Thursday, January 7, 2021

FIRAUN AUR USKI BIWI

 



" और अल्लाह ईमान वालों के लिए मिसाल बयान करता है फिरौन की बीवी की, जब उसने कहा : ए मेरे रब ! मेरे लिए अपने पास जन्नत में एक घर बना दे, और मुझको फिरौंन और उसके अमल से बचा ले " (क़ुरआन अल तहरीम आयत 11)


फिरौंन एक काफ़िर और ज़ालिम शख्स था,

मगर उसकी बीवी आसिया बिंत मजाहिम ईमानदार और बा अमल खातून थी,

बीवी ने जब अपने आपको सही रास्ते पर कायम रखा तो शौहर के गलत बर्ताव उसको कुछ नुकसान ना पहुंचा सके,

शौहर जहन्नम में दाखिल किया गया और बीवी को जन्नत के बागों में जगह मिली

(तज़कीर उल क़ुरआन मौलाना वाहिद्दुदीन )

साभार : Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com

Wednesday, January 6, 2021

DOGLAPAN

 



एक लड़की स्कर्ट पहने जीन्स पहने टी शर्ट पहने घुटनों के ऊपर और नाभि के ऊपर कपड़े पहने खुले बाल और स्तन को दिखाते हुए रोड पर निकले तो यह उसका व्यक्तिगत मामला है।

वह स्वतंत्र है जो चाहे पहने जो चाहे न पहने नग्न ही रहे इस पर किसी को कोई आपत्ति नही है!
लेकिन अगर वही लड़की हिजाब पहन लें तो उस पर आरोपों के बौछार लगा दिए जाते. तब ऐसा लगता है कि स्वतंत्रता और व्यक्तिगत का कानून मुस्लिम महिलाओं पर लागू नही होते है।
स्कर्ट पहन लें तो स्वतंत्रता है और हिजाब पहन लें तो पिछड़ापन और कट्टरता है तब स्वतंत्रता तेल लेने चला जाता है।
दरअसल ऐसा कहने वाले दोयम दर्जे के दोगले होते है।
जो लोग हिजाब का विरोध करते है फैशन परेडो में मार्केट में अर्धनग्न लड़कियों के जिस्म के एक एक अंग को लालसा भरी नज़रों से देखते नही थकते है।
लेखक :- Azad Hashmi

Tuesday, January 5, 2021

औरत के लिए शादी क्यूं ज़रूरी है ??

 



औरत के लिए शादी क्यूं ज़रूरी है ??

एक लड़की माहिर नफसियात के पास गई और कहा मैं शादी नहीं करना चाहती क्यूंकि मैं पढ़ी लिखी हूं, खुद कमाती हूं और खुदमुख्तार हूं इसलिए मुझे शौहर की जरूरत नहीं है मगर मैं बहुत परेशान हूं क्यूंकि मेरे मां बाप शादी के लिए दबाव डाल रहें हैं, मैं क्या करूं ??

माहिर नाफसियात ने कहा :- बेशक तुमने बहुत कामयाबियां हासिल कर ली है लेकिन बाज़ दफा तुम कोई काम करना चाहोगी मगर ना कर सकोगी , कभी तुमसे कुछ गलत होगा , कभी तुम नकाम हो जाओगी, कभी तुम्हारे प्लान अधूरे रह जाएंगे , कभी तुम्हारी ख्वाहिश पूरी नहीं होगी,

तब तुम किसको कसूरवार ठहराओगी ??

लड़की : - नहीं बिल्कुल नहीं, अपने आपको क्यूं दूंगी ??

माहिर नफसीयात :- बिल्कुल यही वजह है के तुम्हे एक शौहर की जरूरत होगी जिसे अपनी गलतियों का ज़िम्मेदार ठहरा सको,

औरत के लिए शादी क्यूं ज़रूरी है ??


एक लड़की माहिर नफसियात के पास गई और कहा मैं शादी नहीं करना चाहती क्यूंकि मैं पढ़ी लिखी हूं, खुद कमाती हूं और खुदमुख्तार हूं इसलिए मुझे शौहर की जरूरत नहीं है मगर मैं बहुत परेशान हूं क्यूंकि मेरे मां बाप शादी के लिए दबाव डाल रहें हैं, मैं क्या करूं ??

माहिर नाफसियात ने कहा :- बेशक तुमने बहुत कामयाबियां हासिल कर ली है लेकिन बाज़ दफा तुम कोई काम करना चाहोगी मगर ना कर सकोगी , कभी तुमसे कुछ गलत होगा , कभी तुम नकाम हो जाओगी, कभी तुम्हारे प्लान अधूरे रह जाएंगे , कभी तुम्हारी ख्वाहिश पूरी नहीं होगी,

तब तुम किसको कसूरवार ठहराओगी ??

लड़की : - नहीं बिल्कुल नहीं, अपने आपको क्यूं दूंगी ??

माहिर नफसीयात :- बिल्कुल यही वजह है के तुम्हे एक शौहर की जरूरत होगी जिसे अपनी गलतियों का ज़िम्मेदार ठहरा सको,

Monday, January 4, 2021

SHIDDAT E GHAM ME NAM AANKHON SE USE PUKAARA JAAYE JO HAR CHEEZ PAR QADIR HAI

 



शिद्दत ए गम में नम आंखों से उसे पुकारा जाए जो हर चीज़ पर कादिर है, तो वह " या अब्दी" कहते हुए फौरन मुहब्बत वा बेकरारी से मुतावज्जोह होता है,


फिर वह उस टूटे हुए दिल में समा जाता है,

हम सोचते हैं आजमाइश का वक्त बहुत लंबा हो गया, मगर वह दरहकीकत मुलाकात का वक्त बड़ा देता है,

अल्लाह को बहुत पसंद है जब हम दुनिया से नहीं बल्कि उससे मांगते हैं, जब हम अपनी बेबसी का रोना दुनिया के सामने नहीं उसके सामने रोते हैं,

जब हम सब कुछ ख़त्म हो जाने के बाद भी उस यकीन के साथ दुआ करते हैं के उसके सिवा कोई हमें कुछ नहीं दे सकता ,

दिल में अल्लाह के साथ का एहसास ज़िंदा हो, तो कंधों पर रखी हुई बेबसी, मायूसी और गमों के सब पहाड़ हल्के हो जाते हैं,

फिर ऐसा लगता है जैसे वह पाक जात हर बोझ को हल्का करने के लिए काफी है,

तहरीर: बहन सबा युसुफजई
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks.com 

Sunday, January 3, 2021

फंसी हुई लड़की और मछुआरा

 



फंसी हुई लड़की और मछुआरा


मुहब्बत और फंसने के फर्क को तो समझते हैं ना आप लोग ??

एक लड़की ने बताया के सर मुझे एक लड़के से बहुत मुहब्बत है , वह पहले मेरे साथ बहुत अच्छा था , मुझसे इज़हार ए मुहब्बत करता था और कहता था के मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता , हर वक्त राब्ते में रहता था, मगर अब वह इग्नोर करता है मेरे मैसेज का जवाब नहीं देता है, कॉल नहीं उठाता जब उसका दिल हो बात कर लेता है वरना कहता है की मैं मसरूफ हूं, हालांकि वो कहीं मसरूफ नहीं होता, मुझे उसकी पूरी रूटीन पता है सर मुझे उससे मुहब्बत है, कुछ ऐसा बताएं कि वो ठीक हो जाए और मुझे मिल जाए ??

वो बार बार मासूमियत से गुफ्तगू के दौरान ये जुमला बोल रही थी के "सर मुझे उससे मुहब्बत है, सर मुझे उससे मुहब्बत है, "

मैंने ताल्लुक की तफसील लेने के लिए पूछा के उससे आपका ताल्लुक कैसे बना था ? क्यूंकि मेरे नजदीक "ताल्लुक की बुनियाद ही ताल्लुक को मुद्दत तय करती है," इस सवाल के जवाब पर लड़की ने बताया के उस लड़के ने ही ताल्लुक शुरू किया था,

"मैं तो उस ताल्लुक के लिए तैयार ही नहीं थी और ना ही मान रही थी वह लड़का ही मुझे हर वक्त मैसेज और काल करता था, मैंने उसे कई बार समझाया के मुझे इस किस्म के ताल्लुक में नहीं पड़ना, मगर वह मेरे पीछे पड़ा रहा .

यहां तक के मैं मान गई और वो मीठी मीठी बातों से मेरे दिल में दाखिल हो गया और मुझे उससे मुहब्बत हो गईं, मैं
भी उसपर मरने लगी, "

मैंने उससे मजीद पूछा के:- " क्या आपका उस लड़के से कोई जिस्मानी ताल्लुक भी था",

इस के जवाब में उस लड़की ने कहा के:-" सर पहले तो मैं मानती नहीं थी, और फिर आहिस्ता आहिस्ता उसने मुझे मना लिया और हमारे दरमियान सब कुछ हो गया, तब मुझे नहीं पता था के इस काम को मुहब्बत नहीं कहते ,"

मैंने उस लड़की को समझाया के:-" जिसे आप मुहब्बत कहती हो, उसे लड़कों को लैंग्वेज में जिस्मानी ताल्लुक बनाने के लिए लड़की फंसाना कहते हैं,"

यहां मैं आपको ये भी बताता चलूं के हमारे यहां लड़कियां ज्यादातर लड़कियों में ही रहती हैं इसलिए उनको लड़कों की लैंग्वेज नहीं आती, लड़कियों के लिए लड़कों की लैंग्वेज समझना बहुत अहम है, बेशुमार लड़के सिर्फ लड़कियों का जिस्म हासिल करने के लिए मुहब्बत का जाल इस्तेमाल करते हैं,

एक बार मैंने रिसर्च के तौर पर बेशुमार लड़कों से पूछा के आप लोग लड़कियों के साथ जिस्मानी ताल्लुक बनाने के लिए मुहब्बत को क्यों बदनाम करते हो ??

सबका यही जवाब था के:-" सर मुहब्बत का नाम इस्तेमाल किए बगैर लड़कियां अपने जिस्म को हांथ नहीं लगाने देती, कोई लड़की कितनी ही अच्छी और शरीफ क्यों ना हो मुहब्बत के लालच में फंस ही जाती है,"

मैंने उस लड़की को समझाया के उस लड़के ने आपको बड़ी होशियारी से फंसाया है आपको उससे मुहब्बत नहीं बल्कि आप फंस गई हो, बिल्कुल वैसे ही जैसे मछली कांटे में फंस कर तड़पती है, आप तड़प रहीं हो, और ऊपर से सादगी देखें के उस तड़पने को आप मुहब्बत का नाम दे रही हो,

खुद से झूट ना बोलें के मुझे उससे मुहब्बत है कहने के बजाए ये कहें के:-" मुझे उसने फंसा लिया है", ताकि जितना जल्दी हो सके आप खुद को उस कांटे से बाहर निकाल सकें, उसने आपको जो धोका देना था दे दिया, मगर अब आप ये कह कह कर के :-" मुझे उससे मुहब्बत है, मुझे उससे मुहब्बत है, खुद को धोका देना बंद करें,"

मैंने आगे कहा के आप तो मच्छली से भी सादा लड़की हो क्यूंकि मच्छली को भी मुफ्त में खाना खाने के बाद कांटे में फसने की समझ आ जाती है के मैं फंस गई हूं, और फिर वह अपनी बका वा खुशियों के खातिर कांटे से निकलने के लिए तड़पती और ज़िन्दगी की तरफ वापस लौटने के लिए ज़ोर लगाती है, वह अपने फंसने को मुहब्बत का नाम नहीं देती के:-" मुझे मुहब्बत हो गईं है, मैं मछुआरे की हूं और मछुआरा मेरा है, मुझे मछुआरा मिलेगा तो मैं ज़िंदा रहूंगी वरना मेरा जीना मुश्किल है, मैं मछुआरा के बिना मर जाऊंगी,"

वह, मैं मछुआरे का इंतजार करूं या आगे बढूं के लिए इस्तेखारे नहीं करवाती किसी से हिसाब नहीं लगवाती,

वह मछली उस झूठी उम्मीद के साथ जुड़ी नहीं रहती के शायद एक दिन मछुआरे को एहसास हो जाए और वह पलट कर हमेशा के लिए मेरा हो जाए, याद रखें मछलियां पकड़ना मछुआरे का काम होता है वह किसी एक मछली का नहीं होता , इसलिए वह आपका नहीं हो सकता,

मछुआरे की जाली और झूठी मुहब्बत ढूंदने की बजाए उसकी मुहब्बत से बाहर निकलने पर ज़ोर दें ,

"मुझे उससे मुहब्बत है, मुझे उससे मुहब्बत है " का विर्द करने की बजाए, " मैं फंस गई हूं, मैं फंस गई हूं " का विर्द करें , ताकि आपका ला शाऊर आपको उसकी झूठी मुहब्बत के लालच से निकलने में आपकी मदद करे, यही इस सारे मसले का हल है,

तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks.com 

Saturday, January 2, 2021

WAQT BADAL JAATA HAI

 



" लोगों ने मुझे बताया वक़्त बदल जाता है और

वक़्त ने मुझे बताया लोग भी बदल जाते हैं। "

" ज़रूरी नहीं है के जो आज आपके साथ हो वह हमेशा आपके साथ रहे इसलिए अकेले चलना सीख लो, वक़्त अपना है तो सब अपना है वरना कोई अपना नहीं "

" उम्मीदें वाबस्ता करने से पहले ही संभल जाएं, वरना आसुओं में ढल जाएं, बदलने वाले बदल जाएंगे। मगर आपकी आंखों में नमी छोड़ जायेंगे !!"

ऐसे रवैयेे देखकर आप अपनी मासूमियत भी खो देंगे, इसलिए वक़्त पर संभल जाए ,

अपने लिए और अपने अल्लाह के लिए खुद को संभाल लें, दूसरों से वाबस्ता उम्मीदों को इन बहते आंसुओं के साथ ही बहा दें,

साभार: Umair Salafi Al Hindi

Friday, January 1, 2021

NIKAH ME DERI KE ASBAAB





मैं डॉक्टर फातिमा हूं कल मैं ड्यूटी पर थी के एक खुदकुशी का इमरजेंसी केस आ गया, खुदकुशी करने वाली लड़की का नाम मुंतहा था और मैंने अपने आठ साल कैरियर और गुज़री ज़िन्दगी में पहली बार इतनी खूबसूरत लड़की देखी थी


मरीजा हालत ए बेहोशी में थी उसको उठा कर उसको अस्पताल पहुंचाने वाले उसके मां बाप थे, मां बाप भी माशा अल्लाह बेहतरीन पर्सनैलिटी के मालिक थे मगर उस वक़्त बेटी के इस अमल ने उनकी हालत काबिल ए रहम बना रखा था पता नहीं क्यूं मुझे लड़की पर प्यार और उसके वालिदैन की बेबसी देखकर बेइंतेहा तरस आ रहा था,

लड़की को ऑपरेशन थियरेटर लाया गया ऑपरेशन के बाद उसको वार्ड में ट्रांसफर कर दिया गया था और वालिदैन को बता दिया गया था के लड़की की हालत खतरे से बाहर है लड़की की खैरियत का पता चलते लड़की का वालिद गरीबों में कुछ तकसीम करने के लिए निकल गया तो लड़की की मां को मैंने अपने ऑफिस में बुलवाया,

मुख्तसर लड़की को मां ने जो कहानी सुनाई वो कुछ यूं थी,

लड़की का नाम मुंतहा है और मुंतहा ने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग कर रखी है पढ़ाई के बाद तमाम वालिदैन की तरह मुंतहा के वालिदैन की भी ख्वाहिश थी के वह अपने घर की हो जाए, इसलिए उन्होंने इसके मुतालिक मुंतहा से उसकी पसंद के मुताल्लिक़ पूछा तो मूंतहा ने बाक़ी लड़कियों की तरह फैसले का अख़्तियार मां बाप को दे दिया,

मुंतहा के मां बाप ने कहीं रिश्ते की बात चलाई तो एक फ़ैमिली मुंतहा को देखने अाई, नाश्ता पानी और ख़िदमात से मस्तफिद होने के बाद औरतें मुंतहा के कमरे में आईं ,किसी ने मुंताहा को चलकर देखने की फरमाइश की किसी ने बोलने और किसी ने उसकी हाथ कि चाय पीने की ख्वाहिश जाहिर की, इसके बाद इजाज़त लेकर चली गईं और कुछ रोज़ बाद बिना कोई बात बताए रिश्ते से इंकार कर दिया ,

मुंतहा के लिए ये पहली बार थी जब वह रिजेक्ट हुई मगर मां बाप की तसल्ली ने मुंतहा को हौसला दिया और एक बार फिर मुंताहा को देखने के लिए फ़ैमिली अाई,

उन्होंने भी खाने से फारिग होने के बाद मुंताहा के हाथ से चाय पीने की फरमाइश ज़ाहिर की और चाय के बाद इजाज़त चाही , तीन दिन इंतज़ार में रखने के बाद ये कहते हुए इनकार कर दिया के:-" लड़की को मेहमान नवाजी नहीं आती क्यूंकि उसने लड़के की मां को टेबल से उठाकर हाथ में चाय पेश नहीं की बल्कि आम मेहमानों कि तरह टेबल पर रख दी "

इस इनकार पर मुंतहा के साथ साथ इस बार वालिदैन भी अंदर टूट फूट गए मगर अल्लाह की मर्ज़ी समझ कर सब्र कर लिया , फिर एक नई फ़ैमिली अाई,

उस फ़ैमिली कि खवातीन के बैठते ही मुंतहा ने उनके जूते तक अपने हाथ से उतारे वहीं बैठे बैठे हाथ धुलवाए और फिर चाय पेश की,

उस फ़ैमिली ने हफ्ते भर बाद ये कहते हुए इनकार कर दिया के :- बेटी पर जिन्नात का साया है वरना कोई मेज़बान पहली बार घर आए मेहमान की इतनी खिदमात कहां करता है ? "

पिछले आठ सालों में सौ से ज़्यादा लोग रिश्ता देखने आए मगर कोई ना कोई ऐब निकाल कर चले गए कल एक फ़ैमिली अाई उन्होंने मुंतहा को बाक़ी हर लिहाज से ठीक करार दिया मगर ये कहते हुए इनकार कर दिया के मुंतहा की उमर ज़्यादा हो गई है और एहसान जताते हुए कहा के अगर आप ज़्यादा मजबूर हैं तो हमारा एक 38 साला बेटा जिसकी अपनी दुकान है उसके लिए मुंतहा क़ुबूल कर लेते है ,

इतना कहते हुए मुंतहा की मां सिसकियां लेकर रोने लगी और कहा आप भी तो मां हैं सोचें मां जितनी भी मजबूर हो गैरों के सामने कैसे कह सकती है ??

और मेरी बेटी कल सारा दिन मेरे सीने से लगकर रोती रही है कहती रही इन लोगों के मेयार तक आते आते मेरी उमर ज़्यादा हो गई है मां और फिर जाने कब उसने दुनिया को अलविदा कहने का फैसला कर लिया क्यूंकि वह कहती थी :- मेरा मनहूस साया मेरी बहन को भी वालिदेन की दहलीज पर बूढ़ा कर देगा "

मैं (डॉक्टर) ने मुंतहा की वालिदा को पानी पिलाया इतने में उसका वालिद और पीछे वार्ड ब्वॉय दाखिल हुआ , आकर बताया के मुंतहा होश में आ गई है,

मुंतहा की मां बिजली की तेज़ी से वार्ड में पहुंची मुंताहा का सर उठा कर सीने से लगा लिया, मैं (डॉक्टर) और मुंतहा का वालिद एक साथ कमरे में दाखिल हुए मुंतहा मां को छोड़कर बाप के गले लगी और सिसकते हुए कहा :- " पापा बेटियां बोझ होती हैं आपने क्यूं बचाया मुझे ?? मुझे मरने देते मेरा मनहूस साया इस घर से निकलेगा तो गुड़िया की शादी होगी, नहीं तो वह भी आपकी दहलीज पर पड़ी पड़ी बूढ़ी हो जाएगी"

मुंतहा का बाप चुपचाप आंसू बहा रहा था जब मैंने हालात आउट ऑफ कंट्रोल होते देखे तो मुंतहा को सुकून का इंजेक्शन दे दिया और मुंतहा के मां बाप को लेकर ऑफिस में आ गई, मैंने मुंताहा और उसकी छोटी बहन को अपने दोनो भईयों के लिए मांग लिया और मुंतहा के मां बाप की आंखें अचानक बरसने लगी मगर इस बार आंसू खुशी के थे,

मेरे दोनों भाई डॉक्टर हैं मैंने उनको अपना फैसला सुना दिया है और वह इसे क़ुबूल कर चुके हैं ,

आखिर में आप लोगों से गुज़ारिश करती हूं आप शादी लड़की से कर रहें होते हैं हूर से नहीं , खुदारा किसी की बेटी को रिजेक्ट करने से पहले उसकी जगह अपनी बेटी रख कर सोचें, मैं डॉक्टर होने कि हैसियत से कहती हूं अगर ऐब की बिना पर रिजेक्ट करना हो तो लड़कियों से दुगनी तादाद में लड़के रिजेक्ट हों, मुझसे दुनिया के किसी भी फोरम पर कोई भी बन्दा बहस कर ले मैं साबित कर दूंगी,

मर्द में ऐब औरत से ज़्यादा है, मैं गुज़ारिश करती हूं अल्लाह के लिए किसी को बिला वजह ऐब जदा कह कर रिजेक्ट ना करो आप अल्लाह की मखलूक के एबों पर पर्दा डाले, अल्लाह आखिरत में आपके ऐबों पर पर्दा डालेगा ,

आपके निकाले ऐब और इनकार लड़कियों को कब्र में धकेल देते हैं,

मंकूल: डॉक्टर सबा खालिद
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi

Blog: islamicleaks.com