Thursday, January 28, 2021

Uqaabi Rooh Jab Bedaar Hoti Hai Jawaanon Me ,

 



उकाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में ,
नज़र आती है उसको अपनी मंज़िल आसमानों में।
ना हो नाउम्मीद, नाउम्मीद जवाल ए इल्म है,
उम्मीद मर्द मोमिन है अल्लाह के राज़दानों में।
नहीं तेरा नशेमन क़सर ए सुल्तानी के गुंबद पर,
तू शाहीन है, बसेरा कर पहाड़ों की चट्टानों में,
Uqaabi Rooh Jab Bedaar Hoti Hai Jawaanon Me ,
Nazar Aati Hai Usko Apni Manzil Aasmaano Me ,
Na Ho Na'ummeed , Na'ummeedi Zawaal E Ilm Hai,
Ummeed Mard Momin Hai Allah Ke Raaz daano Me ,
Nahin Tera Nasheman Qasr E Sultaani Ke Gumbad Par ,
Tu Shaheen Hai, Basera Kar Pahaadon Ki Chattanon Me.



Wednesday, January 27, 2021

ऐ नए साल बता, तुझमें नयापन क्या है।

 




ऐ नए साल बता, तुझमें नयापन क्या है।

हर तरफ खलक ने क्यूं शोर मचा रखा है।
रोशनी, दिन की वही, तारों भरी रात वही।
आज हमको नजर आती है हर एक बात वही।
आसमान बदला है अफसोस, ना बदली है ज़मीन।
एक हिंदसे का बदलना कोई जिद्दत तो नहीं।
अगले बरसों की तरह होंगे करीने तेरे।
कैसे ! मालूम नहीं बारह महीने तेरे।
तू नया है तो दिखा सुबह नई, शाम नई।
वरना इन आंखों ने देखें है नए साल कई

Tuesday, January 26, 2021

वक्त (2020) को बुरा मत कहो

 




वक्त (2020) को बुरा मत कहो
अल्लाह ताला फरमाता है,
" इब्न आदम मुझे तकलीफ पहुंचाता है, वो ज़माने को बुरा कहता है, हालांकि ज़माना तो मैं ही हूं " (हदीस)
बीता साल इन्सान को उसकी औकात बता कर रुखसत हुआ है के अपने इल्म और कामयाबी पर ज़्यादा घमंड ना कर , अगर मेरा रब चाहे तो एक छोटे से ज़र्रे से तुझे आसमान से फर्श पर ला खड़ा कर सकता है,
गुज़रा साल 2020 उसी ज़माने का एक हिस्सा है, 2020 हमारी ज़िन्दगी में एक उस्ताद की तरह आया और बहुत कुछ सिखा कर गया है, जैसे
1- अल्लाह की तरफ लौटना
2- अपने नफस पर काबू रखना
3- अपनी ख्वाहिशात पर कंट्रोल करना,
4- सदकाह और खैरात करना,
5- रिश्तेदार और सच्चे दोस्तों की पहचान करना
6- फ़िज़ूल खर्ची से बचना,
अगर 2020 में हम ये सब नहीं कर पाए तो अफसोस है इब्न आदम पर ,
Allah Taala Farmaata Hai,
" Ibn Adam Mujhe Taqleef Pahunchaata Hai, Wo Zamane Ko Bura Kahta Kahta Hai Halanki Zamana To Main Hi Hoon"
Beeta Saal Insaan Ko Uski Auqaat Bata Kar Gaya Hai Ki Apne Ilm Aur Kaamyaabi Par Zyada Ghamand Na Kar, Agar Mera Rabb Chaahe To Ek Chhote Se Zarre Se Tujhe Arsh Se Farsh Par La Khada kar Sakta Hai
Guzra Saal 2020 Bhi Usi Zamane Ka Hissa Hai, 2020 Hamari Zindagi Me Ek Ustad Ki Tarah Aaya Aur Bahut Kuch Sikha Kar Gaya Hai, Jaise
1- Apne Nafs Par Kaabu Rakhna
2- Apni Khwahishaat Par Control Karna
3- Sadaqah Aur Khairaat Karna
4- Rishtedaaron Aur Sacche Doston Ki Pahchan Karna,
5-Allah Ki Taraf Lautna,
6- fizul Kharchi Se Bachna
Agar 2020 Me Ham Ye Sab Nahin Samjh Paaye To Afsos Hai Ibn Aadam Par,
साभार : Umair Salafi Al Hindi

Monday, January 25, 2021

बहनोई और साली




 बहनोई और साली


ये तो हम सब जानते हैं के बीवी के बहन के लिए हमारे समाज में लफ्ज़ " साली" है,

लफ्ज़ अगर्चे अच्छा नहीं लगता लेकिन इसी नाम से शुरू करते हैं, अमूमन बीवी की बड़ी बहनें शादीशुदा होती है और अगर गैर शादीशुदा भी हो तो वक्त के साथ साथ तबियत में संजीदगी आ चुकी होती है,

