Tuesday, August 11, 2020

TERA AINA HAI WO AINA







तू बचा बचा के ना रख इसे, तेरा आइना है वो आइना ।
के शिकस्तआ हो तो अज़ीजतर, है निगाहें आइना साज में ।।

वो दिल जो अल्लाह के लिए टूटते हैं अल्लाह को बहुत पसंद होते हैं, अपनी ख्वाहिशों की कुरबानी करने में अल्लाह की राह में की जाने वाली कोशिश में आने वाली रुकावटों के नतीजे में,

हक बात करने पर मिलने वाले ताने या नफस को कुचलकर उस पर जब सब्र की इमारत कायम कि जाती है, और सब्र के दौरान सेहरा पर चलते हुए दिल पर जो छाले पड़ते हैं, वो दिल बड़े कमाल के होते हैं !

सब्र तो कभी भी आसान नहीं रहा और अगर इतना आसान होता तो इतना बड़ा अजर ना होता !

इसीलिए यही बासब्र दिल अल्लाह को बहुत भाते हैं, फिर ऐसे दिलों पर अल्लाह की मुहब्बत बरसती है,

जो अल्लाह के लिए टूटे और फिर अल्लाह उस छोड़ दे ये नामुमकिन है,

वो इस कुर्बानी का सिला अल्लाह की मुहब्बत की सूरत में पाते हैं,

तो कहां ये अल्लाह की मुहब्बत से पेबंद लगे दिल और कहां नफस की पैरवी करने वाले खुशनुमा दिल

कोई मुकाबला नहीं दोनों का !!!

Monday, August 10, 2020

COMMUNISM AUR ISLAM



मैं कम्युनिज़्म से बहुत मुतास्सिर (प्रभावित)था, क्योंकि वह इंसानों में यक्सानियत की आवाज उठाता है, अमीरी गरीबी के फ़र्क को मिटाता है, बड़ी जात छोटी जात के फ़र्क को मिटाता है, और उन तमाम मानताओं का विरोध करता है जो यह फ़र्क पैदा करती हैं चाहे वह धर्म के नाम से आई हें या कुरीतियों के, या सामाजिक मान्यताओं के,

मगर जब हमने इस्लाम को पढ़ा तो पता चला कि इस्लाम ना सिर्फ इस यक्सानियत की आवाज उठाता है बल्कि ऐसा करके भी दिखाता है, इस्लाम आक़ा और गुलाम को लड़वाए बिना, मज़दूरों और मिल मालिकों में ख़ूरेज़ी करवाए बिना,अमीरों ग़रीबों को एक दूसरे का दुश्मन बनाए बिना ही यक्सानियत काइम कर देता है,

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा,

"जो खुद खाते हो वही अपने गुलाम को खिलाओ जो खुद पहनते हो वही अपने गुलाम को पहनाओ, उनपर ज़रूरत से ज्यादा बोझ ना डालो, और उनके काम में हाथ बटा लिया करो,"

तारीख़ नवेश लिखते हैं,

"जब कोई सफीर हज़रत उमर से मिलने के लिए आता तो उसे यह पूछना पड़ता के उमर कौन हैं, क्योंकि उमर और उनका गुलाम एक जैसे कपड़े पहने एक साथ बैठे होते,"

अल्लाह का शुक्र है कि उसने मुझे इस्लामी तारीख पढ़ने का शर्फ़ बख़्शा और मुझे नास्तिक होने से बचा लिया,

अगर आज इस्लाम अपनी अस्ल शक्ल में हम मुसलमानों की जिंदगी में मौजूद होता तो दुनिया में कोई भी ना लेनिन से मुतास्सिर होता ना ही मारक्स से, और सारे बुद्धिजीवी और न्याय प्रिय लोग मुसलमान होते, और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम को अपना हीरो मान रहे होते,
✍️मौलाना हारुन छतरपुर

