Tuesday, May 11, 2021

एक मां के रहम (बच्चेदानी) में दो बच्चे थे, दोनों आपस में बातें करने लगे,

 



एक मां के रहम (बच्चेदानी) में दो बच्चे थे, दोनों आपस में बातें करने लगे,


एक ने दूसरे से पूछा, " क्या तुम इस रहम की ज़िन्दगी के बाद भी किसी ज़िन्दगी पर यकीन रखते हो ??"

दूसरे ने कहा," यकीनन, रहम से निकलने के बाद भी कोई ना कोई ज़िन्दगी तो होगी, मुमकिन है हम यहां इसलिए हों के खुद को आने वाली ज़िन्दगी के लिए तैयार कर लें"

पहला बोला ," भला वह किस किस्म की ज़िन्दगी हो सकती है??"

दूसरे ने कहा:- " मुझे नहीं मालूम, लेकिन वहां यहां से ज़्यादा रोशनी होगी, हो सकता है के हम वहां अपने पैरों से चलें और अपने मुंह से खाएं, मुमकिन है के वहां हमारे पास अपने हवास हों जिनके बारे में हमें अभी कुछ समझ नहीं है"

पहले ने मज़ाक उड़ाया," क्या बेवकूफी है, पैरों से चलना मुमकिन ही नहीं और मुंह से खाना?? ये नामुमकिन है, नाफ से जुड़ी नाली से हमें हर वह चीज़ मिल जाती है जिसकी हमें ज़रूरत होती है, लेकिन ये नाली छोटी सी है, जब ये नाली साथ ना होगी तब ज़िन्दगी का तसव्वुर भी मुहाल है,"

दूसरे ने कहा :-" बहरहाल ! मेरा ख्याल है के वहां कुछ ना कुछ ज़रूर है और शायद यहां से अलग , मुमकिन है के वहां हमें खुराक की इस नाली की ज़रूरत ही ना हो, और हो सकता है हम वहां हवा में सांस लें ??"

पहले ने कहा ," बिल्कुल फ़िज़ूल ! भला हम तो पानी में डूबे हुए ही सांस ले सकते हैं, पानी की थोड़ी सी भी कमी हो तो हमारी ज़िन्दगी खतरे में होती है , और तुम हवा में सांस लेने की बात करते हो , अच्छा चलो ! अगर इसके बाहर भी ज़िन्दगी है तो कोई कभी वहां से वापस क्यूं नहीं आया ?? समझ लो के बस यही ज़िन्दगी है उसके बाद कुछ नहीं ",

दूसरा बोला ," खैर मैं ये सब नहीं जानता लेकिन मुझे यकीन है के यहां की ज़िन्दगी खतम होने के बाद हमारी मुलाकात हमारी मां से होगी और वही हमारी देख भाल करेगी "

पहला हैरान हुआ, " मां " ?? क्या तुम वाकई मां के वजूद पर यकीन रखते हो तो अभी वह कहां है ??"

दूसरा बोला :-" मुझे लगता है के मां हमारे चारों तरफ है, हर तरफ, हम भी उसकी वजह से हैं, उसके बगैर ये दुनिया जहान में हम मौजूद हैं, वजूद नहीं रख सकती"

पहले ने ऐतराज़ किया , " अगर मां का वजूद होता तो वह मुझे नज़र भी आती, मुझ से बात भी करती,"

इतनी छुप के ना बैठी रहती, अगर हमसे वह इतना भी प्यार करती तो हम को ऐसे ना छोड़ती, लिहाज़ा ! अक्ल यही कहती है के मां का कोई वजूद नहीं है, सब हमारे दिमाग़ की पैदावार है और कुछ भी नहीं है"

दूसरे ने जवाब दिया," कभी कभी जब हम खामोश होते हैं, तवाज्जह देते हैं और सुनने की कोशिश करते हैं तो उसकी मौजूदगी का एहसास होता है"

कहीं ऊपर से उसकी मुहब्बत भरी आवाज़ सुनाई देती है, हमको अपनी धड़कनों के साथ उसकी धड़कन भी महसूस होती है, वही हमारी मां है, बात सिर्फ महसूस करने की है !"

दोस्तों ! कुछ इसी तरह का हाल हमारा है और हमसे बेपनाह मुहब्बत करने वाले हमारे अल्लाह का है,

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com