Saturday, August 14, 2021

आज कल बड़े पैमाने मुस्लिम लड़कियां गैर मुस्लिम लड़कों के साथ भाग रही है




 आज कल बड़े पैमाने मुस्लिम लड़कियां गैर मुस्लिम लड़कों के साथ भाग रही है क्योंकि उनके साथ जॉब कर रही है, स्कूल कॉलेज में पढ़ रही है तो गलत माहौल मिला हुआ है नमाज़ छोड़ कर कुफ्र कर रही है अलग अब ये तो बंद नहीं किया जा सकता इसलिए माहौल चेंज करने के लिए अब वक्त आ गया है कि औरतों को मस्जिद में एंट्री दिया जाए (पहले बड़े शहरों के कुछ मस्जिद से शुरुआत हो), वहाँ उसके तालीम का भी प्रबंध हो उसे सब सही गलत बताया जाए, मिम्बर से इन मसलों पर बयान हो


अब वक्त आ गया है कि औरतों को मस्जिद में एंट्री दिया जाए (पहले बड़े शहरों के कुछ मस्जिद से शुरुआत हो), वहाँ उसके तालीम का भी प्रबंध हो उसे सब सही गलत बताया जाए. अब लड़कियाँ सब जगह जा ही रही है सिवाय मस्जिद के

अबू हुरैरा ने कहा कि: मर्दों के लिए सबसे आला दर्जे की सफ पहली है, और सबसे कमतर दर्जे की सफ आखरी सफ है, और औरतों के लिए सबसे बेहतरीन साफ आखरी सफ है और उनके लिए सबसे कमतर दर्जे की सफ पहली सफ है। (सहीह मुस्लिम ८८१)

इस सिलसिले में एक और हदीस है:
“सहल बिन साद ने रिवायत की: मैं ने देखा कि एक मर्द, बच्चों की तरह, अपने कम कपड़ों को, कपड़े की कमी की वजह से, अपनी गर्दनों के गिर्द बांधे हुए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पीछे, नमाज़ अदा कर रहा था। मुनादी लगाने वालों में से एक ने कहा: ऐ मस्तुरात अपने सर नहीं उठाएं जब तक मर्द (उन्हें) अपना सर ना उठा लें।
(सहीह मुस्लिम: 883)

एक दूसरी हदीस, जिससे औरतों को मस्जिदों में जाने की इजाज़त साबित होती है:
सलीम ने इसकी रिवायत अपने बाप (अब्दुल्लाह बिन उमर) से की है, कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि: जब औरतें मस्जिद में जाने के लिए इजाज़त तलब करें, तो उन्हें मना मत करो।
(सहीह मुस्लिम:884)

एक और हदीस से इस मसले का तस्फिया होता है:
इब्ने उमर ने रिवायत की: औरतों को रात में मस्जिद में जाने की इजाज़त दो। उनके बेटे ने जिनका नाम वाकिद है कहा कि: तो वह फसाद पैदा करेंगी। (रावी) ने कहा: उन्होंने उन (बेटे) के साइन पर थपकी मारी और कहा कि: मैं तुम से अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की हदीस ब्यान कर रहा हूँ, और तुम कहते हो: नहीं!
(सहीह मुस्लिम: 890)

अब्दुल्लाह (बिन उमर) की बीवी जैनब ने रिवायत की: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हम से कहा: जब तुममें से कोई मस्जिद आए तो, उसे खुशबु नहीं लगानी चाहिए।
(सहीह मुस्लिम: 893)

उपरोक्त सभी हदीसें इस बात की तस्दीक करती हैं कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने महिलाओं को मस्जिदों में जाने की इजाज़त दी है। तथापि मस्जिदों में जाना उनके लिए आवश्यक नहीं किया गया था। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने केवल इतना कहा कि, अगर कोई औरत मस्जिद में नमाज़ अदा करना चाहती है तो रात में भी उसे ऐसा करने से नहीं रोका जाना चाहिए। महिलाओं को यह कहा गया था कि जब वह मस्जिद में जा रही हों तो, खुशबु ना लगाएं।

अपनी औरतों को मस्जिद में जाने की इजाजत दो तुम तो जुमा का खुतबा सुन कर नसीहत हासिल कर लेते हो पर तुम्हारी औरतें इसे गुमराह रहती है जिससे वह दीन (शरीयत इस्लाम) से दूर होती चली जाती है

जिस तरह से मस्जिद ए नबवी में और सउदी अरब मुख़्तलिफ़ मस्जिदो मे औरतों का इंतजाम मर्दों से सेपरेट है उसी तरह से हमे भारत में भी करना चाहिए तब औरतों का हक अदा होगा और वह दीन से करिब आएगी इंशॉल्लाह