Sunday, August 9, 2020

IKHWANI TAHREEKI KE BHAI RAAFZION KI BANU UMAYYA SE DUSHMANI





इख्वान तहरीकी के भाई राफजियों की बनू उमैया से दुश्मनी का खुमार,

मुआरक अल अमान इदलिब के अंदर शाम में मुजरिम बशर अल असद के लिए लड़ने वाली ईरानी मुस्लाह राअफजी मलेशियाओं ने बाशारी फौज के साथ मिलकर मुसलमानों के आठवे खलीफा उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ को क़ब्र खोद कर बाक़ियात को निकाल लिया है, फिर पूरे मकबरे को जला दिया है,

नोट : ये वही इलाका है जहां तुर्क और रूसी फौज एक साथ गश्त कर रहीं हैं ताकि उस शहर पर दोबारा सुन्नी मुसलमानों का कब्ज़ा ना हो सके,

लेकिन इस दिलखराश सानहे पर तुर्क सदर तय्यब उर्डुगां का कोई बयान नहीं आया, दिलचस्प बात ये है के अल जजीरा ने भी ये खबर लगाई है मगर ईरान का नाम ना लेकर लिखा है कि सीरियाई फौज और उसके हम्नवाओं ने ये हरकत की है,

और ताज्जुब की बात ये भी है के उसी खुमैनी नजरिए के डॉक्टर इसरार भी ताईद करते थे जो के खिलाफत बनू उमैया के शदीद तरीन दुश्मन हैं,

Saturday, August 8, 2020

HAR CHEEZ KI QEEMAT USKI MANDI ME LAGTI HAI









हर चीज की कीमत उसकी मंडी में लगती है,

एक उस्ताद था वह अक्सर अपने शार्गिदों से कहा करता ता के ये दीन बड़ा कीमती है, एक रोज़ एक तालिब ए इल्म का जूता फट गया, वह मोची के पास गया और कहा :- मेरा जूता मरम्मत कर दो, उसके बदले में तुम्हे दीन का एक मसला बताऊंगा ,

मोची ने कहा :- अपना मसला रख अपने पास, मुझे पैसे दे,

तालिब ए इल्म ने कहा :- मेरे पास पैसे तो नहीं है,

मोची किसी सूरत ना माना और बेगैंर पैसे जूता मरम्मत ना किया,

तालिब ए इल्म अपने उस्ताद के पास गया और सारा वाक्ए सुना कर कहा

" लोगों के नजदीक दीन की कीमत कुछ भी नहीं "

उस्ताद अकलमंद थे तालिब ए इल्म से कहा :- अच्छा ऐसा करो मैं तुम्हे एक मोती देता हूं तुम सब्जी मंडी जाकर इसकी कीमत पता करो,

वह तालिब ए इल्म मोती लेकर सब्जी मंडी पहुंचा और एक सब्जी फरोश से कहा, इस मोती की कीमत लगाओ,

उसने कहा तुम इसके बदले दो तीन नीबू उठा लो, इस मोती से मेरे बच्चे खेलेंगे,

उस तालिब ए इल्म अपने उस्ताद के पास आया और उसने कहा उस मोती को कीमत दो तीन नीबु है,

उस्ताद ने कहा :- अच्छा अब तुम इसकी कीमत सोनार से मालूम करो, वह गया और पहली है दुकान कर उसने मोती दिखाया तो दुकानदार हैरान रह गया और कहा अगर में इस पूरी दुकान को भी बेच दूं, तो भी इस मोती को कीमत पूरी ना होगी, तालिब ए इल्म ने अपने उस्ताद के पास आकर सारा माजरा सुनाया

उस्ताद ने कहा :- बच्चे ! हर चीज की कीमत उसकी मंडी में लगती है, दीन को कीमत अल्लाह की मंडी में लगती है, इस कीमत को अहले इल्म ही समझते हैं, जाहिल क्या जाने दीन की कीमत क्या है,

Friday, August 7, 2020

HUBBE ALI YA BUGHZ E MUAWIYA







हुब्बेअली या नफरत ए मूआविया



ये जो अहले सुन्नत में जितने हजरात सय्यदना हुसैन के गम में यजीद की कब्र में कीड़े भरते नजर आते हैं और यौम ए हुसैन के दिन यजीद की बुराई में पोस्ट लगाते नहीं थकते,



कभी आप लोगों ने उन में से किसी साहब को यौम ए अली वाले दिन सय्यदना अली के कातिल अब्दुर्रहमान बिन मुलजिम को कोसते हुए देखा या सुना है ??


कभी आपने देखा के इन लोगों ने अब्दुर्रहमान बिन मुलजिम की मुज़म्मत में कोई पोस्ट लगाई ?? नहीं हरगिज़ नहीं देखा होगा,


आप ऐसा कभी नहीं देखेंगे के क्यूंकि ऐसा कुछ अहले शिया नहीं करते, अहले शिया यौम ए हुसैन के दिन यजीद और सहाबा पर तो तबर्रा पढ़ते हैं लेकिन यौम ए अली वाले दिन अब्दुर्रहमान बिन मुलजिम की मुजम्मत में ऐलानिया कुछ नहीं कहते,


सो जो काम अहले शिया नहीं करते वहीं काम अहले सुन्नत में मौजूद उनकी नक्कालों के यहां भी होता नज़र आता है, क्या वजह है कि बेटे के कातिलों पर लानत और बाप के क़ातिल का ज़िक्र तक नहीं,


इख्वान तहरिकी मसलक से खुद को जोड़ने वाले एक गैर ताहिर साहब जो यजीद का नाम बगैर गाली के लेना गुनाह समझते हैं, मौसूफ ने आज तक कभी ना इब्न मुलजिम को गाली देना तो दूर की बात उसका मुजम्मती ज़िक्र तक नहीं किया, क्यूं ???


क्यूंकि मऊसूफ के रूहानी खालाजाद भाई अहले शिया जो ऐसा नहीं करते दिखाई देते हैं, और मौसूफ़ तो मशहूर हैं अहले शिया की नक्काली में फिर चाहे वह इमाम बड़ों में जाकर उनको मर्सियों और और नौहो से लुत्फ़ अंदोज होना हो या फिर उनकी तरह हज़रत अली या हज़रत हुसैन के नामों के आगे पीछे इमाम अलैहि हिस्सालम लगाना हो,


इसी तरह इन सब हजरात को सय्यदना हुसैन की शहादत में इस्लाम ज़िंदा होता नज़र आता है लेकिन सय्यदना अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर की शहादत का दिन भी इनको याद नहीं रहता,

हां ! कभी किसी को सय्यदना अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर की याद आ भी जाए तो वो हुब ए सय्यदना अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर की याद में नहीं बल्कि नफरत ए हज्जाज बिन युसुफ में आती है, वरना तो उनसे हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर की शहादत का दिन और उसके वाकयात पूछ लें, आपको यूं देखना शुरू कर देंगे के जैसा के आपके किसी खलाई मखलूक से मुतालिक मालूमात मांग ली है उनसे,

अलबत्ता जहां हज्जाज की बात आती है तो उनको फौरन सय्यदना अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर और हज़रत असमा बिन अबू बक्र की मुहब्बत इस कद्र ज़ोर से आती है के हज्जाज का तबर्रा बे इख्तियार मुंह से रास्ते निकल जाता है, वरना ना तो उन्हें सय्यदना अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर से कुछ लेना देना है और ना ही सय्यदना असमा बिन अबू बक्र से,

हज्जाज वा यजीद पर लानत भेजना कार ए सवाब समझते हैं लेकिन कभी आपने उनके मूहों से अबू लुलु फिरोज और अब्दुर्रहमान बिन मुलजिम का नाम ना सुना होगा,

कभी सय्यदना उस्मान पर 14 दिन तक पानी बंद करने वाले मालिक अल अश्तर नखी और कनाना बिन बिश्र के बारे में कोई मुज़म्मती बयान ना पढ़ा या सुना होगा अभी घाकफी बिन हरब को पलीद कहते ना सुना होगा,

