐसे थे, जो आपको बहुत अच्छे लगते थे पर उनके जरिए कितना नुकसान पहुंचा आपको, कितना छुपा शर मिला आपको..

हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम या हज़रत मरयम अलैहिस्सलाम की मिसाल देखें, उनसे इफ्फत और पाकीजगी सीखे, क्या वह किसी गलत राह पर चले ??

क्या अपनी जिंदगी उन्होंने उन छोटी छोटी फिक्रों में गुज़ार दी, क्या उनकी जिंदगी का सिर्फ यही मकसद था ?

हज़रत आसिया , हज़रत नूह, हज़रत लूत के आज़वाज की मिसाल देखें, क्या उन्होंने इस गम में अपनी जिंदगी बर्बाद कर दी के उनके आज़वाज (Spouse) उनकी तवक्को के मुताबिक या उन जैसे नहीं, वह दीन में उनके मददगार नहीं ??

वह उस सबसे बलातार थे, उनकी जिंदगियां अपने रब के नाम थी, उनका मकसद रब की रज़ा , उसके दीन की सरबुलंदी था, तभी उनके साथ अल्लाह की मदद थी

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks