Monday, February 14, 2022

ये कतरनों का मरकज है

 



ये कतरनों का मरकज है, यहां जो कतरन बंधी हुई हैं ये हमारे समाज के ना आसूदा ख्वाहिशात हैं,अधूरे ख्वाब है,नाकाम हसरतें हैं, आधी अधूरी तमन्नाएं और मायूस दुवाएं हैं जो अकीदे की कमज़ोरी और जिहालत वा नादानी में गंदे कतरनों के साथ बांध दी गई है,

कतरने बता रही हैं के यहां अल्लाह नहीं रहता!!

ये कतरनें ये भी बता रहीं हैं के यहां बच्चे पैदा करना, शादी करवाना,कारोबार में बरकत डालना,अच्छी नौकरी का बंदोबस्त करना, रूठी बीवी मनाना,महबूब को हासिल करना, ये सब शायद अल्लाह के दायरे इख्तियार में नहीं, बल्कि ये सब कुछ इन कतरनों के जरिए मिलता है,

ये कतरनें कमीज़ फाड़ कर बनाई गई होगी, सलवार फाड़ कर बनाई गई होंगी, दुपट्टे फाड़ कर बनाई गई होंगी या चादरें फाड़ कर बनाई गई होंगी,

यही कतरनें जब कपड़े, कमीज़, सलवार, दुपट्टे या चादरों की शकल में किसी के पास थी तो उनकी मन मांगी मुरादें पूरी नहीं हो रहीं थी लेकिन जब उनकी कतरने बना कर उन्हें कहीं बांध और लटका दिया गया तो मन मांगी मुरादों में जान पड़ने लगी ??
बदकिस्मती से ये सब इस समाज में हो रहा है जो एक अल्लाह और एक अल्लाह के दायरे इख्तियार पर यकीन रखने का दावा करता है,

मेरे पास बहुत कुछ है जो मुझे बगैर मांगे मिला है, मेरे पास बहुत कुछ है जो शायद मांगने से मिला है, मेरे पास बहुत कुछ नहीं है जो मैं एक लंबे अरसे से मांग रहा हूं,

लेकिन मुझे कभी इन कतरनों में दिलचस्पी वा दिलकशी महसूस नहीं हुई क्योंकि मुझे पता है मेरी कमीज़ या सलवार से अलग होने वाली कतरन और चिथड़ों में कुछ नहीं है, वहां ना तो मेरे बच्चे हैं,ना मेरा कारोबार है,ना मेरी शादी है, ना मेरा महबूब है,और ना मेरा फायदा और नुकसान है,

मुझे मालूम है के ये सब चीजें सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ताला के दायरे इख्तियार और उसी के कब्जे कुदरत में हैं,
ना तो मेरा अल्लाह बहरा है, ना अंधा है और ना ही बेवकूफ है जो वह मेरी जायज जरूरतें और नेक तमन्नाएं ना समझ सके,इसलिए मुरादें बिना किसी शरीक किए हुए अपनी सारी मुरादें अल्लाह से मांगें वो ही कय्यूम और जिंदा जावेद है,
यकीन करें, बेजान कतरनों और लटकते गंदे चिथड़ो से कभी किसी को कुछ नहीं मिला और ना ही कभी किसी को कुछ मिलेगा
मंकूल
साभार: Umair Salafi Al Hindi
blog: Islamicleaks

Sunday, February 13, 2022

जानते हैं !!

 



जानते हैं !!

अल्लाह से मुहब्बत को भी Revive करने की जरूरत रहती है, उस मुहब्बत को अगर बढ़ाने की कोशिश नहीं की जाए अगर उसका तजकिरा ना किया जाए,
अगर इसको दूसरों में ना बांटा जाए,
अगर उसके खातिर खुद को थकाया ना जाए,
अगर उसको पाने के लिए अपनी मर्ज़ीयां, अपनी अना , अपनी तरजीहात कुर्बान ना की जाए तो....
तो ये मुहब्बत उसी मक़ाम पर नहीं रहती फिर ये रफ्ता रफ्ता घटने लगती है, फिर ये आदत सी बनने लगती है, फिर ये फीकी पढ़ने लगती है, इसमें वो पहले की सी तड़प वा शिद्दत नहीं रहती, फिर अमाल भी बेदिल से होने लगते हैं, फिर दिल मे वो करार ,चेहरे पर वो मुहब्बत भरी मुस्कुराहट, अखलाक में वो गर्मजोशी, कोशिशों में वो इखलास बाकी नहीं रहता ,
साभार: सबा यूसुफजई
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Saturday, February 12, 2022

आपको क्या लगता है पगड़ियों की इज्ज़त हमेशा औरत ही चुकाती है ?

 



आपको क्या लगता है पगड़ियों की इज्ज़त हमेशा औरत ही चुकाती है ?
आपको लगता है मुहब्बत सिर्फ औरत ही करती है ?
आपने कभी मुहब्बत में हारा हुआ मर्द नहीं देखा, आखिर मर्द जो ठहरा !!! शिकस्त को चेहरे पर नहीं लाता दुख को आंखों से नहीं बहाता ,

जिम्मेदारियों के बोझ से निढाल अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी शिकस्त को खामोशी से कुबूल करके उस ज़ख्म को सीने में दबा देता है, यहां तक के मुहब्बत का ज़ख्म नासूर बनकर उसको वक्त से पहले बूढ़ा करके कब्र तक ले जाता है

साभार: बहन अनम

Friday, February 11, 2022

हां! सय्येदना मुआविया बागी हैं




 हां! सय्येदना मुआविया बागी हैं


क्योंकि आज की तारीख में हर वो शख्स बागी तसव्वुर होगा जिसने कुरआन के हुक्म पर अमल किया ,

सुलह हुदैबिया के वक्त जब मुश्रिकीन ए मक्का ने नबी ए करीम मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर मक्का में दाखिले पर पाबंदी आइद कर रखी थी, अल्लाह के नबी चंद अफ़राद को लेकर उमराह के इरादे से मक्का की तरफ रवाना हुए और हुदैबिया के मकाम पर पड़ाओ डाला , आप सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने सैय्यदना हज़रत उस्मान बिन अफ्फान को अपना दूत बनाकर मक्का रवाना किया ,

उस वक्त अल्लाह के नबी एक पेड़ के नीचे अपने साथियों के साथ तशरीफ फरमा थे के अचानक आप तक एक खबर पहुंची के मक्का वालों ने नबी ए पाक के दूत उस्मान को शहीद कर दिया है,

ये खबर सुनते ही राहमतुलिल आलमीन जिनकी नरमी और बर्दाश्त की दुनिया मुतारिफ है वह हलीमुल फितरत नबी इंतहाई घुस्से में आकर ऐलान करते हैं के मैं उस्मान के कतल का किसास लिए बगैर वापस नहीं जाऊंगा और अपना दाहिना हाथ आगे कर दिया के कौन कौन मेरे साथ उस्मान का किसास लेना चाहता है, जिसपर वहां मौजूद तमाम सहाबा किराम ने नबी ए करीम मोहम्मद सल्ललाहो अलैहि वसल्लम के हाथ पर अपने हाथ रखकर बैय्यत कर ली के हम में से कोई उस वक्त तक वापस नहीं जायेगा जबतक उस्मान के खून के एक एक कतरे का हिसाब नही चुका देते,

इस पर कुरआन की ये आयत नाजिल हुई के अल्लाह भी तुम्हारे साथ इस बैय्यत में शामिल है और उन तमाम बैय्यत करने वालों पर सकीनत नाजिल कर दी,

لَقَدۡ رَضِیَ اللّٰہُ عَنِ الۡمُؤۡمِنِیۡنَ اِذۡ یُبَایِعُوۡنَکَ تَحۡتَ الشَّجَرَۃِ فَعَلِمَ مَا فِیۡ قُلُوۡبِہِمۡ فَاَنۡزَلَ السَّکِیۡنَۃَ عَلَیۡہِمۡ وَ اَثَابَہُمۡ فَتۡحًا قَرِیۡبًا ﴿ۙ۱۸﴾

तर्जुमा: " यकीनन अल्लाह उन मोमिनों से बड़ा खुश हुआ जब वो दरख़्त के नीचे तुम से बैय्यत कर रहे थे और उनके दिलों में जो कुछ था वह भी अल्लाह को मालूम था , इसलिए उसने उनपर सकीनत उतार दी, और उनको इनाम मे एक करीबी फतह अता फरमा दी "

(कुरआन सूरह फतह आयत 18)

कुछ देर बाद ये मालूम होता है के सैय्यदना उस्मान बिन अफ़ान की शहादत की खबर महज़ अफवाह थी मगर रब तो सब कुछ जानता था तो फिर भला वो क्यों ऐसी बय्यत का हिस्सा बन गया जिसकी बुनियाद ही एक अफवाह पर रखी गई थी, इसका सिर्फ एक ही मकसद हो सकता है के ये शायद मुस्तकबिल के अंदेशे की तरबियत थी के कल को जब उस्मान बिन अफ़फान को हकीकत में कतल कर दिया जाए तो इस बय्यत रिजवान पर अमल किया जाए,

और हज़रत मुआविया बागी हो गए क्योंकि उन्होंने कुरआन में मौजूद अल्लाह के हुक्म पर किसास उस्मान का मुतालिबा कर दिया और दुनिया वा तारीख की नजरों में बागी हो गए...

किसास के मुतालिबे पर मुआविया को बागी कहने वालों अपने कुरआन से ये आयत खतम कर दो क्योंकि जबतक ये आयात कुरआन में मौजूद रहेगी इंशा अल्लाह मुआविया की बेगुनाही साबित होती रहेगी

तहरीर: उस्मान पटनी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
blog: Islamicleaks 

Thursday, February 10, 2022

STORY OF MUQALLID (BLIND FOLLOWERS)

 



STORY OF MUQALLID (BLIND FOLLOWERS)

एक गांव मे अंधे पति-पत्नी रहते थे । इनके यहाँ एक सुन्दर बेटा पैदा हुआ। पर वो अंधा नही था।

एक बार पत्नी रोटी बना रही थी। उस समय बिल्ली रसोई में घुस कर बनाई रोटियां खा गई।
बिल्ली की रसोईं मे आने की रोज की आदत बन गई इस कारण दोनों को कई दिनों तक भूखा सोना पड़ा।
एक दिन किसी प्रकार से मालूम पड़ा कि रोटियाँ बिल्ली खा जाती है।
अब पत्नी जब रोटी बनाती उस समय पति दरवाजे के पास बाँस का फटका लेकर जमीन पर पटकता।
इससे बिल्ली का आना बंद हो गया।
जब लङका बङा हुआ और उसकी शादी हुई।
बहू जब पहली बार रोटी बना रही थी तो उसका पति बाँस का फटका लेकर बैठ गया औऱ फट फट करने लगा।

कई दिन बीत जाने के बाद पत्नी ने उससे पूछा कि तुम रोज रसोई के दरवाजे पर बैठ कर बाँस का फटका क्यों पीटते हो?
पति ने जवाब दिया कि
ये हमारे घर की परम्परा (रिवाज) है इसलिए मैं ऐसा कर रहा हूँ।

कहानी का सार:

माँ बाप तो अंधे थे, जो बिल्ली को देख नहीं पाते थे, उनकी मजबूरी थी इसलिये फटका लगाते थे। पर बेटा तो आँख का अंधा नही था पर अकल का अंधा था,
इसलिये वह भी वैसा करता था जैसा माँ-बाप करते थे।

ऐसी ही दशा आज के अपने समाज की है।
पहले शिक्षा का अभाव था इसलिए #पाखण्डी लोग जिनका स्वयं का भला हो रहा था, पाखण्डवादी मूल्यों को अपनाया और फैलाया। जिनके पीछे किसी प्रकार का लाजिक नहीं है।

लेकिन आज पढ़लिख कर, शिक्षित होने के बाद भी अपने समाज के लोग उन्हीं पाखंडपूर्ण परम्पराओं व रूढ़िवादिता के वशीभूत हो कर जीवन जी रहे हैं।
ऐसे समाज व व्यक्तियों को #आँख_का_अंधा कहा जाता है।

इसलिये किसी भी परम्परा को सबसे पहले समझो, जानो और सही प्रतीत हो तब मानो, तभी समाज में परिवर्तन होगा नहीं तो वही......ढाक के तीन पात,,,,,

Wednesday, February 9, 2022

मैं अरबों को चकनाचूर कर दूंगा !! ( ईरान के बादशाह यजदगर्द की धमकी)

 



मैं अरबों को चकनाचूर कर दूंगा !! ( ईरान के बादशाह यजदगर्द की धमकी)

दौर ए जिहालत में अरब कबायेल, बनू शायबां,बनू बक्र बिन वायल और बनू हनीफा ( आल ए सऊद का कबीला) ने जब मुआरका जिल्कार में फारस के मुकाबले में फतह हासिल की तो इन कबायल के हौसले बढ़ गए , और फिर जब बनू शायबान कबीले के मशहूर शुरखील नौजवान मुस्सन्ना बिन हारिश नौ हिजरी को मदीना में आकर अल्लाह के रसूल के हाथों मुसलमान होकर गए थे,

तो वह हज़रत अबू बक्र सिद्दीक के जमाना ए खिलाफत में मदीना हाजिर हुए और मस्जिद नबावी में अहले फारस के खिलाफ एक पुरजोर तकरीर की और सहाबा किराम से कहा के ," अब अहले फारस का गुरूर हमने खाक में मिला दिया है,अगर आप लोग हमें थोड़ी सी मदद करें तो मैं फारस की ईट से ईट बजा दूंगा"

