Sahaba Impex

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Wednesday, July 25, 2018

OONT KA PESHAB AUR HINDU BHAI KE SAWAAL

हमारे मित्र विकी कुमार भाई ने हमें एक स्टेटस मे टैग किया जिसमें उन्होंने प्यारे नबी सल्ल. की छवि को धूमिल करने के लिए नबी करीम सल्ल. पर ये झूठा आरोप लगाया कि माज़अल्लाह नबी सल्ल. ऊंट का पेशाब पिया करते थे ( पूरी तरह बेसलेस और झूठा आरोप )
 

फिर विकी भाई ने लिखा था कि नबी स. ऊंट के पेशाब से बीमार मुसलमानों का इलाज करते थे . और जो भी व्यक्ति मुसलमान बनने के लिए रसूल के पास आता था वे उसे ऊंट की पेशाब जरूर पिलाते थे रसूल फरमाते थे कि ऊंटों की पेशाब मुफीद होती है और कारगर दवा होने के कारन मैं भी इसका इस्तेमाल करता हूँ . (अस्तगफार)
 

सबूत के लिए भाई ने
बुखारी -(वुजू )जिल्द 1 किताब 4 हदीस 234
बुखारी -जिल्द 8 किताब 82 हदीस 794
और बुखारी -जिल्द 7 किताब 71 हदीस 590 के सन्दर्भ बताए थे ॥
 

 भाई को हमारा जवाब :- विकी भाई, आपने रेफ्रेन्स तो सही दिए पर हदीस के शब्दों को अच्छी तरह से बदल डाला है, और आपने ये झूठ बोलकर और मूर्खता दिखाई कि नबी सल्ल. माज़अल्लाह ऊंट का पेशाब पीते थे और नव मुस्लिमों को इसे पीने की आज्ञा देते थे, .. 

धिक्कार है आपके बेबुनियाद झूठ पर भाई,

 सभी जीवों का मल मूत्र और प्रतिबंधित किए हुए जीवों का मांस आदि कुछ ऐसी चीजें है जिन्हें आम हालत मे किसी भी मुस्लिम के लिए खाना हराम है ॥
 

किन्तु पवित्र कुरान मे हराम चीजों का उल्लेख करने के साथ ये भी इजाज़त दे दी गई है, कि यदि कोई इंसान ये हराम चीजे खाने पर मजबूर हो जाए, और उसका मकसद अल्लाह की नाफरमानी करना न हो तो वो हराम चीज खा सकता है, मसलन उसकी जान को खतरा हो और इसके अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प न हो कि किसी हराम की गई चीज के खाने पर जान बच सकती हो तो मुस्लिम अपनी जान बचाने के उद्देश्य से वो अपवित्र चीज खा सकता है !
 

जिन हदीस के सन्दर्भ आपने दिए उनमें लिखा है कि कुछ लोग जो बेहद बीमार और कमजोर थे वे नबी सल्ल. के पास आए और नबी सल्ल. से सहारा मांगा, आप सल्ल. ने उन बीमार लोगों को ऊंटनी का दूध और ऊंटनी का ही पेशाब दवा के तौर पर पीने की सलाह दी, थोड़े ही दिनों मे वो लोग इस इलाज से खूब तन्दुरूस्त हो गए थे ॥
आज अमेरिका के कैंसर अनुसंधान केन्द्र समेत अनेक मेडिकल रिसर्च सेंटर्ज़ का कहना है कि ऊंट का पेशाब कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियों का इलाज करने मे कारगर है .... तो समझ मे आता है कि सम्भवत: उन बीमार बद्दुओं को भी कैंसर जैसा ही कुछ जानलेवा रोग हो गया था, जो नबी सल्ल. के सुझाए इलाज से ठीक हो गया ।
 

और भाई ये तो जगजाना तथ्य है कि दुनिया के लोग चाहे कितने पवित्र और शाकाहारी बनते हों, पर जब अपनी जान पर बनती है, तो अपने डाक्टर की हर सलाह मानकर गन्दी से गन्दी चीज और किसी भी जानवर का रक्त और मांस खा लेते हैं,
 

ये तो आप जानते ही होंगे कि एण्टी बायोटिक दवाएं जानवरों के रक्त और मांस से बनती हैं, जिन्हे बीमार पड़ने पर आप बिना पथ्य अपथ्य का विचार किए खा जाते हो...
 

बहरहाल भाई बीमारी के इलाज के लिए ऊंटनी का पेशाब दवा के तौर पर इस्तेमाल करने की बात पर आपको ऐतराज नहीं करना चाहिए, क्योंकि आपके आयुर्वेद मे तो बीमारी के इलाज के लिए व्यक्ति को स्वयं अपना ही मूत्र पीने का इलाज सुझाया गया है, और दवा के लिये अनेक गन्दे पशुओं का मांस खाना भी सुझाया गया है ।
वो भी छोड़िए, आप जो ह्रष्ट पुष्ट होकर भी अकारण ही प्रसाद के नाम पर रोज गाय का पेशाब पीते हैं, कम से कम आपको तो किसी की जान बचाने के लिए ऊंटनी का पेशाब देने की चिकित्सकीय सलाह इतनी अनोखी नहीं लगनी चाहिए थी ॥
 

( सुनता हूँ कि अरब मे इस हदीस के कारण ऊंट के पेशाब पर अनुसंधान किए गए और उसे कैंसर रोधी पाया गया .... वैसे मेरा विचार है कि लोग केवल अपनी आध्यात्मिक पुस्तकों के प्रेम मे डूबकर ऐसे काम न करें जिनका खुद उनके और उनके समाज के गले से उतरना मुश्किल हो ... ऊंट का मूत्र कैंसररोधी होता है ये बात वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित हो गई, इतना काफी है ... लेकिन मैं ये ठीक नहीं समझता कि कैंसर के इलाज के तौर पर मुस्लिम ऊंट का मूत्र पीना शुरू कर दें जबकि कैंसर के इलाज के स्वच्छ और प्रभावी तरीके मौजूद हों ...
 

हां यदि ऊंट के मूत्र से बेहतर कैंसर का और कोई उपचार सिद्ध न हो तब इस विधि को अपनाने मे भी कोई हिचक नहीं होनी चाहिए, और ऐसी स्थिति मे केवल ऊंट का मूत्र ही क्यों, इनसान की जान बचाने के आखिरी और एकमात्र उपाय के रूप मे दूसरी हराम चीजों से भी सहायता ली जा सकती है, यही हदीस का वास्तविक मन्तव्य भी है ॥ )...... 


written by  Zia Imtiyaz

EK JANWAR SAARE GHAR WALON KI TARAF SE KAFI HAI CHAHE GHARWALON KI TADAD KITNI HI KYUN NA HO

Ek Janwar Sare Ghar Walo Ki Taraf Se Kafi Hai Chahe Gharwalo Ki Tadad Ketni Hi Kyu Na Ho:


Hazrat Ataa Ibn Yasaar Bayan Karte Hai Ke Maine Sawal Kiya Hazrat Abu Ayyub Ansari Raziallahuanhu Se Rasoolullah Sallallahualahiwasallama Ke Daur Me Qurbani Kaise Di Jati Thi? To Hazrat Abu Ayyub Ansari Raziallahuanhu Ne Farmaya:-

 Rasoolullah Sallallahualahiwasallam Ki Daur Me Ek Shaks Ek Bakri(Goat) Ki Qurbani Karta Tha Apne Aur Apne Sare Ghar Walo Ki Taraf Se Aur Wo Khud Bhi Khate Aur Dusro Ko Bhi Khilate Yaha Tak Ke Logo Ne Fakr Karna Suru Kar Diya Aur Jo Haal Hai Wo Tum Dekh Rahe Jo...
 

(Jami Tirmizi, Abwab Ul Azaayi, Babu Maja'a Innasshatal Wahidata Tujziyu An Ahlil Baiti)


Imam Tirmizi Ne Is Hadees Ko Hasan Sahih Karar Diya Hai,
Imam Shaukani Ne Bhi Is Hadees Ko Sahih Karar Diya Hai
(Nayl Ul Awtar, Kitab Ul Uzhiyata, Safa-137)
 

Imam Ibn Naqqash Ne Bhi Is Hadees Ko Sahih Karar Diya Hai.
 
(Al Ihkaam Ul Ahkam,Safa-254)


Ann Abdullahubnu Hishaami Qaula Kaana Rasoolullahi Sallallahualaihiwasallama Yuzhiya Bisshaati Wahidati Ann Jamiyi Ahlihi...


Hazrat Abdullah Ibn Hishaam Raziallahuanhu Farmate Hai Ke Rasoolullah Sallallahualaihiwasallam Ek Bakri Ki Qurbani Karte The Apne Sare Gharwalo Ki Taraf Se...
 
(Mustadrak Imam Hakim, Kitab Ul Uzhiya, Hadees-7555, Safa-255)


Imam Hakim Ne Is Hadees Ko Sahih Karar Diya Hai Aur
Imam Hafiz Zahabi Me Unki Muafiqat Ki Hai,Aur
Imam Hayshmi Ne Farmaya Ise Imam Tabrani Ne Apne Kabeer Me Riwayat Kiya Hai Aur Iske Rijaal Sahih Hai.
 

(Majma Uz Zawaid, Kitab Ul Uzhiya, Safa-21)


In Dono Hadeeso Me Waze Dalil Maujud Hai Ke Ek Bakdi Yani Goat Us Shaks Ki Taraf Se Jo Qurbani Kar Raha Hai Aur Uske Sare Gharwalo Ki Taraf Se Kafi Hai Chahe Gharwalo Ki Tadad Ketni Hi Kyu Na Ho Aur Yahi Rasoolullah Sallallahualaihiwasallam Ki Aur Sare Sahaba Ekram Rizwanullahialahiajmain Ki Sunnat Haiaur Yahi Kehte Hai Imaam Malik Aur Humare Ashab Imam Ahmad Ibn Hambal Aur Imam Ishaq Ibn Rahway Aur Imam Auzayi Aur Imam Lais Ibn Sa'ad Aur Imam Hakim Aur Imam Tirmizi Aur Imam Hayshmi Aur Imam Ibn Quiyim Aur Imam Shaukani Aur Imam Ibn Naqqash Ke Ek Janwar Us Shak Ki Taraf Se Jo Qurbani Kar Raha Hai Aur Uske Sare Gharwalo Ki Taraf Se Kafi Hai...
 

(Jami Tirmizi Abwab Ul Uzhiya)Taufat Ul Ahwazi Sharh Jami Ut Tirmizi, Jild-5, Safa-72)


Imam Abdullah Farmate Hai Ke Maine Apne Walid Yani Imam Ahmad Ibn Hambal Se Pucha Ke 1ek Bakdi(Goat) Sare Gharwalo Ki Taraf Se Qurbani Karne Ke Bare Me?To Unhone Yani Imam Ahmad Ibn Hambal Ne Farmaya,La Bayis Qad Zabiyun Nabiyi Sallallahualaihiwasallama Kabshaini Qurban Ahaduhuma Faqaula Bismillahi Haza Ann Muhammadu Wa Ahlil Baitihi...


Koi Harz Nahi Isme Balke Nabi E Kareem Sallallahualaihiwasallam Ne Do Mendha Zibah Kiya Aur Usme Se 1ek Janwar Apne Zibah Kiya Aur Farmaya Suru Allah Ke Naam Se Ye Muhammad Alahisalam Ki Taraf Se Hai Aur Unke Sare Gharwalo Ki Taraf Se...

(Masail Ul Imam Ahmad Ibn Hambal Lil Abdullah,Safa-262,)
(Masail Imam Ahmad Ibn Hambal Lil Ishaq,Safa-130)


Imam Ibn Quiyim Jauziya Ne Farmaya Rasoolullah Sallallahualahiwasallam Ki Sunnat To Ye Hai Ke 1ek Bakdi(Goat) Ek Shaks Aur Uski Sare Gharwalo Ki Taraf Se Kafi Hai Chahe Unki Tadad Ketni Hi Kyu Na Ho...
 

(Zaad Ul Maad, Jild-1, Safa-579)


Imam Shaukani Ne Farmaya,Wa Haqqu Innaha Tajzi Ann Ahlil Baiti Wa Inkaanu Maayitu Nafsi Aww Aksaru...


Haqq To Ye Hai Ke Ek Bakdi Kafi Hai Sare Gharwalo Ki Taraf Se Chahe Unki Tadad 100 Hi Kyu Na Ho Ya Inse Bhi Zyada....
 

(Nayl Ul Awtar, Kitab Ul Uzhiya, Safa-137)


Alhamdullah Etne Sare Dalil Ke Baad Aur Behes Aur Aur Koi Shak O Shuba Ki Koi Gunjais Hi Baki Nahi Rehta...


Rasool Allah Sallallahu Alaihi Wasallam Ne Farmaya:
 

"Main Tumhare Darmiyan 2 Cheezen Chod Kar Ja Raha Hoon (Quran Aur Sunnat Sahih Hadis) Jab Tak Tum Inhe Mazbuti Se Pakde Rahoge Hargiz Gumrah Nahi Hoge
 

(Hadis Al Hakim, Mo'atta Imam Malik)


#UmairSalafiAlHindi
#IslamicLeaks

मुसलमान एक धार्मिक समूह है, मुसलमानों को कोई राजनैतिक एजेंडा है ही नहीं,




आप राजनैतिक लड़ाई के लिए देश के मुसलमानों को एक साथ इकट्ठा होते हुए नहीं देख पायेंगे, ऐसा क्यों है ?
क्योंकि मुसलमान राजनैतिक समूह हैं ही नहीं , मुसलमान एक धार्मिक समूह है, मुसलमानों को कोई राजनैतिक एजेंडा है ही नहीं,
 

 मुसलमानों का बस धार्मिक एजेंडा है\ वह भी व्यक्तिगत,सामूहिक एजेंडा है ही नहीं, जबकि इसके बरक्स हिन्दू एक राजनैतिक समूह है, इस समुदाय का एक राजनैतिक एजेंडा है, इसका एक सुगठित राजनैतिक प्रशिक्षण का कार्य्रक्रम है,


हिन्दू धर्म नहीं है, हिन्दू एक राजनैतिक शब्द है, पांच सौ साल पहले अकबर के समय में तुलसीदास जब रामचरित मानस लिख रहे थे, तब तक भी उन्होंने अपने लिए हिन्दू शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था,
क्योंकि तब तक भी कोई हिन्दू धर्म नहीं था, कोई भी हिन्दू दुसरे हिन्दू जैसा नहीं है, कोई हिन्दू मूर्ती पूजा करता है कोई नहीं करता, कोई मांस खाता है, कोई नहीं खाता, 


आदिवासी ईश्वर को नहीं मानता,  गाय खाता है, मूर्ती पूजा नहीं करता,  लेकिन हिन्दुओं की रक्षा के राजनैतिक मुद्दे पर भाजपा को वोट देता है, अंग्रेजों नें भारत में अपने खिलाफ उठ रही आवाज़ को दबाने के लिए
एक तरफ मुस्लिम लीग को बढ़ावा दिया दूसरी तरफ हिन्दू नाम की नई राजनैतिक चेतना को उकसावा दिया,
आज़ादी के बाद पाकिस्तान बनने के साथ मुस्लिम लीग की राजनीति भी भारत में समाप्त हो गयी,
लेकिन संघ की अगुवाई में ज़मींदार, साहूकार,  जागीरदारों ने अपनी अमीरी और ताकत को बरकरार रखने के लिए अपना राजनैतिक एजेंडा बनाया, लेकिन ये लोग सत्ता में नहीं आ पा रहे थे क्योंकि यह मात्र चार प्रतिशत थे,
संघ के नतृत्व में इन लोगों नें लम्बे समय तक मेहनत किया, राम जन्मभूमि मुद्दे पर संघ ने दलितों,  आदिवासियों, ओबीसी को हिन्दू अस्मिता के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा संघ नें करोड़ों दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के मन में यह बिठा दिया की देखो यह बाहर से आये मुसलमान हमारे राम जी का मन्दिर नहीं बनने दे रहे हैं,
इस तरह जो दलित पास के आदिवासी को नहीं जानता था,  या जो ओबीसी हमेशा दलित से नफरत करता था
वह सब हिंदुत्व के छाते के नीचे आ गए,


मुसलमानों का हव्वा खड़ा करके अलग अलग समुदायों को इकट्ठा करना और असली राजनैतिक मुद्दों को भुला देना संघ की राजनीति की खासियत रही, संघ इसके सहारे सत्ता हासिल करने में पूरी तरह सफल हो गया,
दूसरी तरफ भारत का मुसलमान बिना किसी राजनैतिक एजेंडे के चलता रहा, 



भारत के मुसलमानों को लगता था कि  आजादी की लड़ाई के बाद हमारे नाम पर पाकिस्तान मांग लिया गया
और गांधी जी की हत्या भी हमारे कारण हो गयी है, इसलिए हमारे समुदाय को तो किसी बात पर मांग करने का कोई हक बचा ही नहीं है, हांलाकि न तो बंटवारे के लिए और ना ही गांधी की हत्या के लिए मुसलमान किसी भी तरह से कसूरवार ठहराए जा सकते थे, भारत के बंटवारे की नींव सावरकर की हिन्दू महासभा और हेडगवार के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा रखी गयी,


यहाँ तक कि मुस्लिम लीग की राजनीति भी हिन्दुओं की मुखालफत करना नहीं था, जबकि हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का शुरुआत से ही मुख्य एजेंडा मुसलमानों, ईसाईयों और कम्युनिस्टों की मुखालफत करने का तय किया गया था,


हिन्दू मह्सभा और संघ की पूरी राजनीति यह थी कि  भारत के लोगों को मुसलमानों और ईसाईयों का डर दिखाया जाय और मजदूरों किसानों और दलितों की बराबरी वाली राजनीति मांग को समाप्त किया जाय,
ताकि पुराने ज़मींदार, साहूकार और जागीरदार अपनी पुरानी अमीरी और ताकतवर हैसियत आजादी के बाद भी बरकरार रख सकें, अपनी राजनीति को जारी रखने के लिए संघ आज भी यही नफरत भारत के नौजवानों के दिमागों में नियमित रूप से डालता है,


भारत के मुसलमान आज भी किसी राजनैतिक एजेंडे के बिना भारत की मुख्यधारा की राजनीति में जुड़ने की कोशिश करते हैं, ध्यान दीजिये भारत के मुसलमान किसी भी साम्प्रदायिक दल को वोट नहीं देते,
क्योंकि मुसलमानों का कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं है,
 

इसलिए आप मुसलमानों को राजनैतिक मुद्दों पर इकट्ठा होते हुए नहीं देख पाते, इसलिए JNU  में नजीब नाम के लड़के को  जब संघ से जुड़े संगठन ने पीटा और गायब कर दिया तो उसकी लड़ाई धर्मनिरपेक्ष ताकतों नें लड़ी,
नजीब के लिए कोई मुसलमानों की भीड़ नहीं उमड़ पड़ी,
 

 हम मानते हैं कि भारत की राजनीति का एजेंडा समानता और न्याय होना चाहिए,
लेकिन संघी राजनीति इन्ही दो शब्दों से खौफ खाती है, इसका उपाय यही है कि बराबरी और इन्साफ के लिए
देश भर में जो अलग अलग आन्दोलन चल रहे हैं,  जैसे छात्रों का आन्दोलन, महिलाओं का आन्दोलन,
मजदूरों का आन्दोलन, किसानों का आन्दोलन,  दलितों का आन्दोलन, आदिवासियों का आन्दोलन,
उन सब के बीच संपर्क बने और वे मिलकर  इस नफरत की राजनीती को खत्म करके
बराबरी और न्याय की राजनीति से युवाओं को जोड़ दें। 

Himanshu Kumar

Sunday, April 15, 2018

TAX KI SHA’RAI HAISIYAT: RULING OF TAXATION IN ISLAM





Bismillahirrahmanirraheem



TAX KI SHA’RAI HAISIYAT: RULING OF TAXATION IN ISLAM

Tax Wo Rakam (Cash) Hai Jo Hukumat Chalaane Ke Liye Alag Alag Sooraton (Types) Me Logon Se Wasool Ki Jaati Hai, Aur Jo Log Taiy (Fixed) Waqt Par Tax Ada Na Karen Unke Khilaaf Kaanooni Kaarwaahi Ki Jaati Hai,

Kaha Jata Hai Ki Sabse Pahle Yunaan (Greece) Aur Rome  Me Sab Se Pahle Istemaal Hone Waali Cheezon (Goods) Par Tax Lagaaaya Gaya, Sabse Pahle Jis Mulk Ne Aam Income Tax Ke Nizaam Ko Apnaaya Wo Britain Hai,

Nepolean Bonaparte Ke Khilaaf Jung Ladne Ke Liye  Britain Hukumat Ne 1799 CE Me Income Tax Laagu Kiya,1810 Me Jung Khatam Hui Toh 1842 Tak British Logon Ko Is Tax Ke Bojh Se Azaad Kar Diya Gaya, Lekin Baad Me President Budget Me Khasaare (Budget Deficit) Ki Wajah Se Dobara Tax Laagu Kar Diya,

1880 CE Tak Log Tax Ke Aadi (Habitual) Ho Gaye, Isi Tarah Dheere Dheere Germany, France, Italy, Sweden Aur America Etc Me Be Tax Laagu Ho Gaya, Angrez Hindustan Me Aaya Toh Yahan Bhi Tax Laagu Ho Gaya,

Islam Ki Aamad Ke Mauqe Par Jo Mukhtalif (Different)  Qism Ke Tax They Unka Mukhtasar (Short) Bayan Is Tarah Hai

M’sak: Zamana E Jaahiliyat (Period Of Ignorance) Me Logon Se Zabardasti Wasool Kiye Jaane Wala Tax, Islam Ne Iski Muzammat Bayan Ki Au Rise Azeem Gunaah Aur Jahannum Me Daakhile Ka Zariya Qaraar Diya

Jiz’yah:  Ye Wo Tax Tha Jog Hair Muslimon (Non- Muslim) Se Unki Jaan Aur Maal Ki Hifaazat (Security Of Life And Wealth Tax) Ke Badle Me Wasool Kiya Jaata Tha, Islam Qubool Karne Se Ye Tax Khatam Ho Jaata Hai,

Khi’raaj : Ye Tax Bhi Ghair Muslims Par Lagaaya That Ha, Dar’asal Ye Unki Zameeno Par Lagan Tha, Jung Me Jeete Hue Ilaaqon Ko Unke Puraane Maalikon Ke Qabze Me Rahne Diya Jaata Aur Unke Ilaaqe Ke Aitbaar Se Khi’raaj Wasool Kiya Jaata

Za’reebah : Ye Bhi Tax Ki Ek Soorat Se Jo Ghulaamon Aur Ghair Muslamano Par Lagaaya Jaata, Musalmano Se Iska Koi Taalluq Na Tha.

Aa’shar:  Is Se Muraad Wo Tijarati Import Duty Thi Jo Yahood Aur Isaayi Aur Hinduon Ke Un Maalon Par Wasool Ki Jaati Thi Jo Tijaarat Karne Ki Wajah Se  Musalmano Ke Ilaaqe Me Laaya Karte They,

Waazeh Rahe Musalmano Par Sirf Zakaat Aur Aa’shoor Ki Hi Paabandi Hai, Iske Elawah Koi Apni Marzi Se Sadqah Wa Khairaat Karta Hai Toh Who Zyada Ajr Wa Sawaab Ka Mustahiq Hai, Zakaat Aur A’shar Ke Elawah Musalmano Par  Allah Ki Taraf Se Koi Bhi Tax Waajib (Obligatory) Nahin, Isiliye Imam Shaukani Ne Naqal Farmaaya Hai Ke

“In (Musalmano) Par Zaqaat Ke Elewa Koi Tax Ya Us Jaisi Koi Cheez Waajib Nahin”

(Neel Ul Awtar)

Aur Ek Riwayat Me Bhi Hai Ke

“Jab Tune Apne Maal Ki Zakaat Ada Kar Di To Jo Tujh Par Farz Tha Who Tone Poora Kar Diya”
(At Targheeb)

Islam Ne In Sab Zaalimaana Taxes Ke Bar’khilaaf (Opposite) Sirf Saal Me Ek Hi Baar Zakaat Farz Ki Hai, Aur Ghair Muslimon Se Bhi Un Par Waajib (Obligatory) Tax Se Zyada Wasool Karne Ki Ijaazat Nahin Di Toh Islami Riyaasat Me Musalmano Se Baar Baar (Income Tax, Sale Tax, GST, Import Duty, Excise Duty Etc) Ghair Islamic Tax Wasool Karne Ki Gunjaish Kaise Nikal Sakti Hai ??


