Friday, March 13, 2020

तुम्हारी मस्जिदें तड़प रही हैं





तुम्हारी मस्जिदें तड़प रही हैं अगर तुम को आंखें दी गई थी तो इसीलिए ताकि तुम उसको देखो अगर तुमको दिल गया था तो इसीलिए ताकि सिर्फ उसी को प्यार करो अगर तुमको आंसू दिए गए थे तो इसीलिए ताके सिर्फ उसी की याद में बहाव, और अगर तुम्हारी पेशानी बुलंद की गई थी तो इसीलिए ताकि उसी के आगे झुकाओ,

पर आह !  तुम्हारी जबाने उसकी हम्द  से महरूम हो गई तुम्हारे दिल उसकी मोहब्बत के ना होने से उजड़ गए तुम्हारी रूह में उसकी चाहत की जगह गैरों की चाहते भर गई , तुम्हारे कदम उसकी तरफ बढ़ने से बोझल हो गए और तुम्हारी आंखों में  उसके इश्क के दर्दो गम के लिए एक कतरा अश्क भी ना रहा


तुम्हारी मस्जिदें तड़प रही है कि रास्ता बाजो की तड़पती हुई और मुस्तराब नमाजे उन के नसीब हो मगर हैवानो और चौपायों के  खड़े रहने और औंधे हो जाने के सिवा वहां कुछ नहीं होता,


हालांकि तुम्हारा खुदा तुम्हारे खड़े रहने और औंधे गिरने का भूखा नहीं और अगर पांव पर खड़ा रहना ही इबादत होता है तो जंगलों के दरख़्तों से ज्यादा तुम खड़े नहीं रह सकते,


बहुत हो चुका ! अब भी छोड़ दो , बहुत सो चुके अब भी चौंक उठे बहुत गुम हो चुके अब भी अपने आप को पा लो,  खुदा ने तुमको वह मोहलत दी है जिस से बढ़कर आज तक जमीन की किसी मखलूक को भी मोहलत ना दी गई , फिर ऐसा ना हो के वह तुमसे अपना रास्ता काट ले और तुम्हारी जगह किसी और को अपनी चाहतों की शहंशाही और अपनी मोहब्बत का ताज वा
तख्त दे दे जैसा के उसी ने हमेशा किया है


अगर तुमको अपना माल व मता खुदा से ज्यादा महबूब है कि उसे ना दोगे और अपनी जानो को उसकी मोहब्बत से ज्यादा प्यारा समझते हो कि उसके लिए दुख में ना डालोगे और अगर तुम्हारे दिलों की आहें तुम्हारे जिगर की टीस और तुम्हारी आंखों के आंसू अब उसके लिए नहीं रहे बल्कि दूसरों का माल हो गए हैं तो यकीन करो कि वह भी तुम्हारा मोहताज नहीं है और उसकी कायनात इंसानों से भरी पड़ी है वह अगर चाहेगा तो अपने कलमा ए हक की खिदमत के लिए दरख्तों को चला देगा पहाड़ों को मुतहैरिक कर देगा कंकरो और खाक के ज़र्रों के अंदर से सदाएं उठने लगेंगी पर वह फासिक और नाफरमान इंसानों से कभी भी काम ना लेगा और अपने कलाम पाक की इज्जत को नापाकियों की गंदगी से कभी भी आलुदा ना होने देगा और फिर भी तुम मानो या ना मानो मगर मैंने सचमुच देखा कि जब तुम्हारे अंदर से उसकी पुकार का जवाब ना मिला तो वह दूसरों को प्यार और मोहब्बत के हाथों से इशारा कर रहा है


+(तंजिया ए आजाद, अबुल कलाम आज़ाद पेज १०८-१०९)

Monday, February 24, 2020

औरत बचाओ मुहिम






डॉक्टर हामिला औरत को बहुत ज़्यादा Calcium खिला रहें हैं Ca और Iron के Suppliments को हिक्मत में कुष्ता कहते हैं इन से बचे...

अक्सर प्रेगनेंट औरत और नमलूद बच्चों को शादीद परेशानी का शिकार होते देखा है, इस पोस्ट में उसी की वजह साफ तौर पर बयान कर दी गई है

औरत बचाओ मुहिम

एक दोस्त का सवाल

आज कल डिलीवरी नॉर्मल क्यूं नहीं होती है ? जबकि आज कल मॉडर्न हॉस्पिटल्स वा मॉडर्न टेक्नोलॉजी मौजूद है..

जब किसी औरत को उम्मीद होती है तो वह फौरन लेडी डॉक्टर के पास भी जाती है, 9 महीने उसके अंडर चेकअप रहती है, उसकी लिखी हुई दवा भी खाती है, उसकी महंगी फीस भी चुकाती है, मगर जब डिलीवरी का वक़्त आता है तो फिर Case नॉर्मल क्यूं नहीं होता ??

9 महीने लगातार Folic Acid और Calcium की गोलियां खाने और Venofer की ड्रॉप्स लगवाने के बावजूद, डिलीवरी के वक़्त खून की कमी क्यूं हो जाती है ???

मेरे प्यारे अजीजों !

इस सवाल का जवाब कुछ इस तरह है के, डिलीवरी नॉर्मल ना होने की सबसे बड़ी वजह Muscular Tissues
का सख्त होना है और ऋतुबत तैलीय यानी Lymphatic Liquid का कम होना है,

याद रखें,

औरत के जिस्म में जितनी लचक Flexibility होगी बच्चे के उतने है चांस नॉर्मल के होंगे,और जितने सख्त होंगे उतना ही ऑपरेशन का चांस ज़्यादा होगा

ये सब वजह औरत के जिस्म के Muscular Tissues को सख्त और रास्तों को तंग कर देते हैं और उनके अंदर की ऋतुबात तैलीय Lymphatic Liquid कम हो जाती है जो Lubrication का काम करती है, फितरत और नेचर के खिलाफ जब हम चलेंगे तो फितरत हमें सजा जरूर देगी, यानी फितरत से खिलाफवर्जी की सजा कि वजह से हमें ऑपरेशन से गुजरना पड़ता है, जबकि

बहुत मॉडर्न हॉस्पिटल्स है, महंगे डॉक्टर है, महंगे दवा और महंगे इंजेक्शन,air conditioning कमरे

याद रखें

इन सब चीज़ों का फितरत से कोई ताल्लुक नहीं हो सकता, पैसे का लालच और होश वा इंसानियत से दूरी, मरीज़ की ज़िन्दगी और सेहत से ज़्यादा मरीज़ की जेब पर नजर का होना दूसरी बड़ी वजह है, औरत का आसानी पसंद होना और ये ख्याल की हमल हो जाने के बाद काम नहीं करना, सारा दिन खाली बैठे रहना muscular tissue और खुसुसन Ovari के Muscles को नरम और flexible बनाने के बजाए stiff और सख्त बना देता है,

खाली सारा दिन लेते रहने के बजाय अगर कुछ खास एक्सरसाइज खुसुसन आखिरी महीनों में की जाए,। या घर के काम काज किए जाएं जैसे झाडू देना , डस्टिंग करना

इससे Ovari की muscles को हरकत मिलेगी , जिससे हरारत पैदा होगी जो नरम करेगी

खुराक में जब हम Folic Acid या Venofer के इंजेक्शन लगाएंगे तो ये लोहा होने की वजह से जिस्म के Muscles को इंतेहाई सख्त करेगा क्योंकि ये Muscles की खुराक है, जिससे रास्ता खुलने के बजाय और तंग होगा, उसकी जगह अगर,

मुरब्बा हरड़
मुरब्बा अमला
सेब
पालक साग
कलेजी,
दूध
अंडा
शहद
घी
मनकी
आडू
लौंग
दालचीनी
बादाम और
जाफ रान का इस्तेमाल किया जाएं तो उससे जिस्म को कुदरती Folic Acid और खून भी ज़्यादा मिकदार में मिलेगा, और जिस्म के Muscular Tissues सख़्त होने के बजाए ताकतवर और नरम होंगे और खूबसूरत बच्चे पैदा होंगे इनशा अल्लाह ,

दूसरी तरफ Calcium की गोलियां याद रखें हड्डियों को सख्त कर देती है, 9 महीने लगातार Calcium की गोलियां खाने से मां और बच्चे की हड्डियां सख्त....

तो आप अंदाजा कर लें के Muscular Tissues भी सख्त , हड्डियां भी सख्त , इसी लिए कभी कभी कह दिया जाता है के बच्चे का सर बढ़ा हुआ है, मां की हड्डी बड़ी हुई है इसलिए ऑपरेशन ही होगा,

भाई 9 महीने अंधा धुंध Calcium की गोलियां खिला खिला कर आपने नॉर्मल डिलीवरी का चांस छोड़ा ही कब है,

क्यूंकि इससे कमाई ज़्यादा है ऑपरेशन से तो पैसे बनने है, नॉर्मल से क्या मिलना है, अगर कुदरती Calcium यानी
दूध
दही
अंडे
घी , खिलाया जाता तो गारंटी से कहता हूं कभी Calcium की कमी ना आती और हड्डियां मजबूत तो होती मगर बढ़ती ना, सख्त ना होती,

हा ! दुकान की सेल जरूर काम हो जाती, कमिशन जरूर कम हो जाता, मेडिकल स्टोर की सेल कम हो जाती, क्यूंकि अमली तौर पर हमारा अल्लाह पर यकीन ज़ीरो है, तकरीरों और बात चीत में 100 फीसद है,

डिलीवरी नॉर्मल ना होने की एक बड़ी वजह, जैसा के मैंने बताया है हड्डियों का सख्त होना,

Muscular tissue का सख्त हो कर उनमें लचक का कम होना और उसमे रूतुबत तैलीय की कमी का होना है, जो Lubrication का काम करती है , इन सब के लिए आखिरी माह सदियों से आजमाया हुआ फॉर्मूला जो हमारी माएं इस्तेमाल करती आ रही थी,

एक तो जिस्मानी वर्जिश और दूसरी अहम चीज देसी घी, छुआरा और जाफ्रान का इस्तेमाल था, दूध में डालकर जिसमें फौलाद कैल्शियम गंधक यानी हरारात अधिक मिकदार में होती है इसका छोड़ देना, और सारा दिन औरतों का बिस्तर पर पड़े रहना और कैल्शियम फोलिक एसिड की गोलियां खाना और Venofer के इंजेक्शन लग वाना है,.

फिर डिलीवरी के रोज़ और दौरान वो ज़ुल्म वा सितम होता है, अल्लाह की पनाह , एक तो शर्म वा हया की धज्जियां उड़ा दी जाती है, जिस्म दिखाया जाता है,

फिर पैसों का लालच और हिर्स में हम उस हद तक गिर चुके हैं के, नॉर्मल केस को कट लगवाकर जेबों पर डाका डाला जाता है,

एक और ज़ुल्म जिसकी तरफ बतौर खास तवज्जो दिलाना चाहता हूं के बच्चा जब मां के पेट में होता है तो उसका दर्जा हरारत 80 से 90 डिग्री तक होता है, लेबर रूम में Air Condition होने की वजह से एक तो मां के अजलात सर्दी से सिकुड़ते है, ये साइंस का उसूल है के सर्दी से चीज़ सिकुड़ती और हरारत से फैलती है,

कमरे में 16 डिग्री का तापमान रहने से रहम सिकुड़ेगा या फैलेगा ?

यकीनन सिकुडेगा तो ये चीज़ नॉर्मल डिलीवरी में फायदेमंद है या रुकावट ?? यकीनन जवाब है रुकावट

मगर, नाज़ुक मिजाज़ डॉक्टर को गर्मी लगेगी लिहाज़ा मरीज़ जाए भाड़ में या मौत के मुंह, हद तो ये है के डॉक्टर तो डॉक्टर है लेकिन रूम का सफाई वाला अमला और उसका नखरा और उसका रुआब अल्लाह की पनाह, वा आसमान पर होता है

मगर सलाम है हमारी उन माओ और बहनों को जो लेबर रूम में अंगीठियां जलाकर पसीने पसीने हो कर फितरी अमल को पाए तकमील तक पहुंचाती थी घर में ही,

इस सिलसिले में एक और मसला बच्चे का सांस उखड़ना और incobeter में डालना ,

प्यारे भाई, जब बच्चा एक दम से 80-90 डिग्री तापमान से एक दम 16 डिग्री के तापमान पर आएगा तो उसकी सांस ना उखड़ेगा तो और क्या होगा ??

फिर दर्द के इंजेक्शन लगवाने की सज़ा बल्कि भैंसों वाले इंजेक्शन पाबंदी के बावजूद लगवाए जाते हैं, जो औरत को सारी ज़िन्दगी कमर दर्द की सूरत भुगतना पड़ती है वह एक अलग कहानी है,

फिर एक एक दिन का गिनना और एक दिन भी ऊपर या नीचे ना जाने देना के ग्राहक किसी और दुकान का रुख ना कर जाए,

इस सिलसिले में सिर्फ इतना अर्ज़ करूं के फल जब पकता है तो खुद बखुद नीचे गिरता है, दर्दें कुदरती और फित्री होना चाहिए, याद रखें फितरत इंसान की दोस्त है दुश्मन नहीं,

मस्नुई दर्द के ग्राहक दूसरी दुकान ना चला जाएं के खौफ से भैंसों वाले टीके लगाएंगे, जो फितरत के साथ भयानक मज़ाक है फिर नतीजे तो भुगतने पड़ेंगे, सजा तो ज़रूर मिलेगी, फितरत किसी को माफ नहीं करती

फिर याद रख लें, बच्चों के अंदर जितने केसेस खून की कमी के आ रहें है वह सब के सब मसनुई Folic acid और मसनुई Calcium की वजह से हैं, क्यूंकि इससे तली का Spleen फाल डिस्टर्ब होता है जिससे वह Anaemia का शिकार हो जाते हैं ,

मुख्तसर

फितरत से जितना दूर हटेंगे इतनी हमें सज़ा ज़्यादा मिलेगी इस मौजू पर बहुत है कहने को शायद इतना भी हज़म ना हो दुकानदारों को,

लेकिन मेरे प्यारे भईयों

ये हमारी माओ बेटियों और शरीक ए हयात का मसला है !!!!

इस पोस्ट को इतना शेयर कीजिए के ये " औरत बचाओ मुहिम " बन जाए

लेखक : अब्दुल्लाह भाई
हिंदी तर्जुमा : Umair Salafi Al Hindi
Via Islamicleaks

Saturday, November 3, 2018

ZAKAWAT E HISS (शीध्र पतन) KI BIMARI AUR USKA ILAAJ

Bismillahirrahmaanirraheem


ZAKAWAT E HISS KI (शीध्रपतन) BIMAARI AUR USKA ILAAJ


ZAKAWAT E HISS (शीध्रपतन)


Ya Marz Bhi  Sheedra'Patan (Sur'at E Inzaal) Jaisa Hai , Magar Isme Yah Hota Hai Ki Kuch Haalaat Me Kapda Bhi Aazu (Penis) Se Chhu Jaye To Mani Kharij Ho Jaati Hai, Aksar Khyaal me Jinsi Khwahish Ke Ubharne Par Aur Zyadatar Sohbat, Ishq Aur Sex (jins) Ki Baatein Karte Waqt Mani Khaarij Ho Jaati Hai Aur Kapde Gande Ho Jaate Hain, Aajkal naujawano ko Saath Aksar Aisa Hota Hai, Kyunki Unke Apne Zehan , Iraade Aur Jazabe Par Control Nahin Hota Hai,


Naubat Yahan Tak Aa Jaati Hai Ki Mani Khud Ba Khud Nikalne Lagti Hai, Khud'aitmaadi ( आत्म विश्वास) Bilkul Baaqi Nahin Rahta , Mazi ( Mani Jaisa Sperm Jo Patla Hota hai) baithte Waqt, Sote Waqt, Chalte Firte Waqt Aur Pakhaana Karte Waqt Bhi Khaarij Hoti Rahti Hai, Yah Tabaah'kun Marz Hai, Isliye Iski Rokthaam Ke Liye Fauran Dawa Istemaal Karni Chahiye


