Wednesday, May 5, 2021

रिलेशन (ताल्लुक़ात)

 



रिलेशन (ताल्लुक़ात)


मुख्लिस इन्सान किस्मत से मिलता है, किसी की तरजीहात में अव्वल होने से खूबसूरत एहसास और कोई भी नहीं है,

यकीन मानिए शक्ल वा सूरत , माल वा दौलत, घर गाड़ी वगेरह की कोई अहमियत नहीं होती,

इन्सान मुहब्बत, इज़्ज़त, खुलूस और संजीदगी के बिना सारी ज़िन्दगी अधूरा और ना मुकम्मल रहता है,

बहुत से लोग किसी के खुलूस और संजीदगी को मुख्तलिफ चीज़ों को मेयार बनाकर ठुकरा देते हैं, मगर ऐसे लोग फिर सारी ज़िन्दगी इज़्ज़त और खुलूस के लिए तरसते रहते हैं,

कितने लोग तमाम ऐशों आराम की चीजों के बावजूद अधूरे है, नमुकम्मल है, ज़रा सी मुहब्बत के लिए सारा दिन इंतजार करते हैं, इज़्ज़त के लिए हसरतें उनके दिल में पैदा होती रहती हैं, उनके कान अपने लिए ये जुमले सुनने को तरसते हैं के

"आप मेरी ज़िन्दगी का बेहतरीन इंतेखाब हो,"
" मेरा होना आपके होने से है,"
" आपकी आंखों में आंसू अच्छे नहीं लगते ,"
" इन मोतियों को ऐसे बर्बाद मत करो,"
" परेशान मत हो क्यूंकि आप अकेले नहीं हो,"

ये जुमले हर मर्द वा औरत की ज़रूरत है, इस फितरत के हामिल लोग बेहतरीन हमसफर होते हैं,

यकीन मानिए, अंडरस्टैंडिंग बहुत बड़ी चीज़ है, ये मुहब्बत से ऊपर के दर्जे की है,

अंडरस्टैंडिंग किसी भी रिश्ते को मजबूत और खूबसूरत बना देती है वरना सिवाए तकलीफ और दर्द के और कुछ भी हासिल नहीं होता ,

साभार:Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Tuesday, May 4, 2021

रिश्ते वज़ाहतों के मोहताज हो जाएं तो समझ लें के रिश्ते की उमर खतम हो चुकी है,

 



कभी कभी हम गलत नहीं होते बस हमारे पास वह अल्फ़ाज़ नहीं होते जिससे हम खुदको सही साबित कर सकें कोई सफाई दे सकें और शायद देने की ज़रूरत भी नहीं होती,


क्यूंकि जब रिश्ते वज़ाहतों के मोहताज हो जाएं तो समझ लें के रिश्ते की उमर खतम हो चुकी है,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com

Monday, May 3, 2021

आदत मुहब्बत से ज़्यादा ख़तरनाक होती है,..!

 



कहते हैं के...


आदत मुहब्बत से ज़्यादा ख़तरनाक होती है,..!

किसी की आदत हो जाए तो मुश्किल होता है उसको खुद से दूर करना,!! तो क्यूं हम इस खतम होने वाली दुनिया से अपने वक्त को भरते हैं??

क्यूं हम खाली वक्त में इंसानी सहारे तलाश करते हैं ?? जब हमारे पास एक ऐसा सहारा , साथी, दोस्त मौजूद हो !!

तो क्यूं हम किसी और की राह देखें??

अपनी आदतों में अल्लाह की रज़ा को जोड़ लें, अल्लाह से बातें करें,

इसको जो आपकी एक याद पर आपके करीब हो जाता है, उसको अपनी रूह में उतार लें,

आपको किसी सहारे की ज़रूरत नहीं महसूस होगी,

अल्लाह ताला हमें अपना बना ले,.... आमीन

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Sunday, May 2, 2021

दुनिया एक पूंजी है और दुनिया की सबसे बेहतर पूंजी नेक औरत है

 



औरत के बारे में गैर इस्लामी विज्ञान कुछ भी कहें उनका कोई महत्व नहीं है लेकिन यह सही है कि औरत पेचीदा और मुश्किल भी है और सादा व आसान भी ।


वह गुनाह की पोटली भी है और फजीलत,पाकीजगी और सुंदरता की मूर्ति भी । इसके छोटे से सर के अंदर क्रान्ति की आग भी भरी होती है और उसके अन्दर सुख चैन और शान्ति भी होती है ।
औरत के इसी महत्व को देखते हुए नबी करीम सल्ल० ने इसकी ताकीद फरमायी कि बेदीन के मुकाबले में दीनदार औरत को प्रमुखता दी जाए और दीनदार की सख्त इच्छा केवल इसलिए की गयी ताकी खानदान में इस्लाम अच्छी तरह समा जाए । क्योंकि बेदिन पत्नी पति और आने वाली नस्लों के लिए मुसीबत बन जाएगी ।

यही कारण है कि नबी करीम सल्ल० ने फरमाया -"दुनिया एक पूंजी है और दुनिया की सबसे बेहतर पूंजी नेक औरत है ।" 

Saturday, May 1, 2021

मेरे नज़दीक मुहब्बत इन्सान को भटकने से मिलती है,

 




मेरे नज़दीक मुहब्बत इन्सान को भटकने से मिलती है, जिन लोगों को बिन मांगे झोली में मुहब्बत मिल जाती है यकीन कीजिए उनकी ये खुशखयाली होती है,

बहुत लोगों से सुनने मिला है उनको मुहब्बत तो मिल गई लेकिन वह तमाम दावे खतम होते गए, पता है जो लोग एक के होकर रहते हैं वह हमेशा धोका खाते हैं,

क्यूंकि जिस एक के वह होते हैं वह उसका नहीं होता , इसलिए फिर धोका खाने के बाद कहते हैं के जिस शख्स पर भरोसा किया है, उसने भरोसा तोड़ा,

मैंने ज़िन्दगी में एक ही तरीका अपनाया हर चाहत के दावेदार को मौका दिया, क्यूंकि मुहब्बत कोई नौकरी का नाम तो नहीं, ये एक जज्बे का ही नाम है और मान का नाम है,

जो कभी भी जाग सकता है, हर किसी को मुहब्बत की मंज़िल ज़रूर मिलती है, लेकिन उनको कभी नहीं मिलती जो एक के होकर रहते हैं, और फिर धोका खा कर मर्द और औरत ज़ाद को बुरा कहते हैं,

यकीन कीजिए जब तक आप किसी को मौका नहीं देंगे तो कैसे आपको पता चलेगा के कौन कैसा है, इसलिए मैं मौका देता हूं ताकि पता चले के कौन मेरा खैरख्वाह है,
पता है,

जब मुहब्बत को मंज़िल मिल जाती है तो उसके बाद इन्सान इधर उधर नहीं भटकता , क्यूंकि उसने मंज़िल ही भटक कर पाई होती है,

और मैं उमैर अंसारी बिल्कुल यकीन से कह सकता हूं जो मुहब्बत आपको बिन मांगे मिल जाती है ना, यकीन कीजिए वो सिर्फ एक सराब (Illusion) है ,

अपनी ज़िन्दगी में उस शख्स के लिए आंसू ना बहाएं जो मुहब्बत नहीं कर सका, और जो आपके साथ है जो चाहे मजबूर है लेकिन मुनाफिक नहीं वह शख्स आपके लिए बेहतर है,

क्यूंकि बुरे इन्सान के साथ ज़िन्दगी गुज़ार सकते हैं लेकिन मुनाफिक के साथ नहीं,
साभार: Umair Salafi Al Hindi

Friday, April 30, 2021

मंगनी या मंगनी की रस्म क्यूं ??? सीधे निकाह क्यूं नहीं !!




 मंगनी या मंगनी की रस्म क्यूं ??? सीधे निकाह क्यूं नहीं !!


मुस्लिम समाज में मंगनी की रस्म अदा कर देने के बाद मुसलमान बच्चे और बच्चियां एक दूसरे के साथ बात चीत वा गिफ्ट देना शुरू कर देते हैं,

मुसलमान समाजी महाज़ पर किरदार की अजमत के खैरख्वाह है उन्हे समाज से बुराई खतम करने के लिए बरपा लिया गया है, लेकिन क्या किया जाए अदम जिहालत का , मुसलमां इस कदर रस्म वा रिवाज के दलदल में फंस गया है कि यहूद भी शरमा जाए,

मुसलमान अगर मंगनी की रस्म के बजाए अपने बच्चों का सीधा निकाह कर दिया करें तो समाज में आसानियां वा सहूलियत बढ़ेगी , मेहनत गैर जरूरी तौर पर बरबाद नहीं होंगी और समाज का अखलाकी, इजतेमाई किरदार, पाकीज़गी वा वकार ज़्यादा महफूज़ रहेगा,

मिल्ली हालत अफसोसनाक हैं, बदकिस्मती से इल्म , वकार और अखलाक से आरी, भारत के पसमांदा मुस्लिम समाज में निकाह से पहले मंगनी की गैर इस्लामी, नाकाबिल ए कुबूल और एक अजीब वा गरीब रस्म ईजाद कर दी गई है, मिस्कीन वा फकीर हैं जो मंगनी को निकाह का जुज समझ लेते हैं, बच्चों का सीधे सादा इस्लामी निकाह कर देने के बजाए पसमांदा शौक़ीयों के नए शौक हैं,

खुद को मुसलमान कहने वाले भूखे, नंगे, लालची, जाहिल वा मसाकीन भिकारियो का गिरोह है, पसंद और रिश्ता तय होने के शुरुआती वा बुनियादी मरहले से ही ये जाहिल डाकू घूम घूम कर मुख्तलिफ लोगों के यहां खाते हैं, तोहफे और लिफाफे वसूलते हैं और जहां पैसा ज़्यादा मिल जाता है वहीं गिर जाते हैं, इन भिकारियों का सारा चक्कर पैसे , जहेज़ और लूट मार रहता है,

गैरत वा वकार से खाली भिकारीयों की इस पसमांदा " रस्म मंगनी" का मकसद भी सिर्फ दूसरों को लूटना और वक्त बरबाद करना होता है,जबकि मंगनी जैसी अजीब वा गरीब पसमांदा रस्म की अदायगी किसी इन्सान के पसमांदा और बे हैसियत होने की साफ अलामत है, इसके इलावा इस रस्म के समाजी और अखलाकी नुकसान अलग हैं,

इस्लाम मुकम्मल दीन है, इस्लाम के अपने उसूल वा जाब्ते है, इस्लाम पसमांदा है,जाहिल और रिवायत पसंदों का ऑप्शनल या इख्तियारी मजमून नहीं है जो मर्ज़ी वह कर लो, इस्लाम खुलूस वा अमल चाहता है, सच यही है के इस्लाम से हटे तो पूरी तरह लपेट दिए जाओगे , खूंटे पर भी जगह नहीं मिलेगी, कुछ काम ना आएगा, इस्लाम ही राह ए निजात है,

इस्लाम इंसानों वा इस्लामी समाज में सहूलियत, सादगी और समाजी तावुन का सादा मिजाज़ देता है, नरमी वा सहूलियत फैलाने का हुकम देता है, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और आम इन्सानों के साथ एहसान वा हमदर्दी की तलकीन करता है,

इस्लाम या इस्लामी सादगी से हटकर लालच, बेगैरती, ज़बरदस्ती, पसमांदगी जिल्लत और रुस्वाई है,

अल्लाह ताला हर पसमांदगी से महफूज़ रखे,.....आमीन

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com 

Thursday, April 29, 2021

जो दूसरों की दलाली के लिए अपनों से गद्दारी करे उसका यही अंजाम होना चाहिए

 



सुल्तान महमूद गजनवी के पास एक शख्स मोर लाया जिसका एक पैर नहीं था , जब सुल्तान ने उसकी कीमत पूछी तो उस शख्स ने बहुत महंगी कीमत बताई, सुल्तान ने हैरान होकर पूछा के


" इसका एक पांव भी नहीं है फिर भी इतनी ज़्यादा कीमत क्यूं ??"

वह आदमी बोला," जब मैं मोरों का शिकार करने जाता हूं तो इसको साथ ले जाता हूं वहां जाल के साथ इसे बांध देता हूं, फिर ये बहुत अजीब सी आवाज़ निकाल कर दूसरे मोरों को बुला लेता है, और मैं उनका शिकार आसानी से कर लेता हूं"

सुल्तान महमूद गजनवी ने उस आदमी को मोर की कीमत अदा करके उसको जिबाह कर दिया, आदमी ने हैरान होकर पूछा के , ज़ीबाह क्यों कर दिया ??

सुल्तान के तारीखी अल्फ़ाज़ हमेशा याद रखियेगा,

" जो दूसरों की दलाली के लिए अपनों से गद्दारी करे उसका यही अंजाम होना चाहिए "

मनकूल

तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog : Islamicleaks.com