Lihaza Waazeh Rah Eke Is Tarah Ke Tamam Tax Ghair Sharai Hain Islam Ka Inse Koi Taalluq Nahin 



#IslamicLeaks
#UmairSalafiAlHindi

Tuesday, April 10, 2018

SHADI KE BAAD SHAUHAR KA NAAM APNE NAAM KE SATH LAGANA HARAAM HAI





Bismillahirrahmanirrahem


SHADI KE BAAD SHAUHAR KA NAAM APNE NAAM KE SATH LAGANA HARAAM HAI

Jo Auratein Apni Shadi Ke Baad Apne Walid Ka Naam Hatakar Apne Shauhar Ka Naam Apne Naam
Ke Aage Lagati Hai Wo Haram Hai.
Misaal K Taur Pe, Shaadi Se Pehley Unka Naam "Fatima Maqsood Ali" Tha Aur Shaadi Hui Sajid Siddiqui Se, Ab Naam Badal Kr "Fatima Sajid Siddiqui" Ya Sirf "Fatima Sajid" Kar Liya. Ye Haraam Hai.

Iski Ijazat Nahi Hai Ki Koi Apney Baap (Walid) Ka Naam Hata Kar Apney Shauhar Ka Naam Ya Apney Shauhar K Khaandaan Ka Naam Apney Naam Ke Agey Lagaye, Ye Kuffar Ka Tareeqa Hai Hame Isko Apnane Se Bachna Chahiye.

AHADEES


Rasool’Allah Sallallahu Alaihi Wasallam Ne Farmaya:

 "Jisney Apney Naam Ko Apney Walid K Naam K Alawa, Apney Naam Me Kisi Dusre Ka Naam (Jo Uska Baap Nahi) Joda Us Par Allah Ki Aur Farishton Ki Lanat Hai "

(Ibn Maajah, 2599�)

Abu Dharr (Radiallahu Anhu) Ne Suna Ki Rasool'Allah Sallallahu Alaihi Wasallam Ne Farmaya :

“ Kisi Admi Ne Apne Walid K Siwa Apni Shinakht Kisi Aur K Saath Milaee Usne Kufr Kiya.
Jisney Us Shaks Se Apney Ko Joda Jo Uska Baap Nahi Wo Apna Thikana Jahannam Me Bana Le.”

(Bukhari 3508 And Muslim 61)

 Sad Ibn Abi Waqqaas Aur Abu Bakar (Radiallahu Anhuma) Ne Kaha Ki Rasool'Allah Sallallahu Alaihi Wasallam Ne Farmaya:

“Jo Ye Kehta Hai Ki Wo Musalman Hai Aur Wo Kisi K Saath Khud Ko Jodta (Attach) Hai Jo Uska Baap
Nahi, Ye Jaan Kar Ki Wo Uska Haqiqi Baap Nahi, Jannat Uske Liye Haraam Hai.”

[Bukhaari 4072 And Muslim 63]

Issey Zada Or Kya Warning Ho Sakti Hai..

Ye Kuffar Ka Tareeqa Tha Or Aaj Hamari Behne Bade Shauq Se Isko Apnati Hain, Yaad Rahey Baap
Ka Rishta Kisi Bhi Nae Rishtey K Aney K Baad Khatam Nahi Hota Aur Aulad Ki Shinakht Aur Pehchan Uske Walid K Naam Se Hi Hogi, Aur Apne Shauhar Ka Naam Apne Naam K Saath Lagana Ye
Kufr Aur Haraam Ka Bais Hai.

Shauhar Aur Biwi Ka Khoon Ka Rishta Nahi Hota Aur Naam Sirf Khoon K Rishtey Se Hi Joda Ja Sakta
Hai. Agar Kisi Wajah Se Uska Talaq Hoga To Us Surat Me Wo Kitney Naamo Ko Change Kareygi
Agar Shauhar Ka Naam Lagana Sahi Hota To Rasool’Allah Sallallahu Alaihi Wasallam
Ki
Biwiyon Ne Bhi Apna Naam Badla Hota Kyunki Unke Shauhar To Duniya K Afzal Tareen Shaks The.

Maslan(Example)

Khadeeja (Radiallahu Anha) Hamesha Khadeeja Bin Khuwalid Rahin ,
Aysha (Radiallahu Anha) Hamesha Ta-Umr Aysha Bint Abu Baker Rahin.
Yahan Tak Ki Rasool'Allah Sallallahu Alaihi Wasallam
Ki Wo Biwiyan Jinke Baap Kafir They,
Aapney Unke Naam Ka Laqab Bhi Kabhi Tabdeel Nahi Kiya.

Jaise:

Saffiya Bint Huyayy (Radiallahu Anha) ( Huyayy Yahoodi Tha Or Rasool’Allah Sallallahu Alaihi Wasallam Ka Jani Dusman Bhi Tha)

Jannat Mey Aurton Ki Sardar Fatima (Radiallahu Anha) Hamesha Fatima Bint Muhammad Rahin
Unhoney Ali (Radiallahu Anhu) K Naam Ke Sath Apne Naam Ko Kabhi Nahi Joda.

Jis Behan Ne Galti Se Aisa Kiya Hai Wo Allah Se Sacchi Tauba Karey Aur Apne Walid Ka Naam
Wapas Apne Naam Se Jodley. Hame Apney Amaalon Ka Hisab Allah Ko Dena Hai Aur Ye Sarsar
Allah Aur Uske Rasool Ki Nafarmani Hai.

Allah Hame Samjhney Aur Is Par Amal Krney Ki

Taufeeq Dey. AAMEEN YA ALLAH !!!!

KYA MAKKAH PAHLE MAKKESHWAR MAHADEV MANDIR THA ?






आज कल एक बेतुकी और बिना सर पैर की की अफवाह को जानबूझकर वास्तविक रूप दे कर पेश करने की कोशिश की जा रही हैं अक्सर websites, blogs, facebook तथा twitter आदि के माध्यम से यह अफवाह कुछ लोगो द्वारा फैअलायी जा रही हैं की मुसलमानों का काबा एक शिव मंदिर हैं या फिर उसमे शिवलिंग हैं या यशोदा और कृष्ण की तस्वीरे काबे के अन्दर हैं या कोई दीपक हमेशा जलता रहता हैं और मुसलमान हज के दौरान वहा शिव या कृष्ण उपासना करते हैं यह पूर्ण रूप से बकवास और अफवाह हैं एक तरफ तो यही लोग कहते हैं की मुसलमान बादशाहों ने मंदिर तोड़े क्यूंकि वो उन्हें मानते नहीं थे और फिर कहते हैं मुसलमानों का काबा एक मंदिर हैं जहा मुसलमान शिवलिंग की उपासना करते हैं यदि मुसलमान शिवलिंग की उपासना ही करते हैं तो फिर उन्हें यह बात कहने या बताने में क्या हर्ज हैं? 



और क्यूँ फिर वो जिस देवता को मानते हैं उसे उसी के देश भारत में उसकी उपासना क्यों नहीं करते? या फिर तीर्थ पर मक्के के बजाये अमरनाथ या काशी क्यों नहीं जाते?

काबे के शिव मंदिर होने की अफवाह सर्वप्रथम रवि शंकर ने अपनी किताब 'Hindusim & Islam' में प्रस्तुत की थी बिना किसी तर्क और दलील के बस उसने लिख दिया और आम हिन्दुओ ने मान लिया क्या अब तक किसी हिन्दू को पता था की उनका सबसे बड़ा शिव मंदिर काबा हैं? 

क्या पुराणों में अरब में किसी शिव मंदिर का वर्णन हैं ? ज़ाहिर हैं नहीं यह सिर्फ रवि शंकर और कुछ हिन्दुओ की उड़ाई हुई अफवाह है जिसका वास्तविकता से कुछ लेना देना नहीं हैं

और वैसे भी हिन्दू धर्म कभी भारतीय उपमहादीप के बहार नहीं गया और ना ही कभी भारतीय उपमहादीप के बहार कोई हिन्दू धर्म के मानने वाला या कोई हिन्दू मंदिर रहा हैं पुरे सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र, इंग्लैंड, फ्रांस, इटली, रोम, टर्की, अमेरिका, अफ्रीका, रूस आदि के इतिहास में वैदिक धर्म का या किसी भारतीय देवता के मंदिर का कोई नामो निशान भी नहीं मिलता हैं और हिन्दू reformer स्वामी दयानद सरस्वती के अनुसार तो यह सभी देवी देवता लोगो के स्वयं के घड़े हुए हैं और प्राचीन भारतीय समाज में सिर्फ एक निराकार ईश्वर की उपासना होती थी तो फिर मक्के में किसी प्राचीन शिव मंदिर का तो कोई मसला ही नहीं बनता हैं और वैसे भी इन लोगो को तो हर खड़ी चीज़ शिवलिंग और हर काली वस्तु महादेव नज़र आते हैं कल को कही यह लोग यह दावा नहीं कर दे के दुनिया में हर काले रंग की इमारत शिव मंदिर हैं और जितने बिजली के खम्बे हैं सब शिवलिंग हैं



लेखक - ज़ीशान अली खान

MULK E SHAAM (SYRIA) KI FAZEELAT






मुल्क-ए-शाम की फ़ज़लियत
  


 सरज़मीं शाम ईमान वालों की सरजमीं है। प्यारे हबीब आप सल्ल० ने फ़रमाया मैंने देखा मेरे तकिये के नीचे से किताब का एक हिस्सा मुझसे छीना जा रहा है। मेरी नज़रों ने उसका ताबकूब किया, मुझसे वापस लिया जा रहा मेरी नज़रें उसको देख रही और उधर से बहुत नूर फुट रहा था। मैंने देखा किताब का वह हिस्सा शाम में रख दिया गया है। जब फ़ित्ने आम होंगे तो ईमान शाम में होगा।
    