जबकि बीवी की छोटी बहनें उमर के उस मरहले में होती है जब ज़िन्दगी का हर रुख खूबसूरत और हर मोड़ दिलकश मालूम होता है,

ऐसे में बहन का शादी होना और एक नए फर्द यानी बहनोई का घर से ताल्लुक होना भी एक अलग रंग लिए होता है, समाज के आम चलन की वजह से अमूमन छोटी सालियां अपने बहनोई से हंसी मज़ाक की बातें भी करती हैं और अपने बहनोई का ख्याल भी बहुत रखती हैं, जब कभी बहन का अपने मायके जाना हो तो अक्सर यही सालियां बहन और बहनोई को बोरियत से बचाने के लिए उनको मुकम्मल वक्त देती हैं,

अब मर्द के रुख से कुछ बात हो जाए, हमारे समाज में एक मुहावरा मशहूर है

" साली आधी घर वाली"

अक्सर मर्द जब अपने अज़ीज़ दोस्तों ने बैठते हैं तो छोटी सालियों के नाम पर एक अजीब मुस्कुराहट उनके चेहरे पर आ जाती है, दोस्त अहबाब भी दो मायने जुमलों (Double Meaning Joke ) से इस मुस्कुराहट को मजीद गहरा करने में अहम रोल अदा करते हैं,

ये हकीकत अजीब सही लेकिन बहरहाल समाज में मौजूद है,अपने बहनोई के इस रुख से उनकी सालियां भी अक्सर बेखबर होती है,

अब इस्लाम के रुख से इस पहलू को देखते हैं,

इस्लाम के रुख से बहनोई साली का आपस में शरई पर्दा है, बहनोई साली का नामहरम है और घर के अंदर गाहे बगाहे उसकी मौजूदगी की वजह से इस पर्दे मे बहुत एहतियात की ज़रूरत है, ये ऐसी हकीकत है जिससे लड़की के मां बाप भी आंखें बंद किए रखते हैं,

अक्सर बहनोई भी इस पर्दे को ज़रूरी नहीं समझते, और सालियां " हमारे बहनोई तो हमारे भाई जैसे है" की सोच के साथ इससे सर्फ ए नज़र अंदाज़ करती हैं, और ये मिलान की खतरनाक हद बहनोई के इलावा किसी के इल्म में भी ना होगी,

और वह बहनोई कभी अपनी बीवी को भी इस मिलान का नहीं बताएगा !!!

ये ऐसा खामोश ज़हर है जिससे या तो वह मर्द वाकिफ है या अल्लाह ताला की जात उसके दिल का हाल जानती है, ना मर्दों मे इतनी ईमानी ताकत है के वह अपनी इस हरकत को तसलीम कर सकें,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com

Sunday, January 24, 2021

ये जुगनुओं की कयादत में चलने वाले लोग,

 



ये जुगनुओं की कयादत में चलने वाले लोग,
थे कल चिराग़ की मानिंद जलने वाले लोग,
हमें भी वक्त ने पत्थर सिफत बना डाला,
हमीं थे मोम की सूरत पिघलने वाले लोग,
हमीं ने अपने चिराग़ों को पामाल किया ,
हमीं है अब कफ ए अफसोस मिलने वाले लोग,
सिमट कर रह गए माजी के दास्तानों तक,
हुदूद ए जात से आगे निकलने वाले लोग,
सितम तो ये के हमारी सफो में शामिल हैं,
चिराग़ बुझते ही खेमा बदलने वाले लोग,
हमारे दौर का फिरौन डूबता ही नहीं,
कहां चले गए पानी पर चलने वाले लोग।
Ye Jugnuon Ki Qayaadat Me Chalne Waale Log,
They Kal Charaagh Ki Maanind Jalne Waale Log,
Hamen Bhi Waqt Ne Patthar Sifat Bana Daala ,
Hamim They Mom Ki Soorat Pighalne Waale Log,
Hamin Ne Apne Charaaghon Ko Pamaal Kiya ,
Hamin Hain Ab Kaf e Afsos Milne wale Log,
Simat Ke Rah Gaye Maazi Ke Daastaanon Tak,
Hudood E Zaat Se Aage Nikalne Waale Log,
Sitam To Ye Ke Hamari Safon Me Shaamil Hain,
Chiraagh Bujhte Hi Khema Badalne Wale Log,
Hamare Daur Ka Firaun Doobta Hi Nahin,
Kahan Chale Gaye Paani Par Chalne Waale Log,
Iqbal Ashar

Saturday, January 23, 2021

हमारा निज़ाम ए तालीम (Our Education System)

 



हमारा निज़ाम ए तालीम (Our Education System)


फितरत से जंग करके भला कोई कैसे कामयाब हो सकता है, फितरती तौर पर हर इंसान अपनी मादरी ज़बान में जो अपने खयालात का इजहार कर सकता है वह गैर ज़बान में मुमकिन नहीं, और इसी तरह सीखने और सीखाने के अमल में भी गैर ज़बान बहुत बड़ी रुकावट है,

यही वजह है सिवाए कुछ गुलाम मुमालिक के पूरी दुनिया में उनका निज़ाम ए तालीम उनकी अपनी ज़बान में है, और वह तरक्की की मंज़िल पर चढ़ते जा रहें हैं,

हाई स्कूल का रिज़ल्ट देखा बच्चों ने नंबर 500 में से 498 ले लिए लेकिन हमारा ये फर्सूदा निज़ाम आज तक कोई वैज्ञानिक पैदा नहीं कर सका,

हमारे निज़ाम ए तालीम में फितरी उलूम के जरिए से बच्चों को तालीम देने के बजाए रिवायती रटटा सिस्टम बड़े पैमाने पर चल रहा है लेकिन तखलीक और तहकीक के मैदान में हम दुनिया से बहुत पीछे हैं,

हम काबिल और माहिर डॉक्टर और इंजीनियर तो बना रहें हैं लेकिन ऊंचे दर्जे के साइंटिस्ट पैदा नहीं कर रहें हैं,

साइंसी उलूम के आला रिसर्च और नई इजादात में हिन्दुस्तानी मुसलमानों का कोई काबिल ए ज़िक्र नाम नज़र नहीं आता , यही वजह है के हम मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग वा टेक्नोलॉजी में तरक्की याफ़्ता मुल्कों के बहुत नीचे है,

यूरोप और अमेरिका दवा, मेडिकल आलात और जंगी असलहा के सौदागर हैं और मुस्लिम मुल्क उनके खरीदार हैं, आलमी मार्केट और आलमी मीडिया पर उनका कब्ज़ा है और हम उनको चैलेंज करने के काबिल नहीं,

अहद हाज़िर में वह कौम मुआशी और सियासी तौर पर खुदमुख्तार नहीं हो सकती जो साइंस के उलूम में दूसरे मुल्कों के मोहताज हों, हमारा तालीम ए निज़ाम नाकिस है क्यूंकि वह अहद हाज़िर में हमारी मूआशी ज़रूरीयात और कौमी तक़ाज़ों से हम आहिंग (Campatible) नहीं,

आखिर में... मैं एक मावाज़ ना पेश करना चाहता हूं के 73 साल हो गए हिन्दुस्तान को आज़ाद हुए लेकिन एक साइंसदा पैदा नहीं हुआ, बल्कि जिस मकसद के लिए ये निज़ाम ए तालीम बनाया गया था वह अपना मकसद पूरा कर रहा है, वह क्या है ??

दीन से दूरी, बच्चों को इल्हाद (नास्तिकता) सिखाना, मदरसे और मदरसे वालों से नफरत सिखाना, अंग्रेजों के लिए नौकरों की खेप तैयार करना ,

ये सब काम तो बख़ूबी हो रहें हैं लेकिन ऐतराज़ उलेमा पर करते हैं के मादारिस टेक्नोलॉजी के मैदान में आगे नहीं बड़ सके,

हालांकि ये काम तो उनका था इलज़ाम दूसरों पर लगा रहें हैं,

मदारिस वाले तो अपना काम बखूबी कर रहें हैं, और अल्लाह उन्हें मजीद दीन की खिदमत की तौफीक़ अता फरमाए.. आमीन

साभार : Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Friday, January 22, 2021

ख़ास आदमी और एक कुम्हार




ख़ास आदमी और एक कुम्हार

बादशाह ने गधों को कतार में चलते हुए देखा तो कुम्हार से पूछा

" तुम इन्हें किस तरह सीधा रखते हो ??

कुम्हार ने जवाब दिया के :-" जो भी गधा लाइन तोड़ता है मैं उसको सज़ा देता हूं बस इसी खौफ से ये सब सीधा चलते हैं "

बादशाह ने कहा :-" क्या तुम अपने मुल्क में अमन कायम कर सकते हो ??"

कुम्हार ने हामी भर ली, बादशाह ने उसे मंसब अता कर दिया, पहले ही दिन कुम्हार के सामने एक चोरी का मुकद्दमा लाया गया,

कुम्हार ने फैसला सुनाया के चोर के हाथ काट दो,

जल्लाद ने वज़ीर की तरफ देखा और कुम्हार के कान में बोला के :-" जनाब ये वज़ीर साहब का खास आदमी है "

कुम्हार ने दोबारा कहा के चोर के हाथ काट दो,

इसके बाद खुद वज़ीर ने कुम्हार के कान में सर्गोशी की के :-" जनाब थोड़ा ख्याल करें ये अपना खास आदमी है "

कुम्हार बोला:-" चोर के हाथ काट दिए जाएं और सिफारिशी की ज़ुबान काट दी जाए "

और कहते हैं कुम्हार के सिर्फ इस एक फैसले के बाद पूरे मुल्क में अमन कायम हो गया,

हमारे यहां भी अमन क़ायम हो सकता है मगर इसके लिए चोरों के हाथ काटना पड़ेंगे और कुछ लोगों की जबानें काटना पड़ेंगी,

इंशा अल्लाह हमारे मुल्क में भी अमन कायम होगा

साभार: शिजा सलफी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks