Sunday, May 30, 2021

दिल छू लेने वाली तहरीर : ज़रूर पढ़ें और दूसरों को शेयर करें,




 दिल छू लेने वाली तहरीर : ज़रूर पढ़ें और दूसरों को शेयर करें,


" मैं किसी दीनदार से शादी करूंगी "

"इसकी मत मारी गई है, बेवकूफ़ लड़की, इसीलिए इसे एमएससी कराई थी के ये इस किस्म की बात करेगी " खैरुन्निसा परवीन का ग़ुस्सा भड़का हुआ था

"ताज्जुब तो मुझे भी हो रहा है , दुनिया की तल्ख हकीकतों से नावाकिफ ये नादान लड़की आखिर किसी दीनदार के साथ दुश्वारियों को कैसे झेल पायेगी," बाप अमीन उल हसन के चेहरे पर फिक्र की गहरी लकीरें फैलती जा रही थी,

सुनिए हिबा के अब्बू , मैं तो समझा कर थक चुकी हूं, उल्टे मुझे समझाने लग जा रही है, अल्लाह और रसूल के क्या क्या हवाले पेश करने लगी है, ऐसे में भला उससे क्या कोई माकूल बात की जा सकती है ?? आप ही इसे समझाइए,

खैरुनिसा परवीन , तू घबरा मत मैं इसे समझाता हूं वह मेरी बेटी है, तालीम याफ़्ता है, समझ जाएगी,

खैरुन्नीसा परवीन और अमीन उल हसन बिस्तर पर दराज़ हो गए और दोनों इसी फिक्र में गरक थे के आखिर उनकी बेटी हिबा का क्या होगा ,

रिश्ता इंजिनियर लड़के का आया था वह खलीज में किसी इंटरनेशनल कंपनी में नौकरी करता था , उसके पास फ़ैमिली वीज़ा था , तनख्वाह बहुत अच्छी थी और बड़े खानदान से ताल्लुक रखता था , हर एक को रिश्ता पसंद था, अमीन उल हसन तो इस रिश्ते से ज़्यादा ही खुश थे,

"खैरूं निसा तेरी बेटी राज करेगी राज, लड़के के पास फ़ैमिली वीज़ा है, अरे इधर उसका निकाह हुआ और उधर वो उड़ जाएगी तेरी हिबा , शहर में चार कमरे का फ्लैट लेकर रहता है वह, कंपनी की तरफ से बेहतरीन गाड़ी मिली हुई है , उसके नीचे कितने सौ नौकर काम करते हैं, खुशकिस्मत है तेरी हिबा , देख माशा अल्लाह क्या रिश्ता आया है, तस्वीर देखी है तूने लड़के की ??? अरे प्रिंस लगता है माशा अल्लाह, अरब शहजादे से कम नहीं!!

खैरुं निसा परवीन भी हां में हां मिला रही थी, अमीन उल हसन से कह रही थी:

" बस जी !! अब अल्लाह के लिए जल्दी जल्दी तैयारी शुरू कर दीजिए और अल्लाह से दुआ कीजिए कि इस रिश्ते को किसी की नजर ना लगे मैंने तो तस्वीर हिबा के कमरे में रख दी है किसी वक्त देख ही लेगी वह भी, बहुत खुशनसीब है हमारी गुड़िया"

दूसरे दिन मां ने उससे उस तस्वीर के बारे में पूछा था और उसके जवाब से हैरत में ही पड़ गई,

हिबा : अम्मी !! मुझे लड़के में कोई कमी नज़र नहीं आती सिवाए इसके के मैं किसी दीनदार परहेज़गार लड़के से शादी करना चाहती हूं,

खैरुन निसा परवीन : ये तू क्या बकवास कर रही है, तेरे अब्बू इस रिश्ते से कितने खुश हैं, तुम्हे कुछ पता है, दीन दार से शादी करेगी बेवकूफ़ लड़की !! पहले ये तो जानना चाहिए था कि ये लड़का क्या करता है, इंजिनियर है, खलीज में नौकरी करता है, लाखों महीना कमाता है, कितने सौ नौकर इसके अंदर काम करते हैं, फ़ैमिली वीज़ा है इसके पास , चार कमरे का फ्लैट लेकर रहता है, बेहतरीन गाड़ी है ,और .....

हिबा : अम्मी !! ये सब ठीक है, लेकिन इसके चेहरे से दीन दारी तो नहीं झलक रही ?? मुझे दीनदार लड़का चाहिए ,

खैरून निसा : तेरा दिमाग़ खिसक गया है क्या ?? ये क्या दीनदार दीनदार की रट लगा रखी है, इसको छोड़ कर तू दस हजार पंद्रह हज़ार वाले किसी दीनदार से बंधना चाहती है, क्या करेगा कोई दीनदार तेरे लिए , पागल कहीं की, किसी ने तुम्हे उल्टा सीधा समझा दिया है ??

हिबा : अम्मी ! किसी ने कुछ नहीं समझाया, मैं सिर्फ दीन दार से शादी करना चाहती हूं के वह अपना हक भी जानता है और बीवी का भी , वह हुकूक मांगता है तो हुकूक अदा भी करता है, वह ईमानदार होता है, वह बदनजर नहीं होता , वह मुहब्बत सिर्फ मुझसे करेगा और रोज़ी तो बहरहाल लिखी हुई है वह तो जितनी मिलनी होगी मिलकर रहेगी ,

खैरू निशा : तेरे बाप को कितना सदमा लगेगा जब वो ये सब सुनेंगे, कैसा अच्छा भला रिश्ता आया था , अरे ऐसे रिश्ते अब मिलते कहां हैं, बेवकूफ़ लड़की कहीं की,

हिबा : अम्मी ! ये अच्छा रिश्ता कितने पैसों में तय होगा ?? लाखों कमाने वाला कितने लाख की मांग करेगा , ये भी मालूम है ना ??

खारुल निशा: ये तेरा मसला है या तेरे मां बाप का मसला है ?? शादी में तो आज के ज़माने में पैसे खर्च तो होते ही हैं,इसमें ऐसी कौनसी नई बात है ?? तू ज़्यादा दलीलें मत बघार समझी,

हिबा : अम्मी आजके ज़माना में भी अच्छे दीनदार बेगैर कुछ लिए शादी करते हैं, सुन्नत के मुताबिक शादी होती है, मेरे लिए आप कोई दीनदार लड़का तलाश कीजिए , सोचिए ना ये दुनिया कितने दिनों की है आज या कल सबको मर जाना है, मैं किसी तकवा परस्त इन्सान के साथ जीना चाहती हूं ताकि मेरी आखिरत तबाह ना हो जो हमेशा की ज़िन्दगी है,

अमीनुल हसन ने सुबह नाश्ते के बाद जब हिबा को आवाज़ दी तो हिबा ने पहले से ही अपना ज़ेहन बना लिया के उसे किस तरह बाप को कायल करना है,

अमीनुल हसन : बेटा ! हम लोगों ने तुम्हारे लिए एक रिश्ता देखा है, हम सब लोगों को लड़का पसंद है, आपकी अम्मी बता रहीं थीं के आप ......

हिबा : अब्बू ! मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है लेकिन अगर आप मेरी खुशी चाहते हैं तो मेरे लिए कोई दीनदार लड़का देखिए , मैं जानती हूं के ये सुनकर आपको अच्छा ना लगेगा लेकिन मैं आपसे फिर भी यही गुज़ारिश करूंगी,

अमीनुल हसन : लेकिन बेटा ! दीनदार लोगों मे भी तो बुरे लोग होते हैं?? अगर कोई बिदाती मिल गया तो ?? ना दुनिया मिलेगी ना आखिरत, खासारा ही खसारा है, हम आपका बुरा नहीं चाह सकते,

हिबा : आप सही कह रहें है अब्बू ! लेकिन हर जगह शराह देखी जाती है, हो सकता है कुछ दीन दार बुरे हो लेकिन ज़्यादातर तो अच्छे होते हैं और फिर क्या ज़रूरी है कि मेरी किस्मत में कोई बुरा ही हो, आप अल्लाह पर भरोसा तो कीजिए , मेरी दुनिया बनाने के चक्कर में मेरी आखिरत तो किसी बेदीन के हवाले मत कीजिए,

