Thursday, January 14, 2021

ZINDAGI KI RACE




 जिंदगी की रेस !!

मेडिकल साइंस कहती है सेक्सुअल इंटर कोर्स के बाद किसी भी मेल (नर) के तकरीबन 200 से 500 मिलियन के करीब स्पर्मस (शुक्राणु) निकलते हैं।
इनमें से तकरीबन आधे तो निकलते ही दम तोड़ जाते हैं ,और बाकी के तकरीबन 200 मिलियन सेहतमंद इस स्पर्म्स की अंडाणु या अंडा कोशिका (ovum) की तरफ जिंदगी हासिल करने की रेस शुरू हो जाती है।
बजाहिर कुछ इंच की इस नजर आने वाली रेस में जहां 200 मिलियन सेहतमंद स्पर्म ने हिस्सा लिया था , कुछ फासला तय करने के बाद महज 300 या 500 ही ऐसे रह जाते हैं जो रेस जारी रख पाते हैं, बाकी सब इस ज़िंदगी की रेस के रास्ते में ही दम तोड़ जाते हैं।
और रेस के आखिरी राउंड में उन 300 या 500 में से भी सिर्फ एक शक्तिशाली और फर्टिलाइजद स्पर्म ही ऐसा होता है जो ovum यानी मादाजननकोशिका में दाखिल होने में कामयाब हो जाता है, और वह है आप, जी हां आप...!!!
प्यारे दोस्तों ! क्या आपने कभी गौर फरमाया है कि जब आप उस जिंदगी हासिल करने वाली रेस का हिस्सा थे तब न तो आपके हाथ थे ना पाऊं, न आंखें थी और न ही जिस्म, और सबसे बड़ी बात बगैर किसी की मदद और सहारे के, फिर भी आप उन 200/500 मिलियन में से वह रेस जीत गए थे।

और अब जबकि आपके पास खूबसूरत जिंदगी की सूरत में इस रेस की जीत का सर्टिफिकेट मौजूद है तो अब आप कैसे किसी मैदान में हार मान सकते हो?
माशाअल्लाह अब आप एक सेहतमंद बोडी के मालिक हो, आपको रब ने अक्ल से पुर दिल और दिमाग दिया है, आप के सामने मकसदे हयात है , उस मकसद के पीछे कुछ ख्वाब हैं, उन ख्वाबों को हकीकत में बदलने के लिए आपको ज़िंदगी के आखिरी सांस तक और खून के आखिरी कतरे तक हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए।
Syed Abdul Mujeeb

Wednesday, January 13, 2021

बा हिम्मत तो वो होते हैं जिनके अंदर ना जाने कितने तूफ़ान होते हैं




 बा हिम्मत तो वो होते हैं जिनके अंदर ना जाने कितने तूफ़ान होते हैं, मगर ऊपर बला का सुकून हो, मुस्कुराती आंखें हों,


इसका मतलब ये नहीं के वह गमगीन नहीं होते , वह रोते नहीं.... वह रोते हैं! आखिर इंसान हैं !

लेकिन जो गमों का पहाड़ नहीं बनाते, जो जीना नहीं छोड़ते,जो जगह जगह गमों का इश्तहार नहीं लगाते, जिनको गमों से निकलना आता हो,

वह ही तो होते हैं जिन्हें इस ज़िन्दगी की कद्र होती है,

उदास मत हो, अल्लाह आपकी सारी मुश्किलात जानता है, वह आपके साथ है,
☆ان اللہ مع الصابرین☆

हाफ़िज़ इब्न रजब अल बग़दादी हंबली फरमाते हैं

❞ والصبر الجميل هو أن يكتم العبد المصيبة ولا يخبر بها.❝
" सब्र ए जमील ये है के इंसान अपनी मुसीबत छुपा ले और किसी को भी इसकी खबर ना दे "

(मजमुआ अल रसाईल इब्न रजब 3/153)

साभार: बहन सबा युसुफजई
ब्लॉग: islamicleaks.com 

Tuesday, January 12, 2021

JO APKE NASEEB ME HAI WO APKO ZAROOR MILEGA CHAAHE HARAM SE CHAAHE HALAL SE

 



जो आपके नसीब में है वह आपको जरूर मिलेगा चाहे हराम से चाहे हलाल से ,


लेकिन अगर आप उसे हराम से लेने को कोशिश करेंगे तो अल्लाह आपके हलाल की लज्जत ले लेगा ,

कुछ मियां बीवी पसंद की शादी के बावजूद बड़ी नाखुश ज़िन्दगी गुज़ार रहे होते हैं,

कभी सोचा है क्यूं ??

क्यूंकि वह शादी से पहले सब हराम से ले चुके होते हैं जो बाद में उनको मिल ही जाना था, इसलिए उनके हलाल की मिठास खतम हो जाती है,

आप किसी के साथ भले अपने मंगेतर के साथ ही मोबाइल फोन पर इन्वॉल्व हैं,

तो इतना याद रखें के महरम और नमहरम के कावानीन आपके दलीलों और हीलों बहानों से बदल नहीं जाएंगे , जो गलत है, वह गलत है, आप जितना हराम लेंगे उतना हलाल को खोते जाएंगे ,

लेकिन इसके अपोजिट अगर आप हराम छोड़ दें, जिस चीज से मना किया जा रहा है उसको अल्लाह के लिए तर्क कर दें तो अल्लाह वही चीज कुछ ही अरसे में आपको हलाल बनाकर दे देगा,

ये मैं नहीं कह रहा ,येे इमाम इब्न क़य्यूम ने सात सौ साल पहले कहा था, आप जानते हैं अल्लाह किसी का कुछ नहीं रखता, वह बहुत गैरत वाला है,

आप जो भी उसकी राह में सदका करें , या कुर्बानी, तो वह उसको कई गुना बरकत देकर आपको लौटा देता है,

इसलिए हराम को छोड़ दें, इस यकीन के साथ के अल्लाह इसको हलाल बना कर आपको लौटा देगा,

बाब (Chapter): और वहीं की आपके रब ने शहद की मक्खी की तरफ

साभार: बहन सबा युसुफ ज़ई
ब्लॉग: islamicleaks.com

Monday, January 11, 2021

KARZ KE MUTAALLIK BAHUT AHAM TAHREER

 



कर्ज़ के मुताल्लिक़ बहुत ही अहम तहरीर


ज़रूर पढ़ें


क्या आप जानते हैं इंसान सबसे ज़्यादा ज़लील कब होता है ??

जब इंसान अपनी ज़रूरीयात को पस ए पश्त डालकर कुर्बानी के जज़्बे के तहत किसी को कर्ज़ दे और आपको शख्त ज़रूरत हो और मुकर्रर मुद्दत पूरी होने के बावजूद आपका दिया हुआ कर्ज़ वापस ना लौटाया जाए और उसे धोके से हज़म किया जाए ना की किसी मजबूरी के तहत,

तो उस वक़्त इंसान इंतेहाई जलील होता है, और इंसान की सोचने और समझने की तमाम सलहियतें मफ्लूज़ हो जाती हैं,

हदीस में जहां कर्जदार को मोहलत देने पर बेइंतहा अजर वा सवाब है वहीं किसी का माल नाहक हज़म करने पर शख्त वाईदें अाई हैं,

यहां बयान किए गए वाक्ए का मकसद आपको ये बताना है के आपको खरे और खोटे की पहचान होनी चाहिए , किसी पर अंधा भरोसा नहीं करना चाहिए , और शरीयत ने जो कानून और उसूल हमारी बहतरी के लिए बनाए हैं उनपर अमल करने में हमारी ही भलाई है, उनको नजरंदाज नहीं करना चाहिए,

अपने खून पसीने की कमाई को लालची और धोके बाज़ नाम निहाद दोस्तों पर बर्बाद ना करें,

मेरे एक दोस्त ने मुझ से एक लाख रुपए मांगा, मैंने कहा ठीक है एक लाख दे देता हूं लेकिन पैसा लेते वक़्त दो गवाह होंगे और स्टाम्प पेपर पर लिख कर भी देना होगा ,

उसने कहा :- मुझपर यकीन नहीं है,

मैंने कहा बिल्कुल है:- मगर शरीयत के मुताबिक कानूनी कार्यवाही ज़रूरी है,

वह मुझसे नाराज़ हो गया, मैंने मनाने के लिए उससे कहा के मैं मज़ाक कर रहा था ,हालाकि मैंने मज़ाक नहीं किया था,

खैर मैंने बेगैर काग़ज़ी कारवाई और गवाहों के एक लाख रुपए दे दिया ,

2- दो साल हो गए मेरे दोस्त ने पैसे वापस नहीं किए ,

मैंने मांगे तो कहने लगा मैंने तो वापस कर दिए थे,
मैंने कहा :- झूट बोलते हो , तो गुस्से से कहने लगा के मुझे झूठा समझते हो, कोई गवाह है तुम्हारे पास , कोई सबूत हो तो पेश करो,

मेरे कुछ दोस्त बड़े बदमाश थे वह भी मेरे पास आ गए और कहने लगे के हमें बीस हज़ार खर्चा पानी दो हम तुम्हे उससे पैसे लेकर देते हैं और ये एक नई परेशानी थी,

मै थाने में गया और कहा के मेरे दोस्त ने मुझसे एक लाख लिया था मगर वापस नहीं कर रहा , उन्होंने कहा कोई सबूत या गवाह,

मैंने कहा :- कोई नहीं है,

थानेदार ने कहा :- बैंक में पैसा जमा करवाते हो तो रसीद देते हैं, लेने जाते हैं तो रसीद देते हैं,

सारे मुसलमान ही हैं क्यूं रसीद मांगते और देते हैं,

इसलिए कानूनी कारवाही ज़रूरी है, आप झूटे हो वरना सबूत लाओ,

तंग आकर मैंने भी दो झूठे गवाह तैयार किए और उनके जरिए से थानेदार के पास गया,

उन्होंने तहरीरी तौर पर लिखा के :- फलां दोस्त को इसके पैसे देने है,

फिर गवाही देने वाले दोस्तों कि कई गलत बातें ज़िन्दगी में मुझे मानना पड़ीं,

थानेदार ने कर्ज़ लेने वाले दोस्त को बुलाया , उसने 20 हज़ार थानेदार को दिए और उल्टा मेरे खिलाफ रिपोर्ट करवा दिया,

मेरे पैसे पहले ही फंसे हुए थे, ऊपर से रिपोर्ट होने पर मैंने अपने दोस्त से माफ़ी मांगी और बयान दिया के उसे मेरे कोई पैसे नहीं देने , तब कहीं उसने मुस्कुराते हुए पर्चा वापस लिया,

घर आया तो घरवालों ने अलग परेशान किया के घर के हालात अच्छे नहीं , दोस्त भी ऐसे ही बनाए हुए हैं, एक गलत फैसले ने बहुत जलील करवाया,

ये दुनिया है और अल्लाह ताला ने इसमें ज़िन्दगी गुजारने के उसूल भी अता फरमाएं हैं,

उन उसूलों को नज़र अंदाज़ करके अपनी मर्ज़ी से मामलात तय करने पर जो नुक़सानात होंगे उसके ज़िम्मेदार हम खुद ही होंगे ,

और आज के पुर फितन दौर में किसी पर भरोसा और यकीन करना बड़ा मुश्किल काम है,

निकाह करते वक़्त गवाह तो होते थे मगर लोग फिर भी मुकर जाते थे,

इसलिए हुकूमत ने निकाह फॉर्म मुताआरिफ करवाया ताकि अवाम झूट ना बोले ,

अब तलाक देकर भी लोग मुकर जाते हैं और कहते हैं कि नहीं दी,

ये कहानी बहुत से लोगों की है, गवाह और तहरीरी दस्तावेज़ बनाने से वही डरेंगे जो गलत काम करते हैं,

या मुझ जैसे जाहिल को सब्ज़ बाग दिखा कर लूटना चाहते हैं,

क़ुरआन में है

" ऐ ईमान वालों! जब तुम लेन देन का कोई मामला किया करो तो उसको लिख लिया करो और दो गवाह भी बना लिया करो,"

(अल बकराह)

बहन भईयों में विरासत का मसला हो , किसी को कर्ज़ देना हो, किसी को मकान किराए कर देना हो, या जिस मामले में पैसों का मामला हो, गवाह और लिखत बहुत ज़रूरी है,

आजमाइश फिर भी हो सकती है मगर हमने क़ुरआन वा हदीस पर ही चलना है ताकि अल्लाह ताला के हुज़ूर अजर पाएं और दुनिया में भी मुश्किलात से बच सकें

वरना
ये जब्र भी देखा है तारिख की नजरों ने
लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई,

अल्लाह ताला हमें दीन समझने और अमल करने की तौफीक़ अता फरमाए,

आमीन

साभार : Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks

Sunday, January 10, 2021

MUJHE YE DUNIYA KYA SAMJHTI HAI

 



मुझे ये दुनिया क्या समझती है ??


हूं कोई मोम की गुड़िया।
या कोई फूल नाज़ुक सा।

कोई आसान सी भाषा हूं।
या मदारी का तमाशा हूं।

सामान ए दिल्लगी हूं
या शोला फुलझड़ी हूं।

मुझे दुनिया क्या समझती है ??

अगर ये सब समझती है तो।
ये गलतफहमी है उसकी।

नहीं हूं मैं मोम की गुड़िया ,ना ही फूल नाज़ुक सा।
बहुत अनजान सी भाषा हूं, ना बेजान सा लाशा हूं।

अगर शोला समझती है, तो जलाकर राख कर दूंगी।
ज़बान से अगर लफ्ज़ बोलूंगी तो छलनी कर दूंगी,

मुझे ये दुनिया क्या समझती है ??

मैं हूं सीप का मोटी।
जो सदियों बाद बनता है।

नहीं हूं आम सी लड़की।
शौक़ परवाज़ है मेरा।

कलम पर हाथ है मेरा।
अगर चाहूं कलम से , मैं उसका सर कलम कर दूं,

मुझे ये दुनिया क्या समझती है ??

तू फिर से सोच ले शायद।

साभार: बहन सबा युसुफजई
ब्लॉग: islamicleaks.com

Saturday, January 9, 2021

DASTAK DENA HAR MARD KI FITRAT HAI

 



दस्तक देना हर मर्द की फितरत है

और दरवाजा ना खोलना औरत का हुस्न।

हर दस्तक पर दरवाज़ा कभी नहीं खोलना , ना दिल का दरवाज़ा ना दिमाग़ का दरवाज़ा , ना सोचों का दरवाज़ा, ना जज़्बात का दरवाज़ा , येे दरवाज़ा ज़िन्दगी के असल साथी कि आमद पर ही खुलना चाहिए ,

उम्मत ए मुहम्मदीया सल्लाल्लहू अलैहि वसल्लम की हर बेटियों के नाम एक पैगाम,

सुनो !!

मेरी बहनों !!

कभी भी किसी अजनबी को अपना जाती वक़्त ना देना, एक वक़्त आएगा वह आपके किरदार पर उंगली उठाएगा आपको ज़हनी टेंशन देगा , तो फाइनल बात ये है के एक के साथ एक लिमिट में राब्ता रखें इससे आप खुद भी महफूज़ रहोगी और आपका ज़हनी सुकून भी,

किसी को पसंद करना एक फित्री अमल है मगर !!
इस जज्बे का गलत इस्तेमाल कभी मत कीजिए ,

सीधा रास्ता और निकाह का जायज और पाक रास्ता बनाए ,और अगर आप समझें के आपके घर बिरादरी फिर्के वाले इस रिश्ते के हक़ में नहीं, और येे रिश्ता आगे नहीं बड़ सकेगा , तो बाद के दुख वा तकलीफ से बचने के लिए इस बात को वहीं खतम कर दीजिए , ख़ास तौर पर लड़कियों को ये बात जान लेनी चाहिए ,

जवानी के जोश में मर्दों को हर औरत या लड़की अच्छी लगती है और औरत को हर मर्द की मुहब्बत सच्ची लगती है, औरत का बस देख लेना भी मर्द को अदा लगती है, और मर्द की ज़रा सी हमदर्दी औरत को ऐतराफ ए मुहब्बत नज़र आती है, येे उमर इस तरह की बेवकूफियों की होती है और दिल को ख्वाब देखना अच्छा लगता है,

तो होता यूं है के ज़रा सा ख्याल भी किसी का आ जाए तो हमें लगता है के हमें मुहब्बत हो गई है या किसी की कोई बात हमें पसंद आ जाए तो हमें लगता है के इसको हमसे मुहब्बत हो गई है, और फिर ज़िन्दगी के बहुत बड़े फैसलों पर हम जल्दबाजी कर देते हैं, इस तरह की मुहब्बत तो होती रहती हैं,

किसी के भरोसे के साथ मत खेलें और वाकई मुहब्बत है तो निकाह करें, क्यूंकि मुहब्बत को इज्जत लाज़िम है, बाक़ी जिस्मानी ख्वाहिशात को मुहब्बत का नाम ना दें,

मर्द जिस औरत को सच्चे दिल से चाहता है उसे अपनी इज़्ज़त मानता है और बनाता है, सबसे छिपा कर रखता है, उस पर किसी दूसरे की नजर नहीं पड़ने देना चाहता , और अगर वह ऐसा नहीं करता तो इसका मतलब ये है के वह औरत उसके दिल में नहीं उतरी, सिर्फ दिखावे की चीज है जो दोस्तों में खुद को अहमियत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है के,

मेरे पास भी दिल बहलाने के लिए एक अच्छी चीज है, इससे सिर्फ मफाद और गरज़ का रिश्ता होता है, इज़्ज़त का नहीं !!

अल्लाह पाक से दुआ है के अल्लाह हर बेटी की, हर बहन की इज़्ज़त की हिफाज़त फरमाए, और अपना मकाम समझने की तौफीक़ अता फरमाए,

ये बात नादान कमअक्ल बेवकूफ लडकियों को समझनी चाहिए , मर्द हमेशा उसी लड़की से मुहब्बत करता है और इज्ज़त देता है जो उसको हलाल रिश्ते में मिलती है यानी निकाह में महरम बनकर ,

और ऐसी लड़की जो नमहराम के लिए सजती है संवरती है वह अपनी वुसत भी खतम करती है, अपनी शर्म वा हया का सौदा करती है, और बड़े अफसोस के साथ जिसके लिए येे करती है वहीं कल टाइम पास करने के बाद , उसको सबके सामने बद किरदार, आवारा, और बद चलन कह कर चला जाता है एक नया शिकार ढूंडने के लिए,

और लड़की का किरदार सब के लिए सवालिया निशान बना कर खुद अपनी ज़िन्दगी में मगन हो जाता है, और लड़की के पास कुछ भी नहीं बचता !

मेरी प्यारी बहनों इस फरेब और ख्वाबों से बाहर आ जाओ ना महरम मर्द ना कभी दोस्त हो सकता है, ना भाई , ना मुहाफिज ना मुहब्बत !!