कहीं भी कैसे उनके दिल और दिमाग़ पर शियत के जेर ए असर यजीद और हज्जाज का भूत सवार है, बाक़ी सहाबा के कातिलों का उनसे क्या लेना देना, क्यूंकि अहले शिया को उनसे कुछ लेना देना जो नहीं है, सो अहले सुन्नत में मौजूद अहले शिया के उन नक्कालों और कव्वालों को भी उन कातिलों को कोई फिक्र नहीं, उनके पेश ए नजर बस सिर्फ यजीद हज्जाज और सय्यदना मुअविया ही है, क्यूंकि उनके रूहानी भाई यानी अहले शिया जो उन अशहाब की मुजम्मत में कव्वालियां गाते फिरते हैं,

सो ये भी उनके पीछे बैठे तालियां पीटने का काम करना अपना फ़र्ज़ ए ऐन समझते हैं

फिर यार लोग कहते हैं के आप बिला वजह ही उन हजरात पर अहले शिया को तोहमतें लगाते हैं

तहरीर : मुहम्मद फहद हारिस
तर्जुमा : UmairSalafiAlHindi
ब्लॉग : ISLAMICLEAKS

Thursday, August 6, 2020

POLICE BRUTALITY





पुलिस उत्पीड़न

नबी ए करीम मुहम्मद (sws) ने फ़रमाया :- " क़रीब है के अगर तुम्हे लंबी मुद्दत मिल गई तो तुम ऐसे लोगों को देखोगे
जिनके हाथों में गायों की दुमों जैसे कोड़े होंगे , वह अल्लाह के गजब में सुबह गुजारेंगे और अल्लाह की सख्त नाराजगी में शाम बसर करेंगे "

(सही मुस्लिम हदीस 7195 )

UmairSalafiAlHindi

Wednesday, August 5, 2020

SHIA SUNNI KA BHAI HAI ??





शिया - सुन्नी भाई भाई हैं ??

जी हां ! शिया - सुन्नी का भाई है,

शेख सदूक , शिया का इतना बड़ा मुहाद्दिस है अगर वह ना रहे तो शिया मजहब खतम हो जाए, वह अहले सुन्नत और सहाबा की तकफीर करता है। ( अल इकादात पेज 103)

क्यूंकि शिया - सुन्नी भाई भाई

शेख मुफीद , तीसरा बड़ा मुहद्दीस है, जिसकी किताबों पर शियात की बुनियाद उठी हैं वह भी सुन्नियों को काफ़िर कहता है (अल मसाइल नकला अन बहरुल अनवार जिल्द 2 पेज 391)

क्यूंकि शिया - सुन्नी का भाई है ,

शेख तूसी, शियों का चौथा खंभा है, उसने भी अहले सुन्नत और सहाबा दोनों को काफ़िर करार दे रखा है, ( तहज़ीब अल कलाम जिल्द 1 पेज 335)

क्यूंकि शिया - सुन्नी आपस में भाई है ??

शेख हाली मुताखिर शिया का सबसे बड़ा नाम है और सहाबा को काफ़िर कहता है ( अल अल्फीन पेज 13)

क्यूंकि शिया - सुन्नी का भाई है

खुमैनी कहा करता था जिस ने शिया मजहब की रूह को समझना हो तो बाकिर मजलिसी की किताबों का मूताला करे, और बाकर मजलिसी सहाबा को काफ़िर कहता है, क़ुरआन को मूहैरफ कहता है, तौहीद की बुनियाद हिलाता है

क्यूंकि शिया - सुन्नी का भाई है

बिलांशुबह तारीख के तमाम अदवार में अहले सुन्नत को शिया के यहां सबसे बड़ा दोस्त समझा जाता रहा है, और इस दोस्ती की बुनियाद हमालिया भी बुलंद हैं, सो वह सुन्नियों को हामालिया से दिखा देना पसंद करते है

उन्होंने अपने एम्मा से महदी के जहूर के बाद के वाकयात नकल किए है
लिखते हैं वह आकर सबसे पहले बनू शैबह को क़त्ल करेगा

( बहरूल अन्वार 52/313, अलल शराई 1/229 वा सनद सही )

क्यूंकि शिया - सुन्नी का भाई है

जब उनका इमाम मेंहदी आएगा तो तमाम मस्जिदों के मीनार गिरा देगा ( बाहरुल अनवर 52/325)

क्यूंकि शिया - सुन्नी भाई भाई,

हत्ता के मेंहदी आकर मस्जिद हराम को भी गिरा देगा तोड़ देगा ( बहारुल अनवर 5/338)

क्यूंकि शिया - सुन्नी भाई भाई,

मस्जिदों को गिराने के बाद वह अरबों को ज़ीबाह करेगा

इमाम जाफर सादिक कहते हैं
ما بقي بيننا وبين العرب إلا الذبح

" हमारे और अरबों के दरमियान सिर्फ ज़ीबह होना ही तो बचा है " ( बहारूल अनवार 52/349)

यानी अरबों को जीबह कर दिया जाएगा, अबू बसीर ने उनके किसी इमाम से रिवायत किया है
إن أهل مكة ليكفرون بالله جهرة وإن أهل المدينة أخبث من أهل مكة، أخبث منهم سبعين ضعفا.

" अहले मक्का ने अल्लाह के साथ वाज़ेह कुफ्र किया है और अहले मदीना और अहले मक्का से सत्तर दर्जा ज़्यादा खबीस हैं " ( उसूल अल काफी 2/265 , सनद सही उंद अल शीया )

क्यूंकि शिया - सुन्नी का भाई है

अबू अब्दुल्लाह से शियाओं ने नक़ल किया वह कहते हैं
كأني بحمران بن أعين وميسر ابن عبد العزيز يخبطان الناس بأسيافهما بين الصفا والمروة '

" मैं हमरान बिन ऐन और मैसर बिन अब्दुल अज़ीज़ को देख रहा हूं जो सफा वा मरवा के दरमियान अपनी तलवारों से लोगों को मार रहें हैं " ( बहार उल अनवर 40/53 सनद सही अंद शिया)

क्यूंकि शिया - सुन्नी का भाई है,

दौर ए मौजूद के मुसन्नफ अहसन ज़ैदी ने अब्दुल्लाह बिन सबा की तहरीक के मुतलिक खुले लफ़्ज़ों में लिखा

" हम कहते हैं जी हां ! अगर वाकई अब्दुल्लाह बिन सबा कोई सख्स था और उसने खिलाफत के शिराज़ह को बिखेरने का इंतजाम किया था तो हमें एक नहीं लाखों ऐसे अब्दुल्लाह बिन सबा चाहिए, हम ऐसे किरदार पर फख्र करते हैं जो जिस हुकूमत को बातिल समझे उसे फना कर दे इसलिए के तहरीक शिआत का एक मकसद ये भी है "

( मजहब शिया पेज 178)

क्यूंकि शिया - सुन्नी का भाई है,

तुम हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ की क़ब्र को रोते हो, अगलों ने अम्मा आयशा से ले कर सिद्दीक ए अकबर तक की क़ब्र उखाड़ने के प्लान अपनी किताबों में दर्ज कर रखें है,

तुम शामी मुसलमानों के लिए रोते हो, उन्हें वक़्त मिलने पर तुम्हारे बच्चों का भी खून पी जाना है,

तुम सय्यदना मुंआविया की बात करते हो, उन्होने सिद्दीक और फारूक को भी गालियां देने में कसर नहीं छोड़ी है,

क्यूंकि शिया - सुन्नी का भाई है

बेशक तुम फिर्का वारियत के कायल नहीं, क़ुरआन की मानवी वा लफ्जी तहरीफ गवारा कर लोगे, लेकिन क़ुरआन का दीफ़ा करके " फिरका परस्त" नहीं बनोगे,

हम अम्मा आयशा की जात पर तोहमत बर्दाश्त करेंगे, लेकिन उनकी दीफ़ा वाली " फिरका वारियत" हमसे नहीं होगी,

क्यूंकि शिया हमारे मुसलमान भाई और हम उनके काफ़िर भाई हैं,
۔ وما علینا الا البلاغ

साभार : अबुल वफा मुहम्मद हम्माद असरी
तर्जुमा : Umair Salafi Al Hindi
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