Thursday, March 4, 2021

BAS EK CHEEZ KA DHYAN RAKHNA

 



बस एक चीज़ का ध्यान रखना,

किसी को ख़ुद मत छोड़ना,
दूसरे को फ़ैसला करने का मौक़ा देना,
यह अल्लाह की सिफ़त है,
अल्लाह कभी अपनी मख़लूक़ को तंहा नही छोड़ता,
मख़लूक़ अल्लाह को छोड़ती है,
और ध्यान रखना!
जो जा रहा है उसे जाने देना,
मगर जो वापस आ रहा है,
उसके लिए कभी दरवाज़ा बंद मत करना,
यह भी अल्लाह की सिफ़ात है,
अल्लाह वापस आने वालों के लिए अपना दरवाज़ा खुला रखता है,
तुम यह करते रहना,
तुम्हारे दरवाज़े पर मेला लगा रहेगा______✍️
मरियम खान

Wednesday, March 3, 2021

ALLAH KE BAARE ME GHALAT TASAWWUR DENA




 घरों में काम करने वाली एक औरत रोटी पकाने के साथ साथ अपनी छोटी सी बेटी को डांट रही थी, जो बार बार जूते के बगैर बाहिर गली में जाने की कोशिश करती थी, उसकी मां उसे डराने के लिए बड़ी अजीब तावीलें पेश कर रही थी,


" अगर तू गली में गई तो अल्लाह गुनाह देगा, तेरे पांवों काट देगा, गला काट के रख देगा। "

मैं पास ही थी, पहले तो मैं समझी के इतनी छोटी बच्ची जो सही से बोल भी नहीं सकती उसको ये सब समझ ही नहीं आ रहा होगा , मगर मैंने देखा के बच्ची ज़रा देर को रूक कर अपनी मां के चेहरे की तरफ गौर से देखते हुए शायद उसके अल्फ़ाज़ पर गौर कर रही थी, इसका मतलब था के बात को ज़ेहन नशीन कर रही थी,

तब मैंने बच्ची को मुखातिब होकर कहा

" मेरी बात सुनो ! अल्लाह ताला ना पांवों काटता है ना गला, ये काम बुरे आदमी करते हैं, अल्लाह ताला तो चीज़ें देता है, कपड़े जूते उसी ने दिए हैं, अल्लाह ताला तुम्हारी अम्मा की तरह प्यार करता है "

फिर मैंने उसकी मां से कहा

" क्यूं छोटी सी बच्ची के सामने अल्लाह को गलत तस्वीर पेश कर रही हो ? क्या ये काम इन्सान नहीं करते ? इंसानों को गलतियां अल्लाह पर मत डालो "

बच्ची की अम्मा हैरान वा परेशान मुझे देखते हुए असबात में सर हिलाने लगी और मुझे लगा के ये अल्फ़ाज़ मुझ पर क़र्ज़ थे, ये अल्फ़ाज़ कुछ साल पहले एक घास काटने वाली औरत ने मेरे हवाले किए थे जब मेरा छोटा सा बेटा बाग़ में रेंगने वाले हसरात उल अर्ज़ को पांवों से रौंद रहा था, मैं बार बार उसे रोकती और कहती के

"अल्लाह नाराज़ हो जायेगा , जब कीड़ों को दर्द होगा तो अल्लाह गुनाह देगा "

तब पास ही घास काटती हुई औरत ने खुरपी रख कर संजीदगी से मुझे कहा

" बीबी बच्चे को वह बात बताओ जो उसे समझ में आए, अल्लाह से अलग मत करो,अल्लाह इतनी सी बात पर नाराज़ होता तो ये सबकुछ ना देता, इसको बताओ के जैसे आपको तकलीफ होती है वैसी ही तकलीफ कीड़ों को भी होती है, और किसी को तकलीफ देने से हमारे प्यारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम ने मना फरमाया है "

मैं भी एक अनपढ़ औरत के मुंह से ऐसी गहरी बात सुनके बिल्कुल इसी तरह हैरान होकर देख रही थी, आज ये अल्फ़ाज़ मैंने रोटी पकाने वाली के सुपुर्द कर दिए ,

यकीनन इसी तरह ये अल्फाज़ आगे ही आगे मुनतकल होते रहेंगे इंशाल्लाह

मनकूल

तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks.com

Tuesday, March 2, 2021

TAALEEMI MAIDAN ME AAGE BADNA

 



बच्चों को बालिग होकर एहसास होता है के असल कामयाबी खिलौने जमा करना नहीं बल्कि तालीमी मैदान में आगे बढ़ना है,

फिर शादी होने पर मालूम होता है के बेहतरीन शरीक ए हयात का मिलना असल कामयाबी है,
फिर रोज़गार के मामलात से दिल में यकीन पैदा हो जाता है के असल कामयाबी कारोबार के बड़ा होने या नौकरी में पोजिशन से है,
जवानी ढलने पर नुक्ता ए नज़र तब्दील हो जाता है के असल कामयाबी तो बसलाहियत औलाद , बड़े से घर और बेहतरीन गाड़ी के होने से है,
फिर बुढापे में इन्सान के नजदीक असल कामयाबी का पैमाना बीमारियों से बचकर जिस्मानी वा दिमाग़ी तन्दरूस्ती का बरकरार रहना करार पाता है,
बिलाआखिर जब मौत का फरिश्ता इन्सान को लेने आ जाता है तो असल बात खुलकर सामने आती है के कामयाबी के तमामतर दुनियावी तसव्वुर दरहकीकत बहुत बड़ा धोका थे, असल कामयाबी का तसव्वुर तो तो अल्लाह की नाज़िल कर्दा किताब कुरआन मजीद में दर्ज है जिसके मुताला वा समझने का वक्त ही नहीं मिल सका था,
इसलिए अभी वक्त को गनीमत जानिए और अल्लाह की तरफ रूजू का जेहन बनाएं,
साभार: Umair Salafi Al Hindi

Monday, March 1, 2021

DUSRI SHADI

 



दूसरी शादी !!

ये 2018 की एक शाम थी जब मेरे मोबाइल की बेल बजी काल रिसीव की,एक सहाब ने सलाम दुआ के बाद में पूछा अब्दुल्लाह साहब ! क्या आप रिश्ते करवाते हैं ??
मैंने कहां जी अलहम्दुलिल्लाह !!,
तो अगला सवाल गैर यकीनी था के सर मैं आपसे मिलना चाहता हूं, मैंने पूछा किस सिलसिले में ,
तो जवाब मिला बहन के रिश्ते के सिलसिले में मदद चाहिए, तीन साल हो गए हैं कोई रिश्ता नहीं मिल रहा,
मैंने मुकम्मल तफसील मांगी तो उन्होंने मुझे तफसील व्हाटसएप कर दी, इसके साथ ही मुलाकात करने की ख्वाहिश ज़ाहिर की, मजीद मालूमात लेने से पता चला भाई किराना की दुकान करते है और मेरे इलाके के नज़दीक ही थे, तो मुलाकात के लिए चला गया, काफी अच्छे और शरीफ इन्सान थे,
बहन के मुताल्लिक पूछने पर बताया के चार साल पहले उस भाई के बहनोई एक हादसे में फौत हो चुके हैं, तीन बच्चे हैं और सितम ये के एक बच्ची माजूर( विकलांग) है,
मैंने कहा हिन्दुस्तान/पाकिस्तान में दूसरे के बच्चे कोई नहीं पालता, ये सुनकर उसके आंखों में आसूं आ रहे थे और कहने लगे "प्रोफेसर सहाब मेरी बीवी ने मेरी बहन और उसके बच्चों का जीना हराम कर रखा है,
औरत ही औरत की दुश्मन है आप किसी तरीके से किसी भी तरह रिश्ता करवा दें अहसानमंद रहूंगा, हाथ जोड़ते हुए कहा '"
मैं हालात को मुकम्मल समझ चुका था लेकिन मसला बच्चों का था फिर एक माजूर बच्ची का साथ, बात कुछ समझ से बाहर थी, खैर कोशिश और तसल्ली देकर वापस आ गया ,
काफी सारे लोगों से बात की सब तैयार मगर बच्चों का सुनते ही सब इनकार कर जाते थे , तंग आकर पहली बीवी की मौजूदगी में शादी करने वालों से बात की तो अंदाज़ा हुआ के उनको सिर्फ जिस्म की ज़रूरत थी और यहां बात बच्चों की भी थी,
जो भी सुनता कहता
" बच्चे नहीं चाहिए भाई मुझे, सुन्नत पूरी करनी है बच्चे नहीं पालना, मैं दूसरे की औलाद क्यूं पालू, दूसरे की औलाद कौन पालता है "
दो महीने इसी तरह गुज़र गए मेरा एक दोस्त जो होलसेल का काम करता था काफी मालदार भी था, माशा अल्लाह
एक दिन उसकी दुकान में बैठे बैठे ख्याल आया मैंने कहा रिज़वान भाई, यार दूसरी शादी क्यूं नहीं कर लेता , उसने गौर से मुझे देखा , मेरी तरफ झांकने लगा, तो मैंने कहा क्या हुआ,
जवाब मिला के अब्दुल्लाह भाई देख रहा हूं आप नशा तो नहीं करने लग गए, क्यूं मुझे मरवाना चाहते हो, मैंने कहा
"रिज़वान ये सुन्नत है, आप माशा अल्लाह अच्छा कमाते हैं, अल्लाह ने आपको बहुत सारी नेमतों से नवाजा है आपको ज़रूर दूसरी शादी करना चाहिए और किसी का सहारा बनना चाहिए "
तो उसके इनकार से भी मायूसी मिली,
खैर कुछ रोज़ बाद रिजवान से दोबारा मुलाकात हुई तो काफी मायूस लग रहे थे, मैंने पूछा क्या बात है कोई परेशानी दिखाई दे रही है कहने लगे दुकान में चोरी हो गई, हालात खराब हो गए हैं, मेरी बीवी भी झगड़ा करके मायके जा बैठी है और लगातार तलाक की मांग कर रही है, औलाद नहीं थी,
मैंने अफसोस किया है तसल्ली देने के साथ ही कह दिया के :- रिज़वान इसीलिए आपसे कह रहा हूं की दूसरी शादी कर लें ,आज दूसरी बीवी होती तो पहली बीवी भी छोड़ कर नहीं जाती, अगर नहीं यकीन तो दूसरी शादी करके यतीम बच्चों के सर पर हाथ रखें, फिर देखें अल्लाह की कुदरत, पहली बीवी भी वापस आयेगी और खुशहाली भी"
मेरी तरफ देखने के बाद रिजवान भाई ने कुछ सोचा और पूछा कितने बच्चे हैं उनके, मैंने कहा दो, एक बेटा एक बेटी, माजूर बच्ची का ज़िक्र मैं भूल चुका था , उसने कहा ठीक है आप बात करें जो मेरे अल्लाह को मंजूर,
मैंने लड़की के भाई को कॉल की और शाम को उसको उसकी दुकान पर भी बुला लिया , मुलाकात कारवाई, घर कारोबार देखने के बाद हां कर दिया ,
इस तरह उनका निकाह प्रोफेसर्स रिसर्च अकादेमी टीम के प्रोफेसर्स ने पढ़ाया और रेहाना अपने बच्चे लेकर रिज़वान की जिन्दगी में खुशगंवार झोंके की तरह शामिल हो गई,