मुहब्बत की मंज़िल निकाह है जिना नहीं, शौहर ही औरत का असल मुहाफिज होता है, औरत से सच्ची मुहब्बत उसका शौहर ही कर सकता है, कोई ना महरम नहीं !!!

अल्लाह ने हमें ना महरम से फिजूल बात करने , नरम लहज़े में बात करने से मना किया के खराबी पैदा ना हो, क्यूंकि ये खराबी बहुत नुकसान से दो चार करती है,

क़ुरआन में अल्लाह ताला का इरशाद है:-

يَا نِسَآءَ النَّبِيِّ لَسْتُنَّ كَاَحَدٍ مِّنَ النِّسَآءِ ۚ اِنِ اتَّقَيْتُنَّ فَلَا تَخْضَعْنَ بِالْقَوْلِ فَيَطْمَعَ الَّـذِىْ فِىْ قَلْبِهٖ مَرَضٌ وَّّقُلْنَ قَوْلًا مَّعْرُوْفًا
(32) سورۃ الاحزاب
(مدنی، آیات 73)

तो मेरी प्यारी बहनों हराम रिश्तों में मुहब्बत मत ढूंढो इसमें लज्जत हो सकती है, पर सुकून नहीं, इज्जत नहीं, सबसे बड़ी बात अल्लाह की रजा नहीं, नाराज़गी और ग़ज़ब होगा और जिल्लत अलग

इसलिए अपने जज़्बात अपने महरम के लिए बचा कर रखें, जिसमें ना जिल्लत का डर हो, ना रुसवाई का , ना अल्लाह के ग़ज़ब और नाराज़गी का ,

अल्लाह हमसे बेपनाह मुहब्बत करता है इसलिए उसने हमें हलाल चीजें और हलाल रिश्ते दिए हैं, और हराम चीजों से बचने को कहा है,

हुदूद अल्लाह मत तोड़ें और खुद को बचाएं हराम कामों और चीज़ों और हराम रिश्तों से ...!!!

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ है, उम्मत मुहम्मदिया की बेटियों और बेटों को पाकदामन और हराम रिश्तों हराम चीज़ों से दूर रखे,

आमीन सुम्मा आमीन

साभार : बहन शीजा सलफी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
ब्लॉग: islamicleaks.com

Friday, January 8, 2021

AURAT KE LIYE EK NASEEHAT

 



अगर औरतें गैर मर्दों के बजाए अपने शौहरों के लिए बनना संवरना शुरू कर दें तो किसी औरत को तलाक नहीं होगी ना किसी को तावीज या झाड़ फूंक की ज़रूरत पड़ेगी,


बाप के बाद जो शख्स औरत के नाज़ वा नखरे उठाता है वह उसका शौहर होता है और ये बात कुछ औरतें मानना तो दूर की बात सुनना भी गवारा नहीं करती,

जो औरतें कहती हैं मर्द किसी का नहीं होता सिर्फ अपनी जात का होता है वह ज़रा हिसाब लगाएं सारे साल का कमाने वाला अपने लिए कितने जोड़े बनाता है,

अगर शौहर कभी गुस्से से बोल दे..

तो ये सोच कर बर्दाश्त कर लिया करो वह सिर्फ अपने लिए ही तो महनत नहीं करता तुम्हारी ज़रूरतों के लिए भी करता है, फिर ये तो वो हस्ती है के अगर इंसान को सजदा जायज होता तो अव्वल नंबर उसका आना था,

वैसे भी शौहर दिल के बूरे नहीं होते बस ज़बान के कड़वे होते हैं,

कामयाब औरत वो नहीं जो पैसे कमा सके , कामयाब औरत वो है जो घर को संभाल सके और घर को अपनी काबीलियत से जन्नत बना सके,

साभार: बहन शिजा सलफी
तर्जुमा: Umair Salafi Al Hindi
Blog: islamicleaks.com