काबिल-ए-ज़िक्र (खास) बात यह है कि यह जनाब 'इख्वानी विचारधारा' (Muslim Brotherhood thought) के सक्रिय व्यक्ति हैं। यह शायद पहली बार हो रहा है कि उनकी कोई बात इतनी तर्कसंगत और सही महसूस हो रही है। अगर इसी विचारधारा को मानने वाले भारतीय उपमहाद्वीप (برصغیر - India/Pakistan/Bangladesh) के लोगों की सोच से इनका मुकाबला किया जाए, तो वाकई बड़ा अफ़सोस होता है।
ईरान ने अरबों को ही निशाना क्यों बनाया?
हाल ही में कई अरब लोग इस बात पर सोच-विचार कर रहे हैं कि आखिर ईरान ने अपनी बमबारी का रुख सिर्फ अरब देशों और जॉर्डन की तरफ ही क्यों रखा? जबकि उसके पड़ोस में तुर्की, अज़रबैजान और पाकिस्तान जैसे गैर-अरब (Non-Arab) देश भी हैं, जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने (Military Bases) मौजूद हैं, लेकिन ईरान ने उन्हें कुछ नहीं कहा।
आखिर अरब ही क्यों निशाना बने? अगर ईरान सुरक्षा या मिलिट्री का बहाना बनाता है, तो वही बात उन दूसरे पड़ोसी देशों पर भी लागू होती है जिन्हें ईरान ने छोड़ दिया। गौर करने वाली बात यह भी है कि ईरान के हमलों ने सिर्फ फौजी ठिकानों को नहीं, बल्कि रिहायशी इलाकों (Civilian areas) को भी नुकसान पहुँचाया।
इस नफरत की वजह क्या है?
इस सवाल का जवाब ईरान के हुक्मरानों की सोच में छिपा है। इसके पीछे "फारसी राष्ट्रवाद" (Persian Nationalism) और "फिरकापरस्ती" (Sectarianism) का वो मेल है जो अरबों के खिलाफ एक पुरानी नफरत रखता है। यह नस्ली भेदभाव (Racism) इतना गहरा है कि ईरान अपने ही संप्रदाय के अरब लोगों को भी नहीं बख्शता।
इतिहास गवाह है कि 1979 के इंकलाब के बाद से इस शासन ने अपने एजेंडे के लिए अरबों का इस्तेमाल किया और उन्हें युद्ध की आग में झोंक दिया—चाहे वो शाम (Syria) हो, लेबनान हो, यमन हो या इराक। यहाँ तक कि इराक में पवित्र मजारों और बाजारों में होने वाले धमाकों में भी अरबों का ही खून बहा।
धोखा और सियासत
हकीकत तो यह है कि अरब देशों ने पूरी कोशिश की कि अमेरिका को इस इलाके में सैन्य कार्रवाई से रोका जाए ताकि शांति बनी रहे। ईरान इन कोशिशों को जानता था, लेकिन बदले में उसने क्या दिया? उसने अपने मिसाइलों का रुख हमारे शांत देशों की तरफ कर दिया। यह सरासर "एहसान फरामोशी" और पुरानी दुश्मनी निकालने जैसा है। शाम से लेकर यमन और बहरीन तक, ईरान का दोहरा रवैया किसी से छिपा नहीं है।
ऐ अल्लाह! तू जालिमों को पकड़—चाहे वो ताकत के नशे में चूर बड़ी ताकतें हों, यहूदी (Zionists) हों या वो लोग जो मुसलमानों के लिए बुरा इरादा रखते हैं।