उनकी तकरीर को सहाबा किराम ने एक जज़्बाती तकरीर समझा और मस्जिद नबावी में चिमगोइया शुरू हो गई, कहां सुपरपावर अहले फारस और कहां एक कबीले का सरदार मुसन्ना इब्न हारीश

इस मौके पर के जब तमाम मुसलमान खामोश थे तो उस वक्त हज़रत उमर फारूक ही थे जिन्होंने अहले फारस से टक्कर लेने की सोची,वह हज़रत अबू बक्र सिद्दीक से फरमाते हैं के आप इस नौजवान की मदद करें, और खालिद बिन वलीद को एक फ़ौज देकर उसके साथ भेजें,

चुनाँचे हज़रत अबू बक्र ने हज़रत खालिद बिन वलीद की इमारत में एक लश्कर हजरत मुसन्ना बिन हारिश के ताऊन के लिए भेजा जिन्होंने वहां जाकर अहले फारस के साथ तीन मशहूर जंगें की और फतह हासिल की,

अर्धशेर की वफात और यजदगर्द की ताजपोशी!!

ईरान का बादशाह अर्दशेर जब फौत हुआ तो नौ उम्र यजदगर्द उनका बादशाह बना उसने अपनी ताजपोशी के दौरान बाद मुसलमानों से टक्कर लेने की सोची क्योंकि मुसलमानों ने दक्षिणी इराक़ का एक मुकम्मल हिस्सा उससे छीन लिया था,

और यजदगर्द ने मुसलमानों को पैगाम भिजवाया के मैं तुमसे निपट लूंगा और तुम्हे चकनाचूर कर दूंगा, उसने दो लाख की तादाद में फौज इकट्ठी की जिसमे साठ हज़ार घुड़सवार, साठ हज़ार ऊंटसवार और अस्सी हजार पैदल फौज थी,और तीस या चालीस के बीच हाथी भी तैयार कर लिए , और अपने मुल्क के छह बहतरीन कमांडरों का इंतेखाब किया जिनमें , रुस्तम, हरमुजान, मेहरान, बहमन जूदेव, जानीलूस, वगेरह थे,

उस वक्त हज़रत अबू बक्र सिद्दीक मर्जुल मौत में मुब्तिला हो गए थे,
जारी

साभार: शैख अब्दुल खालिक भट्टी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks

Tuesday, February 8, 2022

" तुम्हारा हश्र यजीद के साथ हो "




 " तुम्हारा हश्र यजीद के साथ हो "

एक तबका आपको ये कहते हुए नज़र आता है के अल्लाह तुम्हारा हश्र यजीद के साथ करे और हमारा हुसैन के साथ,
बंदा पूछे अगर कयामत के दिन यजीद भी हुसैन के साथ हुआ तो तुम्हारा क्या होगा ??
एक बड़े आलिम थे शेख अब्दुल मुगीस अल हंबली रहमतुल्लाह उन्होंने यजीद बिन मुआवियां के फजायेल पर किताब लिखी जिसका नाम था "فضل یزید" इस किताब के रद्द पर इमाम इब्न जौजी रहमतुल्लाह ने किताब लिखी "الرد المتعصب العنید المانع من ذم یزید " इन दोनों उलेमाओं का आपस में रद्द वा क़द आखिर वक्त तक चलता रहा ,
अब आप यूं समझ लें के इब्न जौजी आज के हालात में बन गए हुसैनी और शैख मुगीस बन गए यजीदी
तो उस यजीदी के बारे जिसने यजीद के फजाएल पर किताब लिखी इमाम इब्न जौजी रहमतुल्लाह अलैह आखिरकार फरमाते हैं ," मैं उम्मीद करता हूं के अब्दुल मुगीस और मैं जन्नत में एक साथ होंगे "
इमाम ज़ौजी रहमतुल्लाह एक यजीदी के जन्नत में अपने साथ होने की उम्मीद का इज़हार फरमा रहें हैं, जबकि आजके नाम निहाद हुसैनी जब जवाब देने से आजिज आ जाते हैं तो आखिरी हथियार ये इस्तेमाल करते हैं,
" अल्लाह तुम्हारा हश्र यजीद के साथ करे और हमारा हुसैन के साथ"
तो हम पूछते हैं के यजीद भी अगर सय्येदना हुसैन के साथ हुआ तो तुम लोग कहां होगे ??
साभार: डॉक्टर अजमल मंजूर मदनी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks