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Tuesday, October 14, 2014

HINDU MAZHAB ME PARDE KI TALEEM





हिंदू भाई अक्सर हमसे कहते हैं कि पर्दा प्रथा स्त्रियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है, और ये अन्याय इस्लाम धर्म ने स्त्रियों पर किया है .... जबकि हिन्दू धर्म मे स्त्रियों पर ऐसा अन्याय कभी नहीं किया गया था ॥

एक और बात बोली जाती है कि हिन्दुओं मे आज अगर कहीं परदा प्रथा प्रचलित है तो वो सिर्फ मुस्लिम आक्रमणकारियों के डर से आई है, और ऐसी कोई प्रथा हिंदू धर्म के मूल मे नहीं थी ....
लेकिन ज़रा खुद देखिए रिग्वेद मे स्त्रियों को सम्बोधित करते हुए जो लिखा है ,

“ ishvar ne tumhe aurat banaya hai, isliye tum apni aankhe jhuki rakha karo, purusho ki taraf mat dekha karo .apne pair ek dusre se sataa ke rakho, aur apne vastr mat kholo , khud ko ghoonghat me chhupa ke rakha karo”
 [ Rigved, Book 8, hym 33, mantra 19 ]

इसी तरह रामकथा मे भी राम चन्द्र जी भी सीता जी से पराये आदमियों से परदा करने को कहते हैं :-

Jab Ram ji ne Parshuram ko aate dekha to Sita ji se kaha ''Sita apne aap ko ghoonghat me chhupa lo aur apni aankhen jhuka lo'' 
[ MahaveeraCharitra, Act 2, Page 71 ]

सीता जी अपने देवर लक्ष्मण जी से भी परदा करती थीं, आपको याद होगा कुछ समय पहले बीजेपी के वयोवृद्ध सदस्य "राम जेठमलानी" ने लक्ष्मण जी को राम जी से भी बुरा बताया था क्योंकि जब राम जी ने लक्ष्मण जी से माता सीता को जंगल से वापिस लाने को कहा तो लक्ष्मण जी ने जवाब दिया था कि मैं सीता जी को नही ला सकता क्योंकि मैंने माता सीता का चेहरा ही नही देखा इसलिए मै उन्हें नहीं पहचानता

खैर मित्रों । हमारा ये मानना है कि परदा प्रथा कोई अन्याय नहीं बल्कि ये तो नारी की मर्यादा और गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने का सबसे सरल और प्रभावशाली साधन है . और नारी मुक्ति का सम्बन्ध कपड़ों से मुक्ति से हरगिज़ नहीं बल्कि उन अत्याचारों से मुक्ति से है, जो दुनिया वाले उस पर करते आए हैं . और उन अत्याचारों मे मुख्य अत्याचार यही है हवस के भूखे लोगों ने हर दौर मे स्त्रियों को बेपर्दा कर के उन्हे बाजार मे बैठा दिया है, और स्त्री को जालिम रिवाज़ो से आजादी दिलाने का झांसा देकर उसके शरीर से खेला ही है ॥



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