रिज़वान भाई ने एक मकान जो किराए पर दिया हुआ था खाली करवा कर रेहाना वा बच्चों को वहां शिफ्ट कर दिया, तब पहली बीवी को पता चला तो वह आंधी की तरह घर आई, घर खाली देखकर रिज़वान भाई को घर बुलाया,
और मियां और पहली बीवी की नोक झोंक हुई तो रिज़वान ने कहा :- तुम्हे नहीं रहना तो बेशक नहीं रहो, तलाक़ लेना है तो बेशक ले लो, अगर यहां रहना है इज़्ज़त से रहो जैसे पहले रहती थी, लेकिन ये ना कहना के रेहाना को छोड़ दो, ये मुमकिन नहीं"
पहली बीवी ने जब देखा कि तीर कमान से निकल चुका है तो वह भी खामोश हो गई,
अब रिज़वान भाई की जिंदगी में बहारें आ चुकी थीं, रेहाना ने उसकी जिंदगी में रंग भर दिए थे, बच्चे शहर के बेहतरीन स्कूल में दाखिल हो गए, लेकिन रिज़वान भाई रेहाना की आंखों में अब भी उदासी देखते और शक कर चुके के कोई बात ज़रूर है,
एक दिन उसने मुझसे जिक्र किया तो मैंने कहा :-" उदासी क्यूं ना हो उसकी एक बच्ची उससे दूर है"
रिज़वान ने कहा:- " बच्ची ! कौनसी बच्ची ??"
तो मैंने सब कुछ बता दिया , रिज़वान ने सब सुनकर मुझे एक नज़र देखा तो मैंने सर झुका लिया,
उस दिन शाम को रिज़वान भाई बीवी से कहने लगे तैयार हो जाओ, बच्चों को भी तैयार करो आज हमें आपके भाई के घर जाना है ज़रूरी काम है,
बीवी का दिल धड़क उठा, पूछा तो जवाब मिला :- जितना कहा है उतना करो "
कुछ देर के बाद ही वो भाई के घर थे, वहां रिज़वान ने रेहाना को कहा के:-" माजूर बेटी कहां है ?" इतना सुनना था के उसे लगा शायद कुछ गलत होने जा रहा है,
वह दूसरे कमरे में है, रिज़वान ने दूसरे कमरे में जाकर देखा तो गलाजत से लतपत बच्ची इंतेहाई कमज़ोरी की हालत में पड़ी थी, रिज़वान भाई इशारा करते हुए कहने लगे :- " रेहाना बच्ची के कपड़े बदलो ये हमारे साथ जायेगी "
रेहाना ने ये सुना तो रिज़वान के कदमों में गिर गई, भाई ने रिज़वान को गले लगा लिया, यूं वह बच्ची रिज़वान अपने घर ले आया,
अब वह बच्ची और दूसरे वह बच्चे रिज़वान, रेहाना और उसकी पहली बीवी की जान हैं, रिज़वान दिन दोगनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है,
एक दिन रिज़वान और उसकी बेगम ने मेरी दावत की तो रेहाना भाभी ने हाथ जोड़कर कहा:-"
सर अब्दुल्लाह साहब कभी ज़िन्दगी में रिश्ते करवाने का काम मत छोड़ना मेरी रिज़वान से शादी ना होती तो मैं आज बच्चों को कत्ल करके खुदकुशी कर चुकी होती, लोगों को बताओ अब्दुल्लाह भाई दूसरी शादी वह नेमत है जो शर्तिया खुशहाली देती है, खुशहाली लाती है, मेरी जैसी लाखों हैं जो दुखों भरी ज़िन्दगी गुज़ार रही हैं, उनको भी खुशियां देनी हैं, काश के ये नेमत समाज में आम हो जाए"
ये वाकया फर्ज़ी नहीं हकीकी है,
दूसरी शादी वाकई एक नेमत है और ऐसी औरत से दूसरी शादी जिसके बच्चे हों, जिन्दगी में हकीकी खुशियां बिखेर देती हैं, मगर क्या किया जाए ऐसे लोगों का जो दूसरी शादी करना चाहते हैं लेकिन बच्चे नहीं चाहते ,
जो दूसरी शादी के मज़े तो लेना चाहते हैं मगर किसी के सर दस्त ए शफकत नहीं रखना चाहते,
क्या ये है सुन्नत ??
कहां लेकर जाए वह औरत उन बच्चों को कत्ल कर दे या किसी दरिया में फेंक दे, क्या करे, जिन्दगी मौत का किसको इल्म, कब किसको मौत अपने शिंकजे में ले ले,
इल्म है नहीं ना तो हमारे बाद तुम्हारे बच्चों के साथ ऐसा हो, फिर क्या करोगे ?? देर मत करो,
दूसरी शादी करना चाहते हो तो बच्चों वाली से करो, पहली बीवी को भी कहने के काबिल होगे के सहारा देने के खातिर की है, बेसहारा बच्चों को बाप का सहारा दो, ये मत कहो के किसी के बच्चे नहीं पाल सकता , क्या तुम पालते हो बच्चों को ??
अरे पालने वाली जात तो अल्लाह की है, अल्लाह से डरो, डरो उस वक्त से जब अल्लाह तुम्हे खुद दिखाए के देखो कौन पालता है , तुम या मैं ??
कम से कम औरतों को इस किस्म की किसी मजबूर को सहारा देने वाली दूसरी शादी को तो सपोर्ट करना चाहिए,
साभार: हाफ़िज़ अब्दुल खालिक भट्टी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
ब्लॉग: Islamicleaks.com

Sunday, February 28, 2021

APNA DIL BADA RAKHEN

 



एक शख्स समुंदर के किनारे वाक कर रहा था उसने दूर से देखा के कोई शख्स नीचे झुकता , कोई चीज उठाता है और समुंदर में फेंक देता है,

ज़रा करीब जाता है तो क्या देखता है के हजारों मछलियां किनारे पर पड़ी तड़प रहीं हैं, शायद किसी बड़ी लहर ने उन्हें समुंदर से निकाल कर रेत पर ला पटका था , और वह शख्स उन मछलियों को वापस समुंदर में फेंक कर उनकी जान बचाने की कोशिश कर रहा था,

उसे उस शख्स की बेवकूफी पर हंसी आ गई और हंसते हुए उसे कहा :-" इस तरह क्या फर्क पड़ना है हजारों मछलियां हैं कितनी बचा पाओगे ??"

ये सुनकर वह शख्स नीचे झुका , एक तड़पती मछली को उठाया और समुंदर में उछाल दिया वह मछली पानी में जाते ही तेज़ी से तैरते हुए आगे निकल गई, फिर उसने सुकून से दूसरे शक्श से कहा :-" इसे फ़र्क पड़ा "

ये कहानी हमें समझा रही है के हमारी छोटी से कोशिश से भले मजमूई हालात तब्दील ना हो मगर किसी एक के लिए वह फायदेमंद हो सकती है,,

लिहाज़ा दिल बड़ा रखें और अपनी ताकत वा हैसियत के मुताबिक अच्छाई करते रहें इस फिक्र में मुब्तिला ना हों के आपकी इस कोशिश से मुआशरे (समाज) में कितनी तब्दीली आई,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
ब्लॉग: islamicleaks.com

Saturday, February 27, 2021

SAUDI ARAB AUR IKHWANI PROPAGANDA

 



सऊदी अरब और इख्वानी प्रोपगंडा


सऊदी अरब ताकत दिखाकर पेट्रोल का दाम घटा दिया तो कहने लगे, रूस की चापलूसी में किया है,

रूस ने ओपेक प्लस की मीटिंग तलब की और कीमत पर बात चीत करने के लिए अपील की और सऊदी ने इनकार कर दिया, तो कहने लगे : बिन सलमान ज़िद्दी है ये अपने साथ सब को ले डूबेगा

अमेरिका ने कीमत घटने पर सऊदी अरब को चेतावनी दी तो कहने लगे : अब सऊदी कि खैर नहीं

आज अमेरिका खुद सऊदी से मीटिंग की अपील कर रहा है तो कहते नजर आ रहें हैं : अमेरिका की बात तो मानना ही है,

