Al Tamur Traders

Wednesday, December 14, 2016

"बेशर्म सुरज" ( ALEPPO IS DYING)











"बेशर्म सुरज"


कल रात चांद ने हमारे बच्चो को माँओ की आगोश में डुबकर उसके सीने से सैराब होते हुये देखा, फिर उसी चांद ने हलब में बच्चो को देखा उनकी प्यास तो पेशानी से टपकते लहु से बुझ रही थी, चांद की रोशनी में ये मंजर भी उभरा... 

हमारे दस्तरख्वानों पर गरम रोटीयां भांप उड़ा रही थी लेकिन बारुद की बु लिये उङता गुबार भी छुपा ना रहा.. 

हमारे मुर्गन खानो की बु फलक तक पहुंची वहां लहु के छींटो से उठती मिट्टी की भीनी खुश्बु फलक से बहुत आगे तक रसाइ पा गइ.. 

चांद को कोइ फर्क तक ना पङा , वह ना  फटा,, वह बे नुर भी ना हुवा... हमारी बे हिसी ऐसी असरअंदाज हुयी कि चांद भी बे हिस हो गया, वह बिना तङपे अपने वक्त पर आराम करने चल दिया...
 

हमारी बे हयाइ ने सुरज से भी शर्म का जेवर छीन लिया, हमारी जिन बहनों के बदन रात की तारीकी में भी ना दिखे थे सुरज ने वह पाकदामन जिस्म हलब में सब को दिखाये..
 

हलब का दुध पीता बच्चा भी हम से नाराज रहा उसने औंधे मुंह मरना पसंद किया कि कहीं हमारी अंधी नजरे उसके चेहरे का नुर ना बुझा दे...
 

ए सर जमीने शाम, तुझे तो कस्सामे अजल ने बङा खुश किस्मत बनाया है, तेरी मीट्टी अंबिया और अवलिया से भरी पड़ी है, और मासुम कलियों के लहु से तर है,,, तेरे लिये खुश बख्ती है कि जन्नत वासी तेरे वतन से निकलेंगे जो अपने महल्लात में जाते हम पर नजर भी ना डालना चाहेंगे... 

हमारा उनका रिश्ता ही क्या है?? 

उनकी चीखों पर हमारे जिस्म ना तङपे, दिल ना लरजे, आंखे ना बही, मुस्कुरुहाट ना बुझी, हम बीवी बच्चों के पहलु में पुर सुकून रहे, हमारे हाथ दुआ के लिये भी ना उठे, ,, तुम्हारे लिये नुसरत तो क्या मांगते अपने लिये दर्दे उम्मत तक ना मांगा...
 

सर जमीने शाम....काबिले रश्क है तु तेरे शहीदो के लिये, खुदा ने कुर्आन में बागात, नहरें और दीदा-ए-गफ्फार का वादा किया,,, तु बेफिक्र रह,, हमारा उस में कोइ हिस्सा नही, हमारी करतुतें हमें जहन्नम में औंधे मुंह गिरा कर रहेंगी (अल्लाह हमें माफ करे). हलब के बच्चों तुम्हारे आराम में हमारी बिलबिलाती आवाजे खलल ना डाल सकेंगी..
 

ए खुदा हम तुझ से हलब के मुसलमानों के लिये क्या मांगे?? हम तो खुद ही तही दामन है, इलाही हमारे दिल को तङपा दे, 

खुदाया!! अश्क का सैले रवां अता फरमा,, मौला हमारे गुनाहों से लथपठ जिस्मों पर एक मर्तबा तो लरजह तारी हो.. 

ए अल्लाह हम हलब वालों के लिये नहीं अपनी खातिर मांगते हैं तु उनकी नुसरत फरमा, उनका हर शहीद हमारे खिलाफ हुज्जत बनता जा रहा है,, 

या अल्लाह हमारी ये हालत नहीं कि हम तेरा कहर बनकर जालिमों पर तुट पड़े,, तु बगैर वास्ते के उन पर अपना कहर नाजिल फरमा,,

रहीम!! बस उस कहर का रुख हमारी तरफ ना कर देना..

रउफ!! हमारे हुक्काम ने तेरे आगे हाथ उठाने से नहीं रोका है तु हमारे इन बुदह उज्रों पर पकड़ ना करना .....
 

#आह_हलब