Thursday, September 3, 2020

MUNKAR E HADITH KA NAZARIYA E MOJEZAAT (PART 2)





मुनकर ए हदीस (चकडालवियों ) का नजरिया ए मोजेज़ात (Miracles) - (किस्त २)

मुनकर ए हदीस (Hadith Rejector) लिखते हैं

" तमाम कुदरत के कानून हमको मालूम नहीं और जो मालूम हैं वो बहुत थोड़े है और उनका इल्म भी पूरा नहीं बल्कि नाकिस है , इसका नतीजा ये है के जब कोई अजीब काम हुआ हो और उसके होने का काफी सबूत भी मौजूद हो और उसका होना कुदरत के कानून के मुताबिक भी ना हो सकता हो, और ये भी मान लिया जाए के बेगैर धोखे और फरेब के वाके हुआ है, तो ये मानना पड़ेगा के इसके होने में बिना शक कोई कानून ए कुदरत है मगर इसका इल्म हमको नहीं के खिलाफ कानून ए कुदरत कोई काम नहीं होता , और जब वह किसी कानून ए कुदरत के मुताबिक हुआ है वह वह मोजेज़ नहीं क्यूंकि हर वह शख्स जिसको वह कानून मालूम हो जाए उसको कर सकेगा "

( तफसीर उल क़ुरआन जिल्द ३ पेज ३४)

आगे लिखते हैं

" फिलोसॉफी के महीरों ने मोजेज़ात या करामात का इनकार चाहे किसी भी वजह से किया हो, हमारा इनकार सिर्फ इस बिना पर नहीं है के वह अक्ल के खिलाफ हैं और इसलिए इनकार करना ज़रूरी है, बल्कि हमारा इनकार इस बिना पर है के क़ुरआन मजीद से मोजेजात या करामात यानी जहूर उमूर का बतौर खरक ए आदत यानी खिलाफ ए फितरत पाया जाता है, जिसको हम कम लफ़्ज़ों में यूं ताबीर करते हैं के कोई काम खिलाफ ए कानून कुदरत नहीं होता "
(पेज ३७)
जवाब:
गौर फ़रमाया आपने मुनकर साहब मोजेंजा के इकरार में भी कितने इनकार पोशीदा है, आप मोजेंजा से सिर्फ इसलिए इनकार कर रहें हैं के क़ुरआन करीम में किसी खिलाफ ए कानून कुदरत वाक्ए का ज़िक्र नहीं, यहां २ सवाल दिमाग़ में उभरते हैं,
१- क्या कानून ए कुदरत के खिलाफ किसी काम का होना मुमकिन है भी या नहीं ??
२- क्या कुरआन करीम में ऐसे किसी वाक्ए का ज़िक्र है भी या नहीं जो कानून ए कुदरत के खिलाफ हो ??
अब हम उन्हीं सवालात पर ज़रा तफसील से ज़िक्र करेंगे (किस्त ३) में
साभार: Umair Salafi Al Hindi