 सैयदना अब्दुल्लाह इब्ने उमर रज़ि० फरमाते हैं आप सल्ल० ने फ़रमाया ऐ अल्लाह हमारे शाम में हमें बरकतें नसीब फ़रमा। हमारे यमन में हमें बरकतें नसीब फरमा। बिलादे शाम और बिलादे यमन वो मुबारक सरज़मीं है, जिसमें बरकतों के लिये आप सल्ल० ने अपने रब से सवाल किया है।।       


(सहीह बुखारी)


आप सल्ल० ने फ़रमाया शाम के लिए खुशहाली है। सहाबाओं ने अर्ज़ किया या रसुल्लुलाह किस वजह से, आपने फरमाया रहमान के मलाइका मुल्क ए शाम पे अपने पर फैलाये हुवे हैं। अपने परों से मलाइका ने ढंका हुवा है। सरज़मीं मुल्क ए शाम बेहतरीन बन्दों के लिए बेहतरीन सरज़मीं हैं।           

(तिर्मिज़ी)   


सैय्यदना अब्दुल्लाह से रिवायत है उन्होंने कहा या रसूलुल्लाह आप  सल्ल० आप मुझे बताइये मैं किस इलाके में जाऊं आपने फ़रमाया बेहतरीन वह लोग होंगे, जो मुल्क ए शाम की तरफ हिज़रत करेंगे।।    

(मुसनद अहमद और अबू दाऊद)


प्यारे नबी आप सल्ल० ने फ़रमाया जब अहले शाम बिगड़ जाए और उन में फसाद बरपा हो जाए, तो फिर तुम्हारे अंदर खैर नहीं है और याद रखना मेरी उम्मत का एक गिरोह " ला इलाहा इल्लल्लाह " के लिए हमेशा हक़ पर रहेगा वह अहले हक़ होगा, जो उनको तकलीफ पहुँचाना चाहे और जो उनको रुस्वा करने की प्लानिंग करना चाहे वह खुद रुस्वा होगा। उनको कोई तकलीफ नहीं दे सकेगा। यह हक़ पर बाक़ी रहेंगे। यहाँ तक की क़यामत क़ायम हो जायेगी और इनका हक़ पर बाकी होना अल्लाह की तरफ से मदद पाने की मुराद क्या है , इन्हें दलील के मैदान में कोई हरा नहीं सकेगा। हक़ इनके साथ होगा।          

(तिर्मिज़ी)


आप सल्ल० ने फ़रमाया अनक़रीब अमरीसराह होगा की तुम लश्करों के मज़मुएं बन जाओगे। एक लश्कर मुल्क ए शाम में होगा और एक लश्कर यमन में होगा और एक लश्कर इराक़ में होगा। इब्ने हवाला ने अर्ज़ किया कि अल्लाह के रसूल आप सल्ल० कोनसे लश्कर की तरफ जाऊं, मेरे लिए किस लश्कर की तजवीज़ आप रखते हैं।जब मुसलमान इस तरह लश्कर में होंगे  आप सल्ल० ने फ़रमाया तुम मुल्क ए शाम के लश्कर को लाज़िम पकड़ना क्योंकि वह अल्लाह की सरज़मीं है। अल्लाह का पसंदीदा खितबा है , वह अपने पसंदीदा बन्दों को इसकी तरफ लायेगा, हाँ अगर तुम वहां न जा सके तो यमन के लश्कर की तरफ जाना। अल्लाह तआला ने शाम और अहले शाम की हिफाज़त की जमानत मुझे दी है।     

(अबू दाऊद)


सैय्यदना सलमा से रिवायत है कि मैं आप सल्ल० के साथ बैठा हुवा था, एक आदमी आया और आकर कहने लगा या रासुल्लुलाह आप सल्ल० लोगों ने घोड़ों की लगाम छोड़ दी, हथियार ढाल दिए, और यह कहने लग गए की अब कोई जेहाद बाकी न रहा, किताल ख़त्म हो गया। आप सल्ल० ने फ़रमाया वह झूट बोल रहे हैं , किताल तो अभी शुरू हुवा है , मेरी उम्मत में एक गिरोह हक़ के साथ किताल करता रहेगा और अल्लाह कुछ लोगों के दिलों को फेर देगा और उनके ज़रिये उनको फायदा पहुंचाएगा, यहाँ तक की आखरी लम्हात आ जायेंगे और अल्लाह का वादा पूरा होगा, घोड़ों की पेशानियों पर क़यामत तक के लिए खेर रख दी है। आप सल्ल० ने फ़रमाया मुझ पर वह्य की जा रही है कि मैं जल्द तुम लोगों से जुदा हो जाऊंगा, तुम मेरे बाद आपस में लड़ोगे, अहले ईमान मुल्क ए शाम का रुख करेंगे । उनका घर मुल्क ए शाम होगा।।     

(नसाई)


अब्दुल्लाह अम्र बिन आस से रिवायत है कि आल सल्ल० ने फ़रमाया ज़मीन वालों में सबसे बेहतर वह लोग वो लोग होंगे जो इब्राहिम अलैहि० की जज़ा यानी मुल्क ए शाम की तरफ हिज़रत करेंगे।     


(अबू दाऊद)