2016 में जब ट्रप सदर बना था तो का रहें थे : अब सऊदी कि खैर नहीं,

लेकिन जब उसने पहला दौरा सऊदी का किया तो कहने लगे : ट्रंप तो सऊदी को चूसने आया है,

सऊदी ने भारत की ऑयल कंपनी से 100 बिलियन डॉलर का मुआहेदा किया तो कहने लगे : सऊदी को कश्मीरियों की कोई फिक्र नहीं,

जब ये मुअहेदा खतम कर दिया तो कहने लगे : ये रियाकारी है,

जब सऊदी अरब ने पिछले साल सियाहती वीज़ा जारी करके 300 रियाल फीस लगाई तो कहने लगे : आल ए सऊद ने बिलाद ए हरमैन को कमाई का जरिया बना लिया है,

जब उमरे वीज़ा पर पाबंदी लगा दी तो कहने लगे : आल ए सऊद ने खाना काबा का तवाफ करने से मुसलमानों को महरूम कर दिया,

जब सऊदी अरब ने कोराना वबाई बीमारी की रोकथाम के लिए पूरे मुल्क में लॉक डाउन कर दिया तो कहने लगे : बिलाद ए मुकद्दस में आल ए सऊद ने सिनेमा खोला तो अल्लाह ने हरमैन को बंद कर दिया

लेकिन जब इसी वबाई बीमारी की वजह से पूरी दुनिया में लॉक डाउन लगा दिया गया तो कहने लगे : ये अल्लाह का अजाब है,

कुछ हफ्तों पहले जब सऊदी अरब ने G20 मुमालिक और दीगर आलमी तंजीम को कोराना वाबई बीमारी से निपटने के लिए एक वर्चुअल मीटिंग में हिस्सा लेने की दावत दी, जो के अपने अंदाज में दुनिया के अंदर पहली मीटिंग थी तो कहने लगे : ये भी छोटा मुंह और बड़ी बात कर रहा है,

लेकिन जब बाशमूल तहरीकी खलीफा साहब ने सऊदी अरब कि दावत पर लब्बैक कह कर इस नादर मीटिंग में हिस्सा लिया तो कहने लगे : इसका कोई फायदा नहीं है,

हुथियों ने रियाद पर मिसाइल फेंका तो कहने लगे : सऊदी कमजोर है,

जब सऊदी ने हुथिओं के ठिकानों पर हमला करके इनके असलहा ज़ख़ीरा को तबाह कर दिया तो बिलबिला कर कहने लगे : सऊदी येमेनी बच्चों को मारता है,

नोट : सऊदी अरब इसी लिए अपने दुश्मनों कि बातों कि परवाह किए बगैर शान से आगे की तरफ बढ़ रहा है, और दुश्मन ए ममलका दुनिया के सामने उसकी तरक्की को देख कर जल भुन रहें हैं

तर्जुमा : UmairSalafiAlHindi
IslamicLeaks 

Friday, February 26, 2021

AAJKAL SABSE ZYADA DHOKA AUR FAREB IN EHSASON NE DIYA HAI

 



आजकल सबसे ज़्यादा धोका और फरेब इन एहसासों ने दिया है के

" मुझे कोई चाहे "
" मुझे कोई मुहब्बत करे "
" कोई अपना हो "
अपने चाहे जाने की ख्वाहिश सबको होती है लेकिन इसे हासिल करने के पीछे झूठी तारीफ़, खुशनुमा अल्फ़ाज़, और दोहरे रवैए होते हैं, इन ख्वाहिशात को छोड़ दें,
हम लोगों को कायल करते हैं के हमसे मुहब्बत करे, क्योंकि हमें मुहब्बत चाहिए होती है,
यूं लोगों के पीछे मुहब्बत का काशकोल लेकर फिरने से बेहतर है के अपने वजूद को खुदसे मुकम्मल करे,
इतनी बमकसद ज़िन्दगी गुजारें की कभी तन्हाई ना हो, खुद के साथ जिएं, खुद से मुहब्बत करें, फिर आपको कभी किसी से मुहब्बत की भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी,
बहन अजरा नफीस