अमीनुल हसन लाजवाब हो गए थे उन्हे अपनी बेटी की बात में जान नज़र आ रही थी,वह कोई कमसिन और गंवार लड़की भी नहीं थी, ऊंची तालीम हासिल किए हुए थी, 23 साल की उमर को पहुंच चुकी थी वह अपनी पसंद और नापसन्द का इज़हार कर सकती थी लेकिन उन्हें समाज और खानदान के लोगों का ताना सता रहा था , वह जानते थे के लोग मज़ाक उड़ाएंगे , बातें बनायाएंगे और उन्हें सबकी बातें सुननी पड़ेगी,

खैरुल निसा को उन्होंने अब खुद ही कायल करना शुरू कर दिया और इस तलाश वा जुस्तुजु में लग गए के कोई अच्छा परहेज़गार दीनदार मिले तो अपनी बेटी की शादी कर दें, अल्लाह का करना देखिए के उन्हीं दिनों शहर में दीनी जलसा हो रहा था, एक नौजवान आलिम ए दीन कुरआन वा सुन्नत के दलील की रोशनी में धुआधार तकरीर कर रहा था , अमीनुल हसन की आंखों में उम्मीद की रोशनी झिलमिलाने लगीं,

छह महीने के अंदर शादी हो गई, लडके एक दीनी स्कूल का टीचर था वहीं कोई 10000 की तनख्वाह थी, शादी बड़े ही सादा अंदाज़ में बगैर किसी सलामी के हुई ,

हिबा को ऐसा लग रहा था जैसे उसके पाओं ज़मीन पर हों ही नहीं वैसे भी उसका शौहर शेरवानी में बहुत हसीन लग रहे थे लेकिन दूसरी तरफ खानदान के लोग मज़े ज़रूर ले रहे थे , चलिए अमीन साहब पैसे बचाने के लिए आपने अच्छा कदम उठाया , दीनदारी के पर्दे में ये हरकत आसानी से छुप जाएगी,

शहर के एक बड़ी हस्ती का ये तंज़ था :-" मुबारक हो अमीन बाबू !नहीं भी तो 25-30 लाख की बचत हो गई, वैसे शादी के बाद इसी पैसे से लड़के को कोई बिजनेस करवा दीजिएगा,"

दो महीने बाद हिबा ससुराल से अपने मायके आई थी, वह ऐसे खुश थी के जैसे उसे अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा खजाना हाथ लग गया हो, मां को इस बात की खुशी थी के बेटी खुश है, ये अलग बात है के उसके अंदर में खलिश अब भी मौजूद थी, बाप बेटी के दरमियान बातें हो रही थी तभी हिबा के फोन की घंटी बजी , उधर से उसके शौहर थे,
वह मोबाइल फोन लेकर कमरे में चली गई,कुछ देर बाद जब वो बाहर आई तो उसका चेहरा खिल रहा था , उसकी आंखें आंसुओं से तर थी और वह कह रही थी

" अब्बू ! वह आपके दामाद ने मदीना के एक तहकीकी इदारे में नौकरी के लिए अर्जी दी थी, वह मंजूर हो गई है, डेढ़ लाख तनख्वाह के साथ रिहाइश फ्री दी जाएगी और फ़ैमिली वीज़ा भी है, हम लोग अगले 6 महीने के अंदर इंशा अल्लाह मदीना शरीफ के अंदर होंगे "

खैरूल निसा अमीनुल हसन को देख रही थी और दोनों मारे खुशी के रोए जा रहे थे,

लेकिन अम्मी ! याद रखें दुनिया मकसद नहीं है, जो अल्लाह से डर कर नबी ए करीम मुहम्मद सल्लालाहु अलैहि वसल्लम के बताए हुए तरीके पर ज़िन्दगी गुजारते हैं दुनिया उनके कदम चूम लेती है, अल्लाह ताला का फरमान है,

ومن یتق اللہ یجعلہ مخرجا ویرزقہ من حیث لا یحتسب

" जो अल्लाह से डर कर ज़िन्दगी गुजारे अल्लाह उसके लिए रास्ता निकाल देता है और ऐसे तरीके से रोज़ी देता है जिसका उसको गुमान भी नहीं होता "

मगर जो दुनिया ही हो अपना नस्बुल ऐन बना ले वह आखिरत की नेमतों से महरूम होता है और दुनियावी ज़िन्दगी भी परेशान कुन होती है,

मनकूल

साभार: Umair Salafi Al Hindi
Blog: Islamicleaks.com