Wednesday, February 4, 2026

स्विट्ज़रलैंड में बच्चों का गोश्त खाने वाला फ़व्वारा!!

 




स्विट्ज़रलैंड में बच्चों का गोश्त खाने वाला फ़व्वारा!!


तुम्हारे ख़याल में वो एक मूर्ति क्यों रखते हैं जो एक आदमी को बच्चों का गोश्त खाते दिखाता है?
और ये ख़याल कहाँ से लाए अगर ये वाक़ई न हो रहा हो?

और क्या बात यहाँ तक पहुँच गई कि बच्चों का गोश्त खाने वालों की इज़्ज़त-अफ़ज़ाई के लिए एक ख़ास फ़व्वारा बनाया जाए?

शैतानी रस्मात जो “तलमूद और ज़ोहार” की तहरीरों में जड़ी हुई हैं, और कहानी को समझने के लिए पहले ये जानना ज़रूरी है कि रब्बानी किस तरह “ग़ैर-यहूदी” बच्चों को देखते हैं।
● तलमूद - सनहदरीन 54b
“यहूदी के लिए नौ साल से कम उम्र के लड़के के साथ हमबिस्तरी जाइज़ है बग़ैर उसे ज़िनाकारी समझे”
● तलमूद - सनहदरीन 55b
“यहूदी के लिए तीन साल और एक दिन की उम्र की लड़की से शादी जाइज़ है”
● तलमूद - कितोबोत 11b
“जब एक बालिग़ आदमी एक छोटी लड़की के साथ हमबिस्तरी करता है तो ये कुछ भी नहीं”
● यबूमोत - 98a
“तुम यहूदियों को इंसान कहा जाता है, जबकि दुनिया की क़ौमें इंसान नहीं कहलातीं”
● ज़ोहार (पहला हिस्सा, सफ़्हा 131a)
“क़ौमें जानवरों की तरह हैं, और उनकी औरतें जानवरों की बेटियों की तरह”

ये “इन्फ़रादी इनहिराफ़” नहीं हैं बल्कि “तलमूद और ज़ोहार” में मुक़द्दस तहरीरें हैं, और अब हम “एपस्टीन” जज़ीरे पर वापस आते हैं

- बच्चों को क्यों ज़्यादती का निशाना बनाया जाता था?
- उन्हें मौत तक क्यों अज़ीयत दी जाती थी?
- उनका ख़ून (एड्रीनोक्रोम) क्यों पिया जाता था?

क्यूँकि ये शैतानी रस्मात हैं और तलमूद ने बच्चों की ज़्यादती को जाइज़ ठहराया, “ज़ोहार” ने ग़ैर-यहूदियों की इंसानियत को छीन लिया, जबकि “कबाला” ने “जादुई पहलू” शामिल किया कि बच्चों का ख़ून शैतानी ताक़त है, यहाँ तक कि मुसलमान मुल्कों में भी इसी यहूदी तरीक़े का तसल्लुस है जैसे जादूगर या शोबदा-बाज़ जिनके लिए बच्चा या जानवर क़ुर्बानी के तौर पर मांगता है और ख़ून को ख़फ़ी तौर पर अलग-थलग तारीक जगह पर बहाया जाता है।

और “जज़ीरों” और “सीवर्स” का इख़्तियार यहूदियों के लिए इत्तिफ़ाक़ी नहीं है, क्यूँकि तलमूद की सिफ़ारिश है: “अपनी बुराई वहाँ कर जहाँ कोई तुम्हें न जानता हो, और अपने अक़ीदे को ग़ैरों से छिपाओ” इसलिए अलग-थलग जज़ीरे और तारीक सीवर्स उनकी रस्मात के लिए ख़फ़ी अड्डे थे ⛧⁶𖤐⁶ “तलमूद और कबाला” में बुनियादी क़ायदा के मुताबिक़ ग़ैर-यहूदियों से अक़ीदे को छिपाना।

क्या तुम जानते हो कि “ज़ोहार” ग़ैर-यहूदियों के ख़ून बहाने को नजात की जल्दी से जोड़ता है? और ये वजह बताता है कि एपस्टीन ने ख़ुद को सियासत और पैसे के आदमियों से क्यों घेरा और उन्हें अपनी रस्मात में शामिल किया, ये महज़ करप्शन का नेटवर्क नहीं बल्कि “मुनहिरफ़ ईमान” का नेटवर्क है।

और एपस्टीन एक मरहले का काहिन था, महज़ जिस्मों का दलाल नहीं, और जज़ीरा महज़ अख़लाक़ी स्कैंडल नहीं बल्कि एक छोटी खिड़की थी जो एक ख़फ़ी दीन को ज़ाहिर करती है जो दुनिया पर हुकूमत करता है, एक दीन जो बच्चों को क़ुर्बानियाँ बनाता है और शैतान को ख़ुदा, और ये वो राज़ है जिसे वो तुम्हारे शुऊर तक पहुँचने से डरते हैं।

चाहे ये ब्लैकमेल हो, इताअत हो या बातिल ईमान, जो मुसलमानों के ख़ून की हिफ़ाज़त न करे वो ख़याली सरहदें भी नहीं बचा सकता जो इस्तेमार ने खींचीं, और जो उम्मत को पहले धोखा दे वो वतन को आख़िर में बेच देगा, और इसी लिए कुछ हुकमरानों की ग़ज़ा में क़त्ल-ए-आम पर ख़ामोशी इस बात का वाज़ेह सबूत है कि वो इस ड्रामे का हिस्सा हैं न कि वतनों के मुहाफ़िज़।

और क्या तुम जानते हो कि अगर एक यहूदी एक ग़ैर-यहूदी तीन साल की लड़की पर ज़्यादती करे तो लड़की को सज़ा दी जाएगी क्यूँकि उसने यहूदी को ज़्यादती पर मजबूर किया, और यहूदी पर कोई गुनाह नहीं?!

बहरहाल! एपस्टीन की फ़ाइलें और इस वक़्त लीक का शाया होना महज़ तवज्जोह हटाने के लिए है, और एपस्टीन केस को अशरों से बनाया गया है, जबकि इसे तर्तीब दे कर दुनिया की निगाहें आने वाली तमाम तबाहियों से हटाने के लिए दबाव के कार्ड के तौर पर।
दुनिया फटने के क़रीब है और अवाम (पब्लिक) शुऊर की ग़ैर-मौजूदगी की हालत में हैं और ऐसी चीज़ों के पीछे दौड़ रहे हैं जो किसी काम की नहीं..!