ROOHAANI ILAAJ:


is Marz Me Apne Zehan Ko Apne Control Me Karna Zaroori Hai, Taaki Sabse Pahle Ye Khyaal Zehan Me Paida Hi Na Ho, Aur Agar Dimaagh Me Ubharne Lage Toh Unhe Badhne Se Pahle Hi Kuchal Diya Jaaye Taki Fitna Paida Na Ho, Kasrat Se SubhanAllah Padhne Rahne  Se Gande Khyalaat Me Kaafi Kami Aa Jayegi, Yah Koi Mushkil Kaam Nahi Hai, Aap Allah Paak Ki Is Yaad Se Zaroor Faayeda Uthaaye, Yaad Rakhen Jab Gande Khyaalaat paida Hone Ki Shuru'aat ho Toh Apna Dhyan Kisi Dusre Kaam Me Ya Jagah Ki Taraf Laga Den Ise English Me Diversion Of Attention Kahte Hain, Ye Bilkul Aasaani Se Ho Sakta Hai, Sirf Iraada Mazboot Hona Chahiye, Agar Kisi Majlis Me Aisi Baatein Hon Toh us Majlis Ko Chhodkar Chale Jaayen


MEDICAL ILAAJ:


Is Marz Me Wahi Dawa Istemaal Hoti Hain Jo Surat'e Inzaal ( Sheedra'Patan) Ke Liye Istemaal Hoti Hain Padhiye Post ISLAMICLEAKS Blog Par, Albatta.


1-Silex Nigra Q (Mother Tincture)
2- Origanum Q (Mother Tincture)


Ko Un Dawaon Ke Saath Zaroor Istemaal Karen , Taaki Kaam Waasna Aur Shahwat Kam Ho Jaaye

1- Metrum Mayur 12x
2-Netrum Rulf 12 x

30 GM's Khareed Kar Rakh Lein, Jab ZAKAWAT E Hiss Ki Zyada Shikaayat Ho Toh Dusri Dawaon Ke Saath Inki 4-4 Goliyan Bhi Din Me 3 Baar Choos Lein, Jab Yah Shikaayat Jaati Rahe Toh In Dawaon Ko Band Kar Dein


Upar Likhi Dawayen Aisi Hain Ki Agar Aap Inme Se Koi Ek Bhi Dawa Istemal Karen Toh In Sha Allah Aaraam Hoga,  Agar Ek Se Zyada Istemaal Karenge Toh Bhi Nateeja Bahtar Saabit Hoga,
Aam Taur Par Musht'zani ( Hast'maithun) Karne Walon Ko ZAKAWAT E Hiss   Zyada Hoti Hai,  Is Liye Sabse Pahle Musht'Zani Se Tauba Kijiye


#UmairSalafiAlHindi
#ISLAMICLEAKS

Wednesday, July 25, 2018

OONT KA PESHAB AUR HINDU BHAI KE SAWAAL

हमारे मित्र विकी कुमार भाई ने हमें एक स्टेटस मे टैग किया जिसमें उन्होंने प्यारे नबी सल्ल. की छवि को धूमिल करने के लिए नबी करीम सल्ल. पर ये झूठा आरोप लगाया कि माज़अल्लाह नबी सल्ल. ऊंट का पेशाब पिया करते थे ( पूरी तरह बेसलेस और झूठा आरोप )
 

फिर विकी भाई ने लिखा था कि नबी स. ऊंट के पेशाब से बीमार मुसलमानों का इलाज करते थे . और जो भी व्यक्ति मुसलमान बनने के लिए रसूल के पास आता था वे उसे ऊंट की पेशाब जरूर पिलाते थे रसूल फरमाते थे कि ऊंटों की पेशाब मुफीद होती है और कारगर दवा होने के कारन मैं भी इसका इस्तेमाल करता हूँ . (अस्तगफार)
 

सबूत के लिए भाई ने
बुखारी -(वुजू )जिल्द 1 किताब 4 हदीस 234
बुखारी -जिल्द 8 किताब 82 हदीस 794
और बुखारी -जिल्द 7 किताब 71 हदीस 590 के सन्दर्भ बताए थे ॥
 

 भाई को हमारा जवाब :- विकी भाई, आपने रेफ्रेन्स तो सही दिए पर हदीस के शब्दों को अच्छी तरह से बदल डाला है, और आपने ये झूठ बोलकर और मूर्खता दिखाई कि नबी सल्ल. माज़अल्लाह ऊंट का पेशाब पीते थे और नव मुस्लिमों को इसे पीने की आज्ञा देते थे, .. 

धिक्कार है आपके बेबुनियाद झूठ पर भाई,

 सभी जीवों का मल मूत्र और प्रतिबंधित किए हुए जीवों का मांस आदि कुछ ऐसी चीजें है जिन्हें आम हालत मे किसी भी मुस्लिम के लिए खाना हराम है ॥
 

किन्तु पवित्र कुरान मे हराम चीजों का उल्लेख करने के साथ ये भी इजाज़त दे दी गई है, कि यदि कोई इंसान ये हराम चीजे खाने पर मजबूर हो जाए, और उसका मकसद अल्लाह की नाफरमानी करना न हो तो वो हराम चीज खा सकता है, मसलन उसकी जान को खतरा हो और इसके अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प न हो कि किसी हराम की गई चीज के खाने पर जान बच सकती हो तो मुस्लिम अपनी जान बचाने के उद्देश्य से वो अपवित्र चीज खा सकता है !
 

जिन हदीस के सन्दर्भ आपने दिए उनमें लिखा है कि कुछ लोग जो बेहद बीमार और कमजोर थे वे नबी सल्ल. के पास आए और नबी सल्ल. से सहारा मांगा, आप सल्ल. ने उन बीमार लोगों को ऊंटनी का दूध और ऊंटनी का ही पेशाब दवा के तौर पर पीने की सलाह दी, थोड़े ही दिनों मे वो लोग इस इलाज से खूब तन्दुरूस्त हो गए थे ॥
आज अमेरिका के कैंसर अनुसंधान केन्द्र समेत अनेक मेडिकल रिसर्च सेंटर्ज़ का कहना है कि ऊंट का पेशाब कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियों का इलाज करने मे कारगर है .... तो समझ मे आता है कि सम्भवत: उन बीमार बद्दुओं को भी कैंसर जैसा ही कुछ जानलेवा रोग हो गया था, जो नबी सल्ल. के सुझाए इलाज से ठीक हो गया ।
 

और भाई ये तो जगजाना तथ्य है कि दुनिया के लोग चाहे कितने पवित्र और शाकाहारी बनते हों, पर जब अपनी जान पर बनती है, तो अपने डाक्टर की हर सलाह मानकर गन्दी से गन्दी चीज और किसी भी जानवर का रक्त और मांस खा लेते हैं,
 

ये तो आप जानते ही होंगे कि एण्टी बायोटिक दवाएं जानवरों के रक्त और मांस से बनती हैं, जिन्हे बीमार पड़ने पर आप बिना पथ्य अपथ्य का विचार किए खा जाते हो...
 

बहरहाल भाई बीमारी के इलाज के लिए ऊंटनी का पेशाब दवा के तौर पर इस्तेमाल करने की बात पर आपको ऐतराज नहीं करना चाहिए, क्योंकि आपके आयुर्वेद मे तो बीमारी के इलाज के लिए व्यक्ति को स्वयं अपना ही मूत्र पीने का इलाज सुझाया गया है, और दवा के लिये अनेक गन्दे पशुओं का मांस खाना भी सुझाया गया है ।
वो भी छोड़िए, आप जो ह्रष्ट पुष्ट होकर भी अकारण ही प्रसाद के नाम पर रोज गाय का पेशाब पीते हैं, कम से कम आपको तो किसी की जान बचाने के लिए ऊंटनी का पेशाब देने की चिकित्सकीय सलाह इतनी अनोखी नहीं लगनी चाहिए थी ॥
 

( सुनता हूँ कि अरब मे इस हदीस के कारण ऊंट के पेशाब पर अनुसंधान किए गए और उसे कैंसर रोधी पाया गया .... वैसे मेरा विचार है कि लोग केवल अपनी आध्यात्मिक पुस्तकों के प्रेम मे डूबकर ऐसे काम न करें जिनका खुद उनके और उनके समाज के गले से उतरना मुश्किल हो ... ऊंट का मूत्र कैंसररोधी होता है ये बात वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित हो गई, इतना काफी है ... लेकिन मैं ये ठीक नहीं समझता कि कैंसर के इलाज के तौर पर मुस्लिम ऊंट का मूत्र पीना शुरू कर दें जबकि कैंसर के इलाज के स्वच्छ और प्रभावी तरीके मौजूद हों ...
 

हां यदि ऊंट के मूत्र से बेहतर कैंसर का और कोई उपचार सिद्ध न हो तब इस विधि को अपनाने मे भी कोई हिचक नहीं होनी चाहिए, और ऐसी स्थिति मे केवल ऊंट का मूत्र ही क्यों, इनसान की जान बचाने के आखिरी और एकमात्र उपाय के रूप मे दूसरी हराम चीजों से भी सहायता ली जा सकती है, यही हदीस का वास्तविक मन्तव्य भी है ॥ )...... 


written by  Zia Imtiyaz

EK JANWAR SAARE GHAR WALON KI TARAF SE KAFI HAI CHAHE GHARWALON KI TADAD KITNI HI KYUN NA HO

Ek Janwar Sare Ghar Walo Ki Taraf Se Kafi Hai Chahe Gharwalo Ki Tadad Ketni Hi Kyu Na Ho:


Hazrat Ataa Ibn Yasaar Bayan Karte Hai Ke Maine Sawal Kiya Hazrat Abu Ayyub Ansari Raziallahuanhu Se Rasoolullah Sallallahualahiwasallama Ke Daur Me Qurbani Kaise Di Jati Thi? To Hazrat Abu Ayyub Ansari Raziallahuanhu Ne Farmaya:-

 Rasoolullah Sallallahualahiwasallam Ki Daur Me Ek Shaks Ek Bakri(Goat) Ki Qurbani Karta Tha Apne Aur Apne Sare Ghar Walo Ki Taraf Se Aur Wo Khud Bhi Khate Aur Dusro Ko Bhi Khilate Yaha Tak Ke Logo Ne Fakr Karna Suru Kar Diya Aur Jo Haal Hai Wo Tum Dekh Rahe Jo...
 

(Jami Tirmizi, Abwab Ul Azaayi, Babu Maja'a Innasshatal Wahidata Tujziyu An Ahlil Baiti)


Imam Tirmizi Ne Is Hadees Ko Hasan Sahih Karar Diya Hai,
Imam Shaukani Ne Bhi Is Hadees Ko Sahih Karar Diya Hai
(Nayl Ul Awtar, Kitab Ul Uzhiyata, Safa-137)
 

Imam Ibn Naqqash Ne Bhi Is Hadees Ko Sahih Karar Diya Hai.
 
(Al Ihkaam Ul Ahkam,Safa-254)


Ann Abdullahubnu Hishaami Qaula Kaana Rasoolullahi Sallallahualaihiwasallama Yuzhiya Bisshaati Wahidati Ann Jamiyi Ahlihi...


Hazrat Abdullah Ibn Hishaam Raziallahuanhu Farmate Hai Ke Rasoolullah Sallallahualaihiwasallam Ek Bakri Ki Qurbani Karte The Apne Sare Gharwalo Ki Taraf Se...
 
(Mustadrak Imam Hakim, Kitab Ul Uzhiya, Hadees-7555, Safa-255)


Imam Hakim Ne Is Hadees Ko Sahih Karar Diya Hai Aur
Imam Hafiz Zahabi Me Unki Muafiqat Ki Hai,Aur
Imam Hayshmi Ne Farmaya Ise Imam Tabrani Ne Apne Kabeer Me Riwayat Kiya Hai Aur Iske Rijaal Sahih Hai.
 

(Majma Uz Zawaid, Kitab Ul Uzhiya, Safa-21)


In Dono Hadeeso Me Waze Dalil Maujud Hai Ke Ek Bakdi Yani Goat Us Shaks Ki Taraf Se Jo Qurbani Kar Raha Hai Aur Uske Sare Gharwalo Ki Taraf Se Kafi Hai Chahe Gharwalo Ki Tadad Ketni Hi Kyu Na Ho Aur Yahi Rasoolullah Sallallahualaihiwasallam Ki Aur Sare Sahaba Ekram Rizwanullahialahiajmain Ki Sunnat Haiaur Yahi Kehte Hai Imaam Malik Aur Humare Ashab Imam Ahmad Ibn Hambal Aur Imam Ishaq Ibn Rahway Aur Imam Auzayi Aur Imam Lais Ibn Sa'ad Aur Imam Hakim Aur Imam Tirmizi Aur Imam Hayshmi Aur Imam Ibn Quiyim Aur Imam Shaukani Aur Imam Ibn Naqqash Ke Ek Janwar Us Shak Ki Taraf Se Jo Qurbani Kar Raha Hai Aur Uske Sare Gharwalo Ki Taraf Se Kafi Hai...
 

(Jami Tirmizi Abwab Ul Uzhiya)Taufat Ul Ahwazi Sharh Jami Ut Tirmizi, Jild-5, Safa-72)


Imam Abdullah Farmate Hai Ke Maine Apne Walid Yani Imam Ahmad Ibn Hambal Se Pucha Ke 1ek Bakdi(Goat) Sare Gharwalo Ki Taraf Se Qurbani Karne Ke Bare Me?To Unhone Yani Imam Ahmad Ibn Hambal Ne Farmaya,La Bayis Qad Zabiyun Nabiyi Sallallahualaihiwasallama Kabshaini Qurban Ahaduhuma Faqaula Bismillahi Haza Ann Muhammadu Wa Ahlil Baitihi...


Koi Harz Nahi Isme Balke Nabi E Kareem Sallallahualaihiwasallam Ne Do Mendha Zibah Kiya Aur Usme Se 1ek Janwar Apne Zibah Kiya Aur Farmaya Suru Allah Ke Naam Se Ye Muhammad Alahisalam Ki Taraf Se Hai Aur Unke Sare Gharwalo Ki Taraf Se...

(Masail Ul Imam Ahmad Ibn Hambal Lil Abdullah,Safa-262,)
(Masail Imam Ahmad Ibn Hambal Lil Ishaq,Safa-130)


Imam Ibn Quiyim Jauziya Ne Farmaya Rasoolullah Sallallahualahiwasallam Ki Sunnat To Ye Hai Ke 1ek Bakdi(Goat) Ek Shaks Aur Uski Sare Gharwalo Ki Taraf Se Kafi Hai Chahe Unki Tadad Ketni Hi Kyu Na Ho...
 

(Zaad Ul Maad, Jild-1, Safa-579)


Imam Shaukani Ne Farmaya,Wa Haqqu Innaha Tajzi Ann Ahlil Baiti Wa Inkaanu Maayitu Nafsi Aww Aksaru...


Haqq To Ye Hai Ke Ek Bakdi Kafi Hai Sare Gharwalo Ki Taraf Se Chahe Unki Tadad 100 Hi Kyu Na Ho Ya Inse Bhi Zyada....
 

(Nayl Ul Awtar, Kitab Ul Uzhiya, Safa-137)


Alhamdullah Etne Sare Dalil Ke Baad Aur Behes Aur Aur Koi Shak O Shuba Ki Koi Gunjais Hi Baki Nahi Rehta...


Rasool Allah Sallallahu Alaihi Wasallam Ne Farmaya:
 

"Main Tumhare Darmiyan 2 Cheezen Chod Kar Ja Raha Hoon (Quran Aur Sunnat Sahih Hadis) Jab Tak Tum Inhe Mazbuti Se Pakde Rahoge Hargiz Gumrah Nahi Hoge
 

(Hadis Al Hakim, Mo'atta Imam Malik)


#UmairSalafiAlHindi
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मुसलमान एक धार्मिक समूह है, मुसलमानों को कोई राजनैतिक एजेंडा है ही नहीं,




आप राजनैतिक लड़ाई के लिए देश के मुसलमानों को एक साथ इकट्ठा होते हुए नहीं देख पायेंगे, ऐसा क्यों है ?
क्योंकि मुसलमान राजनैतिक समूह हैं ही नहीं , मुसलमान एक धार्मिक समूह है, मुसलमानों को कोई राजनैतिक एजेंडा है ही नहीं,
 

 मुसलमानों का बस धार्मिक एजेंडा है\ वह भी व्यक्तिगत,सामूहिक एजेंडा है ही नहीं, जबकि इसके बरक्स हिन्दू एक राजनैतिक समूह है, इस समुदाय का एक राजनैतिक एजेंडा है, इसका एक सुगठित राजनैतिक प्रशिक्षण का कार्य्रक्रम है,


हिन्दू धर्म नहीं है, हिन्दू एक राजनैतिक शब्द है, पांच सौ साल पहले अकबर के समय में तुलसीदास जब रामचरित मानस लिख रहे थे, तब तक भी उन्होंने अपने लिए हिन्दू शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था,
क्योंकि तब तक भी कोई हिन्दू धर्म नहीं था, कोई भी हिन्दू दुसरे हिन्दू जैसा नहीं है, कोई हिन्दू मूर्ती पूजा करता है कोई नहीं करता, कोई मांस खाता है, कोई नहीं खाता, 


आदिवासी ईश्वर को नहीं मानता,  गाय खाता है, मूर्ती पूजा नहीं करता,  लेकिन हिन्दुओं की रक्षा के राजनैतिक मुद्दे पर भाजपा को वोट देता है, अंग्रेजों नें भारत में अपने खिलाफ उठ रही आवाज़ को दबाने के लिए
एक तरफ मुस्लिम लीग को बढ़ावा दिया दूसरी तरफ हिन्दू नाम की नई राजनैतिक चेतना को उकसावा दिया,
आज़ादी के बाद पाकिस्तान बनने के साथ मुस्लिम लीग की राजनीति भी भारत में समाप्त हो गयी,
लेकिन संघ की अगुवाई में ज़मींदार, साहूकार,  जागीरदारों ने अपनी अमीरी और ताकत को बरकरार रखने के लिए अपना राजनैतिक एजेंडा बनाया, लेकिन ये लोग सत्ता में नहीं आ पा रहे थे क्योंकि यह मात्र चार प्रतिशत थे,
संघ के नतृत्व में इन लोगों नें लम्बे समय तक मेहनत किया, राम जन्मभूमि मुद्दे पर संघ ने दलितों,  आदिवासियों, ओबीसी को हिन्दू अस्मिता के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा संघ नें करोड़ों दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के मन में यह बिठा दिया की देखो यह बाहर से आये मुसलमान हमारे राम जी का मन्दिर नहीं बनने दे रहे हैं,
इस तरह जो दलित पास के आदिवासी को नहीं जानता था,  या जो ओबीसी हमेशा दलित से नफरत करता था
वह सब हिंदुत्व के छाते के नीचे आ गए,


मुसलमानों का हव्वा खड़ा करके अलग अलग समुदायों को इकट्ठा करना और असली राजनैतिक मुद्दों को भुला देना संघ की राजनीति की खासियत रही, संघ इसके सहारे सत्ता हासिल करने में पूरी तरह सफल हो गया,
दूसरी तरफ भारत का मुसलमान बिना किसी राजनैतिक एजेंडे के चलता रहा, 



भारत के मुसलमानों को लगता था कि  आजादी की लड़ाई के बाद हमारे नाम पर पाकिस्तान मांग लिया गया
और गांधी जी की हत्या भी हमारे कारण हो गयी है, इसलिए हमारे समुदाय को तो किसी बात पर मांग करने का कोई हक बचा ही नहीं है, हांलाकि न तो बंटवारे के लिए और ना ही गांधी की हत्या के लिए मुसलमान किसी भी तरह से कसूरवार ठहराए जा सकते थे, भारत के बंटवारे की नींव सावरकर की हिन्दू महासभा और हेडगवार के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा रखी गयी,


यहाँ तक कि मुस्लिम लीग की राजनीति भी हिन्दुओं की मुखालफत करना नहीं था, जबकि हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का शुरुआत से ही मुख्य एजेंडा मुसलमानों, ईसाईयों और कम्युनिस्टों की मुखालफत करने का तय किया गया था,


हिन्दू मह्सभा और संघ की पूरी राजनीति यह थी कि  भारत के लोगों को मुसलमानों और ईसाईयों का डर दिखाया जाय और मजदूरों किसानों और दलितों की बराबरी वाली राजनीति मांग को समाप्त किया जाय,
ताकि पुराने ज़मींदार, साहूकार और जागीरदार अपनी पुरानी अमीरी और ताकतवर हैसियत आजादी के बाद भी बरकरार रख सकें, अपनी राजनीति को जारी रखने के लिए संघ आज भी यही नफरत भारत के नौजवानों के दिमागों में नियमित रूप से डालता है,


भारत के मुसलमान आज भी किसी राजनैतिक एजेंडे के बिना भारत की मुख्यधारा की राजनीति में जुड़ने की कोशिश करते हैं, ध्यान दीजिये भारत के मुसलमान किसी भी साम्प्रदायिक दल को वोट नहीं देते,
क्योंकि मुसलमानों का कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं है,
 

इसलिए आप मुसलमानों को राजनैतिक मुद्दों पर इकट्ठा होते हुए नहीं देख पाते, इसलिए JNU  में नजीब नाम के लड़के को  जब संघ से जुड़े संगठन ने पीटा और गायब कर दिया तो उसकी लड़ाई धर्मनिरपेक्ष ताकतों नें लड़ी,
नजीब के लिए कोई मुसलमानों की भीड़ नहीं उमड़ पड़ी,
 

 हम मानते हैं कि भारत की राजनीति का एजेंडा समानता और न्याय होना चाहिए,
लेकिन संघी राजनीति इन्ही दो शब्दों से खौफ खाती है, इसका उपाय यही है कि बराबरी और इन्साफ के लिए
देश भर में जो अलग अलग आन्दोलन चल रहे हैं,  जैसे छात्रों का आन्दोलन, महिलाओं का आन्दोलन,
मजदूरों का आन्दोलन, किसानों का आन्दोलन,  दलितों का आन्दोलन, आदिवासियों का आन्दोलन,
उन सब के बीच संपर्क बने और वे मिलकर  इस नफरत की राजनीती को खत्म करके
बराबरी और न्याय की राजनीति से युवाओं को जोड़ दें। 

Himanshu Kumar

Sunday, April 15, 2018

TAX KI SHA’RAI HAISIYAT: RULING OF TAXATION IN ISLAM





Bismillahirrahmanirraheem



TAX KI SHA’RAI HAISIYAT: RULING OF TAXATION IN ISLAM

Tax Wo Rakam (Cash) Hai Jo Hukumat Chalaane Ke Liye Alag Alag Sooraton (Types) Me Logon Se Wasool Ki Jaati Hai, Aur Jo Log Taiy (Fixed) Waqt Par Tax Ada Na Karen Unke Khilaaf Kaanooni Kaarwaahi Ki Jaati Hai,

Kaha Jata Hai Ki Sabse Pahle Yunaan (Greece) Aur Rome  Me Sab Se Pahle Istemaal Hone Waali Cheezon (Goods) Par Tax Lagaaaya Gaya, Sabse Pahle Jis Mulk Ne Aam Income Tax Ke Nizaam Ko Apnaaya Wo Britain Hai,

Nepolean Bonaparte Ke Khilaaf Jung Ladne Ke Liye  Britain Hukumat Ne 1799 CE Me Income Tax Laagu Kiya,1810 Me Jung Khatam Hui Toh 1842 Tak British Logon Ko Is Tax Ke Bojh Se Azaad Kar Diya Gaya, Lekin Baad Me President Budget Me Khasaare (Budget Deficit) Ki Wajah Se Dobara Tax Laagu Kar Diya,

1880 CE Tak Log Tax Ke Aadi (Habitual) Ho Gaye, Isi Tarah Dheere Dheere Germany, France, Italy, Sweden Aur America Etc Me Be Tax Laagu Ho Gaya, Angrez Hindustan Me Aaya Toh Yahan Bhi Tax Laagu Ho Gaya,

Islam Ki Aamad Ke Mauqe Par Jo Mukhtalif (Different)  Qism Ke Tax They Unka Mukhtasar (Short) Bayan Is Tarah Hai

M’sak: Zamana E Jaahiliyat (Period Of Ignorance) Me Logon Se Zabardasti Wasool Kiye Jaane Wala Tax, Islam Ne Iski Muzammat Bayan Ki Au Rise Azeem Gunaah Aur Jahannum Me Daakhile Ka Zariya Qaraar Diya

Jiz’yah:  Ye Wo Tax Tha Jog Hair Muslimon (Non- Muslim) Se Unki Jaan Aur Maal Ki Hifaazat (Security Of Life And Wealth Tax) Ke Badle Me Wasool Kiya Jaata Tha, Islam Qubool Karne Se Ye Tax Khatam Ho Jaata Hai,

Khi’raaj : Ye Tax Bhi Ghair Muslims Par Lagaaya That Ha, Dar’asal Ye Unki Zameeno Par Lagan Tha, Jung Me Jeete Hue Ilaaqon Ko Unke Puraane Maalikon Ke Qabze Me Rahne Diya Jaata Aur Unke Ilaaqe Ke Aitbaar Se Khi’raaj Wasool Kiya Jaata

Za’reebah : Ye Bhi Tax Ki Ek Soorat Se Jo Ghulaamon Aur Ghair Muslamano Par Lagaaya Jaata, Musalmano Se Iska Koi Taalluq Na Tha.

Aa’shar:  Is Se Muraad Wo Tijarati Import Duty Thi Jo Yahood Aur Isaayi Aur Hinduon Ke Un Maalon Par Wasool Ki Jaati Thi Jo Tijaarat Karne Ki Wajah Se  Musalmano Ke Ilaaqe Me Laaya Karte They,

Waazeh Rahe Musalmano Par Sirf Zakaat Aur Aa’shoor Ki Hi Paabandi Hai, Iske Elawah Koi Apni Marzi Se Sadqah Wa Khairaat Karta Hai Toh Who Zyada Ajr Wa Sawaab Ka Mustahiq Hai, Zakaat Aur A’shar Ke Elawah Musalmano Par  Allah Ki Taraf Se Koi Bhi Tax Waajib (Obligatory) Nahin, Isiliye Imam Shaukani Ne Naqal Farmaaya Hai Ke

“In (Musalmano) Par Zaqaat Ke Elewa Koi Tax Ya Us Jaisi Koi Cheez Waajib Nahin”

(Neel Ul Awtar)

Aur Ek Riwayat Me Bhi Hai Ke

“Jab Tune Apne Maal Ki Zakaat Ada Kar Di To Jo Tujh Par Farz Tha Who Tone Poora Kar Diya”
(At Targheeb)

Islam Ne In Sab Zaalimaana Taxes Ke Bar’khilaaf (Opposite) Sirf Saal Me Ek Hi Baar Zakaat Farz Ki Hai, Aur Ghair Muslimon Se Bhi Un Par Waajib (Obligatory) Tax Se Zyada Wasool Karne Ki Ijaazat Nahin Di Toh Islami Riyaasat Me Musalmano Se Baar Baar (Income Tax, Sale Tax, GST, Import Duty, Excise Duty Etc) Ghair Islamic Tax Wasool Karne Ki Gunjaish Kaise Nikal Sakti Hai ??


Lihaza Waazeh Rah Eke Is Tarah Ke Tamam Tax Ghair Sharai Hain Islam Ka Inse Koi Taalluq Nahin 



#IslamicLeaks
#UmairSalafiAlHindi