आज का सेकुलर मुसलमान:
Har Ibteda Se Pehle Har Inteha Ke Baad, "ZAAT-E-NABI Buland Hai "ZAAT-E-KHUDA" Ke Baad, Dunya Main Ehtraam Ke Qabil Hain Jitne Log, Main Sabko Manta Hun, Magar ,"MUHAMMAD-MUSTAFA{sall’Allaahu ta’aalaa alaihi wa’sallam} Ke Baad..
आज का सेकुलर मुसलमान:
कहने लगा , " जो लोग जिंदगी में खसारे बर्दाश्त करने के आदी हो जाएं ना तो,
वह हर रिश्ते से बा आसानी दस्ताबरदार हो जाते हैं, तुम क्या कहते हो ?
बर्रे सगीर में तहरीकी और तबलीगी सूफी हमेशा से सऊदी अरब के खिलाफ रहें हैं, उसे आल ए सुलूल, यहूदियों का एजेंट, और ना जाने क्या क्या खिताब से नवाजते हैं,
ये आज मुहम्मद बिन सलमान की तब्दीली की बात नहीं हैं बल्कि जबसे सऊदी अरब कायम है तबसे उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ मुहाज़ आराई कर रखी है,आप मौलाना अब्दुल माजिद दर्याबादी रहमतुल्लाह की किताब सफरनामा हिजाज़ पढ़िए सऊदी आवाम और उलेमा को कैसा जाहिल और हुक्काम को नाअहल बावर कराने की कोशिश की है,
सलमान नदवी जैसे हजारों उलेमा के सऊदी अरब के मुताल्लिक अफकार किसी से पोसीदा नहीं हैं, लेकिन सउदी अरब अपने यहां कुछ करे तो हिंदुस्तान के सूफिया तो सूफिया अपने आपको वसीउल कल्ब समझने वाले तंग नजर अहले हदीस हजरात भी सउदी अरब को खारजा और दाखिला पॉलिसी समझाने लगते हैं,
आप अपनी फिक्र कीजिए सऊदी अरब को अपने बारे में जो बेहतर लग रहा है कर रहा है, ऐसा तो नहीं होगा ना के आप जमात के नाम पर हुकूमत के खिलाफ बात भी कीजिए , नाम दीजिए जमात अल अहबाब का काम कीजिए बुग्ज वा अनाद वाला और फिर हुकूमत कोई कारवाही भी ना करे, अपनी आवाम को मुतनबबेह भी ना करे,
साभार: डॉक्टर अब्दुल्लाह मुश्ताक
बे ज़रर और भोली जमात जो खुले आम अमेरिका यूरोप में तबलीग करती है, हर मुल्क इसका साथ देता है, हत्ता के इजराइल भी कहता है के तुम हमारे यहां के मुसलमानों में तबलीग करो उन्हे अच्छा मुसलमान बना दो, तुम बहुत अच्छे हो, मगर !!
क्या आप अक्सरियत के पीछे चल रहें हैं ?
एक बार हज़रत उमर र० बाजार में चल रहे थे, वह एक शख्स के पास से गुजरे जो दुआ कर रहा था ,
" ऐ अल्लाह मुझे अपने चंद लोगों में शामिल कर , ए अल्लाह मुझे अपने चंद लोगों में शामिल कर "
हज़रत उमर र० ने उनसे पूछा ," ये दुआ तुमने कहां से सीखी ? वह बोला , अल्लाह की किताब से !
अल्लाह ने कुरआन में फरमाया है," और मेरे बंदों में सिर्फ चंद ही शुक्रगुजार हैं " (कुरआन 34:13)
हज़रत उमर र० ये सुनकर रो पड़े और अपने आपको नसीहत करते हुए बोले ," ऐ उमर ! लोग तुमसे ज्यादा इल्म वाले हैं, ऐ अल्लाह मुझे भी उन चंद लोगों में शामिल कर "
हम देखते हैं के जब हम किसी शख्स से कोई गुनाह का काम छोड़ने को कहते हैं तो वह कहता है के ," ये अक्सर लोग करते हैं, मैं कोई अकेला तो नहीं "
अगर आप कुरआन में "अक्सर लोग " सर्च करें तो " अक्सर लोग "
" अक्सर लोग नहीं जानते " (कुरआन 7:187)
" अक्सर लोग शुक्र अदा नहीं करते " (कुरआन 2:243)
" अक्सर लोग ईमान नहीं लाए " (कुरआन 11:17)
अगर आप " ज्यादातर " सर्च करें तो आपको मिलेगा के , ज्यादातर लोग,
" ज्यादातर शदीद नाफरमान हैं " (कुरआन 5:59)
" ज्यादातर जाहिल हैं " (कुरआन 6:111)
" ज्यादातर राह ए रास्त से हट जाने वाले हैं " (कुरआन 21:24)
" ज्यादातर सोचते नहीं " (कुरआन 29:23)
" ज्यादातर सुनते नहीं " (कुरआन 8:23)
तो अपने आपको " चंद लोगों" में डालो जिनके बारे में अल्लाह ने फरमाया,
" मेरे थोड़े ही बंदे शुक्रगुजार हैं " ( कुरआन 34:13)
" और कोई ईमान नहीं लाया सिवाए चंद के "( कुरआन 11:40)
" मजे के बगात में पिछलों में ज्यादा हैं और बाद वालों में थोड़े " (कुरआन 14-56:12)
चंद लोगों में अपने आपको शामिल करें और इसकी परवाह ना करें के कोई इस रास्ते में नहीं और आप अकेले है !
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