Saturday, May 8, 2021

हिम्मत न हारो, ग़म न करो, तुम ही ग़ालिब रहोगे अगर तुम इमानवाले हो




 जब भी आपके सामने किसी का स्टेटस आए जिसमें कोई हदीस ता क़ुरआन की आयत या कुछ भी ऐसा मोटिवेशनल पढ़ने को मिले जिससे आपको आपके सवालों का जवाब मिले तो ये सब इत्तेफाक नहीं होता , ये कोई ऐसे ही अपने स्टेटस पर नहीं लगा लेता ,


" वह जो अर्श पर मुस्तवी हमारा रब है ना", वह हमारी दिली कैफियत से बखूबी वाकिफ है, उस अर्श वाले की तरफ से ज़मीन वालों को जवाब मिलते हैं,

ये अल्लाह की आप पर रहमत होती है के वह आप को ऐसे ही रोता हुआ डिस्ट्रेस नहीं छोड़ता, वह किसी ना किसी को वसीला बनाकर अपने प्यारे बंदों को तसल्लीया ज़रूर देता है,

महसूस किया करें बस अपने ऊपर अल्लाह की रहमत को बरसते हुए ,

महसूस करने पर मुन्हासिर है कभी कभार महसूस किया है और अक्ल दंग रह जाती है अल्लाह यूं एक मुसीबत से हिफाज़त फरमाते हैं सारी रात किसी मुश्किल के डर से मदद के लिए रोते रहें सुबह देखें तो उससे आसान काम कोई होता ही नहीं, वह अल्लाह हर एक को जवाब देता है, कोई उन जवाबों को ढूंढता कैसे है उसी में उसका इनाम छुपा होता है वह इनाम हिदायत वा सुकून होता है,

ये उतना ही मिलता है इन्सान को जितनी वह कोशिश करता है असल में अल्लाह के जवाबात पाने के लिए , " अल्लाह को पाने के लिए "

तो हम पर भी लाज़िम है किसी का अच्छा जरिया ज़रूर बनें, हमें जैसे किसी के जरिए अल्लाह की तरफ से तसल्ली मिलती है,

इसी तरह हो सकता है हमारे जरिए अल्लाह किसी और को जीना सिखा रहा हो, अल्लाह का फरमान है,

” __ وَلَا تَهِنُوۡا وَ لَا تَحۡزَنُوۡا وَاَنۡتُمُ الۡاَعۡلَوۡنَ اِنۡ كُنۡتُمۡ مُّؤۡمِنِيۡنَ‏ __“
"हिम्मत न हारो, ग़म न करो, तुम ही ग़ालिब रहोगे अगर तुम इमानवाले हो"

(क़ुरआन सुरा इमरान आयत 139)

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com