Friday, August 13, 2021

शैख रज़ाउल्लाह अब्दुल करीम मदनी हाफिजहुल्लाह की बसीरत अफ़रोज़ गुफ्तगू

 



शैख रज़ाउल्लाह अब्दुल करीम मदनी हाफिजहुल्लाह की बसीरत अफ़रोज़ गुफ्तगू


खुलासा

खुदकुशी का असल वजह दहेज़ ही नहीं बल्कि उसके इलावा दर्ज़ जेल वजह भी हैं, बहुत से रिश्ते दहेज़ से पाक मिलते हैं लेकिन उनको गरीबी का बहाना बनाकर कैंसल कर दिया जाता है जबकि अल्लाह का वादा कुरआन में मौजूद है,

नंबर 1, दीन से दूरी,
नंबर 2, नजायेज मुहब्बतों का माहौल
नंबर 3, शादी के लिए रिश्तों के इंतेखाब में जात बिरादरी वाद ,ये बहुत बड़ी वजह है शादियों के मुश्किल होने का जिसके खिलाफ कोई ज़बान खोलने की हिम्मत नहीं करता ,

लड़की गैर मुस्लिम के साथ भाग जाए गवारा है पर गैर बिरादरी के मुस्लिम नौजवान को देना गवारा नहीं , जब गैर मुस्लिम के साथ भागती है तो कितने मां बाप गैरत में आकर खुद बच्ची की जान ले लेते हैं,

नंबर 4, मेरे जैसी खूबसूरत है वैसा ही खूबसूरत लड़का मिले तब ही रिश्ता करेंगे , इसी इंतेजार में लड़कियां बहुत उम्र दराज हो जाती हैं और बहुत से फितनों की नज़र होकर अपनी जिंदगी बरबाद कर लेती हैं,

इसी तरह जितना खूबसूरत मेरा लाडला है, उसी तरह चांद जैसी लंबे कद वाली, लंबे बालों वाली मिलेगी तब ही रिश्ता करेंगे ,

अल्लाह मुस्लिम समाज की इसलाह फरमाए ...आमीन

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com

Thursday, August 12, 2021

मुनाफिक

 



जज़्बाती होना , जल्दी गुस्सा करना, छोटी छोटी बातों को दिल पर लेना और जल्द रो देना , एक साफ दिल आदमी होने की निशानी होती है, इसकी वजह जज़्बात में शिद्दत का होना है,


ये सब खूबियां कभी किसी मुनाफिक (Hypocrite) इंसान में नहीं पाई जाती, इनका ताल्लुक उन लोगों से होता है जो रिश्तों को दिमाग से बढ़कर, दिल से निभाते हैं,

Umair Salafi Al Hindi

Wednesday, August 11, 2021

आजकल एक मश्हूर नारा चल रहा है - 'मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी'

 



आजकल एक मश्हूर नारा चल रहा है - 'मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी'

हालांकि किसी भी इंसान की मर्ज़ी उसके जिस्म पर नहीं चलती

इंसान मुंह से खाता और बोलता है, नाक से सांस लेता और सूंघता है, कान से सुनता, आँख से देखता है, हाथ से चीज़ों को पकड़ता है, और पाँव से चलता है

दुनिया के लगभग हर इंसान के पास ये अंग होते हैं
लेकिन दुनिया का कोई भी इंसान इन अंगों के ऊपर अपनी मर्ज़ी नहीं चला सकता, इनके फंक्शन को नहीं बदल सकता

दुनिया का कोई भी इंसान नाक से नहीं देख सकता, आँख से नहीं सुन सकता, पाँव से सूंघ नहीं सकता, वो अपनी मर्ज़ी से एक अंग के फंक्शन नहीं बदल सकता उनकी औकात हि नही जो अपने हि जिस्म के अंग के कामो को अपने मन मानी मर्जी से चला सके मैं ईकरा अर्श खान कानपुरी पुरे रुये जमी पर जितने भी इंसान है उन सब को खुली चुनौती और चैलेंज दे रही हु अगर तुम सब मिल भी जाओ और सब मिल कर भी इस नेजामे कुदरत में किसी एक अंग के साथ भी उलट फेर कर के दिखा दो पूरे जिस्म की तो बात ही बहुत दूर है

इंसान के जिस्म पर उसकी मर्ज़ी नहीं चलती अगर चलती है तो कोई भी इंसान अपने उपर आयी मौत को रोक कर अपनी उम्र बढ़ा कर दिखाए औकात से जादा बड़ कर बोल देना बेशक आसान होता है लेकिन जब करने कि बारी आती है तो पता चलता है कि कौन कितना पानी में है कहने को तो सब लाखो करोडो़ कि बात करते हैं जैसे वो किसी बादशाह के बेटे हो और शाहनशाही खुद्दारी गुरुर घमंड भी ऐसा होता है जैसे वो इतना पावर फुल ताकतवर है कि उसे कभी किसी कि कोई जरुरत ही नहीं पडे़गी औकात और गुरुर घमंड का तब पता चलता है जब उसके मुसीबत पर उसके रवैईये से खुद उसी के रिश्तेदार दोस्त एहबाब उसका साथ नही देते और बात करते हैं अपनी जिंदगी अपने जिस्म और अपने मर्जी से जिने कि

सच तो ये है मर्ज़ी सिर्फ अल्लाह की चलती है इंसान तो बस एक मिट्टी का खिलौना है और वो अपनी मूर्खता का परिचय दुनिया को कराता है जाहीलाना जुम्ला बोल कर मेरा जिस्म और मेरी मर्जी अल्लाह की कुदरत को मत आजमाना भूल कर भी वर्ना कही तुम्हारे जिस्म मे जान तो रहेगी लेकिन तुम अपने ही बिस्तर से उठने लायक नही रहोगे और तुम्हारे जिंदगी का सहारा एक मामूली सा इंसान हि होगा इस लिए रब के इस्लाम के खिलाफ जाने कि भूल कर भी कोशीश मत करना कुर्आन हदीस को 💕 लगा कर पढ़े और उस पर अमल करने कि कोशीश करेंगे तो हर परेशानी दुःख दर्द बिमारी से महफूज रहोगे इंशा अल्लाह

#ईकरा_अर्श_खान_कानपुरी 🌹🤲🌹

Tuesday, August 10, 2021

मर्द ही ज़ालिम क्यों ??

 



तस्वीर का दूसरा रुख


मर्द ही ज़ालिम क्यों ??

जब भी दहेज की बात आती है तो मर्दों को बुरी तरह लताड़ा जाता है, उन्हे बेगैरत और ना जाने क्या क्या कहा जाता है,

अपने यहां की बात करूं तो यहां एलानिया डिमांड तो नहीं की जाती मगर दहेज की ख्वाहिश सब करते हैं लेकिन हकीकत ये भी है के मर्दों को अगर दहेज की ख्वाहिश होती है तो जरूरी चीजों की होती है,

मगर हम लड़कियां...?? जरूरत से कई गुना ज्यादा सामान खरीदती हैं, शादी की शॉपिंग ऐसे करते हैं जैसे दो तीन नस्लों को दुकानों के चक्कर से निजात दिलाना हो, किसी तरह की क्रॉकरी, कपड़ों और ज्वेलरी का कोई सेट ना छूटे, कोई डिजाइन रह ना जाए,

एक लड़की दूसरी लड़की को देखकर , एक औरत दूसरी औरत को देखकर सामान खरीदते खरीदते अंबार लगा देती है,

शादी के मौकों पर जूता छिपाई, द्वार छिकाई और ना जाने कौन कौन सी रस्म में, किसका हाथ है ?? मर्दों का !!! मुझे तो नज़र नहीं आता!!

जब बॉक्स से सामान निकाल कर एक दो रूम भर दिए जाते हैं तो उसकी कंपनी चैक करने और ब्रांडेड और गैर ब्रांडेड का लेबल लगाने क्या मर्द जाते हैं ??

दहेज पर ताना कसने वाले अक्सर हमारी हम सनफ ही होती हैं तो फिर औरत से हमदर्दी और मर्द जालिम क्यों ?? सच कहूं तो इन रस्मों में मर्दों से ज़्यादा हमारी हिस्सेदारी है,

आखिर में मैं ये कहना चाहूंगी के जो लोग दहेज़ सिर्फ इसी को समझते हैं जो डिमांड की जाए और अगर डिमांड ना किया जाए तो बाप भाई कहते हैं के," हम अपनी बेटी बहन को खुशी से दे रहें हैं"

अगर कोई अपनी बहन बेटी को कुछ दे रहा है तो खास शादी के मौके पर क्यों ?? क्या शादी के बात उनका अपनी बेटी बहन से ताल्लुकात खतम हो जाते हैं ??

तुम चाहो तो अपने बेटियों को सातों जमीन सोना भरकर दो मगर नुमाइश करके गरीबों की झोंपड़ीयों में इज़ाफा क्यों करते हो ??

और मैं समाज से ये भी पूछना चाहूंगी के जब बेटी बहन को साजो सामान " खुशी से " दिया जाता है ताकि वह ससुराल में तानो का शिकार ना हो तो जब वही बहन बेटी विरासत जो की उसका हक़ है उसका मुतालबा करती है तो उनकी गर्दनें छुरियों की नोक पर क्यों रख दी जाती हैं ??

अगर वह ज़बरदस्ती अपना हक ले ले तो इस पर मायके के दरवाज़े क्यों बंद कर दिए जाते हैं ?? क्या उस वक्त बहन बेटी की खुशी प्यारी नहीं होती ??

साभार : बहन सबा यूसुफजई Saba Yosuf Zai
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com

Monday, August 9, 2021

तमाम तर चाहतें कुरबान जिस पर, वही चाहत मांगी गई।




 तमाम तर चाहतें कुरबान जिस पर, वही चाहत मांगी गई।

वक़्त ऐ कुबुलियत था, अल्लाह से अल्लाह की मुहब्बत मांगी गई।

ना और कोई आरज़ू, ना मजीद ख्वाहिश रही बाक़ी
हर्फ ए आखिर में हुआ सवाल तो तहज्जुद की आदत मांगी गई।

Sunday, August 8, 2021

जब वो पैदा हुआ तो उसकी मां ने उसे देखकर मुंह फेर लिया

 




जब वो पैदा हुआ तो उसकी मां ने उसे देखकर मुंह फेर लिया क्योंकि ना सिर्फ वह दोनो हाथों , पांव से महरूम था बल्कि सिरे से उसकी टांगें और बाजू मौजूद ही नहीं थे, इस वक्त उसकी उम्र 37 साल है,


सोचिए उसने पिछले 37 साल बिना टांगों, बाजुओं, बगैर हाथों, पांव के कैसे गुजारे होंगे और वह आज किस हालत में होगा,

अगर आप ऑस्ट्रेलिया में पैदा होने वाले इस सख्स की जिंदगी को पढ़ें तो आपके तमाम गिले शिकवे, तमाम बहाने , सब शिकायतें, हवा में उड़ जायेंगी और मेरी तरह आपका सर भी शर्म से झुक जाएगा क्योंकि वह अपने आधे अधूरे जिस्म के बावजूद एक मुकम्मल और भरपूर जिंदगी जी रहा है बल्कि करोड़ों बुझी आंखों में उम्मीद की रोशनी और मायूस दिलों में जोश की आग भड़का रहा है,

ये सात किताबों का लेखक है और इसकी अक्सर किताबें न्यू यॉर्क बेस्ट सेलर की लिस्ट का हिस्सा बनी हैं, इसकी किताबों की शोहरत का अंदाजा इस बात से लगाएं के ये किताबें दुनिया के चालीस से ज्यादा जबानों में ट्रांसलेट हो चुकी हैं,

वह एक मोटिवेशनल स्पीकर भी है और TED समेत हर काबिल ए जिक्र फोरम पर अपनी गुफ्तगू के जरिए लाखों लोगों की जिंदगियां बदल चुका है उसके मुंह से निकलने वाला हर लफ्ज़ उम्मीद और जिंदगी से भरपूर होता है, अपनी तकरीरी सरगर्मियों के सिलसिले में वह आधी से ज़्यादा दुनिया घूम चुका है,

उसने 2005 में " Limbs Without Limbs" और 2007 में "Altitude is Altitude" के नाम से ट्रेनिंग के इंस्टीट्यूट बनाए जहां वह कारोबारी इदारों , अफ़राद और दुनिया के मुख्तलिफ हुकूमतों के ऑफिसर्स को कामयाबी के गुर सिखाता है,

इसका मीडिया से भी गहरा ताल्लुक है, हर काबिल ए जिक्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके लाखों फॉलोअर हैं जिन्हें वह अपनी गुफ्तगू, वीडियो और तहरीरों के जरिए बेहतर और खुशहाल जिंदगी जीने की तरघीब देता रहता है,

BBC, CNBC, CNN समेत दुनिया भर के मोतबर तरीन टीवी चैनल इसके इंटरव्यू नश्र करते रहते हैं,

इसने मुहब्बत भी की और शादी भी, इसकी बीवी एक खूबसूरत ऑस्ट्रेलिवी मॉडल है, इन दोनो के चार हस्ते खेलते बच्चे हैं, ये अपनी खूबसूरत बीवी और बच्चों के साथ कैलिफोर्निया अमेरिका में अपने आलीशान घर में अपनी मनपसंद जिंदगी जी रहा है,

इस आदमी का नाम Nick Vujicic है,

जब आप अपने पूरे जिस्म के साथ अपनी अधूरी जिंदगी से तंग आने लगे तो इस पोस्ट को बार बार पढ़ लिया करें, इसके अधूरे जिस्म के साथ " पूरी" जिंदगी आपको जीने का हुनर और हौसला अता करेगी,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks